शुक्रवार, 20 जून 2014

सावित्री काला की कहानी-- कल

नई रचना प्रकाशित होने पर एक पाठक का फोन आया |बोले मैडम हमें तो आपसे  इश्क हो गया है |
हमने कहा इस बुढ़ापे में |
अब हो ही गया है तो हम क्या करे |

रतिका बोली ,अपना इश्क -विश्क अपने पास ही रखिये ,दोस्ती से आगे बढ़ने की हमारी न तो उम्र है न इच्छा |
वे बोले ,इतना अच्छा लिखती हो कहाँ से इतने भावात्मक भाव  बटोरती हो |
रतिका ने उत्तर दिया ,आप जैसे ,इश्क बाज पाठको के भावो को कल्पनाओ के रस में उड़ेल कर उसकी चाशनी बना कर संशोधित रूप में आप जैसे पाठको को परोसती हूँ |

वे बोले, आपकी रसोई में तो बहुत वैरा दिलफेंक यटी है लिखते तो हम भी है लेकिन नीरस विषयो पर जिनके बहुत कम पाठक होते है| हमने तो भई विज्ञानं विषय में डाक्टरेट की है ,बस विषयो से संबधित पाठक ही हमारे लेख पढ़ते है| बस उसमे से " सार सार गहि रहियो थोथा देय उड़ाय “ की कहावत को चरितार्थ करते हुए हमारे लेखो का अवलोकन ही करते है |आस्वादन या रसास्वादन नहीं करते |

यही उचित भी है अगर सभी पाठक आपकी तरह कवि या रचनाकार की रचनाओं को आत्मसात कर इश्क
फरमाने लगे तो बेचारा लेखक कँहा तक झेल पायेगा |

हम तो डूब चुके है आपके अशआरों में |
यही तो आशिक की पहिचान है ,इसमें डूब कर ही आनंद आता है ,जो किनारे बैठे रहते है ,डूब जाने से डरते है ,
वे क्या खाख इश्क फरमाएंगे या इश्क को समझ पाएंगे |
आप से बातें करके दिल खुश हो जाता है |
बुद्धि जीवियों की यही पहिचान है |अपनी मानसिक तृप्ति का सर्वोत्तम साधन भी यही है |

अरे आपने तो हमारे मन की बात कह दी ,हम आपकी पुस्तक जब भी पढ़ते है बड़ा आनंद आता है |
आपने अपनी रचनाओ में जीवन की सच्चाई उड़ेल कर रख दी है |सच कहते हैं बड़ा अच्छा लिखती हैं आप |
तभी तो आप हमारे दिल के इतने करीब आ सके हैं|बस इश्क की बात हमसे मत करिये |
इश्क के नाम पर हमने बड़ा धोका खाया हैं ,रतिका ने पाठक रूपी आशिक से आपने दिल की बात कही |
तभी आप इश्क के नाम से चोंक गई थी |

अरे नहीं इश्क के दरिया में डूब कर ही हमें अनुभूति हुई तभी तो हम  शायरी की दुनिया में कदम रख पाये|
नदी से दरिया तक तो आप पहुंच चुकी हैं अब आगे क्या इरादा हैं |

अब थोड़ा प्रकृति का आनंद लेंगे कुछ ऊपर की ओर बढ़ेंगे ,सूफी बन कर आकाश चाँद सितारे बादल पर्वत आदि  की बात करेंगे ,आपने पाठकों को अध्यात्म की सैर कराएँगे |

बड़ा नेक इरादा हैं ,डाक्टर साहब बोले ,कुछ हमें भी राह दिखाइए |
आप तो बस हमारी रचनाये पढ़िए और हमारे साथ साथ चलिए |
चलो देर से ही सही आप हमें मिली तो ,डाक्टर साहब दिल से बोले |
रतिका बोली, जीवन का अब तो अंतिम पड़ाव हैं ,देखते हैं कब तक चल पाते हैं |
|
डॉक्टर  साहब बोले ,'मैडम अपने तो इति मै ही अति  कर दी हमें अवस्था का भान  करा कर अंतिम पड़ाव तक पहुंचा  दिया  अभी तो हमारी दृस्टि मै जीवन शुरू हुआ है
;चलो ठीक है आपकी बात मान लेते है आइये हम अपनी दोस्ती का पहला कदम बढ़ाये
रुकिए हम भी आते है डॉक्टर साहब बोले |

अरे दौड़ कर मत आना गिर जाओगे  धीरे धीरे अवस्था का भान करके चले  आना
आप बार बार अवस्था का भान क्यों कराती है माशाअल्लाह  अभी तो हम जवान है
केवल दिल से रतिका  ने चुटकी ली धीरे धीरे चल कर ही  पहुंच सकते हो दौड़ कर नहीं पाओगे जमने के साथ
आपकी आज्ञा शिरोधार्य ,डाक्टर साहब उसी अंदाज में बोले |
इश्क की गलियो को पर करके आधात्यम के दीवाने बन कर के हीआप हमारे साथ साथ चल सकते है ,
बोली है मंजूर ,रतिका ने पूछा |

जी  हूजूूर,डाक्टर साहब बड़ी रसिकता से बोले
तो आइए मिल कर इस भावात्मक दरिया को पार करते है |
अभी आता हुँ ,डाक्टर साहब ने कहा|
आपका साथ रहा तो दरिया ही नहीं ,आगे बढ़ कर हम प्रकृति के उपहारों को शिरोधार्य करके आगे ही आगे
बढ़ सकते है |
बड़ा नेक इरादा है देखे इसमें हम आपकी कितनी मदद कर सकते है |

मदद नहीं बस आप दिल दिमाग से हमारे साथ बने रहिये ,रतिका ने डाक्टर साहब को सलाह दी |
आपका किन शब्दो में धन्यवाद करुँ ,आपने हमें इस काबिल तो समझा |
कहिये कब आ रहे हो ?|
आज अभी डाक्टर साहब उत्सुकता से बोले |

नहीं आज नहीं कल ,रतिका ने धीरे से कहा |

नदी दरिया तक तो पहंची ,पर साहिल का कल कभी नहीं आया | जीवन में कभी भी कल नहीं आता ,सबको
वर्तमान में ही जीना पड़ता है | रतिका और डाक्टर साहब भी आध्यात्मिक सागर में गोते खाते रहे , उनके जीवन में भी कल नहीं आया ,आ ही नहीं सकता था |
                                                                                                                                           

6 blogger-facebook:

  1. बड़ी ही अच्छी कहानी....प्रमोद यादव

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    उत्तर
    1. धन्यवाद आपने पढ़ने के लिए समय निकाला |

      हटाएं
    2. धन्यवाद आपने पढ़ने के लिए समय निकाला |

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    3. धन्यवाद आपने पढ़ने के लिए समय निकाला |

      हटाएं
  2. अखिलेश चन्द्र श्रीवास्तव1:02 pm

    दिलचस्प रचना है अक्सर ऐसे दिलफेंक पाठक
    पीछे ही पड़ जाते है लेखिका जी ने सलीके से
    सुलटाया उन्हें बधाई

    उत्तर देंहटाएं

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