रविवार, 8 जून 2014

राजीव आनंद का आलेख : स्मृति शेष - एफारथायड की मुखर विरोधी माया एंजेलो का जाना

    मारग्रेट एनी जॉनसन जिसे माया एंजेलो के नाम से पश्चिमी साहित्यिक दुनिया जानती है का 28 मई को 86 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. अपनी आत्मकथा 'आई नो वाइ द केजड बर्ड सिंगस' में माया एंजेलो ने अपने शुरूआती सत्रह साल का बड़ा ही मार्मिक वर्णन किया है. अपनी जिंदगी के उबड़-खाबड़ राहों को शब्दों में इस कदर पिरोया कि पश्चिमी साहित्यिक फलक में तारे की तरह चमकने लगी. 1969 में 'आई नो वाइ द केजड बर्ड सिंगस' के प्रकाशित होने के बाद माया एंजेलो सार्वजनिक तौर पर अपने जीवन के विभिन्न आयामों की व्याख्या किया तथा उन्हें अश्वेत लोगों के मुखर वक्ता के रूप में जाना-पहचाना जाने लगा. एफारथायड यानी रंगभेद की मुखर विरोधी के रूप में माया एंजोलो तब सामने आयी जब उन्हें मार्टिन लूथर जूनियर का साथ मिला. माया एंजेलों की रचनाओं को अश्वेत संस्कृति के पक्ष में पहचान मिली. यद्यपि उनकी रचनाओं को अमेरिका में प्रतिबंधित करने का भी प्रयास किया गया था परंतु विश्वव्यापी सफलता एवं प्रचार-प्रसार के कारण ऐसा संभव नहीं हो सका.


    सुप्रसिद्ध कवि राबर्ट फ्रास्ट के बाद माया एंजेलो पहली ऐसी कवयित्री हुई जिन्हें 1993 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन के उद्घाटन भाषण में अपनी कविता 'ऑन द पल्स ऑफ मार्निंग' का भावपूर्ण पाठ का मौका मिला था. इसके पूर्व सिर्फ राबर्ट फ्रास्ट ही एकमात्र ऐसे कवि हुए जिन्होंने 1961 में राष्ट्रपति जॉन एफ कैनेडी के उद्घाटन भाषण में अपनी कविता का पाठ किया था.


    माया एंजेलो का बचपन पथरीली राहों से भरा था. माया जब आठ वर्ष की थी तभी उनकी माँ के दोस्त फ्रीमैन ने माया का यौन उत्पीड़न और बलात्कार किया था. बाद के दिनों में फ्रीमैन की हत्या हो गयी थी जिसका बहुत गहरा प्रभाव माया पर पड़ा था. उसके बाद लगभग पांच वर्षों तक माया ने गूंगी की तरह एक खामोश जीवन व्यतित किया था. यह वही खामोश वक्त था जब माया ने खुद को समेट कर अपने भीतर साहित्य अनुराग को विकसित किया जिसमें उनके पारिवारिक दोस्त व शिक्षिका बर्था फ्लावर ने काफी मदद किया. यह बर्था फ्लावर ही थीं जिन्होंने माया को फिर से बोलती दुनिया से और प्रसिद्ध साहित्यकारों यथा चार्ल्स डिकेंस, विलियम शेक्सपियर, एडगर ऐलन पो, डगलस जॉनसन से परिचय करवाया


    केलिफोर्निया लेबर स्कूल से स्कूली शिक्षा प्राप्त करने के बाद अपनी माली स्थिति को सुधारने के लिए माया को सेन फ्रांसिस्को में प्रथम स्ट्रीटकार कंडक्टर बनना पड़ा था. 1940 का दशक माया के लिए काफी संघर्षपूर्ण रहा जब उन्होंने रोजगार के लिए नाइट क्लब डांसर और रसोइया के काम के साथ-साथ सेनडियागो वेश्यालय में वतौर मैडम यानी मौसी और सेक्स वर्र्कर की तरह कार्य किया. लिखने की दीवानी माया ने 'ग्रेट फूड, ऑल डे लांग' नामक पुस्तक खाने के विभिन्न रेसिपी पर लिखी.


    1951 में माया ने अपनी माँ के इच्छा के विरूद्ध टॉस एंजेलो नामक संगीतकार से विवाह कर लिया. इसी समय माया की मुलाकात प्रसिद्ध डांसर एलविन ऐले और रूथ वैक फोर्ड से हुई. माया ने एक डांस टीम 'अल एंड रीटा' नाम से बनाई, जो आधुनिक नृत्य टीम के रूप मे समूचे सेन फ्रांसिस्को में प्रदर्शन किया परंतु सफल नहीं हो सका.
    1954 में माया एंजेलो का विवाह टूट गया, उस वक्त माया परपल ओनियन नामक नाइट क्लब में क्लेप्सो संगीत पर गाती एवं नृत्य करती थी. यह वही वक्त था जब माग्रेट जॉनसन या रीटा के नाम से जानी जाने वाली महिला अश्वेत कलाकार माया एंजेलो के नाम से प्रसिद्ध हुई. क्लेप्सो संगीत में माया ने इतनी महारत हासिल किया कि 1996 में अपना पहला एलबम 'मिस क्लेप्सो' प्रर्दशित किया तथा 'क्लेप्सो हिट वेभ' नामक फिल्म में स्वरचित गानों को खुद अपनी आवाज दी.


    माया एंजेलो के जीवन में 1960 का दशक बहुत महत्वपूर्ण साबित हुआ जब उन्होंने सिवील राइट विश्वप्रसिद्ध नेता मार्टिन लूथर जुनियर से मिली और रंगभेद के खिलाफ उनकी मुहिम में खुद को शामिल कर लिया. 1961 में माया की भेंट दक्षिण अफ्रीका के स्वतंत्रता सेनानी बियूसुमजी मेक से हुई यद्यपि कानूनन माया ने मेक से विवाह तो नहीं किया पर उनके साथ अपने बेटे 'गाय' को लेकर मिश्र की राजधानी केरो आ गयी तथा यहां उन्होंने एक अंग्रेजी सप्ताहिक अखबार 'द अरब ओबजर्बर' की एसोसिएट एडिटर बना दी गयी. कलांतर में माया घाना विश्वविद्यालय की प्रशासक भी नियुक्त की गयी और अफ्रीकन रिब्यू की फीचर एडीटर भी रहीं. माया ने इसी समय 'द हर्ट ऑफ अ वुमेन', 'गेदर टुगेदर इन माए नेम', एंड आई स्टील राइज', 'इभेन द स्टारस लुक लोनसम', 'वुड नॉट टेक नथींग फॉर माइ जरनी नाउ', 'लेटर टु माइ डाउटर' तथा 'मॉम एंड मी एंड मॉम' नामक आत्मकथ्यात्मक पुस्तके लिखीं. 1990 और 2000 में वेस्ट स्पोकेन वर्ड एलबम के लिए ग्रेमी अवार्ड से नवाजा गया. 2011 में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने माया एंजेलो को प्रेसीडेंसीयल मेडल ऑफ फ्रीडम से सम्मानित किया. माया एंजेलो को श्रद्धांजलि देने वालों में विश्वविख्यात कलाकारों सहित विश्व नेताओं में अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा भी शामिल रहे जिन्होंने माया एंजेलो को 'द ब्राइटेस्ट लाइट' की संज्ञा से नवाजा.

 

राजीव आनंद
प्रोफेसर कॉलोनी, न्यू बरंगड़ा
गिरिडीह-815301 झारखंड़

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