शनिवार, 5 अप्रैल 2014

यशवन्त कोठारी का आलेख - अमेरिका में गरीब और गरीबी

अमेरिका में गरीब और गरीबी

यशवन्‍त कोठारी

हर पांच अमेरिकी बच्‍चों में से एक गरीब है और अमेरिका में एक करोड़ साठ लाख बच्‍चे रोज भूखे सो जाते है। बी․बी․सी․ हिन्‍दी के अनुसार इन भूखे बच्‍चों पर एक फिल्‍म भी बनाई गई है। गरीबी और गरीबी रेखा पर अमेरिका में भी भारत की ही तरह रोज बहस होती रहती है। न्‍यूयार्क टाइम्‍स ने जनवरी में अमेरिका की गरीबी पर एक विस्‍तृत जानकारी पूर्ण लेख प्रकाशित किया था। वाशिंगटन पोस्‍ट में भी अमेरिका की गरीबी पर समाचार आये है। वास्‍तव में 46 मिलियन लोग अमेरिका में गरीब है और गरीबी में जीवन यापन कर रहे है। गरीबी के विरुद्ध लड़ाई को अमेरिका में पचास वर्प पूरे हो गये है, मगर न गरीब मिटा और न ही गरीबी मिटी है।

8 जनवरी 1964 को अमेरिकी राष्ट्रपति लिण्‍डन जोनसन ने गरीबी के विरुद्ध युद्ध छेड़ने की घोषणा की थी। तब से अमेरिकी प्रशासन गरीबी के विरुद्ध जंग लड़ रहा है। पचास वर्ष पूर्व जब गरीबी के खिलाफ कार्यक्रम बनाये जा रहे थे तब प्रशासन, स्‍वयं सेवी संस्‍थाएं और कार्यक्रम थे, मगर धीरे धीरे गरीबी की रेखा पर बहस होती रही और गरीब बढ़ते रहे। ओबामा प्रशासन भी लगातार गरीबी को खतम करने पर काम कर रहा है मगर सफलता अभी भी अनिश्‍चित है। हर छः अमेरिकी लोगों में से एक गरीबी में जीवन यापन कर रहा है। गरीबी के मुख्‍य कारण सर्वत्र एक जैसे है - बेरोजगारी, बीमारी, कम भुगतान आदि। गरीबी रेखा पर बहस अमेरिका में भी जारी है और भारत में भी जारी है। नतीजे कहीं भी नहीं आये है।

वालमार्ट, पिज्‍जाहट जैसी कम्‍पनियां न्‍यूनतम मजदूरी 7 से 8 डालर प्रति घंटा पर कामगार रखती है जो यहां के जीवन स्‍तर को कायम रखने में कम है भारत में भी न्‍यूनतम मजदूरी बढाये जाने पर बहस चल रही है और यहां भी न्‍यूनतम मजदूरी दस डालर करने पर विचार हो रहा है मगर यह राशि भी गरीबी को कम करने में समर्थ प्रतीत नहीं होती है। मजदूरी बढ़ने पर काम कम हो जाने का खतरा है। 2009 से 2011 के बीच में 31․6 प्रतिशत अमेरिकी गरीबी के साये में समय गुजार रहे थे। अमेरिकी गरीबी भारतीय परिस्‍थितियों से अलग है। मगर यहाँ भी चौराहों पर तख्‍ती लगाकर भीख मांगते लोग हैं। होम-लेस-पुअर-हेल्‍प के बोर्ड दिख ही जाते हैं। अमेरिका में गरीबी रेखा 2012 में 23,050 डालर प्रति वर्ष प्रति चार व्‍यक्‍तियों के परिवार के लिए तय की गईथी। 25 वर्ष से 40 वर्ष के बीच अमेरिकी व्‍यक्‍ति को कम से कम एक वर्ष गरीबी में जीवन यापन करना पडा़ था। अमेरिकी सेंसस ब्‍यूरो के अनुसार 16 प्रतिशत अमेरिकी गरीबी में रह रहे है। करीब 20 प्रतिशत बच्‍चे भी गरीबी में जी रहे है।

गरीबी के कारण अमेरिका में चिकित्‍सा सुविधाएं भी प्रभावित हो रही है। चिकित्‍सा अत्‍यन्‍त मंहगी है और ज्‍यादातर गरीब अमेरिकी चिकित्‍सा हैतु चिकित्‍सा बीमा करा पाने की स्‍थिति में भी नहीं है। इसी प्रकार बेरोजगारी या कम आयवाली नौकरी के कारण भी गरीबी बढ़ रही है। आम अमेरिकी व्‍यक्‍ति को बीमा, शिक्षा, घर, बिजली, बच्‍चों, कार, गैस, कपड़ों आदि पर काफी खर्च करना पड़ता है और बेरोजगारी या कम आय के कारण गरीब अमेरिकी पर कर्ज का बजन बढ़ जाता है। गरीबों में बीमार, असहाय, वृद्ध, विकलांग, बेरोजगार आते है। अमेरिका के केलिफोंर्नियां में पानी का संकट है, कोलोरोडो नदी से पानी केलिफोर्निया में घास की खेती के लिए भेजा जा रहा है और यह घास चीन को निर्यात की जा रही है। जल संकट, तेज ठण्‍ड, बर्फ, अकाल व विशाल रेगिस्‍तानी भू भाग के कारण अमेरिकी गरीब गरीबी रेखा से ऊपर आने में असमर्थ है।

दूसरी और हर 4 अमेरिकी बच्‍चों में से 2 बच्‍चे मोटापा के शिकार हो रहे है और मोटापा के कारण नित नई बीमारियां पैदा हो रही है। उच्‍चशिक्षा आम अमेरिकी के लिए बिनाऋण के संभव नहीं है। चिकित्‍साबीमा एक भारी खर्च के रुप में अमेरिकी नागरिक को परेशान करता है। गरीब और गरीबी की यह बहस पूरी दुनियां में अनवरत जारी है। न गरीब मिटता है और न गरीबी मिटती है। गरीबी के कारण लोगों में तनाव, अनिद्रा, असुरक्षा, कम आई․क्‍यू․ मानसिक शारीरिक बीमारियां भी पैदा हो जाती है और यह सर्वत्र है। अमेरिकी राष्ट्रपति रोनाल्‍ड रीगन ने 1988 में ठीक ही कहा था हमने गरीबी के विरुद्ध युद्ध छेड़ा था और गरीबी ही जीत गई। पूरी दुनिया में गरीबी ही जीत रही है। गरीबी की यह जीत हर किसी के दिल में एक टीस पैदा करती है गरीबी कम करने के लिए न्‍यूनतम मजदूरी बढाई जाने की बहस भी जारी है। लेकिन इस दुनिया में गरीब और गरीबी है, थे और रहेंगे।

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यश्‍पवन्‍त कोठारी 86, लक्ष्‍मीनगर, ब्रहमपुरी बाहर , जयपुर- 302002

केम्‍प-डेनवर-यू․एस․

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