शुक्रवार, 7 जून 2013

मनोज 'आजिज़' की लघुकथा - कवि की उम्मीद

(लघुकथा )

कवि की उम्मीद 

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                -- मनोज 'आजिज़'

एक सरकारी संस्था की ओर से हिन्दी पखवाड़ा में कवि सम्मेलन आयोजित करने की बात हुई । हिन्दी अधिकारी ने अपने सहयोगी को कवियों की जुगाड़ करने को कहा । शहर के एक वरिष्ठ कवि से संपर्क साधा गया । बात पक्की हुई । उन्ही से चार-पांच कवियों को सूचित करने को कहा गया । सूचना मिलने पर  सभी ने अपनी  गति दिखायी । कार्यक्रम के दिन कविगण सम्मेलन में पहुंचे । आवभगत में कमी नहीं थी । विश्रामालय में कवियों ने गला साफ़ करना शुरू किया । हंसी के फव्वारे और ग़ज़ल की खुशबू फिज़ा में परलौकिक काव्यात्मकता घोलने में सफल हो रहे थे । मूड बन चुका था तभी कार्यक्रम-स्थल जाने की बात हुई । कवियों ने कविताओं की लड़ी लगा दी, काफ़ी तालियाँ भी बजीं । कार्यक्रम के अंत में एक अधिकारी ने सभी कवियों को एक-एक लिफ़ाफा पकड़ाया । एक ने चुपके से आन्तरिक दर्शन किया । वापसी आयोजकों की गाड़ी से हो रही थी । प्राप्ति की बात छिड़ी तो झट जवाब आया -- २ हज़ार है !

गाड़ी का ड्राइवर सब सुन रहा था । उसने कहा -- इसी में खुश हैं सर ! पांच-पांच का आबंटन है । वरिष्ठ कवि ने कहा -- कवि लोग और क्या उम्मीद करे ! 

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(लेखक बहु भाषीय साहित्य सेवी हैं, ''द चैलेन्ज'' अंतरराष्ट्रीय शोध-पत्रिका के संपादक हैं एवं अंग्रेजी भाषा-साहित्य के अध्यापक हैं। इनका ७ कविता-ग़ज़ल संग्रह प्रकाशित हो चुका है )

पता-- इच्छापुर, ग्वालापाड़ा, पोस्ट- आर .आई .टी .

        जमशेदपुर-१४ , झारखण्ड 

फोन- 09973680146

mail- mkp4ujsr@gmail.com

2 blogger-facebook:

  1. Akhileshchandra srivastava9:21 am

    Manoj ji ne bahut hi achche dhang se kaviyon ki katha katha samne rakhi hai 5hazar ke awantan ke bad 2 hazar par khush hona unki mazboori hai is dar ke sath ki virodh karne par dubara nahi bulaya jaiga

    Manoj ji ek sachchai ujagar karne ke liye badhai

    उत्तर देंहटाएं
  2. Akhilesh ji aapne meri laghukatha ka bhaw ko thik samjha aur prashansa ki, dhanyavaad ! Kahin na kahin kaviyon ki yahi dasha hai.
    Manoj 'Aajiz'
    mkp4ujsr@gmail.com
    jamshedpur

    उत्तर देंहटाएं

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