गुरुवार, 15 नवंबर 2012

बच्चन पाठक 'सलिल' की दीपावली विशेष रचना - आओ, हम भी दीप बनें!

आओ, हम भी दीप बनें !
                    -- डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'


दीपक है लक्ष्मी का ध्वज-वाहक
प्रकाश फैलाता है, तमस मिटाता है
अखिल विश्व को सुमार्ग दिखाता है


दीप को अपेक्षित है पात्र
पात्रता विहीन कोई प्रकाश दे नहीं सकता
साथ ही दीप को स्नेह चाहिए
जो आधार है करुना और विश्व मैत्री का।


वर्तिका प्रतिक है अनवरत त्याग का
स्वार्थी प्रकाशक हो नहीं सकता ।
पात्रता, स्नेह और वर्तिका को संबल से ही
दीप प्रकाशवान बनता है
जग को आलोक-दान करता है ।


आओ, हम भी दीप बनें,
पात्रता, स्नेह और त्याग की त्रिवेणी में सनें ।


पता- आदित्यपुर
       जमशेदपुर , झारखण्ड
फोन- 0657/2370892

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