सोमवार, 29 जुलाई 2013

सीताराम पटेल की रचना - पचास धन

 

पचास धन

1:-

मुस्‍कान तेरी

दिल में उतर गई

सद्‌यःस्‍नात अभिनेत्री

सुनयना मुस्‍कुराई

2:-

मीनाबाजार

प्रणय में मंहगाई

आवाज खड़खड़ाई

प्रीत तुमने निभाई।

3:-

पचास धन

सपना में समा गई

एक बहाना है काफी

हमारे जीने के लिए

4:-

पाटल पुष्‍प

अंग अंग लगे तेरे

अधर अमृत पीउंॅ

बस इतनी चाहत

5:-

मधुर योग

पल पल हठ योग

न समझे इसे रोग

प्रकृति पुरूष योग

6:-

भंवर गीत

रात सरोज में सोए

प्रातःकाल उड़ चले

भंवर को चैन कहांॅ

7:-

बारह बजा

मिलन की घड़ी आई

तन मन करे योग

मेघ जल बरसाई

8:-

मन मोहिनी

तरस रहे हैं कान

सुनने आवाज तेरी

एक बार कहो प्रेम

9:-

पाली की प्‍यारी

अंॅगनियांॅ की दुलारी

मुखिया का अपमान

मत कर तू गुमान

10:-

मधु यामिनी

खनखनाती चूड़ियांॅ

महमहाती बदन

नव विवाहिता वधु

11:-

अक्षर ज्ञान

प्राथमिक पाठशाला

नव सृजन का शाला

हंॅसमुख मतवाला

12:-

तुलसीदास

रामचरित मानस

समन्‍वयक सहारा

सत्‍य हरदम जीता

13:-

रोग की दवा

तुम ही हो राधारानी

मरते प्राणी की सुधा

मेरी जागृत कल्‍पना

14:-

मेरी आराध्‍या

तुमने रचाई रास

और हुआ नाम मेरा

अद्‌भुत तेरी साहस

15:-

निर्दयी विश्‍व

देती है सिर्फ यातना

दुनिया मत बांॅधना

अपनी मोटी जंजीर

16:-

प्‍यासा क्‍या देख्‍ो

कहीं भी मुंॅह मारता

कुपथ पथ मानता

सभी को एक जानता

17:-

निंदिया लागी

आओ सो ले साथ साथ

प्रिये बाकी रहा बात

जाने को है अब रात

18:-

गायत्री माता

बस तेरा ही सहारा

स्‍ंासार में मैं हूंॅ हारा

तेरे बिन हूंॅ आवारा

19:-

आह वेदना

साहित्‍य सृजनकर्ता

सबमें लाता एकता

मिलाता है मानवता

20:-

गड़गड़ाना

प्रकृति का नगाड़ा

गड़गड़ गड़गड़

वसुधा गगन योग

21:-

कर्म का फल

विपरीत प्रतिक्रिया

सत्‍कर्म होता शहद

हमेशा कर सत्‍कर्म

22:-

म्‍ोरी गोमाता

देती है गोबर धन

करें हम गोवर्धन

गो का वध करें बंद

23:-

मांॅ की ममता

बड़ी होती अनमोल

संसार में नहीं तोल

मांॅ से तू मधुर बोल

24:-

सावन भादों

हरा भरा वसुन्‍धरा

झर झर जल झरा

नदी नाले सब भरा

25:-

क्‍वांर कार्तिक

छिटके श्‍वेत चांदनी

फसल लहलहाती

सबका मन है लुभाती

26:-

काला अंगूर

पीकर हैं सभी बढ़े

नारी का रूप सौन्‍दर्य

आकर्षण है अनोखा

27:-

हमसफर

तो सुहाना है सफर

हम सभी हैं जानते

परमेश्‍वर मानते

28:-

राधिका रानी

अनुराग बरसाती

प्रेम पथ पर आती

कनुप्रिया कहलाती

29:-

प्रणय योग

रसधर चक्रधर

बंशीधर गीतेश्‍वर

रूपधर विश्‍वेश्‍वर सीताराम पटेल

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उॅं भूर्भुवः स्‍वः तत्‍सवितुर्वरेण्‍यं भर्गो देवस्‍य धीमहि धियो योनः प्रचोदयात्‌।

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