सोमवार, 26 अगस्त 2013

पुस्तक समीक्षा - घर घर की राम लीला

सफल और सार्थक व्‍यंग्‍य

सुप्रसिद्ध व्‍यंग्‍यकार पूरन सरमा का सोलहवां व्‍यंग्‍य संकलन घर घर की राम लीला' आया है। वे राष्ट्रीय स्‍तर पर चर्चित व्‍यंग्‍यकार है। उन्‍होंने व्‍यंग्‍य के अलावा उपन्‍यास एवं नाटक विधा पर भी कलम चलाई है। उनका एक उपन्‍यास समय का सच काफी चर्चित रहा है।

पूरन सरमा व्‍यंग्‍य - लेखन के क्षेत्र में अपनी मौलिकता तथा कथात्‍मक रचनाओं के कारण जाने जाते है। वे साहित्‍य अकादमी से समाद्रत है। लगभग हर पत्र पत्रिका में उनको स्‍थान मिलता रहा हैं। व्‍यंग्‍य हिन्‍दी में आधुनिक काल में पुप्‍पित पल्‍लवित हुआ है। भारतेन्‍दु काल से लगाकर हरिशंकर परसाई, शरद जोशी व श्री लाल शुक्‍ल तक की व्‍यंग्‍य - यात्रा के अवलोकन से स्‍पष्‍ट है कि आज व्‍यंग्‍य साहित्‍य की एक महत्‍वपूर्ण विधा है। पूरन सरमा के इस संकलन में विभिन्‍न विषयों पर लिखे उनके छियासठ व्‍यंग्‍य संकलित है। पूरन जी में विपयों को ढूढंने की क्षमता है और वे रचना के अन्‍त तक विपयों के निर्वहन में सिद्धहस्‍त है। लगभग चालीस वर्षों से वे लिख रहे है।

इस संकलन में साहित्‍य, चुनाव, राजनीति, शिक्षा, भ्रष्टाचार, नारी विमर्श, सत्‍ता, सगंठन, सरकार, आदि विविध विषयों पर उन्‍होंने कलम चलाई है।

कई स्‍थानों पर वे सहज-सरल भाषा में गहरा कटाक्ष कर जाते हैं। जैसे -

फेल होने के अपने मौलिक फायदे हैं, इन्‍हें लेने से मत चूकिये।

इसी प्रकार बनानी है सरकार में वे लिखते है -

गिरे हुए लोगों ने मिलकर बनायी थी सरकार, सो गिर रही थी सरकार।

इसी प्रकार एक अन्‍य व्‍यंग्‍य लेख सत्‍ता में आने दो में वे लिखते है -

बिना सत्‍ता में आये वे कुछ नहीं कर सकते है। सत्‍ता ही समाधान की सीढ़ी है। इस वाक्‍य में अनुप्रास अलंकार भी है। पाठक जी व आओ हड़ताल करे भी प्रभावशाली रचनाऐं है। आज के इस भौतिकवादी युग में समकालीन यथार्थ को, नंगेपन को पूरी ताकत के साथ पाठकों तक पहुँचाने में पूरन जी सफल है पूरन सरमा के व्‍यंग्‍य यह बताते है कि समाज, सरकार, सत्‍ता, में कहाँ क्‍या गलत है। कभी कभी वें समाधान का रास्‍ता भी सुझाते है।

कथ्‍य, शिल्‍प, कथानक के सहारे वे रचना का ताना बाना बुनते है और बुनते ही चले जाते है। पाठक रचना को आद्योपान्‍त पढ़ कर ही रुकता है। और यही पूरन जी की सफलता है। वे समाज में व्‍याप्‍त विसंगतियों , विद्रूपताओं, टुच्‍चेपन को पूरी शक्‍ति के साथ उजागर करते है।

इस पठनीय संकलन के प्रकाशन पर पूरन सरमा को बधाई। व्‍यंग्‍यकारों की इस भीड़ में पूरन सरमा एक ऐसा नाम है जिसकी अनदेखी संभव नहीं। पुस्‍तक का प्रोडक्‍शन -गेटअप सुन्‍दर है 000

पुस्‍तक का नाम - घर घर की राम लीला

लेखक- पूरन सरमा

प्रकाशक-पंचशील प्रकाशन,

जयपुर पप्‍ठ- 200

मूल्‍य- 400रु․

संस्‍करण- प्रथम

समीक्षक - यशवन्‍त कोठारी

86, लक्ष्‍मीनगर ब्रहमपुरी बाहर

जयपुर - 302002 मो․ 9414461207

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