प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बालगीत

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बच्चों के पाँचों बच्चों का
एक साथ मिल जाना
सुबह शाम हल्ला गुल्ला
गानों पर नाच दिखाना।

गुल्ली टुल्ली रुद्र अमित‌
आध्या का घर में आना
ढिशुम ढिशुम और ऊधमबाजी
इतराना       इठलाना।

ऊपर छत पर दौड़ लगाकर‌
पल    में   नीचे        आना
तीन चकों वाली सायकल को
सड़कों   पर   दौड़ाना।
 
कभी खेलना कभी झगड़ना
सारा दिन मस्ताना
छुपा छुपौअल खेल कभी
कागज़ की नाव बनाना।

  बात बात में ऐंड़ रूठ कर‌
  कट्टी "की"कर जाना
  किंतु जरा ही  बाद‌ दोस्ती
  "मी" करने आ जाना।

बच्चे सबसे अच्छे शिक्षक‌
आता उन्हें पढ़ाना
बच्चों की कक्षा में मिलता
खुशियों भरा खज़ाना।

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1 टिप्पणी "प्रभुदयाल श्रीवास्तव का बालगीत"

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