रविवार, 9 सितंबर 2012

बलबीर राणा की कविता - यौवन तुझे ललकार है

यौवन तुझे ललकार

यौवन तुझे आज फिर ललकार!!

तेरा जीना बेकार!!

फैला है अनियमितता का अन्धकार

लूट खसोट का व्यापार

खुली आँखो के धृतराष्ट्रों के अंधे युग में

कब तक जीते रहोगे?

घातक देशद्रोही

बने सरकारी मेहमान

कानून इन हत्यारों को सजा देने में है नाकाम

इस करूणामयी कानून व्यवस्था को

कब तक व्यवस्थित मानते रहोगे?

अर्थव्यवस्था की खस्ता हालात

रोजमर्रा चीजों की आसमान छूती लागत

सर्वोच्च कुर्सी पे बैठे अर्थशास्त्री के असहाय तर्कों से

कब तक सन्तुष्ट रहोगे?

सत्तर रूपये किलो दाल का

सत्तर फीसदी घरों में लाले हैं।

दफ्तर कार्यालयों में रिश्वतखोरों के न्यारे वारे हैं।

इनके ही काम के लिए इनको

कब तक रिश्वत देते रहोगे?

भ्रष्टाचार के दंश से तड़प रहा देश

जनप्रतिनिधियों के दो रूपी दो भेष

भ्रष्टाचार के नासूर को

और कब तक सहते रहोगे?

विकाश के वायदे मात्र वोट तक

कार्य संपादन सीमित घोषणाओं तक

सत्ता के लोलुप शकुनियों के पासों में

जीवन की बाजी कब तक हारते रहोगे?

गर्दिश में ना डालो अपने पुरूषार्थ को

जुल्मों का हाहाकार मचा चहुं ओर

खून का दरिया उफान पर

वज्रपात मानवता के मन्दिर में

कब तक सहते रहोगे?

हर दिन चीर हरण हो रहा द्रौपतियों का

दुशासनों की भरमार

महफूज नहीं रही नारी

कब तक मूक किंकर्तव्यविमूढ़ पांडव बने रहोगे?

भाई भाई को लड़ाया जा रहा

देश की धर्मनिरपेक्षता को

भेदभाव में बिखराया जा रहा

पहले ही इतना बिखर चुके

और कितना बिखराये जाओगे?

अखबार टेलिविजन में रसूखी खबरों की भरमार है।

पूरा सूचनातन्त्र बना चाटुकार है।

भूक गरीबी इनको दिखती नहीं

सुर्खियों मे रसूखदारों के जलसों के जलवे

अधनंगी बालाओं के ठुमके

देख कर कब तक मदमस्त होते रहोगे?

दहशतगर्दों का आक्रमण देश के चारों ओर

बारूद के ढेरों से भरा ओर छोर

साजिशों से भड़कायी जा रही साम्प्रदायिकता की ज्वाला

इन साजिशों से कब चेतोगे?

अब ना कोई कृष्ण आयेगा।

ना कोई गीता ज्ञान सुनायेगा।

राज काज ताजपोशी में भाई बन्धु का मोह

स्वयं तोडना होगा।

आज ना कोई सुभाष पुकारेगा।

ना टैगोर गांधी आयेगा।

ना कोई अहिंसा का पाठ पढ़ायेगा।

लोक तन्त्र में हो रही हिंसा को

अहिंसक बनाने को

युवा तुझे आगे आना होगा ।

किसी ना किसी को

भगत सिंह बनना होगा।

रंग दे बसन्ती गाना होगा।

पडोसी नही!!

अपने ही घर में मातम मनवाना होगा।

चोरों से देश को बचाना होगा।

जाग यौवन जाग

दर दर ना भाग

कब तक सोता रहेगा?

कब तक भटकता रहेगा?

यौवन तुझे ललकार है

नही तो तेरा जीना बेकार है!!!! जीना बेकार है!!!!

 

बलबीर राणा "भैजी" 

08 सितम्बर 2012

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