मंगलवार, 12 जून 2012

शेर सिंह, देवेन्द्र पाठक 'महरूम' व विजय वर्मा की कविताएँ और गजलें

शेर सिंह की कविता : हिमालय

पहाड़ है जहां

बर्फ, हिमनद

है वहां ।

 

गंगा हो या जमुना

व्‍यास हो या सतलुज

या हो रावी, चनाव

पहाड़ ही

इन की जननी

इन का स्रोत ।

 

नाम हिमालय

वास महादेव शिव का

मान देश का

पहचान भारत की

रक्षक प्रकृति का

पुराण मानवता का ।

 

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शेर सिंह

के. के.- 100

कविनगर, गाजियाबाद – 201 001

E-Mail: shersingh52@gmail.com

--

देवेन्द्र पाठक 'महरूम' की ग़ज़लेँ :-

देवेन्द्र पाठक महरूम

दर्दो सितम के सायोँ तले ।

उजड़े कभी बसे घोँसले ॥

 

सच बोलना बाद मेँ पहले

अंज़ाम होगा क्या सोच ले॥

 

पैरोँ पे झुके उनके आस्मां ;

हैँ जिनके आस्मानी हौसले।।

 

क्योँ पोँछते हो आईने को ;

चेहरे से गर्दे-ग़म पोंछ ले॥

 

'महरूम' जो इन्साँ ठान ले;

रफ़्तार ए तूफ़ा भी रोक ले।।

 

= = = = = = = =

ख़्वाबे-सहर का एतबार है

इक फ़रिश्ते का इंतज़ार है।।

 

है उम्र सज़ा, ज़ुर्म ज़िंदगी ;

करना ये ज़ुर्म बार-बार है ।।

 

जो जस की तस धरी कबीर ने ;

अब वो चदरिया तार तार है॥

 

आ गया क़यामत का बुलावा;

किस बेवफ़ा का इंतज़ार है।।

--

मोबाइल - 8120910105

= = = = = = = = = =

विजय वर्मा की ग़ज़ल

दिलों की दूरियां अब और ना बढाई जाए.

हो गिले-शिकवे तो रु-ब-रु बताई जाए.

 

ऐसी कोई वज़ह नहीं हमारे मुद्दें ना सुलझे

समझना ना चाहो तो कैसे समझाई जाए.

 

मासूम बचपनों पर तो तरस खाओ कमसे

पुस्तकों के बदले उन्हें बन्दूक ना थमाई जाए.

 

गैरों के चेहरे पर की धूल दिखाने वालो

जरा खुद की ओर भी दर्पण घुमाई जाए.

 

अँधेरा मिटाने को सूरज लाने की बातें है

चलो इस दरम्यां एक दीपक ही जलाई जाए

 

इधर जी है अपने तो उधर भी कोई ग़ैर नहीं

ठीक यही बात अपने जेहन में बिठाई जाए.

 

--
v k verma,sr.chemist,D.V.C.,BTPS

BOKARO THERMAL,BOKARO
vijayvermavijay560@gmail.com

6 blogger-facebook:

  1. तीनों ही रचनाकारों की उम्‍दा रचनाएं हैं

    उत्तर देंहटाएं
  2. रचनाएं अच्छी हैं । विजयजी की गज़ल में --गिले-शिकवे बताई जाए, दीपक जलाई जाए, दर्पण घुमाई जाए-- त्रुटियाँ अखर रहीं हैं ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. रचनाएं अच्छी लगी । विजय जी की गज़ल अच्छी है लेकिन उसमें कुछ बातें---दीपक जलाई जाए , दर्पण घुमाई जाए-ठीक नही लगी ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. .भाई देवेन्द्र पाठक 'महरूम',विजय वर्मा को उनकी उम्दा ग़ज़लों के लिए एवं शेर सिंह को उनकी अच्छी कविता के लिए बधाई.

    उत्तर देंहटाएं
  5. धन्यवाद गिरिजा जी त्रुटियाँ बताने के लिए.
    आभार.

    उत्तर देंहटाएं
  6. काजल कुमार जी और राजा अवस्थी जी प्रतिक्रिया के लिए बहुत-बहुत धन्यवाद.

    उत्तर देंहटाएं

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