शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

सुरेन्द्र कुमार पटेल की लघुकथा - फ़र्क पड़ता है

॰फर्क पड़ता है॰
"तुम्हारे नि:स्वार्थ शब्दों ने मेरी जिन्दगी बदल दी। "

एहसान के भार से दबी राधा ने रमेश से सिसकते हुए कहा ।
"कौन-सी बात ?"
रमेश ने अचकचाकर पूछा ।
"वही नीबू निचोड़ने वाली बात ।"
रमेश की वर्षों पुरानी स्मृति चलचित्र की भाँति सामने आने लगी ।
रमेश और राधा निकट आए फिर उनकी निकटता सह्रदयता में परिणित होती चली गयी
।दोनों में प्रेमालाप होने लगा था ।आधुनिक लड़के-लड़कियों की तरह
बाग-बगीचों में स्वच्छन्दता का आनन्द न लिया था और न ही उनमें कोई अमान्य
संबंध थे।पर उनमें अन्तरंगता की कोई मर्यादा नहीं रह गई थी ।दोनों मन की
गाँठें
बखूबी खोल लिया करते ।
इसी दरम्यान राधा का ब्याह किसी और से हो गया ।अब भी ,वह जब भी मौका पाती
रमेश से खुलकर बातें करती ।रमेश भी खूब मरहम लगाता
।सच्चाई तो ये थी कि रमेश के होते उसे उसके पति के होने न होने का
फर्क समझ में नहीं आया ।मन की जिन गाँठों को वह पति के सामने न खोल पाती
,बड़ी आसानी से वह रमेश के समक्ष खोल देती ।उसके पति को भी पत्नी प्रेम का
फीकापन जल्द ही दिखाई देने लगा ।राधा , रमेश को अपने पति के अमानवीय और
रूखे व्यवहार के किस्से आए दिन सुनाया करती ।रमेश को भी महसूस हो गया कि
राधा का दाम्पत्य जीवन उसकी वजह से नारकीय होता जा रहा है ।वह अतीत को
भुला नहीं पा रही है ।वर्तमान उसके सुनहरे भविष्य की कामना कर रहा है मगर
अतीत से पीछा छुड़ा पाना राधा के वश की बात नहीं थी।
एक दिन मजाक ही मजाक में उसने राधा से कह दिया ," जानती हो राधा तुम
दोनों के बीच नीबू निचोड़ने वाला कौन है ?"
"कौन है ?" उसने पूछा था । "मैं और सिर्फ मैं ।" रमेश ने कहा था ।उस रोज
के बाद रमेश का अभिनय बदल गया ।वह उसकी जिन्दगी से दूर भागने लगा।उसकी
बातों की अन्तरंगता से अरुचि रखने लगा।और फिर... धीरे-धीरे उससे लगभग
नाता ही तोड़ लिया ।जब रमेश का आधार खत्म हो गया तो राधा का प्रेम-बेल
अपने पति की ओर
बढ़ने लगा ।देखते ही देखते उन दोनों के प्रेम-बेल की शाखें गहरा गईं
।लम्बे समय बाद संयोगवश आज जब दोनो निकट आए तो राधा ने रमेश के उपकार का
बदला उसका एहसान जताकर किया ।रमेश , राधा से अपनी कठोरता की वजह दिल
खोलकर बयां करना चाहता था ।मगर उसे
डर था , कहीं सह्रदयता का यही प्रेमांकुर फिर से खरपतवार बनकर उसके
दाम्पत्य जीवन को नष्ट न कर दे । उसने मुस्कुराकर सिर्फ इतना कहा , " चलो
दिमाग ठिकाने तो लगा।" आज रमेश कहीं अधिक आनन्द की अनुभूति कर रहा था ।
-0-

सुरेन्द्र कुमार पटेल
वार्ड क्रमांक -4, ब्योहारी
जिला-शहडोल
मध्यप्रदेश 484774
भारत ।
ईमेल-surendrasanju.02@gmail.com

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