शशांक मिश्र भारती के तीन बालगीत

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शशांक मिश्र भारती के तीन बालगीत

दादा जी

अच्‍छी-अच्‍छी बातें सुनाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

कथा-कहानी हमें सुनाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

सदाचार का पाठ पढ़ाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

सबाल-जबाब हमें समझाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

अनेक रोचक किस्‍से सुनाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

प्रेम भाव का पाठ पढ़ाते

मेरे प्‍यारे दादा जी

पापा-मम्‍मी के भी पापा

मेरे प्‍यारे दादा जी

घर में सबके बुजुर्ग हैं

मेरे प्‍यारे दादा जी।

प्रकाशनः- बच्‍चे और आप पाक्षिक 16 जून 1996 पृ․․03,बाल साहित्‍य समीक्षा मासिक-मार्च 1997 पृ․․06,संकलितः-आओ मिलकर गाएं-2011 पृ010

 

सपना

सुन्‍दर और सलोना सपना

नित एक आता मुझको सपना,

अन्‍तरिक्ष की नयी बातों की

सुन्‍दर कथा सुनाता सपना,

यहां-वहां की सैर कराता

नींद टूटते भग जाता सपना,

रोज रात को आकर भी

हो नहीं पाता मेरा अपना

 

हम बच्‍चे

हम सब छोटे-छोटे से

इस देश के प्‍यारे बच्‍चे हैं

करते रोज हैं कठोर श्रम

देशभक्‍त हम सच्‍चे हैं,

नन्‍हें मुन्‍हें हम हैं फिर भी

आगे ही बढ़ते जाएंगे

करेंगे देश की डटकर सेवा

भारत का मान बढ़ायेंगे।

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॥संकलितः-आओ मिलकर गाएं-2011 पृ012

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हिन्‍दी सदन बड़ागांव शाहजहांपुर - 242401प्र

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1 टिप्पणी "शशांक मिश्र भारती के तीन बालगीत"

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