बुधवार, 15 अगस्त 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -39- छत्र पाल की कहानी : हवाला कांड

हवाला  कांड

छत्र पाल

सर आपने बुलाया है मुझे?

जी हाँ मिस्टर कांडपाल, कुछ खास बात करनी थी।

सर बताएं कुछ गलती हो गयी क्या मुझसे?

गलती नहीं बड़ा भारी कांड किया है आपने। आप तो बड़े छुपे रुस्तम निकले।

सर मैं बेहोश हो जाऊँगा प्लीज, बताएं क्या गुनाह किया है मैंने?

बताऊंगा, जरूर बताऊंगा। आपने एक्स कंपनी को कांट्रेक्ट देने की एवज में कितने पैसे खाए हैं?

सर क्या बात कर रहे हैं उस मुहिम पर तो मैं आपके अंडर ही काम कर रहा था, फिर आपसे छुपा कर मैं क्यों कोई ऐसा काम करूँगा, ये तो मैं सपने मैं भी नहीं सोच सकता हूँ?

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रु. 15,000 के 'रचनाकार कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन' में आप भी भाग ले सकते हैं. पुरस्कार व प्रायोजन स्वरूप आप अपनी किताबें पुरस्कृतों को भेंट दे सकते हैं. अंतिम तिथि 30 सितम्बर 2012

अधिक व अद्यतन जानकारी के लिए यह कड़ी देखें - http://www.rachanakar.org/2012/07/blog-post_07.html

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यही तो देखने की बात है मिस्टर कांडपाल। आपने पैसे खाए, थोड़े बहुत नहीं पूरे बीस लाख झटके हैं आपने, मेरे पास लिखित में प्रूफ के साथ शिकायत आई है यह देखिये।

सर उस बात को तो दस साल गुजर गए और वह पुल भी गिर गया जिसके लिए कांट्रेक्ट दिया गया था। अब इतनी पुरानी बात मुझे तो याद नहीं सर।

आपको क्यों याद रहेगी, ऐसी बातें तो याद रहते भी भुला दीं जाती हैं मिस्टर कांडपाल। लेकिन कहते हैं न दीवारों के भी कान होते हैं। याद कीजिए पन्द्रह अगस्त 2001 की वह रात जब एक्स कंपनी का गुमास्ता आपको पैसे देने इसी आफिस के सभागार में आया था। शराब के नशे में आप यह भूल गए कि सभागार में कैमरे व ऑडियो रिकाँरडर भी लगे हैं। क्यों मैं ठीक कह रहा हूँ न?

सर आज ठीक से याद तो नहीं आ रहा, पर मुझे घर जाकर अपनी पुरानी डायरियां उलटना पलटना पड़ेंगीं, इसके बाद ही मैं कुछ बता पाऊँगा।

अच्छा तो क्या आप ऐसीं बातें भी डायरियों में लिखते हैं?

सर यह तो मेरी पुरानी आदत है छोटी से छोटी बात मुझे डायरी में लिखने की आदत है। पर सर जो भी हो अब मेरी इज्जत आप ही के हाथ में है, प्लीज सर मेरी चार बिन व्याही लड़कियां हैं, मैं बेमौत मारा जाऊँगा।

ठीक है कल आप अपनी डायरी लेकर आईएगा, हाँ याद रखिये आपने अभी अभी जो कुछ भी कहा है वह भी इस रिकार्डर में रिकार्ड होगया है, अब बदलने भी नहीं पाओगे।

अगले दिन श्री कांडपाल वर्ष 2001 की डायरी कबाडी़ के यहाँ से कबाड़ कर बॉस के चेंबर में हाज़िर हुए एवं पन्द्रह अगस्त का पन्ना निकल कर गिगियाते हुए बोले सर आपने ठीक ही कहा था। एक्स कम्पनी ने मुझे बीस लाख रूपये कांट्रेक्ट उसी को देने के लिए भिजवाए थे जिसका पूरा ब्योरा मेरी इस डायरी में दर्ज है।

डायरी पढ़ने के बाद -

अजी मिस्टर कांडपाल आपका तो मैंने बहुत नाम सुना था कि आप बहुत बड़े मक्कार व काईयाँ हैं, पर यह क्या आप तो एक झूँठी घुड़की में ही टांय टांय फिस्स होगये? आपके तो पसीने ही छूट गए। चलो चाय पीते हैं, मैं तो मजाक कर रहा था।

थैंकयू सर।

डायरी के पन्द्रह अगस्त के पन्ने पर दर्ज था –

“आज एक्स कंपनी का गुमास्ता मुझे बीस लाख रूपये पुल बनाने का ठेका उसकी ही कम्पनी को देने की एवज में दे गया, इस ताकीद के साथ कि इसमें से अट्ठारह लाख बॉस के हैं, बाकी बचे दो लाख मेरे और मेरे स्टाफ के लिए हैं। मेरा बॉस भी सा... बड़ा चुगद है। गुमास्ता सभागार से निकल भी न पाया था कि अपने पैसे लेने अ पहुंचा। देने पड़े। वह तो मुझे मेरा एक लाख देकर स्टाफ का एक लाख भी खुद ले गया, यह  कहते हुए कि वह खुद ही स्टाफ को बाँट देगा। पर हरा... ने बांटे कभी नहीं।”

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रचनाकर -  "छत्र  पाल"

35-शिवम टेनेमेंट्स, वल्लभ पार्क,

साबरमती, अहमदाबाद (गुजरात)382424

ईमेल-crmsvkkvsmrs@gmail.com

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