370010869858007
नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

एस. के. पाण्डेय की लघुकथा - तुम कहाँ हो?

image

तुम कहाँ हो ?

नीलोत्पल ने मुझसे पूछा “संत लोग कहते हैं कि यह संसार माया है । मिथ्या है । लेकिन जो हमारे सामने प्रत्यक्ष है, वह मिथ्या कैसे हो सकता है” ? मैंने कहा “ठीक ही तो कहते हैं । संसार सत्य है । यह तो आभास मात्र है । वस्तुतः यह मिथ्या ही है” ।

मैंने आगे कहा “ हम और आप आमने-सामने प्रत्यक्ष बैठे हैं । लेकिन वस्तुतः हम तो हैं ही नहीं” ।

यह सुनकर वह कुछ बोला नहीं । शायद वह कुछ समझ नहीं पा रहा था । इसलिए उसे और समझाने की गरज से मैंने उसके हाथ की ओर इशारा करके पूछा “यह क्या है” ? जबाब मिला “यह मेरा हाथ है” । फिर मैंने उसके पैर की ओर इशारा करके पूछा “यह क्या है” ? फिर जबाब मिला “यह मेरा पैर है” ।

इसी तरह जबाब मिलता गया “ यह मेरी आँख है । यह मेरी नाक है । यह मेरा कान है । यह मेरा सिर है” । आदि ।

यह सुनकर मुझे हँसी आ गई । मैंने कहा “सब कुछ तो तुम्हारा है । लेकिन तुम कहाँ हो” ?

नीलोत्पल ने कोई जबाब नहीं दिया ।

---------

डॉ. एस. के. पाण्डेय,

समशापुर (उ.प्र.) ।

ब्लॉग: श्रीराम प्रभु कृपा: मानो या न मानो

URL1: http://sites.google.com/site/skpvinyavali/

*********

लघुकथा 741444680215747242

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव