गुरुवार, 27 दिसंबर 2012

राजीव आनंद की कविताएँ


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रात भारी थी


हमने एक रात तेरे दर पे गुजारी थी
तमाम हयात-ए-रात पे वो रात भारी थी
याद आती है आज भी वो रातें
जो हमने तुम्‍हारी यादों में गुजारी थी
आज भी दिल-ए-अजीज है वो नुक्‍कड़ की दुकान
सिगरेट लेने जहां मैं आता था चीनी लेने तुम आ जाती थी
दूर तक भागा था सितार को घर पर देख कर
धक्‍का सा लगा था जब तुम सितार लौटा गयी थी
तुम्‍हारी वो आदत आज भी याद बहुत आती है
वादा कर नहीं आना क्‍या खूब तुमने प्रीत निभायी थी
वो रूमाल आज भी सहेज कर रखा है
जिसे मेरे कमरे में तुम एक बार छोड़ आयी थी
याद आती है आंसुओं से डबडबायी तुम्‍हारी आंखें
छलक-छलक के मुझे भिगाती चली गयी थी


मैं, मैं हूँ या तू


कोई प्‍यार ऐसा भी कौन करेगा ?
मुझमें आज तक तुम नजर आती हो !
जब मैं रोता हॅूं, मेरी आंखों में
तुम्‍हारे आंसू नजर आती है !
कभी तुम्‍हें याद कर गर हंस देता हूँ
गालों पर तुम्‍हारी तरह गडढे नजर आती है !
उजाड़ चांदनी रातों में तन्‍हा जब भटकता हॅूं
मेरी परछाई में तुम्‍हारी अक्स नजर आती है !
गुलमोहर के फूल जब हाथ पर उठाता हॅूं
आपने हाथ के शक्‍ल में तुम्‍हारे हाथ को पाता हूँ !
मैं, मैं हॅूं या तू मुझमें घर कर गयी
तुझसे एकाकार का खुद में एक मिसाल सा पाता हॅूं !
 

राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्‍यू बरगंड़ा
गिरिडीह, झारखंड़ 815301
मो. 9471765417                

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