शनिवार, 29 जून 2013

बसंत भट्ट की कहानी - डर का अहसास

  
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डर का अहसास
               बात उस समय की है। जब अपने मामा के वहा रहता था। मेरे मामा एक किसान थे| जो उतरांचल के  पहाड़ी गाव में रहते थे। एक बार मेरे साथ एक अजीब सी घटना हुई। हुआ ये एक दिन में सुबह उठा और नाश्ता करने के लिए रसोई में बैठा था। तभी मुझे अपने मामा की लड़की जो मुझसे बड़ी थी। उसकी आवाज सुनाई दी जो सांप –सांप कह कर चिल्ला रही थी। में दौड़ते हुए उस और को चल दिया। लेकिन तब तक सांप भाग चूका था। वह मुझे हाथ से इशारा कर बता रही थी। वो जा रहा है। लेकिन में देख नहीं पाया सांप मेरी आँखों से ओझल हो चूका था। वह बोली बहुत बड़ा सांप था। मैंने कहा मुझे तो नहीं दिखा वह बोली ऐसा नहीं बोलते है। मैंने कहा ऐसा क्यों नहीं बोलते है।  वह बोली ऐसा बोलने वाले को दिन भर सांप ही दिखाई देते है।

मैंने हँसते हुए कहा मुझे ठग रही हो वह बोली ये बात सही है। मैंने अपनी दादी से सुना है। उसकी दादी जो  मेरी नानी थी। में उसके पास गया और उनसे पूछा वह क्या यह बात सही है। वह बोली हा , अब में भी थोडा डर सा गया। मुझे डरा देखा कर नानी बोली ये सिर्फ कुछ पुराने किस्से है। इसमें डरने की कोई बात नहीं है। में मुस्करा कर बाहर चला गया। तभी मेरे मामा ने मुझे आवाज दी में दौड कर उनके पास गया। मामा जी बोले तू दीवान सिंह के वहा चला जा , उनके यहाँ कल शादी है। आज कामकाजी का निमंत्रण है।  कामकाजी निमंत्रण में शादी से पहले सब समान आदि को शादी वाले घर पर एकत्र किया जाता था। जिसकी शादी में जरुवत होती थी। में घर निकल पड़ा उनका घर करीब 2 किलोमीटर दूर  था। रास्ता खेत व वरसाती नाले के बीच से होकर जाता था। में अपनी धुन चला जा रहा था। अभी में कुछ दूर ही पहुंचा ही था कि मेरे सामने एक सांप था। में डर गया और रूक गया। सांप आराम से घूमता हुआ। रास्ते से एक और चल दिया और में दौड़ते हुए  आगे बढ़ गया। अभी थोड़ी दूर पहुंचा ही पाया दो सांप मुझे लड़ते हुए दिखाई दिए जो रास्ते से कुछ दूरी पर थे। में डर के मारे पसीने से नहा गया।

मैंने बजरंगबली का नाम लिया और दौड़ लगा दी। में हांफ्ते हुए उनके घर में पंहुचा। मुझे देखकर और लोगो ने मुझे डाटा बोले कहा के लिए देर हो रही थी। जो तू इतना दौड़ के आया में मुस्करा दिया। उसके बाद हम लोग इधर उधर से सामान ला कर जमा करने लगे। हम लोगों ने दोपहर का भोजन भी वही किया। उसके बाद सब लोगो ने जंगल लकड़ी लाने का प्रोग्राम बनाया। मुझे तो जंगल के नाम से मुझे सांप की याद आ गयी। में डर गया। पर उनसे कुछ नहीं कहा चुप चाप उनके साथ लकड़ी लेने चल दिया। हम लोग जंगल में लकड़ी जमा करने लगे में अपने चारों और लकड़ी और सांप दोनों को देख रहा था।

मुझे कुछ दूरी पर एक लकड़ी पड़ी दिखाई दी में बड़ी सावधानी से उस ओर बढ़ा अभी में लकड़ी के पास पंहुचा ही था। मुझे कुछ दूरी पर सांप दिखाई दिया में  डर के मारे चिल्लाया साथ वाले दोड़ते हुए आये तब तक सांप जा चूका था। में उनसे बोला आज सुबह से ही मुझे सांप ही सांप दिखाई दे रहे है। में अब तुम लोगो के ही साथ रहूगा अकेले नहीं जाउगा वे हस दिए थोड़ी देर में हम लकड़ी ले कर घर की और चल दिए में बड़ी सावधानी से चल रहा था। तभी मुझे झाड़ी में कुछ आवाज सुनाई दी मैंने उस देखा तो एक सांप तेजी से मेरी और आ रहा था। मैंने चिल्लाते हुए सांप –सांप कह कर, लकड़ी फैंक दी और  दौड़ लगा दी। साथ वालों ने मुझे आवाज दी और रोक कर पूछा कहा है। सांप मैंने उन्हें हाथ से इशारा किया। वहां पर है। उन्होंने वहा जाकर देखा और बोले कहा है। सांप मैंने का अभी तो यहाँ था। वे बोले लकड़ी उठा और हमारे साथ चल लकड़ी उठा कर में उनके साथ चल दिया।

घर पंहुच कर वे सब मेरा मजाक बना कर हस रहे थे। में चुपचाप खड़ा उनकी हंसी सुन रहा था। तभी राजकुमार जो गाव के रिश्ते से मामा लगते थे वह बोले चाय बनाओ सब थके हुए है। में खड़ा खड़ा ये सोच रहा था। कोई साथ मिल जाता तो में घर चले जाता।


तभी मुझे किसी रसोई से आवाज लगाई में वहा पहुंचा तो पता चला की चाय के लिए दूध नहीं है। मुझे   दूध लाने के लिए ही बुलाया था। नरोतम जी के वहा से मुझे दूध लाना था। जो गाव के आखिरी कोने में रहते थे| में मना भी नहीं कर पाया में दूध लेने के लिए चल दिया। मेरा डर फिर वापस आ गया था। मेरी चाल बहुत तेज थी में लगभग दौड़ते हुए चल रहा था। रास्ते के एक और बरसाती नाला था। उस नाले के दूसरी और एक भूमि देवता का मन्दिर था। मैंने सुन रखा था। उस मन्दिर के आस – पास एक मणि वाला नाग रहता है। जो रात के अंधेरे में कभी – कभी अपनी मणि के साथ दिखाई देता है।

मुझे डर के मारे चमकते हुए जुगुनु भी सांप लग रहे थे| आगे चढ़ाई थी में फिर भी दौड़ रहा था। में हांफ्ते – हांफ्ते उनके घर पहुंचा उनकी पत्नी ने मुझे दूध का डिब्बा दिया। में दूध ले कर चल दिया। में दौड़कर अभी बरसाती नाले को पार करके खेत में पहुंचा ही था। मुझे २ जोड़े सांप के दिखाई दिए जो मेरे रास्ते थे एक के उपर एक चिपके हुए थे। में डर के मारे चीख पड़ा और दौड़ने लगा मुझे ऐसा लग रहा था। की सांप मेरे पीछे भाग रहे है| में दौड़ता रहा  जब तक में अपने दोस्त के घर नहीं पहुंचा| 

वह मुझे अपने बरामदे  में ही मिल गया मैंने उसे हांफते हुए बताया की उनके घर को आने वाले रास्ते में सांप का जोड़ा है। वह तुरन्त लाठी लेकर मेरे साथ चल दिया। सांप तो नहीं देखे हा खेत में कुछ हल चल हुई उसे बिश्वास हो गया की में सच बोल रहा हूँ। मेरे निवेदन करने पर वह मेरे साथ चल दिया। हमने पहले दूध पहुंचाया फिर मुझे  अपने मामा के घर छोड़ कर वह चला गया। में सीधे बिस्तर में घुस गया और सो गया आज भी उस दिन को याद कर मेरे रौंगटे खड़े हो जाते है में आज तक यह समझ नहीं पाया उस ऐसा क्या हुआ था। जो मुझे ही सांप  दिखाई दिए।

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  1. Akhilesh Chandra Srivastava9:33 pm

    bade budhon dwara bataye gayeen baten anubhav par aadharit hoti hain, un baaton ka zehan men hona aurman men baithe dar se hi Bhatt ji ko saanp dikhe ,kahani dilchasp thi

    उत्तर देंहटाएं

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