शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

रजनीश कान्त की कविता - दीपावली को खास बनायें

दीपावली को खास बनायें

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एक रावण के वध करने पर
राम की हुई थी जय जयकार
दीपों और पटाखों से
अयोध्या हुआ था गुलज़ार
राम की जीत पर
अयोध्या में
खुशियाँ मनी
पटाखे फूटे जोरदार
लेकिन
आज तो हर कदम पर
रावणों की है भरमार
रास्तों पर बैठे हैं
मासूमों की इज्ज़त
करने को तार -तार
कुछ तो हैं
ऐसे दरिन्दे
जो गर्भ में ही
मासूम बच्चियों का
कर रहे हैं क़त्ल
महंगाई का हर ओर
बज रहा है डंका
घोटालेबाजों का
देशभर में
हो रहा है आज बुलंद झंडा
दीपावली में खुशियाँ मनाएं
मिठाइयाँ खाएं
और जमकर फोड़े पटाखा
लेकिन, ये भी याद रखें
इज्ज़त के दरिंदों को भी
करना है खात्मा
महंगाई डायन को भी
है जलाना
भ्रष्टाचारियों पर भी
करना है प्रहार
इस दीपावली में
कर दो रावणों पर वार
ताकि
खास बन जाये दीपों
का यह त्यौहार


                रजनीश कान्त
rajanishk35@gmail.com

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