मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

शशांक मिश्र भारती की दो कविताएं

 

बसन्‍त

बसन्‍त-

वह गीत है

जिसमें लगी है सभी की प्रीत

आते ही जिसके

खिल जाते हैं कोमल पुष्‍प

महक उठते हैं उपवन

झूम उठते हैं सभी के मन,

मौसम-

बन जाता है सुहावना

नूतन सौन्‍दर्य छा जाता है चहुंओर

कई तरह के सतरंगी पुष्‍प खिलकर

बढ़ाते हैं शोभा

बगीचों की, और-

आकर्षित करते हैं

अपनी ओर मधुकरों को-

खिल-खिलाकर हंस पड़ती है

सरसों-

मधुआ के गेहूं के खेत में,

बोलती हैं कोयलें

हरिया के आम्रमंजरी से

झूमते बाग में,

तेा कहीं निकल पड़ते हैं

मस्‍तानों के झुण्‍ड

पीताम्‍बर डाले, गीत गुनगुनाते

मादकता, सरसता के मोहक

ऋतुराज के स्‍वागत

अभिनंदन को।

बसन्‍त के वंदन को!!

--

 

बसन्‍तऋतु

बसन्‍त

आने पर जिसके

करते हैं विभिन्‍न क्रीड़ाएं मोर

अपनी सुन्‍दर क्रीड़ाओं से,

छोटे खग-हिग भी करते हैं मधुर शोर

कोमल पंखुड़ियों व नूतन पुष्‍पों पर

मंडराते हैं मधुकर

और-

मुग्‍ध हो जाते हैं सभी जन

तेरा सौंन्‍दर्य देखकर

हे बसन्‍त ऋतु!

प्‍यारी सुगन्‍ध ऋतु।

--

हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर -242401 उ.प्र.

1 blogger-facebook:

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.अपनी रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------