शुक्रवार, 15 फ़रवरी 2013

प्रेम मंगल के दो लघु आलेख - निन्दा, अनामिका

इ+न+न्‌+द+अ त्र निन्‍दा

पांच अक्षरों के मेल से बना है मेरा नाम। मेरा नाम जितना सुन्‍दर है कार्य भी उतने ही सुन्‍दर हैं।

मैं क्‍या नहीं कर सकती ? बताओ किसका घर तुडवाना है ? चुटकियों में तुड़वा दूंगी । पति - पत्‍नि में झगड़ा कराना तो मेरा बांये हाथ का खेल है ।सास बहू के रिश्ते में तो मुझे पांच सितारा होटल के लंच की याद आ जाती है। बहुत ही मजा आता है। सुबह से शाम और शाम से रात तक जितने चाहे नुस्‍खे प्रयोग कर सकती हूं ।

गैरों की तो छोड़ो मैं तो भाई-बहिन को भी एक-दूजे से अलग कर सकती हूं। बस एक बार मेरे में कोई रस लेना प्रारम्‍भ कर दे फिर देखो,आपकी बस खराब हो गई है आपको चार घंटे इंतजार करना है बस निंदा पुराण चालू करो समय कब निकल जायेगा आपको पता भी नहीं चलेगा ।

कार्यालयों में चाहे सरकारी हों या प्रायवेट भाई मेरे लिये तो सात सितारा होटल है,खूब ऐश करने को मिलती है।

चापलूस कर्मचारी जब अपने बॉस से मिलने जायें तो मैं उनकी जिव्‍हा पर वास करने लगती हूं ,भाई बड़ा ही मजा आता है ,लग जाती है चुगलियों की झडी और बस हो जाता है बॉस का दिमाग खराब, जय हो जाती है मेरी।

गर दो सच्‍चे दोस्‍त हों, दांत कटी रोटी हो और गल्‍ती से मुझे जरा सा भी अपने दिल दिमाग में ले आयें फिर तो मजा देखने लायक है,मेरा नाम पंचअक्षरी नहीं गर मैं उन्‍हें जुदा नहीं कर दूं ।

दोस्‍त को दुश्मन बनाने में मेरा स्‍पेशलाइजेशन है। मेरा नाम है निन्‍दा और मेरी पर्यायवाची है चुगली । हां तो सुनिये ः-

चुगली या संसार में बहुत बलषाली होय

जाको चाहे धर तोडनो बाको तोड वो देय

दोस्‍तन को बा अलग करके खुद इठलाती जाये

सास-बहू के झगड़न में बेटन से चक्‍की पिसवाये

 

अनामिका

मैं वह हूं जो हर काम करा सकती हूं । कठिन से कठिन काम को आसान बना सकती हूं। बिन मेरे कोई काम कराके देख लो कोई कर ही नहीं सकता । दुर्वार्य को आसान बना सकती हूं, आसान को दुर्वार्य बना सकती हूं।

मुझे जो प्रेम से किसी के पास फेंके उसका जीवन निहाल कर सकती हूं। मुजरिम को बरी करा सकती हूं निर्दोष को मुजरिम बना सकती हूं।

बस मेरा उपयोग करना कोई सीखे, ढंग से उपयोग करना आता हो किसी को। कोई काम नहीं है मुश्किल। कांटे हट जायेंगे मार्ग से सारे,बिछ जायेगी मखमली चादर। बता सकते हो मैं कौन हूं ? मेरा नाम जानना आसान नहीं ।

मैं अनामिका हूं यदि मेरा नाम लोगे तो काम नहीं करा पाओगे। मैं हर काम चुपके से कर देती हूं। मुझे लिफाफे में बन्‍द कर टेबिल के नीचे से दिया जाता है। अन्‍य रुपों में भी मुझे छिपाकर दिया जाता है।

मैं चुपके चुपके काम करती हूं। छिपकर आती हूं और छिपकर चली जाती हूं

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प्रेम मंगल

कार्यालय अघीक्षक

स्‍वामी विवेकानन्‍द इंजीनियरिंग कॉलेज

इन्‍दौर म़़.प्र.

4 blogger-facebook:

  1. बसन्त पंचमी की हार्दिक शुभ कामनाएँ!बेहतरीन अभिव्यक्ति.सादर नमन ।।

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  3. खूब कही।
    http://yuvaam.blogspot.com/2013_01_01_archive.html?m=0

    उत्तर देंहटाएं
  4. प्रेम मंगल जी 'अनामिका' और 'निंदा' इन दो शब्दों को पकडकर सादगी के साथ विचारों को सामने रखा। बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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