मंगलवार, 19 फ़रवरी 2013

उमेश मौर्य की कविताएँ और ग़ज़लें

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1॥ आयी गीत पजामा पहने॥

कुछ शब्‍दो का जामा पहने,

आयी गीत पजामा पहने।...

मात्राओं की नाड़ा बांधे,

छंदो की घुघरू से साजे,

नौ रस की करधनियॉ पहने,

अलंकार का चन्‍दन साजे

कवियों की ये राज दुलारी

कविता घूमे गॉव दुआरी,

कभी घूल मे सनकर आती,

कभी घूप में खूब नहाती,

भावुक मन को खूब लुभाती

बच्‍चों के भी मन को भाती,

एक जगह वह नहीं ठहरती,

दिन में कितनी बार सॅवरती

रंग रंग का गहना पहने

आयी गीत पजामा पहने .......

 

2॥ दूर से ॥

कॉच हूं अब डर सताता है मुझे,

जब कोई पत्‍थर उठाता दूर से॥

बेशक मुझे क्‍यूं शक ये होने लगा,

यूं कोई जब मुस्‍कराता दूर से॥

अब तो रिश्तों से भरोसा उठ गया,

दोस्‍त भी बाहें हिलाता दूर से॥

हर किसी के चोर दिल में है छुपा,

सच कोई न बोल पाता दूर से॥

अब किसे मिलने की भी फुर्सत यहॉ,

हर कोई रिस्‍ते निभाता दूर से॥

हम गलत हैं या जमाना है बुरा,

हर कोई बातें सुनाता दूर से॥

--

 

उमेश मौर्य

सराय, भाईं,

सुलतानपुर, उ0प्र0।

ukumarindia@gmail.com

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