रविवार, 1 सितंबर 2013

साताप्पा लहू चव्हाण का आलेख - भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी का योगदान

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी का योगदान

Ø डॉ. साताप्पा लहू चव्हाण
E-mail - drsatappachavan@gmailcom

image

मीडिया की विकास प्रक्रिया का अध्ययन करने से ज्ञात होता है कि मीडिया के विकास में ‘भाषा’ का स्थान महत्त्वपूर्ण है। भाषा विशेषज्ञों, तकनीशियों और वैज्ञानिकों के परिश्रम से ही मीडिया का विकास हुआ है। भारतीय मीडिया का विचार किया जाए तो ‘हिंदी भाषा’ के बल पर ही भारतीय मीडिया जनसामान्य तक जा पहुँचा है। विभिन्न भारतीय भाषाओं को साथ लेकर ‘हिंदी भाषा’ ने मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है, , इस बात को नकारा नहीं जा सकता। भारतीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी भाषा ‘विश्वकल्याण’की भूमिका निभा रही है। भारतीय मीडिया और हिंदी भाषा वर्तमान में एक−दूसरे की विकास प्रक्रिया से जुड़कर समाज सुधार में सक्रिय है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अध्ययन से स्पष्ट हो जाता है कि मीडिया और हिंदी भाषा दोनों निःसंदेह सामाजिक विकास की प्रक्रिया से जुडे है। ‘हिंदी भाषा’ को माध्यम के रूप में स्वीकार कर प्रस्तुति देकर भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने अपना विकास किया है।

इंटरनेट, रेडियो, ‚टेलीविजन‚फिल्म‚फोटो‚ब्रेल‚, , केबल‚मल्टी−मीडिया‚कम्प्यूटर‚उपग्रह संचार की 3जी‚ 4जी प्रणाली भारत में विकसित करने में ‘हिंदी भाषा’ केंद्र में रही है। “विज्ञान और तकनीकी क्षेत्र में हिंदी का लगातार प्रयोग बढ़ रहा है। राजभाषा प्रयोग के संबंध में 1960 में ही भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन ही वैज्ञानिक और तकनीकी शब्दावली आयोग की 1961 में स्थापना की गयी थी। विज्ञान और तकनीकी अलग –अलग नहीं है। इस क्षेत्र में संस्कृत के साथ ही अंतर्राष्ट्रीय शब्दावली को भी हिंदी तकनीकी के क्षेत्र में प्रयोजनमूलक हिंदी का व्यापक प्रयोग किया जा रहा है। ” 1 भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में जनसंचार माध्यम भाषा के रूप में हिंदी भाषा केंद्रीय स्थान पा चुकी है। सृजनात्मक भाषा और संचार भाषा के रूप में हिंदी भाषा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सहयोग दे रही है। टेलीविजन न्यूज रूम से लेकर रेडियो और साइबर मीडिया तक का अध्ययन करने से पता चलता है की विभिन्न साक्षात्कर‚वृत्तचित्र‚धारावाहिक‚समाचार‚निवेदन‚ इलेक्ट्रॉनिक मीडिया का विज्ञापन लेखन‚ विभिन्न ब्लॉग आदि के निर्माण में हिंदी की भूमिका महत्त्वपूर्ण रही परिलक्षित होती है। हम यह कह सकते है कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हिंदी दोनों ने मिलकर भारतीय सभ्यता‚संस्कृति और वैज्ञानिक विकास की प्रक्रिया को गतिमान बनाया है। “मौजूदा हाइटेक युग में एक छोटी−सी चिप (माइक्रोचिप)ने साइबर मीडिया के परिप्रेक्ष्य में जनसंचार माध्यमों के स्वरूप को कहीं अधिक बदल कर रख दिया है। माइक्रोचिप ने बडे आकार के उपकरणों (टेलीविजन‚ कंप्यूटर‚ ट्रांजिस्टर‚ वीडियो‚ कैमरा आदि)को जेब में डाल दिया है। मोबाइल में टेलीविजन देखा जा रहा है, एफ.एम. सुना जा रहा है, मोबाइल में कंप्यूटर समा रहा है, कंप्यूटर नोटबुक ने तबदील हो रहा है, वाई फाई के जरिए नोटबुक पर कहीं भी इंटरनेट पर काम किया जा रहा है। ”2 भारतीय बहुभाषिकता का विचार किया जाय तो ‘हिंदी भाषा’के कारण ही भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया आम जनता तक पहुँच रहा है। बहुभाषाओंको साथ लेकर चलने की क्षमता हिंदी में होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी का विस्तार तेजी से हो रहा है।

भारतीय भाषाओं में ‘भाषा सौहर्द’स्थापित करने हेतु शुरू से हिंदी का योगदान रहा है। इस बात को भारतीय मीडिया विशेषज्ञों ने माना है। अतः भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विकास की प्रक्रिया में ‘हिंदी भाषा’ की उपयुक्तता को सर्वमान्यता प्राप्त हो चुकी है। हिंदी के कारण ही विभिन्न भाषा−भाषी लोक भारतीय विकास की प्रक्रिया से जुडे रहें है। “संपर्क−भाषा के रूप में राजभाषा हिंदी की प्रौढ़ता स्वयंसिद्ध है। सैकडों वर्षों से हिंदी देश की जनता के बीच बोल चाल की आम भाषा रही है। ”3 कहना आवश्यक नहीं कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विशेषज्ञों ने हिंदी का महत्त्व जानकर ही मीडिया विकास प्रक्रिया में हिंदी भाषा को केंद्र में रखा। वर्तमान में सर्वाधिक प्रगति जिन−जिन क्षेत्रों में हुई है उन्हीं में इलेक्ट्रॉनिक मीडिया अग्रणी है। मेहनती युवाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रोजगार का विकल्प बन रहा है। हिंदी भाषा का अध्ययन करनेवाले युवाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में कैरियर की संभावनाएँ बढ़ रहीं है। समाचार−विश्लेषण‚ समीक्षा, ‚ विज्ञापन से, जुडे प्रसारण कार्य हिंदी भाषा के माध्यम में सर्वाधिक होने के कारण इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी भाषा का ज्ञान सबसे बडा गुण माना जा रहा है। हिंदी भाषा में अब इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए नई हिंदी भाषा शैली और शब्दावली की जरूरत महसूस हो रही है। ज्ञानसंवर्धन की प्रक्रिया हिंदी भाषा के माध्यम से धड़ल्ले से हो रही है। अतः इलेक्ट्रॉनिक मीडिया हिंदी भाषा को गंभीर दृष्टि से देख रहा है। रेडियों, दूरदर्शन, मल्टीमीडिया, एनिमेशन आदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अंतर्गत हिंदी भाषा के माध्यम से अनेक कार्यक्रम दिए जा रहें है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने हिंदी भाषा को और हिंदी भाषा ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को नया जीवंत रूप देने का काम किया है, इसे नकारा नहीं जा सकता। हिंदी भाषा ने अपनी शब्दावली का विकास स्वयं किया है। व्यापक अनुसंधान के बल पर हिंदी भाषा दिन−ब−दिन भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रहीं है। “विश्वबाजार की भाषा अंग्रेजी में हजारों नए हिंदी शब्दों ने प्रवेश किया है, जिन्हें आँक्सफ़ोर्ड डिक्शनरी में स्थान मिल चुका है। इससे हिंदी के विश्वभाषा बनने के रास्ते में मदद ही मिलती है। भाषाओं का यह अन्तर्मिश्रण हमें बताता है कि हिंदी में भी शब्दों के प्रवेश को लेकर संशय और शुद्धता की रक्षणशील भावनाएँ बहुत उपादेय नहीं है। ”4 भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की भाषा विशुद्ध साहित्यिक भाषा नहीं है। फिर भी जनसाधारण के लिए सुबोध भाषा का नया रूप इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दृष्टिगोचर होता है।

मीडिया में दोषपूर्ण हिंदी भाषा के अनेक उदाहरण मिलने के बावजूद भी हिंदी का प्रयोग तेजी से हो रहा है। अतः मीडिया के लिए तकनीकी शब्दावली वर्तमान में आवश्यक बन रहीं है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास के साथ हिंदी का भी विकास हो रहा है। भाषा कंप्यूटरीकरण का विचार किया जाए तो वर्तमान में हिंदी का कंप्यूटरीकरण अन्य भारतीय भाषाओं की तुलना में अधिक तेजी से हो रहा है। अतः इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए आवश्यक हिंदी के साधन सहज उपलब्ध होने के कारण हिंदी का प्रयोग बढ़ रहा है। अनेक ऑनलाइन एवं ऑफलाइन साधन हिंदी में उपलब्ध है। जैसे−ई−महाशब्दकोश, शब्दमाल, लिप्यंतरण, डेटा कनवर्टर, विभिन्न फॉण्टस, लिपिक इन, अक्षर−ब्रिज, शब्द−ज्ञान, गोल्डेन−डिक्ट आदि। अतः इन साधनों का भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने प्रयोग कर आम जनता तक पहुँचने का सफल प्रयास किया हुआ दृष्टिगोचर होता है। हिंदी भाषा को केंद्र में रखकर मीडिया अपना विकास करने में सफल हुआ नजर आता है। “आज भारतीय भाषाओं में सर्वाधिक फिल्में बनती हैं। इनमें भी हिंदी में सबसे अधिक। देश−विदेश में इनकी लोकप्रियता है। नई−नई तकनीक अपनाकर इन्हें अंतर्राष्टीय स्तर का बनाया जा रहा है। कुल मिलाकर कहें कि भारतीय सिनेमा का एक लंबा और सुदृढ़ इतिहास है। आज फिल्म मूलतः मनोरंजन और अंशतः शिक्षा का अत्यंत लोकप्रिय

माध्यम है। नई प्रौद्योगिकी ने इस जन माध्यम में गुणात्मक परिवर्तन किए हैं। ”5 वर्तमान में हिंदी भाषा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में वैचारिक और बौद्धिक दृष्टि से सक्षम बनने की कोशिश कर रही है। अतः मीडिया के विकास में हिंदी भाषा में हिंदी भाषा की प्रमुख भूमिका को हम नकार नहीं सकते।

सरकारी, सार्वजनिक, व्यक्तिगत, स्कूलों, कालेजों आदि के कामकाज में हिंदी भाषा का कंप्यूटरी रूप व्यापकता से दृष्टिगोचर हो रहा है। भारतीय समाज हिंदी भाषा को चाहता है। इन सभी कारणों से हिंदी भाषा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास का आधार बन गई है। “बीसवीं सदी के अंतिम दौर में वायुमंडलीय संचार परिवर्तन विश्व परिदृश्य पर पूरी तरह हावी हो रहा है। डिजिटल प्रणाली और फाइबर ऑप्टिक्स अब विभिन्न तकनीकों और सेवाओं को संचार प्रणाली से जोड़कर उसे संगठित कर रही है। । । । सूचना क्रांति अभी बीच रास्ते में है और भारत इस मामले में पीछे नहीं है। वह सूचना समाज बनाने की और तेजी से कदम बढा रहा है, जिस में संचार एवं संचार तकनीकी एक प्रमुख शक्ति होगी। भारत का इलेक्ट्रॉनिक मीडिया नेटवर्क विश्व के सबसे बडे मीडिया नेटवर्कों में से एक है। संचार की इस परिदृश्य में भी भाषा की महत्त्वपूर्ण भूमिका है। ”6 कहना सही होगा कि भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दिन−ब−दिन भाषा खास कर हिंदी भाषा का महत्त्व बढ़ रहा है। हिंदी भाषा अब विकास संकल्पना का आधार बन रहीं है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी भाषाशिक्षण को स्वतंत्र कार्यक्रम के रूप में देखा जाना मीडियाकालीन हिंदी सामार्थ्यशील बनने का ही उदाहरण है। “ भारतीय भाषाएँ नई सहस्राब्दि में विदेशी भाषाओं के समानांतर उन्नति कर रही है। ” 7 हिंदी भाषा भी हमकालीन इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विश्व के साथ जुडकर विदेशी भाषाओं के साथ−साथ भारतीय मीडिया में अपनी प्रमुख भूमिका निभा रही है। मीडिया के क्षेत्र में हिंदी का योगदान अनेक कठिनाइयों के बावजूद भी जागरूक और अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में दृष्टिगोचर होता है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में शुरू से हिंदी भाषा के व्यावहारिक प्रयोग को जारी रखने का प्रयास हुआ है। इक्कीसवीं सदी में हिंदी भाषा को संपूर्ण भारतीय मीडिया में प्रतिष्ठा की भाषा मानी जाना मीडिया और हिंदी भाषा दोनों की दृष्टि से गौरव की बात है, इस में दो राय नहीं।

निष्कर्ष:–

भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी का शुरू से महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है। हिंदी भाषा विशेषज्ञों ने मान लिया है कि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के केंद्र में हिंदी भाषा ही रहीं है। विभिन्न भारतीय भाषाओं को साथ लेकर ‘हिंदी भाषा’ ने मीडिया के माध्यम से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया है, । जनसामन्य की भाषा हिंदी रही है। अतः भारतीय मीडिया के विकास में विशेषकर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी भाषा केंद्रीय भूमिका में रही है। भारतीय प्रिंट और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास में हिंदी भाषा ‘विश्वकल्याण’की भूमिका निभा रही है। इस बात को मानना होगा।

वर्तमान में भारतीय मीडिया और हिंदी भाषा एक –दूसरे की विकास प्रक्रिया से जुडकर समाज सुधार में सक्रिय है। साथ ही साथ सृजनात्मक भाषा और संचार भाषा के रूप में हिंदी भाषा भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को सहयोग दे रही है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया और हिंदी दोनों ने मिलकर सभ्यता‚संस्कृति और वैज्ञानिक विकास की प्रक्रिया को गतिमान बनाया है। भारतीय भाषाओं में ‘भाषा सौहर्द’स्थापित करने हेतु शुरू से हिंदी का योगदान रहा है। इस बात को भारतीय मीडिया विशेषज्ञों ने माना है। अतः भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया विकास की प्रक्रिया में ‘हिंदी भाषा’ की उपयुक्तता को सर्वमान्यता प्राप्त हो चुकी है। मेहनती युवाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रोजगार का विकल्प बन रहा है। हिंदी भाषा का अध्ययन करनेवाले युवाओं के लिए इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के क्षेत्र में कैरियर की संभावनाएँ बढ़ रहीं है। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी भाषा का ज्ञान सबसे बडा गुण माना जा रहा है। ज्ञानसंवर्धन की प्रक्रिया हिंदी भाषा के माध्यम से धडल्ले से हो रही है। रेडियों, दूरदर्शन, मल्टीमीडिया, एनिमेशन आदि इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अंतर्गत हिंदी भाषा के माध्यम से अनेक कार्यक्रम दिए जा रहें है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने हिंदी भाषा को और हिंदी भाषा ने भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया को नया जीवंत रूप देने का काम किया है।

व्यापक अनुसंधान और स्वयं की शब्दावली के कारण हिंदी भाषा मीडिया विकास प्रक्रिया में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। जनसाधारण के लिए सुबोध हिंदी भाषा का नया रूप इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में दृष्टिगोचर होता है। जो रूप मीडिया के विकास के लिए अत्यावश्यक माना जाना उचित होगा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के विकास के लिए भविष्य में तकनीकी शब्दावली का विस्तार होना अनिवार्य है। ऑनलाइन एवं ऑफलाइन साधन हिंदी में उपलब्ध होने के कारण भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी भाषा का प्रयोग दिन−ब –दिन बढ़ रहा है। अतः हिंदी मीडिया की विकास प्रक्रिया का विभिन्न अंग बनी है। इस बात से हमें सहमत होना होगा। इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में हिंदी भाषाशिक्षण को स्वतंत्र कार्यक्रम के रूप में देखा जाना मीडियाकालीन हिंदी सामर्थ्यशील बनने का ही उदाहरण है। मीडिया के क्षेत्र में हिंदी का योगदान अनेक कठिनाइयों के बावजूद भी जागरूक और अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में दृष्टिगोचर होता है। भारतीय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के हमकालीन परिदृश्य का अध्ययन करने से पता चलता है कि सबसे अधिक कार्यक्रम हिंदी भाषा के कारण ही सफल हो रहें है। अतः कहा जाना उचित होगा कि हिंदी भाषा ही भारतीय मीडिया का मुख्य आधार है।

संदर्भनिदेश $Á−

1। डॉ। राजेंद्र मिश्र –प्रयोजनमूलक हिंदी और जनसंचार, पृष्ठ −20

2। बलवीर कुंन्दरा− जनसंचार बदलते परिप्रेक्ष्य में, पृष्ठ −5

3। संपा। प्रणव कुमार वंद्योपाध्याय− भाषा, बहुभाषिता और हिंदी, पृष्ठ −145

4। सतीश शर्मा – संचार माध्यमों की भाषा और नई हिंदी, पृष्ठ −214

5। सुमित मोहन – मीडिया लेखन, पृष्ठ −73−74

6। www। pustak। org Dtd। 13। 6। 2013

7। संपादक डॉ। शशि भारद्वाज – भाषा (द्वैमासिक)मई−जून2002, पृष्ठ −5

------------------------------------------------------------------------------------------------

Ø डॉ। साताप्पा लहू चव्हाण
सहायक प्राध्यापक
स्नातकोत्तर हिंदी विभाग,
अहमदनगर महाविद्यालय,
अहमदनगर 414001(महाराष्ट्र)
दूरभाष - 09850619074
E-mail -
drsatappachavan@gmailcom

निवास : 6/180, ´पितृ छाया ´ पंपिंग स्टेशन रोड, ताठे मला,

भुतकरवाडी, सावेडी, अहमदनगर।

2 blogger-facebook:

  1. अच्‍छा है, तकनीकि‍ वि‍षयों में अंग्रेज़ी पर नि‍र्भरता समाप्‍त होनी ही चाहि‍ए

    उत्तर देंहटाएं
  2. अच्‍छा है, तकनीकि‍ वि‍षयों में अंग्रेज़ी पर नि‍र्भरता समाप्‍त होनी ही चाहि‍ए

    उत्तर देंहटाएं

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

------------------------------------------------------------

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------