मनोज 'आजिज़' की ग़ज़ल

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ग़ज़ल 

कर दिया कुछ ने 

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                  -- मनोज 'आजिज़'

बागे-वतन को जहन्नम कर दिया कुछ ने 

दिले-वतन में जखम कर दिया कुछ ने 

 

ग़रीबों का खून पीकर मस्ती से जीते हैं कुछ 

बेशर्मी से खूब दामन भर दिया कुछ ने 

 

रौशन था नाम बेहद दुनिया में एक ज़माने 

लूट मचाकर झुका सर दिया कुछ ने 

 

इन्सां को इन्सां से इंसानियत की आस थी 

हर सू दह्शती आलम कर दिया कुछ ने 

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जमशेदपुर 

झारखण्ड 

 

mkp4ujsr@gmail.com

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2 टिप्पणियाँ "मनोज 'आजिज़' की ग़ज़ल"

  1. ग़ज़ल का भाव अच्छा है !
    मोहसिन 'तन्हा'

    उत्तर देंहटाएं
  2. गजल में शब्दों का जादू नहीं था ।

    उत्तर देंहटाएं

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