बच्चन पाठक 'सलिल' की कविता - अनुरोध

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अनुरोध 

              --  डॉ बच्चन पाठक 'सलिल'

इस सफ़र से यों नहीं घबराइए 

सफ़र लम्बा मुस्कुराते जाइए 

एक दिन गंतव्य भी आ जायेगा 

हर कदम आगे बढ़ाते जाइये ।

 

आपके भी बाद जायें पर्यटक 

राह के कंटक हटाते जाइए 

सुरा महँगी और जहरीली हुई 

आँख से अमृत पिलाते जाइये ।

 

बदबू प्रदूषण की हवा में है भरी 

प्यार का सौरभ बहाते जाइए 

ध्यान हो कोई नहीं दुश्मन बने 

मित्र को पर आजमाते जाइए ।

 

'सलिल' सब साधन यहाँ पाथेय है,

हम सफ़र में सब लुटाते जाइए

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जमशेदपुर 

झारखण्ड 

0657/2370892

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