गुरुवार, 6 फ़रवरी 2014

बच्चों का कोना - भारतीय रेल्वे संबंधी महत्वपूर्ण जानकारियाँ

संकलन - गोवर्धन यादव

1/- भारत में प्रथम रेल 16 अप्रैल 1853 को मुंबई एवं थाणे के मध्य चलाई गई,जिसने करीब 34 किली की दूरी तय की थी.

2/- भारत में द्वितीय रेल 1854 में हावडा से हुगली के मध्य चलाई गई

3/- भारतीय रेल का एशिया में प्रथम एवं विश्व में दूसरा स्थान है.

4/- भारतीय रेल का राष्ट्रीयकरण 1950 में हुआ .

5/- भारतीय रेल्वे बोर्ड की स्थापना मार्च 1905 में की गई थी.

6/- 1 नवम्बर 1950 को चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स का चितरंजन में डा..राजेन्द्रप्रसाद द्वारा विधिवत उद्घाटन किया गया. (ii) डीजल लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी में बनाए जाते हैं. चितरंजन लोकोमोटिव वर्क्स ने सबसे पहला रेल इंजन 1950-57 में बनाया. इस कारखाने में 1971 में आखिरी भाप से चलने वाला इंजन बनाया. इसी कारखाने ने 1961-62 में अपना पहला डी.सी.विद्युत चालित रेल इंजन बनाया.

7/- 14 अगस्त, 1956 को पेराम्बूर में इन्टीग्रल कोच फ़ैक्टरी की स्थापना की गई

8/- 2 अक्टूबर 1953 को रेल्वे की शताब्दी प्रदर्शनी का उद्घाटन नई दिल्ली और कलकत्ता में हुआ

9/- इस संस्थान के अंतर्गत लगभग 58 भाप इंजिन, 4.596 डीजल इंजिन, 2785 विद्युत इंजिन, 35,650 यात्री डिब्बे, तथा 253,186 माल वैगन कार्य में लगे हुए थे.

10/- प्रथम भूमिगत रेल मेट्रो 24 अक्टूबर 1984 को कलकता से एस्प्लेनेड से टॊलीगंज 8.किमी और दमदम से 2 किलो बेलगाचिवा स्टेशन के मध्य चलाई जाती है

11/- 1925 को प्रथम बिजली से चलने वाली गाडी “डेकन क्वीन” थी, जो मुम्बई एवं पुणॆ के मध्य चली.

12/-. प्रथम कम्प्युटर रिजर्वेशन पद्धति नई दिल्ली में लागू की गई.

13/- भारत की सबसे तेज चलने वाली गाडी “शताब्दी एक्सप्रेस” है, जो नई दिल्ली से भोपाल के मध्य चलती है,जिसकी अधिकतम गति 140 किमी/घण्टा है. इसके अतिरिक्त 12 अन्य शताब्दी एक्सप्रेस गाडियां भी चल रही हैं.

14/- मीटर गेज पर चलने वाली भारत की प्रथम सुपर गाडी पिंक सिटी एक्सप्रेस है, जो दिल्ली तथा जयपुर के बीच चलती है.

15/- भारत के यात्री डिब्बे तथा मालवाहक डिब्बों का निर्माण इन्टीग्रल कोच फ़ैक्टरी, पेराम्बूर(मद्रास) एवं रेल कोच फ़ैक्टरी, कपूरथला में होता है.

16/- इन्टीग्रल कोच फ़ैक्टरी स्विट्जरलैण्ड के माडल पर आधारित है.

17/- भारत में विद्युत इंजन का निर्माण चित्तरंजन लोकोमोटिव वर्क्स वाराणसी में होता है.

18/- भाप के इंजिन का निर्माण चितरंजन में होता था. 1971 में भाप इंजिन का निर्माण बन्द कर दिया गया.

19/- भारतीय रेल्वे का व्हील और एक्सल बनाने का कारखाना बंगलौर में है.

20/- सबसे लम्बी सुरंग मध्य रेल के अन्तर्गत “मंकीहिल” व “खण्डाला” के मध्य है, यह सुरंग करीब 2100 मीटर लम्बी है.(२) बनिहाल और काजीगुंड के बीच रेल सुरंग 11 किमी लंबी है तथा रेल्वे ट्रेक के समकक्ष छः मीटर चौडी सडक बनाई गई है ताकि किसी आपात स्थिति में बचाव दल वहां पहुंच सके.

21/- भारत का सबसे लम्बा प्लेटफ़ार्म खडगपुर (प.बंगाल) में है, यह लगभग 2733 फ़ुट लम्बा है.

22/- सबसे बडा यार्ड मुगलसराय (उ.प्र.) में है.

23/- भारतीय रेल्वे के तीन गेज हैं (अ) बडी लाइन=1.675 मीट ( ब) मीटर गेज(1 मीटर) (स) छॊटी लाइन (0.762 मीटर)

24/- आज भारतीय रेल का नेटवर्क 55 हजार किमी. से अधिक है.

25/- देश में प्रतिदिन 10 हजार से अधिक रेलगाडियां चलती हैं. तथा 24 मिलियन यात्री प्रतिदिन सफ़र करते हैं.

26/- देश में लगभग 7500 रेल्वे स्टेशन हैं.

27/- भारतीय रेल में लगभग 60 हजार पैसेंजर कोच हैं., 10 हजार रेल के इंजिन हैं,जिनमें 4200 बिजली इंजिन, 5200 डीजल इंजिन तथा 50 स्टीम इंजिन हैं.

28/- भारत में लगभग 24 हजार किमी रेलमार्ग का विद्युतीकरण किया जा चुका है.

29/- 1867 में देश की पहली उपनगरीय रेल सेवा मुंबई में शुरु हुई थी.

30/- देश में पहली ब्राडगेज लाइन 1885 में बिछाई गई.

31/- दुनिया में पहली बार महिलाओं के लिए विशेष गाडी पश्चिम रेल्वे ने मुंबई में शुरु की.

32/- 1982 में दमदम से टालीगंज के बीच देश की पहली मेट्रो या भूमिगत रेलसेवा की आधारशिला रखी गई

33/- देश का पहला रेल पुल गोदावरी रेलब्रिज 1897 में बना, यह तीन किमी लंबा मद्रास-हावडा रेलमर्ग पर बनाया गया था.

34/- अधिकतर सवारी गाडियों के डिब्बे इन्टेग्रल कोच फ़ैक्ट्री पैराम्बूर में बनाए जाते हैं. इसने सवारी डिब्बे बनाने का काम 1955-56 में प्रारंभ किया

35/- रेल विभाग को जितने माल डिब्बों की आवश्यकता होती है, उसे सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के कारखाने पूरा करते हैं.

36/- वर्तमान में भारतीय रेल्वे के 17 जोन तथा 68 मंडल हैं.

37/- रेल प्रशासन और प्रबंधन का जिम्मा रेल्वे बोर्ड पर है. यह रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है.

38/-भारतीय रेल्वे में लगभग 14 लाख कर्मचारी काम करते हैं. इसमें रोजगार के काफ़ी अवसर हैं.

39/- दिल्ली में अपनी तरह का रेल संग्रहालय है जहां रेल्वे के बढ़ते कदमों को नौ दीर्घाओं के जरिए दिखाया गया है.

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