रविवार, 7 जुलाई 2013

क़ैस जौनपुरी की कहानी - साफ़ दिल

शाद अपने ऑफिस से वापिस आ रहा था․ सड़क पे ट्रैफिक जाम था․ वो अपनी बाईक चला रहा था․ आज कुछ ज्‍यादा ही जाम लगा हुआ था․ हर आदमी कोशिश कर रहा था किसी भी तरह से जाम से निकलने की․ कुछ लोग गलत रास्‍ते से से भी जा रहे थे․ बहरहाल, ये हिन्‍दुस्‍तान है․ यहां सबकुछ चलता है․ और फिर ये तो सिर्फ ट्रैफिक जाम था․ लोगों को तो आदत पड़ चुकी है․ लोगों को पता है कि ”कैसे निकलना है, चाहे पैर रखने की भी जगह न हो․”

वो चुपचाप सबकुछ देख रहा थाए जो कुछ भी हो रहा था․ वो बायीं तरफ से धीरे-धीरे खिसक रहा था․ उसे कोई जल्‍दी नहीं थी․ सड़क पे बहुत शोर था․ गाडि़यों की आवाजें, लोगों की आवाजें․․․․और उसके कानों में एक और आवाज आ रही थी, जो किसी प्रार्थना की धुन लग रही थी․ हां, वो आवाज वहीं सड़क के किनारे एक चर्च से आ रही थी․

वो प्रार्थना की धुन को बड़े ध्‍यान से सुन रहा था․ ये एक मीठी धुन थी․ अचानक उसे ईसा मसीह का ख्‍याल आया․ और उसने सोचा,

”लोग अपने भगवान को क्रॉस पर कैसे लटका सकते हैं? या

”लोग ऐसे भगवान की पूजा कैसे कर सकते हैं जो खुद क्रॉस पर लटक रहा हो?

अब पूरी इसाईयत उसके लिये एक सवाल बन गया था․

बहुत सारी गाडि़यां आ-जा रहीं थी․ और ठीक उसी तरह बहुत सारे ख्‍याल उसके दिमाग में आ-जा रहे थे․

आखिरकार, वो अपनी मंजिल तक पहुंच ही गया, जो कि उसका घर था, मुंबई के एक भीड़ भरे इलाके में․ अब वो लिफ्‍ट में जा रहा था․ लिफ्‍ट के सामने की दीवार में शीशा लगा हुआ था․ वो अपने आप को उस शीशे में रोज देखता है․ लेकिन उसे आज कुछ अलग दिखाई दिया․

उसे अपने अन्‍दर ईसा मसीह दिखाई दिये․ अचानक उसे एहसास हुआ, ”हां, वो ईसा मसीह ही थे․ लम्‍बे-लम्‍बे बाल और चेहरे पे दाढ़ी․․․और तब शाद ने अपनी आखें बन्‍द कर लींए अपने सिर को शीशे पे टिका दिया․․․․

वो सोच रहा था, ”ईसा मसीह उसके पास क्‍यूं आए?

”क्‍या वो सिर्फ एक एहसास थाए या उसके पीछे कोई मकसद था?

सबसे ज्‍यादा परेशान करने वाला सवाल था कि, ”वो क्‍यूं?ष्‍

”क्‍या वो हिन्‍दुस्‍तान का अगला मसीहा बनने वाला है․․․?

ये बात उसके दिमाग में घूम-घूम कर आ रही थी कि “हिन्‍दुस्‍तान की आज जो हालत है उसके हिसाब से तो दुनिया के इस सबसे बड़े लोकतंत्र को एक मसीहा की सख्‍त जरुरत है․․․” उसने अपने आप से सवाल किया․․․”क्‍या मैं इस काबिल हूं․․․?” और उसके सवाल का कोई जवाब नहीं था․․․तब उसने धीरे-धीरे अपनी आखें खोलीं․ और तब तक ईसा मसीह का अक्‍स गायब हो चुका था․․․

वो लिफ्‍ट से बाहर आ चुका था․․․बाहर आते वक्‍त उसने एक बार फिर खुद को शीशे में देखा․․․उसने देखा कि उसका चेहरा भी ईसा मसीह के जैसा लगता है․․․लम्‍बे बालों और दाढ़ी के साथ․․․

अब उसका दिमाग एक दूसरी दुनिया में था․․․उसने फैसला किया कि, ”वो ईसा मसीह के बारे में पढ़ने से शुरु करेगा․․․” और अब․․․वो पढ़ने जा रहा था․․․ईसा मसीह के बारे में․․․․वो जा रहा था․․․जानकारी इकट्‌ठा करने․․․ईसा मसीह के बारे में․․․․

उसने अपने दिमाग पर जोर डाला, तो उसे याद आया कि कुछ दिन पहले उसके कुछ दोस्‍त आपस में बहस कर रहे थे कि․․․”ईसा मसीह․․․इस्‍लाम से ताल्‍लुक रखते हैं․․․और इस हिसाब से सारे ईसाई मुसलमान होते हैं․․․․लेकिन जैसा कि होता आया है․․․लोग खुद को एक समुदाय में शामिल कर लेते है․․․और एक अलग मजहब बना लेते हैं․․․और फिर वो अपनी एक अलग राय बना लेते हैं․․․अपने नये भगवान के बारे में․․․”

उसने सोचा․․․”लोगों की बातें सुनके राय बनाने से अच्‍छा है․․․खुद पढ़ो और समझो․․․कि सच क्‍या है․․․?” इसके लिये उसने फैसला किया․․․”क़ुरआन पढ़ने का․․․” ताकि पता चले कि․․․”क़ुरआन क्‍या कहता है․․․ईसा मसीह के बारे में․․․?”

और इतना सब सोच-विचार करने के बाद वो अपने कमरे में दाखिल हुआ․․․और खाना खाके सो गया․․․

रात का वक्‍त था․․․और शाद अपने कमरे में सो रहा था․․․․․․․․․जैसा कि अब हर चीज․․․हर बात․․․उसे ईसा मसीह का एहसास दिलाती थी․․․वैसे जो वो ख्‍वाब देख रहा था․․․और ख्‍वाब में भी उसे ईसा मसीह दिखाई दिए․․․श्वेत कपड़ों में․․․हाथों में बकरी का बच्‍चा लिए हुए․․․और जितना वो ईसा मसीह के बारे में जानता है उसमें एक बात ये भी है कि ”ईसा मसीह को बकरी से बहुत प्‍यार था․․․” लंदन में उसने ढ़ेर सारी तस्‍वीरें देखीं थी जिनमें ईसा मसीह को बकरी के साथ दिखाया गया है․․․

उसने ख्‍वाब में देखा कि․․․बकरी ईसा मसीह की गोद से उतरकर भागती है․․․और थोड़ी दूर जाने के बाद रोने लगती है․․․उसने ख्‍वाब में देखा कि․․․उसे बकरी के रोने की आवाज सुनाई दे रही है․․․․और ईसा मसीह बकरी की तरफ दोनों हाथ फैलाए उसका इन्‍तजार कर रहे हैं․․․और बकरी बस रोए जा रही है․․․दोनों के बीच एक फासला है जो खतम नहीं हो पा रहा है․․․दोनों एक ही जगह खड़े हुए हैं․․․ईसा मसीह चाह रहे हैं कि बकरी उनके पास आ जाए․․․मगर बकरी उनके पास नहीं आ रही है․․․ईसा मसीह चाह रहे हैं कि․․․वो खुद जाकर बकरी को अपनी गोद में उठा लें․․․मगर जमीन इतनी सख्‍त है कि हिलती ही नहीं․․․अचानक․․तेज हवाएं चलने लगती हैं․․․ईसा मसीह के बाल हवा से लहरा रहे हैं․․․बकरी डर रही है․․․मगर अपनी जगह से हिल नहीं पा रही है․․․․बस रोए जा रही है․․․

अचानक उसे महसूस हुआ कि․․․अब ना तो ईसा मसीह दिखाई दे रहे हैं․․․और ना ही हवा चल रही है․․․और बकरी भी दिखाई नहीं दे रही है․․․․मगर बकरी के रोने की आवाज अभी भी आ रही है․․․․फिर अचानक हैरानी में उसकी आंख खुल गई․․․और बकरी की आवाज अभी भी उसके कानों को सुनाई दे रही थी․․․․अब जाके उसे एहसास हुआ कि․․․वो सपने से बाहर आ चुका है․․․मगर बकरी अभी भी रो रही है․․․

उसने खिड़की से बाहर देखा․․․बकरी सचमुच में चिल्‍ला रही थी․․․उसने देखा․․․एक सफेद बकरी․․․बिल्‍कुल वैसी ही जैसी उसने सपने में देखी थी․․․ईसा मसीह की गोद में․․․․

बकरी एक खूंटे से बंधी थी․․․और वहीं एक एक सब्‍जी का ठेला उल्‍टा करके खड़ा किया हुआ था․ और दूसरी तरफ एक नई बिल्‍डिंग बन रही थी․․․जिसकी टिन की चादर से चारदिवारी बनाई गई थी․․․टिन की चादर और सब्‍जी के ठेले के बीच बहुत थोड़ी सी जगह बची थी․․․जहां बकरी फंसी हुई थी․․․․बकरी वहां से निकलना चाह रही थी․ मगर खूंटे से बंधी थीए इसलिए निकल नहीं पा रही थी․․․इसी वजह से चिल्‍ला रही थी․․․

अब उसे एहसास हुआ कि बिल्‍कुल यही हो रहा था उसके सपने में․․․उसने आसपास नजर दौड़ाई․․․कई लोग आ-जा रहे थे․․․मगर कोई भी उस बकरी की तरफ ध्‍यान नहीं दे रहा था․․․शाद को बहुत बुरा लग रहा था․․․वो अपनी बिल्‍डिंग की चौथी मंजिल पर रहता है․․․उसने देखा कि․․․शायद कोई आए और उस बेचारी बकरी की मदद करे․․․उसने सोचा․․․”क्‍यूं न खुद चलके उस बकरी को वहां से निकाल दूं․․․?” उसने फिर सोचा․․․”अगर किसी ने कुछ कहा तो फिर․․․? उसका मालिक आ गया तो․․․? लोग क्‍या सोचेंगे․․․? मैं क्‍यूं इतना परेशान हो रहा हूं․․․? जब लोग ये सवाल पूछेंगे तो मैं क्‍या जवाब दूंगा․․․? आजकल कहां कोई किसी की मदद करता है․․․अगर कोई करने की कोशिश भी करे तो लोग उसके पीछे मकसद तलाशने लगते हैं․․․” फिर उसे ख्‍याल आया․․․ईसा मसीह․․․का․․․उसने सोचा․․․अगर ईसा मसीह ने भी इसी तरह सोचा होता․․․․तो लोगों की मदद कैसे करते․․․․? फिर उसे एहसास हुआ कि․․․उसे भी लोगों की परवाह छोड़कर․․․․बस उस बकरी के बारे में सोचना चाहिए․․․जो मुश्‍किल में है․․․․अगर तुम भी नहीं गये․․․․तो लोगों और तुममें क्‍या फर्क रहेगा․․․․उसके अन्‍दर एक तूफान उमड़-घुमड़ कर आ-जा रहा था․

उसने लोगों की परवाह छोड़कर बकरी की मदद करने का फैसला किया और नीचे उतरने के लिये तैयार होने लगा․․․․पायजामा उतारकर पैंट पहन लिया․․․․․तभी उसे लगा कि․․․बकरी की आवाज․․․अब नहीं आ रही है․․․․उसने नीचे उतरने से पहले खिड़की से नीचे झांककर देखा․․․․उसने देखा कि․․․बकरी का मालिक उसे वहां से निकाल रहा था․․․․शाद के दिल को अब जाके सुकून मिला․․․․उसने आसमान की तरफ देखा․․․․उसे ईसा मसीह मुस्‍कुराते हुए दिखाई दिए․․․․और उसके दिल से ये आवाज आई कि․․․“तुम बस अपना दिल साफ रखो․․․बाकी सब ऊपरवाले के हवाले छोड़ दो․․․․”

अब उसे इस बात का एहसास हो चुका था कि “आज का इंसान कितना खुदगर्ज़ हो चुका है․․․छोटी-छोटी बातों में भी बड़ी-बड़ी वजह बनाकर खुद को किनारे कर लेता है․․․“

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