रविवार, 26 मई 2013

सुनील जाधव की लघुकथा - हनुमान जी का गदा

हनुमान जी का गदा ... [ लघु कहानी ]

सड़क किनारे एक वृक्ष था  उस पर कभी किसी की नजर नहीं पड़ी थी। अचानक एक दिन उस पेड़ में परिवर्तन होने लगा। उसका तना फूलने लगा। तोंद की भांति गोल मटोल। चहुँ ओर से उसका तना फूल गया था। अबतक उस पेड़ पर किसी की नजर नहीं पड़ी थी। एक हनुमान भक्त श्रद्धालु की नजर उसपर पड़ी और उसने उस पेड़ के चरणों में मस्तक टेक दिया। साक्षात हनुमान जी का गदा उस पेड़ में अवतरित हो गया था। पेड़ का तना फूलने से वह पेड़ हुनमान जी का प्रिय शस्त्र गदा की भांति दिखाई दे रहा था।

धीरे-धीरे भक्तों की संख्या बढ़ने लगी थी। चहुँ ओर हनुमान जी के शस्त्र की बात ध्वनि की गति से भी अधिक तीव्र गति से फैल गई थी। वैज्ञानिक भक्त विज्ञान की दृष्टि से उसे देखने लगे थे। मीडिया वाले भक्त मीडिया से भक्ति प्रकट कर रहे थे। कुछ ऐसे ही भक्त ऐसी ही भक्ति प्रकट कर रहे थे। धूप-अगरबती जलाये जाने लगे थे। विभिन्न वस्तुओं के दुकान वहाँ खुल गए थे। वृक्ष भी प्रसन्न था। उसकी उपेक्षा खत्म हुई थी। वह ख़ुशी से झूमने लगा था। पर उसकी यह ख़ुशी धीरे-धीरे कम होने लगी थी | भक्त,श्रद्धालुओं की संख्या कम होने का नाम नहीं ले रही थी। वृक्ष की नींद उड़ गई थी। उसे पुराने दिन याद आने लगे थे। वह शांति, वह स्वच्छ वातावरण ....|

एक दिन अचानक हनुमान जी का गदा गायब हो चुका था। सामान्य पेड़ को देख कर भक्त भी गायब हो चुके थे। पर पेड़ अब खुश था।

डॉ.सुनील जाधव 

नांदेड,महाराष्ट्र 

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