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यशवन्त कोठारी का यात्रा संस्मरण - रंग पर्व होली पर लासवेगास के रंगीन जुआघरों की सैर

होली पर जुआघरों की सैर

यशवन्‍त कोठारी

जुआ बड़ा रोजगार जो हार नहीं होती। सच में जुए से बड़ा रोजगार क्‍या हो सकता है। लेकिन जुआघरों से मैंने किसी को भी जीत कर जाते हुए नहीं देखा। इधर अमेरिका के जुआघरों के लिए प्रसिद्ध शहर लासवेगास जाने का अवसर मिला। होली पर लोसवेगास की याद आना स्‍वाभाविक है। हालांकि जिन्‍दगी में जुआ नहीं खेला। मगर लासवेगास के जुआघरों को देख कर आंखें चौधियां गई। हिन्‍दी फिल्‍मों की याद ताजा हो गई। होली पर एक रंग यह भी।

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हमें वैगस जाने की तमन्‍ना नहीं थी, मगर अमेरिका के प्रसिद्ध मनोरंजन स्‍थल को देखना भी जरुरी था क्‍योंकि यह विश्‍व के सबसे बड़े मनोरंजन स्‍थलों में से है या यो कहिये कि मनोरंजन की वैश्‍विक राजधानी है। कभी रेगिस्‍तान रहे नेवाडा राज्‍य के बीच में स्‍थित है लोसवेगास शहर। सच में रेगिस्‍तान में नखलिस्‍तान की तरह है लासवेगास। अमेरिका में अन्‍यन्‍त्र जो कार्य अवैधानिक हैं वे सभी काम यहां पर खुले आम और वैधानिक तरीके से किये जाते हैं।

डेनवर से वेगस जाने के लिए हम ने सड़क मार्ग चुना डेनवर से वैगस लगभग सात सौ माइल से ज्‍यादा दूर है। रास्‍ते में विश्रामकुटीरों में विश्राम करने की सुविधा है। हाइवे पर चलते हुए उटा पहुँचे। यहां के राष्‍ट्रीय आर्क म्‍यूजियम को देखने का भी आनन्‍द लिया। ऐसे प्राकृतिक आर्क विश्‍व में अन्‍यत्र कहीं नहीं है। ठोरो पहाड़, पहाड़ों पर गोल-गोल हुए आर्क, बर्फ और पहाड़ों पर पत्‍थरों से बनी अलग -अलग आकृतियां। नयनाभिराम। अत्‍यन्‍त सुन्‍दर।

शाम हो चुकी थी। हम लोसवैगास शहर में प्रवेश कर रहे थे। ऐसा आलीशान, मनोरंजक, आनन्‍द दायक नजारा कि देख देख कर प्रसन्‍न होते रहे। प्रति वर्ष पांच करोड़ लोग अपनी किस्‍मत अजमाने यहां आते हैं। लास वेगस शहर की सबसे उंची टावर वाले होटल की पन्‍द्रहवीं मंजिल पर हमने डेरा डाला। रात्रि में इस होटल की छत से शहर का नजारा देखना बहुत अच्‍छा लगता है। सभी धर्म, जातियों के नवविवाहित दम्‍पत्‍ति, मित्र इस शहर को रात की बाहों में देखकर प्रसन्‍न हो रहे थे। यहीं पर है एक उंची राईड जहाँ से व्‍यक्‍ति को पूरी सुरक्षा के साथ बांध कर नीचे की ओर मशीन से तेजी से गिराया जाता है। कलेजा मुंह को आ जाता है, मगर सब कुछ सुरक्षित। सुरक्षा के साधनों के कारण मानव-जीवन का मूल्‍य बना रहता है।

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रात्रि-विश्राम के बाद सुबह तरोताजा होकर हम लोग-दामाद नवनीत जी, पुत्री दीपाली, नाती हर्षुल, तथा श्रीमतीजी के साथ शहर की ओर चल पड़े। लेकिन जरा ठहरिये - हमारे होटल के बिलकुल नीचे के हॉल से ही शुरु करते हैं। सुबह से ही तैयार होकर लोग-बाग जुआ खेलने आ जाते हैं। बड़ी-बड़ी मशीनें, एक सेंट से शुरु होकर जुए की बाजी सौ- दौ सौ डालरों तक आसानी से चली जाती है। ताश, मशीनें, ब्रिज, गेम्‍स, और हजारों तरह की जुआंए-बस खेलते जाइये। लेकिन सुरक्षा व्‍यवस्‍था ऐसी ही की अठारह वर्ष से कम के बच्‍चे मशीनों के आस-पास खडे़ भी नहीं हो सकते। और कोई न कोई सुरक्षाकर्मी आकर टोक ही देता। जीतने पर तुरन्‍त नकद भुगतान। आईये अपने होटल के बाहर चलते हैं। ये है लासवैगास की सबसे प्रसिद्ध गली स्‍टिप, स्‍टीट। इस गली के दोनों तरफ बसे है विश्‍व के प्रसिद्ध होटल और इन होटलों के अन्‍दर विश्‍व के प्रसिद्ध जुआघर। हर होटल की अपनी विशेषता है और अपने विशेष प्रकार के जुआ।

ज्‍यादातर होटल किसी विशेष थीम के आधार पर बनाये गये हैं और अन्‍दर उस थीम को साकार करते जुआ घर, बाजार, रेस्‍त्रां, कमरे, बैयरे, खाना-पीना, और यहां तक भाषा-वेश-भूषा भी। कुल 36 बड़े होटल है। जिसमें न्‍यूयार्क-न्‍यूयार्क होटल, पेरिस होटल, डिजनी होटल, पिरामिड का मिश्र होटल, सर्कस-सर्कस होटल वेनिस होटल, हालीवुड होटल, बेलिजियो होटल आदि हैं। पूरे विश्‍व की झलकी यहां के होटलों में हैं। सर्कस-सर्कस होटल के अन्‍दर बच्‍चों के खेलने के लिए सबसे ज्‍यादा खेल हैं और हर खेल में जीतने पर इनाम। हर्षुल ने यहां से एक गिटार जीता। जो वो पूरी यात्रा में बजाता रहा।

न्‍यूयार्क-होटल में पूरा ताम झाम न्‍यूयार्क शहर का है। वेनिस होटल में वेनिस शहर को उतारा गया है। एक होटल में पूरी छत कृत्रिम है, मगर आनन्‍द दायक है।

जुआघरों में सुबह से रात तक रौनक रहती है। पुरुष ही नहीं महिलाएं भी जी भर के दांव लगाती हैं। शुरु में एक-दो बार आप जीत सकते हैं, मगर अन्‍त में हार निश्‍चित है। मुफ्‌त पेय, ड्रिंक और कम्‍प्‍यूटरों से जुआ खिलाती महिलाएं। कुछ मशीनों पर ही एकर जुआ खिलाती है। और इतना व्‍यवस्‍थित सोफ्‌टवेयर कि आश्‍चर्य होता हैं। सब कुछ शालीन मर्यादा में। लेकिन जुएं में हार तय होती है, मैंने प्रवास में किसी भी व्‍यक्‍ति को जीत कर जाते नहीं देखा। लगभग हर होटल के बाहर शाम को निशुल्‍क शो होते हैं।

हमने ज्‍वाला मुखी के शो देखे संगीत मय फव्‍वारे के शो देखे। फे्रमोन्‍टस्‍टीट के ध्‍वनि-रोशनी के शो देखे। लोसवेगस व्‍यक्‍ति मनोरंजन, पर्यटन, जुओं के लिए ही आता है। तन थक जाता है मगर मन नहीं भरता।

धन भी साथ छोड़ देता है। एक महिला यात्री ने बताया कि वे एक माह से यहीं पर है या तो करोड़पति हो जायेगें या फिर दीवालिया।

फुटपाथों पर भी छोटे-छोटे कलाकार अपनी कला का प्रदर्शन करते रहते हैं। पूरी दुनिया में लोग छुटि्‌टयां मनाने वेगस आते हैं। फिर भी यहां भी चौराहों पर भीख मांगते लोग देखे जा सकते हैं। हो सकता है आज भीख मांगने वाला व्‍यक्‍ति कभी यहां के केसीनो में दाव लगा कर भिखारी बना है। केसिनो के आकर्षण से बचना मुश्‍किल है। केसिनो का जो चित्रण हिन्‍दी फिल्‍मों में है उससे ज्‍यादा और बेहतर है-केसिनो।

वेगस में बदनाम गलियां भी है और सरे आम उनकी उपस्‍थिति भी है। दलाल सरे आम आपको आकर्षित करने के प्रयास भी करते हैं। होली पर लोसवेगास के केसिनो, मनोरंजन, जुआ, ताश, आदि की याद आना स्‍वाभाविक है। भारतीय भोजन मिल जाता है। जुआ बड़ा रोजगार मगर हार के कारण बचे। वैसे जिन्‍दगी एक जुआ ही है। क्‍या ख्‍याल है आपका।

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यशवन्‍त कोठारी

86,लक्ष्‍मीनगर ब्रहमपुरी बाहर जयपुर-2

 

चित्र- दिपाली जैन

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यात्रा संस्करण काफी रोचक है जैसे हम स्वयं ही सबअपनी आखों से देख रहे हों। वैसे कोठरी साहब मैं समझता हूँ कि जुआ खेलने का रिवाज होली मे नहीं वरन् दीवाली में है।

akhilesh chandra srivastava

juvan khelne ke liye bas junvari man hi chahiye awsar koi bhi chalta hai aur juvan
khelne casino jana bhi jaroori nahin. Yashvant ji ne apni yatra ka bahut sajeev varnan kya hai jaise ham swayam sab kuch dekh aur sun rahe hon. Los Vegas
ghumane ke liye badhai aur dhanyvad

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