शुक्रवार, 28 सितंबर 2012

कहानी लेखन पुरस्कार आयोजन -90- रमाकंत बडारया ‘‘बेताब'' की कहानी : जैसा पेड़ वैसा फल

कहानी

जैसा पेड़ वैसा फल

रमाकंत बडारया ‘‘बेताब''

प्रस्‍तावना ः प्रस्‍तुत मंचीय, नुक्कड़ नाटक शैली की कहानी 'जैसा पेड़ वैसा फल' लिखने की प्रेरणा मुझे 1975 में जांजगीर जिला-बिलासपुर में पड़े भयंकर अकाल से मिली. तब मैंने बैंक में सर्विस के दौरान गावों में प्रवास के समय देखा, मीलों खेतों में फसलें सूखी पड़ी हैं. खेत सूखे पड़े हैं. पानी के आभाव में खेतों की जमीन में दरारें पड़ी हुयी हैं. लोगों के चेहरों की चमक गायब है, लोगों के पेट और पीठ आपस में मिले हुये हैं. बड़ा ही दर्दनाक माहौल वातावरण देखने मिलता, आखें नम हो जातीं. जहां देखो पलायन करने वाले किसान नजर आते. किसी घर के सामने दरवाजे पर, कटीली झाडियों को देखो तो समझ जायें,परिवार पलायन कर गया है. मैंने 1975 में इन चंद लाइनों में उसका आखों देखा हाल कुछ इस तरह लिखा है

 

ये हकीकत है कि, छतीसगढ जल रहा है.

पापी इन्‍द्र है जो, इसको छल रहा है.

मीलों चले जाइये, खेतों में धान नहीं मिलेगी.

लोगों के चेहरों पर, मधुर मुस्‍कान नहीं मिलेगी.

चौंकों में चले जाइये, चून नहीं मिलेगा.

काटोगे तन को लोगों के, तो खून नहीं मिलेगा.

मैंने प्रण, किया, मुझे जब भी मौका मिलेगा मैं अवश्य ही इस समस्‍या के निदान के लिये कुछ न कुछ जरूर करूंगा और ये मौका मुझे 1996 में मिला . शासकीय योजनांर्तगत मैंने सामूहिक उदवहन सिचाई योजना में 35 लोगों को कर्ज मंजूर कर वितरण किया ,ताकि किसानों को पानीं की कमी का सामना ना करना पड़े .रोजी रोटी की समस्‍या का सामना ना करना पड़े .अकाल की काली छाया किसानों पर ना पड़े .पलायन के दर्दनाक मर्जंर से किसानों को ना गुजरना ना पड़े .परिवार खुशहाल हों .एक तीर से दो शिकार हों. इसी मूल भवना से ओत प्रोत है,मेरी यह कहानी‘‘जैसा पेड़ वैसा फल'' मैं किसानों को रास्‍ता दिखाने में ,मार्ग दर्शन में कहां तक कामयाब रहा. पाठकों पर छोड़ता हूं आज छतीसगढ़ में सिंचाई साधनों में शासन की पहल से बहुत विस्‍तार हुआ है पलायन पर अंकुश लगा है

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अ-वर्षा किसानों के जीवन में बहुत दुःखद संदेश लेकर आती है . इससे उन्‍हें ऐसा लगता है, मानो उन पर दुखों के पहाड़ टूट रहे हैं .ऐसे ही एक वर्ष अ -वर्षा के शिकार एक ग्राम के तीन-चार किसान अपने खेतों की ओर दुख -भरी निगाहों से देख रहे हैं . जहां -जहां तक दूर -दूर उनकी नजर जाती है ,खेतों की फसल चौपट नजर आतीं हैं .मिटटी में दरारें ही दरारें नजर आती हैं .सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि, किसानों के दलों में क्‍या बीत रहा होगा ?'

एक किसान देवचरन अपने साथी पूरन से कहता है ः- ‘‘ यार पूरन ?''

पूरन उत्‍सुकता से पूछता है - ‘‘क्‍या बात है,यार देवचरन बोल ?''

‘‘यार पूरन,फिर दे गये इंद्र देवता हमे एन वक्‍त पर धोखा?- ‘‘बोला देवचरन.''

पूरन भी दुखी मन से कहता है- ‘‘ हां यार देवचरन ,फिर पड़ेंगे हमारे सिर पर भुखमरी के ओले ''

बोला देवचरन - ‘‘ठीक कहते हो पूरन,अब कैसे चलेगी हमारी रोजी -रोटी? सबसे बड़ी समस्‍या आने वाली है. अब हमारे सामने ,कैसे निपटेंगे इससे'' ?

अपना मौन तोड़ते हुये बोला जगदीश - ‘‘कब तक रहेंगे हम बादलों के भरोसे''

देवचरन बोला ः ‘‘भाईयों अब नहीं चला जाता मुझसे चलो चलकर बैठते हैं, नदी किनारे पेड़ों की छांव मैं '' सभी सहमति के साथ चल पड़ते हैं ! सभी नदी किनारे पेड़ों की छांव में जाकर बैठते हैं .पैर पसार कर बड़े आराम से.

कुछ देर पश्‍चात्‌ मौन तोड़ते हुये,आसमान की तरफ देखते हुये जगदीश बोलता हैः-‘‘हे भगवान ! क्‍या लिखा है हमारी किस्‍मत मैं?

जगदीश की बात सुनकर देवचरन बोलाः-‘‘जगदीश क्‍या बात है? क्‍या चल रहा है तेरे दिमाग में, बोल देर कैसी? भाई देवचरन, मैं सोचता हूं क्‍यों न खुदवा लूं खेत में कुआं? हो जायेगी पानी की समस्‍या हल.कैसा रहेगा?

बोला देवचरन - ‘‘ वाह मेरे मिटटी के शेर,बहुत खूब ! भूल गया क्‍या? पहले से ही कितने कुएं पड़े हैं सूखे हमारे खेतों में , बिन पानी सब सून!

क्‍या तुम चाहते हो ,एक और असफल कुआं . चाहते हो करना अपनी कीमती जमीन करना खराब?''

दुखी मन से जगदीश कहता हैः-‘‘नहीं यार ! देवचरन ,कौन करना चाहेगा अपनी कीमती जमीन खराब?''

पर कुछ सूझता भी तो नहीं है ! करें तो करें क्‍या? तुम्‍हीं बोलो .''

गुस्‍से से बोला देवचरन ः-‘‘जगदीश तूं जब भी करेगा बे-सिर पैर की ही बात करेगा .'' गुस्‍से भरी बात सुनकर खमोशी छा जाती है.

तभी मुस्‍कराकर खमोशी तोड़ते हुए पूरन बोला-‘‘मिल गया रास्‍ता ,यारों मिल गया रास्‍ता''.

आश्‍चर्य चकित होते हुए जगदीश बोला -‘‘कैसा रास्‍ता कुछ बोलेगा भी !''

सामने की ओर इशारा करते हुए बोला पूरन -‘‘वो देख जगदीश ,जरा गैर से देख !''

सभी उस ओर उत्‍सुकता बस देखने लगते हैं !!

जगदीश बोला -‘‘ हां-हां देख रहा हूं, कुछ महिलायें अपने सिरों पर चारे की गठरियां लेकर आ रहीं हैं ,तो!

‘‘सारी समस्‍याओं का हल रहता है महिलाओं के पास ,देखना कुछ न कुछ हल जरुर निकालेंगी ये ''!मूछों पर तॉव देकर बोला -पूरन.

देवचरन बोला -‘‘ पूरन क्‍या सच में ?,चलो देखते हैं !''

कुछ देर पश्‍चात्‌ महिलायें पास आ जातीं हैं.चारे की गठरियां उतारती हैं,और बैठती हैं.

कुछ देर की खामोशी को तोड़ते हुए बोली गौरी-‘‘क्‍या बात है मोहन के बाबू?

‘‘नहीं-नहीं कोई खास बात नहीं है.'' बोला जगदीश .

गौरी कहती है-‘‘नहीं-नहीं ! क्‍या नहीं?

कोई बात जरुर है,जिसे आप लोग छुपा रहे हैं ?

कुछ खास बात जरुर है!‘अपनों से शर्म कैसी''

तब जगदीश अपने मन की बात बयां करते हुए कहता है-‘‘हे भाग्‍यवान ! अकाल की चिंता सताने लगी है,

फिर दे गये इंद्र-देवता हमे धोखा.क्‍या नहीं जानती?''

‘‘सच कहा ,मोहन के बाबू,आपकी चिन्‍ता वाजिब है .'' -बोली गौरी

देवचरन बोला -‘‘गौरी भौजी हम मेहनत कर सकते हैं!,पर हमारी मेहनत बेकार कर देते हैं बरसाती बादल. बिन बरसे ही निकल जाते हैं यहां से .शायद इंद्र देवता नाराज हैं हमसे, हमारे गांव से ?''

‘‘यही है हमारी चिंता का विषय गौरी''-बोला जगदीश .

देवचरन बात आगे बढ़ाते हुए बोला-‘‘भौजी हमारे जगदीश भईया कहते हैं, खेत में कुआं खुदवा लेते हैं.

है कहां हमारे गांव की जमीन के नीचे पानी ? जानती हैं न आप.''

सुनकर बोली गौरी -‘‘आपकी बात ठीक है, पर भगवान के भरोसे भी तो नहीं रहा जा सकता भईया देवचरन ''

जगदीश आसमान की ओर देखकर बोला-‘‘हे भगवान लगता है,फिर से पलायन लिखा है हमारे भाग्‍य में''

गौरी चिंतित होकर बोली - ‘‘ ना-ना ,ऐसा अ-शुभ मत बोलो मोहन के बाबू ,भय लगता है पलायन से !

भगवान पर भरोसा रखो. सब ठीक हो जायेगा.''!

सबकी बातें सुनकर चम्‍पा से नहीं रहा गया ,हाथ उठाकर बोली -‘‘भाईयों ,मैं कुछ बोलूं?

सभी एक स्‍वर से बोलते हैं-‘‘हां-हां बोलिये चम्‍पा जी ,क्‍या कहना चाहतीं हैं आप ?

नदी की तरफ इशारा करते हुए चम्‍पा बोलती है -‘‘भाईयों ,आप लोग क्‍या इस नदी को नहीं देखते ?

नहीं देखते !इसके बहते हुए पानी को'

पूरन हंसकर बोला -‘‘नदी है ये तो हम सब जानते हैं,इसमें पानी ही तो बहेगा''.

गोरी बोली -‘‘क्‍यों मजाक करती है चम्‍पा''.

चम्‍पा कहती है -‘‘गौरी ये मजाक नहीं हकीकत है.चलो चलते हैं नदी के पास !''

सभी सहमत होकर नदी की ओर प्रस्‍थान करते हैं.

सभी नदी के किनारे पहुंचकर आपस में बतिया रहे हैं.चम्‍पा उन्‍हें रोक कर कहती है ,भाइयो!- नदी का बहता ये पानी, दिला सकता है हमें अवर्षा से मुक्‍ति !लहलहा सकतीं हैं फसलें, सोना उगल सकती है धरती.

बोला देवचरन -‘‘वो कैसे चम्‍पा जी ?

अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए चम्‍पा कहती है-

भाइयों! नदी का पानी हमारे खेतों के बाजू से होकर गुजरता है......

पूरन बोला-‘‘वो तो दिख रहा है''.

भाई पूरन,यही पानी बुझा सकता है धरती की प्‍यास!

क्‍यों न करें नदी के इस पानी का उपयोग खेतों की सिंचाई के लिये?

नदी में भरपूर पानी रहता है,जो जीवन दे सकता है फसलों को,फसलें दे सकतीं हैं हमें नया जीवन! मिल सकती है पलायन से मुक्‍ति .''

देवचरन बोला -‘‘तुम ठीक कहती हो बहन चम्‍पा पर हमारे खेत उपर हैं नदी का पानी नीचे बहता है. ये कैसे पहुंचेगा हमारे खेतों तक .''सुनकर बोली चम्‍पा -

‘‘भाई देवचरन ,बहुत अच्‍छा प्रश्‍न किया आपने ! है हमारे पास एक रास्‍ता.''

गौरी आश्‍चर्य चकित होकर पूछती है-‘‘क्‍या है वो रास्‍ता ? विस्‍तार से बता ,पहेलियां मत बुझा.''

सुन गौरी ‘‘ नदी मैं सिचाई पम्‍प बैठाकर पहुंचा सकते हैं ,इसके पानी को खेतों तक .''

देवचरन कहता है-‘‘बहन चम्‍पा ,कहां है हमारे पास इतना पैसा .खरीद सकें जिससे पम्‍प?''

भाई देवचरन बोली चम्‍पा-‘‘क्‍या हम सरकारी योजनाओं का लाभ नहीं ले सकते? नहीं ले सकते पम्‍प लेने किसी बैंक से कर्ज?

‘‘वाह! चम्‍पा बहन वाह!! उछलकर बोला जगदीश -‘‘,क्‍या पते की बात कही है तुमने ? हमारा तो ध्‍यान ही नहीं गया इस ओर .आप तो गजब की नजर रखतीं हैं.हमे आप पर गर्व है.''

गौरी बात को समझकर बोली -‘‘भाइयों ,क्‍यों न सरपंच से बात की जाये,लिया जाये उनसे मार्गदर्शन?''

.चम्‍पा बेाली - ‘‘ भाईयों ,कल सुबह मिलते हैं सरपंच जी के घर . सभी अपनी सहमति देते हैं.

देवचरन उठकर कहता है-‘‘चलो भाईयो,कल मिलते हैं सरपंच जी से ,आप लोग समय में अवश्‍य पहुंच जायें , सभी आपस में बतियाते जा रहे हैं. उनके चेहरों की चमक देखते ही बनती है.चर्चा सुनहरे भविष्‍य के लिये आशा की किरण जो लेकर आई है .पूरन ने कितनी सटीक बात कही थी,महिलायें हर समस्‍या का हल निकालने में माहिर होती हैं.खरी उतरतीं हैं. इनका लोहा तो मानना ही पड़ेगा.

दूसरे दिन सुबह ,जगदीश ,पूरन ,देवचरन,अपने साथियों खिलावन, बुधराम ,मनराखन के साथ सरपंच जी से मिलने के लिये आपस में बतियाते हुए एक गली से दूसरी गली पार करते हुए सरपंच के घर पहुंचते हैं,पीछे-पीछे चम्‍पा, गौरी,रामबती ,राधा भी सरपंच के घर पहुंचते हैं.

देवचरन सरपंच के घर का दरवाजा खटखटाते हुए बोलता है-‘‘सरपंच जी,.....सरपंच जी.''

अंदर से आवाज आती है! ‘‘ कौन है भाई,आता हूं!!,जरा सब्र करो!''. दरवाजा खोलते हुए ,देवचरन को देखकर बोले- ‘‘ओ ! हो!,भाई देवचरन सुबह-सुबह कैसे आना हुआ ? क्‍या बात है.आइये भईयों, बहनों आइये.स-सम्‍मान सभी को अंदर बुलाकर बिठाते हैं.फिर आने का कारण पूछते हैं-‘‘ कहिये देवचरन जी कैसे आना हुआ?

देवचरन अपने आने का कारण बताते हुए कहता है-‘‘सरपंच जी हम लोग आपसे एक खास विषय पर चर्चा करना है.''

सरपंच उत्‍सुकता से पूछते हैं !-‘‘क्‍या है आपकी समस्‍या बतायें ?''

देवचरन अपना पक्ष रखते हुए बोला-‘‘सरपंच कि जैसा कि, आप जानते हैं इस वर्ष कम वर्षा हुइ है,अकाल की स्थिति है.अकाल का साया मडराने लगा है!. बहन चम्‍पा ने हमें एक रास्‍ता सुझाया है.''

सरपंच बोले -‘‘ क्‍या है वह रास्‍ता जरा विस्‍तार से बताइये,''?

जी सरपंच जी बताता हॅूं, कहकर देवचरन बोलना शुरू करता है -‘‘सरपंच जी, अ-वर्षा, पानी की कमी से फसलें चौपट हो जाती हैं.

हमारे ग्राम के पास से शिवनाथ नदी बहती है ,जिसमें भरपूर पानीं रहता है.''

‘‘सो तो है, साफ-साफ कहो क्‍या कहना चाहते हो देवचरन ?'' -बोले सरपंच.

देवचरन- ‘‘जी सरपंच जी, मैं असली मुद्‌दे पर आता हॅूं, आपका ध्‍यान चाहॅूंगा - ‘‘बहन चंपा का कहना हैं, नदी के पानी से खेतों में सिंचाई कर फसलों को बचाया जा सकता है. साथ ही बताया यह कार्य नदी में पंप बिठाकर किया जा सकता है.''

बहन चम्‍पा कहती है कि बैंक से ऋण लेकर पम्‍प बैठाया जा सकता है सरपंच बोले -‘‘सुझाव तो अच्‍छा है.

क्‍या करना होगा मुझे.?

चम्‍पा बोली -‘‘सरपंच जी, आपको हमारे साथ बैंक चलना होगा. हम बैंक मेनेजर को अपनी योजना बताएँगे एवं उनसे ऋण के लिये बात करेंगे.

सरपंच बोले -‘‘बहन चम्‍पा सबसे पहले मैं आपको अच्‍छी योजना बतानें के लिये धन्‍यवाद देना चाहॅूंगा, आपका

बहुत-बहुत धन्‍यवाद.हम सब इसके लिये हमेशा आपके आभारी रहेगें.

आप जैसी महिलाओ की समाज को बड़ी जरुरत है.

चम्‍पा बोली -‘‘मैं आपके आभारी हॅूं सरपंच जी, जो आप सोंचते हैं, यह आपकी महानता है.''

सरपंच -‘‘हाँ तो भाइयों कल सुबह ग्रामीण बैंक में मिलते हैं, आप सभी 11 बजे बैंक पहॅुंच जायें मैं आपको वहीं मिलॅूंगा.''

वादे के साथ चाय-नाश्‍ता कर सरपंच से विदा लेते हुए घर से बाहर निकलते हैं.

अपनें-अपनें घरों की ओर आपस मे बतियाते हूए जा रहे हैं.

सरपंच उन्‍हें आँखों से ओझल होता हुआ देख रहे हैं. फिर अपनें घर में प्रवेश करते हैं.

तीसरा दिन,सुबह सरपंच और किसान देवचरन,पूरन,चम्‍पा,गौरी,खिलावन,जगदीश के साथ ग्रामीण बैंक में प्रवेश करते हैं.बैंक मैनेजर के पास पहूॅचते हैं. ब्रांच-मैनेजर,आगंतुको का स्‍वागत्‌ करते हुए कहते हैं-‘

‘आइए सरपंच जी,बैठिए.भाइयो-बहनों आप भी बैठिये. सभी बैठते हैं.‘कहिये सरपंच जी कैसे आना हुआ़''?

सरपंच अपने आने का कारण बताते हुए कहते हैं-‘‘मैनेजर साहब किसानों की एक समस्‍या है,इन्‍हे आपकी सहायता की आवश्‍यकता है'' खुलकर बताइये सरपंच जी ,मैं किसानों की क्‍या मदद कर सकता हूँ.?

सरपंच बोले-‘‘मैनेजर साहब ,हमारे गाँव के कुछ किसान शिवनाथ नदी में पम्‍प बिठाकर खेतों में सिचाई करना चाहते हैं इसके लिये इन्‍हें कर्ज चाहिये .इसके लिये इन किसानों को क्‍या करना होगा ?''सुनकर मैनेजर बोले-‘‘सरपंच साहब !

ये तो बड़ी खुशी की बात है ,हमारी बैंक सिचाई साधनों के लिये प्रधानता के साथ कर्ज देती है. इनके लिये ,सामूहिक उदवहन सिचाई योजना ठीक रहेगी.''

चम्‍पा उत्‍सुकता से पूछती है-‘‘ मैनेजर साहब ,ये उदवहन सिचाई योजना क्‍या होती है? जरा विस्‍तार से बताइये.

ब्राँच मेनेजर बोले -‘‘हाँ-हाँ जरा गौर से सुनों बताता हॅूं, इस योजना में विद्युत पंप और इसकी सहायक सामाग्रियाँ खेतों में नाली बनाने के लिये, सम्‍पवेल बनाने के लिये, पंप घर बनाने के लिये विद्युत कनेक्‍शन व्‍यय के लिये राशि मंजूर की जाती है. इस योजना के अंतर्गत्‌ जितना भी कर्ज मंजूर किया जाता है उसका 50प्रतिशत सरकार अनुदान के रूप में देती है. यह राशि वापस नहीं करना पड़ता. बचत 50 प्रतिशत सात आसान वार्षिक किश्‍तों मे सालाना ब्‍याज दर से फसल आने पर वापस करना होता है. हुई न आम के आम गुठलियों के दाम वाली बात!''

सुनकर चम्‍पा बोली -‘‘सच कहा आपने मेनेजर साहब है आम के आम और गुठलियों के दाम वाली बात. सरकारी योजना वाकई मे लाजवाब है. मेनेजर साहब प्रकरण बनाने की क्‍या प्रक्रिया होगी बताने की कृपा करें.''

अच्‍छा प्रश्‍न किया चम्‍पा जी आपने, सर्वप्रथम जो किसान इस योजना मे शामिल होना चाहते हैं उनके पास कृषि योग्‍य भूमि होना चाहिये. पानी का श्रोत नदी, नाला पास ही हो जिसमे बारहों माह पर्याप्‍त पानीं होना चाहिये एवं विद्युत लाईन खेतों के पास से गुजरती हो ये प्रमुख शर्तें हैं. साथ ही साथ सबसे पहले इन किसानों का एक स्‍वसहासता समूह बनाना पड़ता है सभी सदस्‍य मिलकर अध्‍यक्ष एवं सचिव, कोषाध्‍यक्ष का चुनाव करते हैं. प्रत्‍येक सदस्‍य को मासिक रूप से निर्धारित राशि जो भी तय करें जमा करना होता है. प्राप्‍त राशि से बैंक में समूह के नाम पर खाता खोला जाता है खाते के संचालन हेतु यथा राशि निकालने अथवा जमा करने किन्‍हीं दो पदाधिकारीयों को प्रस्‍ताव पास कर अधिकृत किया जाता है जिनमें एक अध्‍यक्ष अनिवार्य होता है. बैंक खाते का संचालन संयुक्‍त हस्‍ताक्षर से ही होना चाहिये.

खाते का संचालन 6 माह तक नियमित होने पर शासन की तरफ से 25000 रु सहयोग राशि के रुप मैं शासन द्वारा समूह को दी जाती हैै . इस राशि पर समूह को कोइ ब्‍याज नहीं देना होता.

इस राशि को समूह अपने सदस्‍यों को आजीवन कर्ज के रुप में जरुरतें पूरा करने देकर तय सुदा ब्‍याज के साथ वसूल कर, अपने फण्‍ड में व्‍ृाधि करेगा. समय -समय में बैक और सरकारी अधिकारी रिकार्ड्र की जांच करेंगे .जब यह सुनिश्‍चित हो जायेगा कि समूह ने लेन-देन सही- सही किया है तो समूह के नाम से सिचाई योजना का कम से कम 10लाख का प्ररकरण बनाया जा सकता है. प्रकरण फिर ग्राम सभा मैं मंजूरी के लिये रखा जाता है. ग्राम सभा में पास होने के बाद प्ररकरण मंजूरी के लिये जनपद पंचायत भेजा जाता है. जांच पड़ताल पश्‍चात जनपद चंपायत के माध्‍यम से प्ररकरण को बैंक स्‍वीकृति लिये बैंक भेजा जाता है ,बैंक योजना का स्‍थल निरिकक्षण ,जांच पड़ताल कर कर्ज मंजूर कर राशि का उपकरणों की सपलाई कतवाती है जहां से समूह क्रय करना चाहे .भाईयो समझ गये न आप लोग ?

हाँ-हॉ समझ गये हम लोग सभी मिलकर बोलते हैं......!!

चम्‍पा बोली -‘‘ मैनेजर साहब हमे अब यह बताईये प्रकरण बनाने में किन -किन कागजातों की आवश्‍यकता होती है?

कौन व - सहायता समूह बनाता है कौन? प्ररकरण बनायेगा कौन? बताइये ? आपकी बड़ी मेहरबानी होगी.

बैंक मैनेजर प्रसन्‍न होकर बोले - स्‍व-सहायता समूह,प्रकरण बनाने की मार्ग-दर्शन देकर योजना पूर्ण करवाने की जिम्‍मेवारी जिला पंचायत विभाग के अधिकारी कर्मचारियों की है.इसके लिये दस्‍तावेज चाहिये, पांचसाला खसरा ,नकल बी-1 नक्‍शा पम्‍प कोटेशन, लाइन के लिये बिजली विभाग का एन. ओ. सी. डिमांड नोट,प्रोजेक्‍ट रिपोर्ट किसानों का नो-डयूज,पत्र भाईयों आप लोग चिंता न करें ,ये सब कार्यवाही जनपद पंचायत के अधिकारी मिलकर करवा देंगे.

इसमें आप लोगों को ,कोई परेशानी नहीं आने वाली .सरपंच जी ऐसा करते हैं,हम लोग जनपद पंचायत कार्यालय चलते हैं. इस सम्‍बंध में मुख्‍य कार्य पालन अधिकारी से सम्‍पर्क कर कार्यूवाही करवाते हैं. सरपंच खुशी व्‍यक्‍त करते हुए सरपंच बोले -‘‘इससे अच्‍छी बात और क्‍या हो सकती है मेनेजर साहब चलो चलते हैं ?''. सभी उठकर चलना प्रारंभ करते हैं! बैंक से बाहर निकसते हुए!

कुछ देर पश्‍चात सभी जनपद पंचायत कार्लालय पहुंचते हैं,पहुंचकर मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी महोदय से जाकर मिलते हैं.वे उन्‍हें ससम्‍मान बैठाते हैं. सरपंच उन्‍हें वस्‍तु-स्‍थिती से अवगत कराते हैं. ब्राच मैनेजर बोले़‘-‘सी.ई.ओ.महोदय, योजना के सम्‍बंध में मैंने सभी जानकारियां दे दीं हैं.बोले सी.ई.ओ.-‘ये तो मैंनेजर साहब बड़ी अच्‍छी बात है. इनका समूह और प्रकरण बनवाने की कल से शुरुवात करवा देते हैं ताकि ग्राम सभा एवं जिला पंचायत से अनमति लेने में बिलम्‍ब न हो। कल ग्राम पंचायत भवन में मीटिंग रखते हैं,इसमें सभी विभागों जैसे ,राजस्‍व, बिजली ,एग्रीकलचर को आमंत्रित करते हैं.हम और आप तो रहेंगे ही .सभी सहमति के साथ बिजली विभाग कार्यालय प्रस्‍थन करते हैं.

बिजली विभाग पहुंचकर,अधिकारी के पास पहु्ंचते हैं.अधिकारी सभी आगंतुकों का अभिवादन करते हुए बोले -

‘‘कहिये श्रीमान आप लोगों का कैसे आगमन हुआ ,आश्‍चर्य आप लोग एक साथ? मुख्‍य कार्य पालन अधिकारी बोले -

श्रीमान ये किसान उदवहन सिचाइ योजनांर्तगत बैंक से कर्ज लेना चाहते हैं,इसके लिये इन्‍हें आपके विभाग से लाइन के लिये एन,ओ,सी, की आवश्‍यकता होगी ?कल ग्राम पंचायत भवन मैं मीटिंग रखी गई है ,पकरण बनवाया जाना है.

कलेक्‍टर महोदय का निर्देश है .आप आकर जांच पड़ताल कर लें . प्रमाण पत्र पदान करने, स्‍टीमेट सम्‍बंधी कार्यवाही प्रदान करने का अनुरोध है. से विद्युत लाइन पास से ही गुजरती है.ामस्‍या नहीं होगी,व्‍यय भी ज्‍यादा नहीं आयेगा.

साहब अनुरोध कैसा? ये तो अपनी डयूटी है कल मिलते हैं काम हो जायेगा.सभी मुस्‍कराकर धन्‍यवाद देते हैं.हाथ जोड़कर अभिवादन करके विदा लेते हैं .सबके चेहरों पर विजेता के भाव स्‍पष्‍ठ देखे जा सकते हैं. ऐसा लगता है मानो उन्‍हें कोई गड़ा हुआ खजाना मिल गया हो?

चौथे दिन , ग्राम पंचायत भवन किसानों से खचा-खच भरा हुआ है. बैंक ,राजस्‍व, बिजली, एग्रीकलचर एवं जनपद पंचायत विभाग के अधिकारियों का आगमन हो चुका है. तभी सरपंच माइक पर घोषण करते हैं ,भइयो !

बैंक, जनपद, एग्रीकल्‍चर ,सरपंच ,पंचों की उपस्‍थिति में एक स्‍व-सहायता समूह का गठन किया गया है. इन्‍हें आज प्रशिक्षण भी दिया गया है, ताकि ये समूह का संचालन बेहतर तरीके से कर सकें .अब मैं सी.ई.ओ साहब से निवेदन करुंगा वे आकर समूह के पदाधिकारियों के नामों की घोषण करें,आइये श्रीमान.

भइयो आपके ग्राम के कुछ प्रगतिशील किसानों ने का गठन किया है.आज का दिन बड़े ही सौभाग्‍य का दिन है,स्‍व-सहायता समूह के सदस्‍यों की घोषणा आज माननीय सी.ई.ओ. करेंगे मैं उन्‍हें आमंत्रित करता हूं . आइये श्रीमान......! मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी आकर घोषणा करते हैं.

भाइयों स्‍व-सहायता समूह के निम्‍मलिखित पदाधिकारियों का चयन सर्व-सम्‍मति से किया गया है,इनके नाम इस प्रकार हैं-

1. अध्‍यक्ष -.श्रीमति चंम्‍पा 2.सचिव-श्री देवचरन 3. कोषाध्‍यक्ष-श्री जगदीश . तालियाँ गूजती हैं ! ! ! ! .

अपनी बात को आगे बढ़ाते हूए बोले ‘‘मैं पदाधिकारियों से अनुरोध करुंगा वे समूह का संचालन ईमानदारी से करेंगे

एक खास बात और समूह के लिये 10 लाख रु का सिंचाई योजना का प्रकरण भी बनाया गया है.सही -सही उपयोग करेंगे इसमें 5 लाख रु अनुदान ,5 लाख ऋण है. ऋण को 7 आसान वार्षिक किस्‍तों में फसल आने पर मय ब्‍याज अदा करना है अपनी जमीन के अनुपात में जो बाद में मैनेजर साहब बता देंगे.कर्ज अदा मिलकर करना सामूहिक जिम्‍मेवारी होगी. आपका भविष्‍य आपके हाथों में है . ग्रामीण बैंक ने कर्ज मंजूर करने का आश्‍वासन दिया है.

तालियां गूंजतीं हैं.! ! !

मेरी शुभ-कांमनायें आपके साथ हैं. धन्‍यवाद जै-हिन्‍द ! सरपंच खड़े होकर बोले-‘‘मैं मेनेजर साहब से निवेदन करुंगा आकर दो शब्‍द कहे. आइये श्रीमान.मेनेजर किसानों को सम्‍बोधित करते हुए बोले -‘‘भाईयो मैंने- इस प्रकरण का अवलोकन कर लिया है,समूह का संचालन नियमित होगा.ग्राम सभा से अनुमोदन होकर,प्रकरण बैंक आने पर वितरण होगा वादा है.एक माह बाद बैंक आकर 25000रु सहयोग राशि बाबत जानकारी कर लेवें धन्‍यवाद !''

ब्राच मैनेजर चम्‍पा के पास जाकर उसे समूह की पास बुक सौपते हुए बोले-‘आप समूह के हर माह सदस्‍यों से नियमित रुप से निर्धारित राशि लेकर खाते में जमा कर दें हर माह मीटिंग लेकर आपसी लेन-देन पर चर्चा करें.

चम्‍पा आकर बोली-‘‘आदरणीय,अधिकारीगण मैं आप सभी के प्रति समूह की तरफ से आभार व्‍यक्‍त करती हूं . हम लोग आज बेहद खुश हैं,क्‍योंकि आज हमारी मनो-कामना पूर्ण हुई है.इसमें आप सभी का ,अहंम्‌ योगदान है.. धन्‍यवाद

जै-हिन्‍द !

सरपंच माइक पर आकर घोषण करते हैं-‘‘माननीय अधिकारी गण, किसान बंधुओं, माताओं बहनों, आपने अपना अमूल्‍य समय निकालकर कार्यक्रम को सफल बनाया मैं पंचायत की ओर से आप सभी के प्रति आभर व्‍यक्‍त करता हूं. मीटिंग समापन की घोषण करता हू। आप सभी से अनुरोध है चाय-नाश्‍ता लेकर जायें . धन्‍यवाद जै-हिन्‍द !चाय नाश्‍ता पश्‍चात लोग आपस मैं चर्चाकर हॅसी मजाक करते अपने घरों को जा रहे हैं. अधिकारियों का काफिला भी जाता हुआ आंखों से ओझल होता दिखाई दे रहा है. समूह का संचालन करते हूए 6 माह हो चुके हैं.जांच पड़ताल में कोई अनियमिता नहीं पाई गई स्‍दस्‍यों द्वारा 25000रु का उपयोग अपनी घरेलू जरुरतों को पूरा करने में सफलता पूर्वक किया . कर्ज में ली गई रकम समय में लौटाई. .फल स्‍वरुप जिला पंचायत से ग्राम सभा की सूचना प्राप्‍त हुई है. सरपंच ने सदस्‍यों को पंचायत भवन बुलवाकर इसकी सूचना दी.सरपंच ने बताया कि दो दिन बाद ग्राम सभा का आयोजन किया गया है जिसमें समूह का प्रकरण अनुमोदन के लिये रखा जायेगा. आप सभी को आना है,तैयारी भी करना है,सभी एक साथ बोले-‘‘सरपंच जी ये भी कोई कहने की बात है ?

सभी के चेहरे खुशी के मारे चमक उठते हैं .खशी की लहर दौड़ जाती है.सभी गले मिलते हैं. शाम का समय है ग्राम कोटवार गाँव में ग्राम-सभा की मुनादी करते हुए एक गली दूसरी गली घूम रहा है. लोग दरवाजों पर सुनने आकर खड़े हो जाते हैं. कोटवार आवाज लगता है - ‘‘सुनो-सुनो!! गाँव वालो सुनो !!!!!

राह चलत एक ग्रामीण कहता है-‘‘अरे बनवारी सुनो-सुनो क्‍या सुनो कुछ बोलेगा भी ?

कोटवार फिर आवाज लगाता है-‘‘सुनो-सुनो..कल हमारे गाँव में ग्रामसभा का आयोजन है.

इसमें स्‍व-सहायता समूह का प्रकरण मंजूरी के लिए रखा गया जायगा. किसी को अपत्‍ति हो तो आकर दर्ज कराएँ. सभी लोगों से निवेदन है अवश्‍य ही पधारें. ढम-!!!!!-ढम!!!!! !!

कोटवार की मुनादी का सिलसिला लगातार पूरे गाँव में एक छोर तक चलता है.

लोग कल की होनेवाली ग्राम-सभा के सम्‍बंध में आपस में चर्चा करते हुए जगह-जगह दिखाई दे रहे है.

गाँव का महौल बहुत खुशनुमा लग रहा है.ऐसा प्रतीत हो रहा है. मानो. ग्रामवासियों को कोई छुपा खजाना मिल गया हो. ?

ग्राम पंचायत भवन में ग्राम-सभा की तैयारियां बहुत जोर-छोर से चल रहीं .हैं. कोई कमी ना रहे इस पर विचार विमर्श करने में सरपंच,पंच,समूह के सदस्‍य लगे हुए हैं. चर्चा पश्‍चात सरपंच बोले-‘‘भाईयों बहुत रात हो गयी अब चलें कल मिलते हैं. एक दुसरे का अभिवादन करते हुए लोग अपने अपने घरों को लौट रहे हैं. आज सुबह से ही ग्राम का माहोल खुश-नुमा है,ग्राम पंचायत भवन अच्‍छी तरह सजाया गया है. पंडाल-तोरण द्वार लगाये गये है. लोगो को बैठनें के लिए कुर्सिया, दरियां बिछाई गई हैं, लाउड-स्‍पीकर में राष्‍ट्र भक्‍ति का का गीत बज रहा है. ग्राम पंचायत भवन की ओर लोगों ने अपना रूखकर लिया है .

शने-शने कुर्सियां भरने लगी है. पुरूष कुर्सियों पर,महिलायें बच्‍चे दरियों पर बैठ रहे हैं. इसी बीच सरपंच, मंच में घोषणा करते हैं-‘‘सभी बहनों, बच्‍चों से निवेदन है कुछ देर में ग्राम सभा की कार्यवाही शुरू की जा रही है. मुख्‍य - कार्य पालन अधिकारी,बैंक मैनेजर मंच पर आ चुके है. अब में आशा-स्‍व-सहायता समूह के सदस्‍यों से निवेदन करता हूँ वो मंच पर अपना स्‍थान ग्रहण करें.''

स्‍व-सहायता समूह के सदस्‍य एक-एक कर विराजमान हो रहे है. इसके पश्‍चात अधिकारियों का ,समूह के सदस्‍य गण पुष्‍पा-हार से स्‍वागत करते हैं. मुख्‍य-कार्य पालन अधिकारी ग्रामीणों को शासकीय योजनाओं के विषय में जानकारी देरहे हैं. विशेष कर सामूहिक उद्वहन सिंचाई योजना पर प्रकाश डालते हैं.. स्‍वा-सहायता समूह की महत्‍ता पर प्रकाश डालते हैं. अधिक से अधिक,ग्रामीण इसका लाभ लें. शासन, प्रशासन, इसके लिए हमेशा तत्‍पर है. जिसका परिणाम आपके सामने है, आपके ग्राम के कुछ प्रगतीशील किसानों ने.,स्‍वा-सहायता समूह बनाया, सफलता पूर्वक इसका संचालन किया. अकाल से, पलायन से मुक्‍ति पाने के लिए ये चिन्‍तित दिखे. इन्‍होंने सरपंच को अपनी समस्‍या बताई. सरपंच ने बैंक में सम्‍पर्क किया. सबने मिलकर मुझसे सम्‍पर्क किया। परीणाम स्‍वरुप ,10लाख का प्रकरण सिंचाई योजना के लिए बनकर तैयार हुआ. आज ग्राम सभा की मंजूरी के लिए

आपके सामने प्रस्‍तुत करते हुए.मुझे खुशी हो रही है. स्‍वा-सहायता समूह की प्रगति,अकाल से मुक्‍ति का द्वार खोलने प्रकरण में मंजूरी के लिऐ विचार करें.

विचार करने के लिये आपको सिर्फ दस मिनट का समय है. आपत्ति हो तो - बे-खौफ दर्ज कराएँ - धन्‍यवाद!

सरपंच खड़े होकर बोलते हैं -‘‘सज्‍जनों, दस मिनट का समय समाप्‍त हो गया है,कोई आपत्‍ति नहीं आयीं. क्‍या? प्रकरण को मंजूर मान लिया जाय, ?

जोर से हाँ की आवाज गूंजती है, ध्‍वनिमत से प्रकरण मंजूर हो जाता है.

स्‍व-सहायता समूह की अध्‍यक्ष चम्‍पा खड़े हो कर बोली -‘‘सज्‍जनों, माताओं-बहनों आपने हमारी योजना को मंजूरी देकर , हम पर बड़ा उपकार किया है,

हम लोग आपको इसके लिए तहेदिल से धन्‍यवाद देते हैं .हमे ऐसे ही आपका सहयोग मिलता रहेगा. जय हिन्‍द, जय किसान

सरपंच माइक पर आकर सभा समाप्‍त की घोषणा करते हैं. सभी का आभार व्‍यक्‍त करते हैं. सभी से स्‍वल्‍पाहार लेने का अनुरोध करते हैं.

सभी उपस्‍थित नागरिक हँसी-खुशी स्‍वल्‍पाहार ले रहे है. जो ले चुके हैं वो अपने घरों को प्रस्‍थान कर रहे हैं.

लोगों के चेहरों पर चमक देखते ही बनती है. भगवान करे, ऐसी चमक हमेशा बनी रहे.

गाना बज रहा है '' हम होंगे कामयाब एक दिन''.............!!..........!!

मेहमानों का काफिला धीरे-धीरे जाता हुआ आंखों से ओझल होता हुआ दिखाई दे रहा है.

गाने के बोल अब भी कानों में गज रहे हैं........हम होंगे का......म.......या......ब..........! ! !

स्‍व-सहायता समूह के अध्‍यक्ष के नाम ग्रामीण बैंक से पत्र आया है, जिसे पढ़कर चंपा सबको सुनाते हुए बोली-‘‘भगवान ने हमारी सुन ली.

खुशियों की सौगात लेकर आया है यह पत्र.! बोला जगदीश-‘‘हाँ चंपा जी, बड़े ही हर्ष का विषय है.

फिर बोली चम्‍पा-मेरे प्रिय साथियों बैंक ने हमारा प्रकरण मंजूर कर लिया है, लेटर के साथ स्‍वीकृति पत्र भी है, इसमें ऋण की शर्तों का विवरण दिया गया है. सभी पढ़कर अपने हस्‍ताक्षर कर दे, आज ही बैंक बुलवाया गया है. कुछ कागजातों में हस्‍ताक्षर करना है,

जिसके बाद ही योजना में काम शुरू होगा. ‘‘चंपा जी, भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली, अब नहीं रहना पड़ेगा हे बादलों के भरोसे''-बोला जगदीश.

बोली गैरी-‘‘नहीं सतायेगा हमें अब पलायन का भय और भूत!''

चम्‍पा बोली-‘‘सही कहा, सही कहा भाईयों आप लोगों ने. होगीं भरपूर फसलें.!

नहीं रहेगी रोजी- रोटी की चिंता.जल्‍दी हस्‍ताक्षर करें.''. सभी हस्‍ताक्षर करते हैं .

‘‘चलो चलते हैं बैंक'' बोला -देवचरन.सभी उठकर खड़े होते हैं ,बोलते हैं-‘‘ चलो ! चलो! चलते हैं बैंक''

बैंक प्रस्‍थान करते हुए सभी आपस में बतियाते जा रहे हैं.बड़े प्रसन्‍नचित्त दिखाई दे रहे हैं..

राह चलते हुए कई जगह लोग प्रश्‍न करते हैं,अरे भाई सुबह-सुबह कहां ? लोगों के प्रश्‍नों का उत्‍तर देते हुए सरपंच के साथ बैंक पहुंचते हैं.

बैंक पहुंचकर मैनेजर से मिलते हैं.मैनेजर सबको स-सम्‍मान.बिठाते हुए बाले -‘‘ भईयो ! मैं आप लोगों का ही इंतजार कर रहा था.

कुछ कागजात सामने रखते हुए बोले-‘‘चम्‍पा जी ये समूह और बैंक के बीच. ऋण करार पत्रक हैं.अपने हस्‍ताक्षर कर दें.

बैंक की तरफ से मैंने सील के साथ हस्‍ताक्षर किये हैं,बाजू में अध्‍यक्ष की जगह चम्‍पा जी,और कोषाध्‍यक्ष की जगह जगदीश का हस्‍ताक्षर करें.

बगल वाले पेज में सभी सदस्‍य हस्‍ताक्ष्‍र करेंगे. हस्‍ताक्ष्‍र की प्रक्रिया पूर्ण करते हैं,

मैनेजर बोले -‘‘भाईयों इसके बाद जो भी कर्ज निकलेगा सामान खरीदने जो आर्ड्रर दिया जायेगा समूह के प्रस्‍ताव के आधार पर अध्‍यक्ष

और सचिव के हस्‍ताक्षर लगेंगे.'' समझ गयै आप लोग ? सभी एक स्‍वर में बोलते हैं हां! हां! ! समझ गये ! हमे मंजूर है.

तीन-चार माह की कड़ी मेहनत ,बैंक,सरपंच,जनपद पंचायत,राजस्‍व , एग्रीकल्‍चर विभागों की सतत्‌ निगरानी म,ें सिचाई योजना का कार्य पूर्ण होतं है. जिला पंचायत ़द्वारा कार्य पूर्णता प्रमाण पत्र लारी किया गया है.

पंचायत भवन में बैंक मैनेजर, मुख्‍य कार्यपालन अधिकारी,समूह सदस्‍य उदघाटन बावत्‌ चर्चा कर रहे हैं. मुख्‍य कार्य पालन अधिकारी कहते हैं-‘‘ भाईयो सिचाई योजना का शुभारंभ कृषि मंत्री के कर कमलों ,द्वारा होगा. कलेक्‍टर महोदय ने2 अक्‍टूबर की तिथि तय की है.हे तैयारी में जुट जाना है.

चम्‍पा बोली -‘‘ये तो बड़ी खुशी की बत है.

सब व्‍यवस्‍था ,सब विभाग मिलकर कर लेंगे. आप चिंता न करें.चंपा बोली -‘‘ धन्‍यवाद सरपंच जी .''

सरपंच बोले -‘‘ भईयो अब चलते हैं .आगे की तैयारियों में जुट जायें.

वादे के साथ सभी अभिवादन कर विदा लेते हैं.

उदघटन का तैयारियां बड़े जोर -शोरों से चल रही है.शाम चार बजे, कार्यक्रम रखा गया है. ग्राम कोटवार ग्राम में मुनादी कर सरपंच को सूचना देता है.

सरपंच उसे व्‍यवस्‍था में लगने निर्देश देते हुए बोले -‘‘बनवारी दरवारी देखो, पंडाल में कुर्सियां जमवाना शुरू करो, करवाओ.

‘‘जी सरंपच जी '' कहता हुआ प्रस्‍थान करता है.

पंडाल लग चुका है. द्वार सज गया हैं.कुर्सियां लग चुकीं हैं, मंच सज चुका है.माइक लग चुका है.

सरपंच आकर माइक पर बोलते हैं-‘‘हलो-हलो, माई टेस्‍टींग !!!!!!! माई,टेस्‍टिंग !!!!!!.....!!!!!! .

व्‍यवस्‍था होते ही, लोगों का आना शुरू हो चुका है. महिलांए आगे की लाइन में और पुरूष पीछे निर्धारित स्‍थान की कुर्सियों पर बैठ रहे हैं.

चारों तरफ जहॉ-जहॉ भी नजर जाती है, भारी भीड़ दिखाई देती है. मंच से घोषणा होती है-‘‘.कृपया शांत रहे‘‘अतिथिगण आ हैं चुके है.,

मंच पर विराजमान होते दिख रहे हैं. मंच के एक ओर स्‍व-सहायता समूह के सदस्‍य आकर बैठते हैं.

भाइयो, अब में मंत्री महोदय का कलेक्‍टर महोदय का समूह के सदस्‍यों से परिचय कराता हूं. मंत्री सदस्‍यों के पास पहुंचकर उनसे परिचय लेते हैं

कलेक्‍टर महोदय भी,समूह के सदस्‍यों से परिचय प्राप्‍त सरते हैं.

सरपंच बोले-‘‘अब मैं स्‍व-सहायता समूह अध्‍यक्ष चम्‍पा जी से निवेदन करुंगा वे समूह की तरफ से अतिथियों का पुष्प‍हार से स्‍वागत करें.

आईये चम्‍पा जी! चम्‍पा एक- एक कर अतिथियों का पुष्‍प गुच्‍छ से स्‍वागत करतीं है. जोरदार तालियां गूंजतीे है.! ! ! !

तालियों की आवाज से सारा वातावरण गुंजायमान होउठता है. लोगों का उत्‍साह देखते ही बनता है.

सरपंच माईक पर घोषण करते हैं-‘‘ मैं अब माननीय ग्रामीण बैंक अध्‍यक्ष जी से निवेदन करता हूं ,

वे आकर मार्ग-दर्शन के दो शब्‍द्र कहिये श्रीमान.

ग्रामीण बैंक अध्‍यक्ष बोले -‘‘आदरणीय, मंच पर विराजमान सम्‍मानीय अतिथिगण, किसान भाईयों ,माताओ -बहनों ,मुझे बड़ी प्रसन्‍नता है कि,

आप जैसे प्रगतिशील किसानों के बीच आने मौका मिला .हमारी बैंक को फसलों को जीवन देने वाली ,किसानों के जीवन में सुख -समृद्धि लाने वाली ,

योजना में कर्ज उपलब्‍ध कराने का शुभ-अवसर प्राप्त हुआ है.आपसे मेरा विनम्र आग्रह है,योजना को सुचारु रुप से , ईमानदारी के साथ चलायेंगे.

भरपूर आय अजित करेंगे.जीवन स्‍तर में सुधार हो ऐसी कामना करता हूं

आप लोगों के लिये एक खुश खबरी और है. आपके समूह के लिये 2 लाख रु किसान क्रेडिटकार्ड्र में बैंक ने स्‍वीकृत किये हैं.

किसान क्रेडिट कार्ड के माध्‍यम के समूह खाद, बीज, दवाई, खरीद सकते हैं. बिजली बिल अदा कर सकते हैं.

इतना ही नहीं खेती की तैयारी करते समय किसानों के पास आय का कोई साधन नहीं रहता.

फलस्‍वरुप किसान मजबूरी बस साहूकार के पास जाकर घर खर्च चलाने बड़ी ब्‍याज दर पर उधार लेता है. अब जरुरत नहीं, पड़ेगी.क्‍योंकि किसान क्रेडिट कार्ड में कुल पात्रता राशि का 20 प्रतिशत घर खर्च चलाने के लिये ही होता है. आम के आम और गुठलियों के दाम का नाम है ‘ये किसान क्रेडिट ''

भाइयों आपसे आग्रह है, फसल आने पर सिंचाई योजना की किश्‍त एवं किसान क्रेडिट से जो रकम उधार ली थी ,मय ब्‍याज अदा करेंगे. किसान क्रेडिट कार्ड का 3 साल में एक बार नवीवीकरण भी करवा लेंगे साल भर इसमें लेन-देन कर सकते हैं.आप लोग इसका उपयोग बचत खाते की तरह किया जा सकता है.धन्‍यवाद जै-हिन्‍द !

अब मैं माननीय कलेक्‍टर महोदय से अनुरोध करुंगा वे आकर मार्ग दर्शन के दो शब्‍द कहें. हमें अनुग्रहीत करेंगे.आईये! श्रीमान, आईये !

कलेक्‍टर खड़े होकर संबोधन शुरु करते हैं-‘‘माननीय मंत्री जी,किसान भाईयों,मैं,आज आपके बीच पाकर गर्व महसूस कर रहा हूं. आप लोगों ने अपने भविष्‍य को बेहतर बनाने के लिये जो पहल की है वह सराहनीय है.आप लोगों ने जिले नाम रोशन किया ,जिनके सहयोग से आपने कार्य पूर्ण किया मैं आप सभी को हार्दिक बधाई देता हॅूं,सफलता की कामना करता हूँ.बैंक अध्‍यक्ष द्वारा दी गई सलाह पर ध्‍यान देंगे,सफलता निश्‍चित है. धन्‍यवाद जै-हिन्‍द ! तालियां गूंजती हैं!!!

अब मैं माननीय मंत्री जी से आग्रह करुंगा आशीष वचन कहें. आईये सर जी आईये ! यहां उपस्‍थित जन-सैलाब तालियों की गड़गड़ाहट से मंत्री जी का जोरदार स्‍वागत करता है मंत्री महोदय हाथ हिलाकर जनसमूह का अभिवादन कर बोले-‘‘भाईयों आपका.उत्‍साह देखकर ,उपस्‍थिति देखकर लगता है हर अच्‍छे कार्य को लोगों का साथ मिलता है.आपको

धन्‍यवाद देने के लिये मेरे पास शब्‍द क पड़ रहे हैं, क्षमा करेंगे !

शासन की योजना का लाभ किसानों त पहुँचा,जिनकी सहायता से पहुँचा.जिनके मार्ग-दर्शन से पहुँचा मैं शासन ओर से उन्‍हें धन्‍यवाद देता हूं.क्‍योंकि उन्‍होंने निष्‍ठा और लगन के साथ सराहनीय काम किया है. मुझे बताया गया, इस योजना की कल्‍पना करने वाली आदर्श महिला श्रीमती चम्‍पा देवी हैं जिन्‍होंने अकाल और पलायन से मुक्ति दिलाने के लिये शिवनाथ नदी की ओर अपने साथियों का ध्‍यान आकर्षित किया .उन्‍होंने बताया कैसे नदी के बहते पानी से फसलों को बचाया जा सकता है.कैसे नदी के पानी को खेतों तक पहुँचाया जा सकता है.

चम्‍पा जी ने लोगों को शासकीय योजनाओं की जानकारी दी. योजना को साकार करने हेतु सरपंच, बैंक, जनपद पंचायत कार्यालय, बिजली विभाग से सम्पर्क का सिलसिला चलाकर तारीफे-काबिल काम किया है.परिणाम आपके सामने है.चम्‍पा की वजह से ही सामूहिक सिंचाई योजना का जन्‍म हुआ है. मैं ऐसी महान विभूति को नमन्‌ करता हूँ.।

भाईयों, मुझे यह बताते हुए प्रसन्‍नता हो रही है, शासन द्वारा चंपा जी को उनके इस सराहनीय कार्य के लिये ‘‘आयरन-लेडी'' की उपाधी से एवं 25000रु नगद राशि देकर सम्मानित किया जा रहा है. सम्‍मान पत्र एवं राशि सौंपते हैं! सारा माहौल तालियों की ध्‍वनि से गूंज उठता है..! ! चम्‍पा जी एक खुश-खबरी और भी है शासन ने योजना के रख-रखाव के लिये 50000रु की सहयोग राशि भी स्‍वीकृत की है. चम्‍पा को सौंपते हुए बोले-‘‘इस राशि का उपयोग समय-समय सिर्फ मेंटेनैंस में ही खर्च किया जाना है,ताकि कार्य रुके नहीं. हमेशा रिजर्व रखें. खुश रहें खुशहाल रहें. धन्‍यवाद जै-हिन्‍द! तालियां माहौल में जोश और उमंग भर देता है. सरपंच माईक पर आकर बोले-‘‘अब मैं अतिथि गणों से निवेदन करता हॅूं, वे शिलालेख का अनावरण करें एवं बटन दबाकर, सिंचाई योजना की शुरूआत करें, अतिथियों को सदस्‍यगण शिलालेख के पास ले जाते हैं, मंत्री महोदय नारियल फोड़ते हैं पर्दा हटाकर अनावरण करते हैं.जोरदार तालियां गूंजती हैं ! इसका बाद बटन दबाकर सिचाई योजना का शुभारंभ करते हैं.पानी की तेज धार बह निकलती है.लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा. वातावरण हर-हर महादेव के नारों से गूंज उठता है.ह...र..ह..र .म..हा...दे....व.! !

जैसे-जैसे पानी खेतों में फैल रहा है,लोगों के चेहरो की चमक बढ़ती जा रही है.सदस्‍य आपस में एक दूसरे के गले मिल रहे हैं. उछल कूद रहे हैं.उन्‍हें देखकर अतिथि मंद-मंद मुस्‍करा रहे हैं.

मंत्री महोदय कहते हैं-‘‘भाईयों जैसा पेड़ वैसा फल''

पीछे से आवाज आती है- ‘‘जैसा कर्म वैसा फल,देखने मिलेगा सुनहरा कल''

सुनकर सभी एक साथ बोलते हैं-वाह ! वाह ! वाह! ! क्‍या बात है? जोरदार ठहाका लगता है.

सभी मंच पर आकर बैठते हैं.कुछ देर विचार विमर्श होता है,फिर सरपंच कार्यक्रम समापन की धोषणा करते हुए बोले-‘‘ अतिथि गण ,किसान भाईयो आपने अपना अमूल्‍य समय देकर इस कार्यक्रम को सफल बनाया हम आपके अत्‍यंत आभारी हैं.अब कार्यक्रम पूर्ण होता है. आप सभी से विनम्र आग्रह है स्‍वलपाहार लेकर जायें.धन्‍यवाद जै‘हिन्‍द!

गाना बज रहा है‘-‘‘ साथी हाथ बढ़ाना ,एक अकेला थक जाये तो.............! !

कार्यक्रम समापन पश्‍चात्‌ स्‍वलपाहार लेकर ग्रामीण अपने अपने घरों का लौट रहे हैं.पीछे -पीछे अधिकारियों का काफिला भी निकल रहा है.आसमान में सूर्य अस्‍त होने के पश्‍चात्‌ छटा देखते ही बनती है . लोग आसमान को निहारते हुए आपस में हॅसी मजाक करते आंखों से ओझल हो रहे हैं.

गाने का स्‍वर अब भी सुनाई दे रहा है,...सा..थी....हा....थ.....बढ़ाना ...! ! ! .

एक माह पश्‍चात-स्‍वसहायता समूह के सदस्‍य अपना सारा ध्‍यान खेत जोतने,सुधार में लगाते हैं. ,खरीफ फसल का सय नजदीक है.तैयारियां जोरों से चल रही हैं.किसान क्रेडिट कार्ड के माध्‍यम से खाद-बीज का व्‍यवस्‍था पहले से कर ली गई है ,ताकि एन वक्‍त पर कमी का सामना न करना पड़े. अब घर खर्च के लिये साहूकार को कर्ज नहीं लेना पड़ा.

बीज बोने के समय बीज बोते हैं .निदाई-गुड़ाई सब समय पर होता है.वर्षा हो या न हो कोई फर्क नहीं पड़ता. बैंक ,कृषि विभाग ,के अधिकारी र्कचारी समय -समय पर आकर मार्ग दर्शन देते हैं. उनकी सलाह अनावश्‍यक खर्चों में कमी लाती है.

स्‍व सहायता समूह के सदस्‍य पम्‍प घर के पास ,नदी किनारे बैठकर कभी नदी के पानी को तो कभी खेतों की लहलहाती हुई फसलों को देखते हैं.उनके चेहरों की चमक उनकी सफलता की कहानी कहती है. गौरी कहती है-‘‘बहन चम्‍पा शिवनाथ नदी का ये पानी सिर्फ पानी नहीं है.! ये तो अमृत है अमृत है पूरन कहां चुप रहने वाला था बोला -‘‘गौरी ये जो फसलें हैं ये सिर्फ फसलें नहीं हैं इनमें मोती भरे हैं मोती भरे हैं''!

सभी आसमान की ओर देखते हैं ,मानो भगवान को धन्‍यवाद दे रहे हों!.

कुछ समय पश्‍चात्‌ ,फसलें पकतीं हैं,कटाई, मिजाई पश्‍चात्‌ बैंक में शासन द्वारा घोषित मूल्‍य पर धान बेचते हैं. उचित मूल्‍य के साथ शासन द्वारा धोषित बोनस भी मिलता है.वादा मुताबिक समूह सदस्‍य प्राप्‍त आय से सबसे पहले बैंक पहुंचकर देय किश्‍त और किसान क्रेडिट के माध्‍यम से ली गई रकम अदा करते हैं.फिर जमीन के अनुपात में रकम का बटवारा करते हैं.

जगदीश गुनगुनाता है-‘‘दुख भरे दिन बीते रे भईया सुख भरे दिन आयो रे ! आयो रे ! !.

रंग जीवन में नया लायो रे ! .....लायो रे बोला पूरन-‘‘ क्‍यों भाईयों मैने क्‍या कहा था ? ''

बीच में बोली गौरी -‘‘ जहाँ महिलायें बैठतीं हैं,वहाँ समस्‍या का हल निकल ही आता है!''

देवचरन बोला -‘‘ सच कहा गौरी ,बिलकुल सच कहा ‘‘आयरन लेडी ''जिंदाबाद ,जिंदाबाद !

जगदीश बोला -!‘‘ जैसा पेड़ वैसा फल''

चम्‍पा बोली-‘‘ भगवान उन्‍हीं की मदद करते हैं.जो निष्‍ठा और लगन से काम करते हैं''

अब इंद्र देवता भी नाराज नहीं है गांव में हर साल झमा-झम बरसात होती है...............!

रमाकंत बडारया ‘‘बेताब''

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