गुरुवार, 13 जून 2013

मनोज 'आजिज़' की लघुकथा - सौ-पचास का कमाल

सौ-पचास का कमाल 

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                     -- मनोज 'आजिज़'

दो तल्ले घर में रहने के लिए सिर्फ ५ सदस्य ही थे । ललित राय ने ऊपरी तल्ले को भाड़े में देने का मन बनाया । एक परिवार को दिया गया । मालिक और भाड़ेदार में अच्छा संपर्क बन गया । भाड़ेदार की बेटी बड़ी हुई तो शादी भी उसी घर से दी गयी । लड़के की शादी भी हुई । बहु आई । सब कुछ ठीक चल रहा था पर कुछ महीनों में मन-मुटाव की बात सामने आने लगी । एक दिन बहु ने घर पर फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली । ललितजी ने पुलिस केस से तो अपने भाड़ेदार को बचाया पर घर वालों के प्रतिरोध से घर खाली करवाना पड़ा । अब समस्या यह थी कि उस कमरे का क्या किया जाय । सारे लोग डर से दिन के उजाले में भी इधर-उधर प्रेतात्मा का दर्शन करने लगे । सब दीवार से सट कर ही बैठते और दिन-रात घर की बिजली जलती रहती । गलती से अगर कोई चूहे ने कहीं गिलास या कोई वर्तन ही गिरा दिया तो सारे लोग एक साथ विकट शोर मचाते । 

ललितजी ने सोचा कि ऐसे मैं हार्ट-फेल तक की नौबत आ सकती है । इन्होने खुद उस कमरे में सोने की बात सभी से कही । मना करने पर भी वे सोते रहे और उन पर किसी भी प्रेतात्मा का प्रभाव नहीं पड़ रहा था । लोग हैरान थे । घर के सदस्य भी भौचक थे । वे बिल्कुल निडर होकर उस कमरे में रहते थे । 

किसी ने पूछा -- ललित, आप कैसे उस कमरे में अकेले रह लेते हैं ?

ललित जी का जवाब था-- जैसा रहा जाता है । बेकार की बातों पर मैं समय नहीं गंवाता । और ये लोग सब काम छोड़ कर प्रेतात्मा के पीछे लगे हैं । ऐसे में प्रेतात्मा नाम का कुछ होता भी होगा तो वो भी परेशान हो जाये । मेरे पास अगर वो आये तो मैं कहूँगा कि पास आकर टक्कर ले ले और नहीं तो सौ-पचास लेकर दफ़ा हो जाये । 

पूछने वाले ने मन ही मन सोचा -- पुलिस, किरानी या चपरासियों को सौ-पचास देने की बात सुनी थी अब तो लोग प्रेतात्मा को भी दे कर काम निपटाने की सोच रहे हैं । 

(लेखक बहु भाषीय साहित्यसेवी हैं , अंग्रेजी शोध-पत्रिका ''द चैलेन्ज' के संपादक हैं और अंग्रेजी भाषा साहित्य के अध्यापक हैं )

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  1. akhileshchandra srivastava8:24 am

    Uttam aur naveen vichar hai pretatma ko 100 ya 50 me nipatana iske liye lekhak badhaiee ke patra hain meri bhi badhaiee

    उत्तर देंहटाएं

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