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गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (5)

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गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ के उपन्यास Chronicle of a death foretold  का अनुवाद अनुवादक – सूरज प्रकाश mail@surajprakash.com   पिछली...

गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़

के उपन्यास

Chronicle of a death foretold 

का अनुवाद

अनुवादक – सूरज प्रकाश

mail@surajprakash.com

 

पिछली किश्तें - 

 

  किश्त 1 | किश्त 2 | किश्त 3 | किश्त 4 |

 

म सब, जो भी उसके यार दोस्‍त थे, यह बात मानते थे कि अचानक ही पाब्‍लो विकारियो अपने भाई के लौटने के बाद उसी पर निर्भर रहने लगा था। और उसका भाई बैरक रूम की कठोर आत्‍मा को ले कर लौटा था। जिस किसी पर उसे रौब डालना होता था, उसके सामने अपनी कमीज उठा कर अपनी बायीं कांख पर गोली से हुए घाव का निशान दिखा देता था। अब वह बड़े बड़े लोगों के सुजाक रोग के पक्ष में बोलने लगा था। इस रोग को उसका भाई शौर्य पदक की तरह दिखलाता फिरता था।

पैड्रो विकारियो ने जो घोषणा की थी, उसके अनुसार उसी ने सैंतिएगो नासार को मारने का फैसला किया था और पहले पहल तो उसका भाई वैसा ही करता रहा जैसा उसने कहा। लेकिन जब मेयर ने उनसे उनके चाकू ले लिये तब भी वही यह सोचने के लिए आगे रहा कि ड्यूटी तो पूरी करनी ही है, इसके बाद से पाब्‍लो ने कमान संभाल ली थी। दोनों में से किसी ने भी दोनों के बीच की आपसी असहमति के बारे में जांचकर्ता को अलग अलग दिये गये बयानों में नहीं बतलाया। लेकिन पाब्‍लो विकारियो ने कई बार मेरे सामने इस बात की पुष्‍टि की थी कि पैड्रो को इस संकल्प को पूरा करने के लिए मनाना कोई आसान काम नहीं था। बेशक मामले की तह में कुछ भी न हो, सिर्फ आतंक की तरंग मात्र हो, लेकिन सच्चाई यह थी कि पाब्‍लो विकारियो दूसरी बार चाकू लेने सूअर बाड़े में अकेला ही गया था और उसका भाई भारी यंत्रणा में था। वह इमली के दरख्‍़तों के तले खड़ा देर तक पेशाब करने में लगा रहा।

“मेरा भाई कभी नहीं जान पाया, सब कुछ से गुज़रना कैसा था,” पैड्रो ने मुझे इकलौते इंटरव्‍यू में बताया था,“यह तो कुल्‍हड़ में मूतने जैसा था।” पाब्‍लो विकारियो जब चाकू ले कर लौटा तो उसने देखा – पैड्रो पेड़ से लिपटा खड़ा था। “तकलीफ की वजह से उसे ठंडा पसीना छूटने लगा था।” पाब्‍लो ने बताया था,“और उसने मुझसे कहा था कि जाओ, तुम अकेले ही सब कुछ निपटा कर आओ। मैं किसी को मारने वारने की हालत में नहीं हूं। वह शादी की दावत के लिए पेड़ों के नीचे बनायी गयी एक बेंच पर जा बैठा। यहां तक कि उसने अपना शिश्‍न पैंट के अंदर करने में आधा घंटा लगा दिया था।” पाब्‍लो विकारियो ने मुझे बताया था। दरअसल, इसमें पैड्रो विकारियो को दस मिनट भी नहीं लगे थे, लेकिन पाब्‍लो विकारियो के लिए यह सब कुछ इतना मुश्‍किल और इतना चक्‍कर में डाल देने वाला था कि उसे लगा, पैड्रो विकारियो किसी तरह समय बरबाद करने की नयी नयी जुगतें भिड़ा रहा है ताकि सुबह हो जाये। इसलिए उसने चाकू अपने हाथ में रखा और एक तरह से अपने भाई को घसीटता हुआ ले चला – अपनी बहन की अस्‍मत लूटने वाले की तलाश में।

“इससे बाहर निकलने का कोई रास्‍ता नहीं है।” पाब्‍लो ने पैड्रो को बताया था,“समझो सब कुछ निपट चुका है।”

वे सूअर बाड़े के गेट से बाहर निकले। हाथों में नंगे चाकू। पीछे, आँगन में कुत्‍तों के भौंकने की आवाजें। भोर होनी शुरू हो गयी थी। “बरसात नहीं हो रही थी,” पाब्‍लो ने याद करते हुए कहा था,“इसके विपरीत समुद्री हवा चल रही थी और आकाश में अभी भी उंगलियों पर गिने जा सकने वाले तारे थे।” उन्‍होंने खबर इतनी अच्‍छी तरह से चारों तरफ फैला दी थी कि जब वे होर्तेन्‍सिया बाउते के घर के आगे गुजरे तो उसने हौले से अपना दरवाजा खोला। सैंतिएगो नासार के लिए रोने वाली वह पहली महिला थी, “मुझे लगा, वे पहले ही उसका काम तमाम कर चुके हैं।” होर्तेन्‍सिया बाउते ने मुझे बताया था,“क्‍योंकि मैंने गली में रौशनी में उनके हाथों में चाकू देखे और मुझे ऐसा लगा, मानो उनमें से लहू टपक रहा हो।” उस भूली भटकी गली में थोड़े से घरों में से एक और घर खुला था। यह घर था पाब्‍लो विकारियो की मंगेतर – प्रूडेंसिया कोटेस का। वे जब भी उस वक्‍त वहां से गुज़रते थे, खास कर बाज़ार जाने के दिन - शुक्रवार को, तो वे कॉफी का पहला प्‍याला वहीं पीते थे। उन्‍होंने दालान की तरफ खुलने वाले दरवाजे को धकेल कर खोला। वहां ढेर सारे कुत्‍ते थे। कुत्‍तों ने उन्‍हें भोर के धुंधलके में पहचान लिया। वे दोनों रसोई में पहुंचे और प्रूडेंसिया कोटेस की मां से दुआ सलाम की। कॉफी अभी तैयार नहीं हुई थी।

“इस समय हम ज़रा जल्‍दी में हैं,” पाब्‍लो विकारियो ने कहा था,“बाद में पी लेंगे कॉफी।”

“मैं महसूस कर सकती हूं मेरे बच्‍चो,” मां ने कहा था,“सम्‍मान इंतज़ार नहीं करता।”

इसके बावजूद वे इंतज़ार करते रहे। तब पैड्रो विकारियो का लगा, उसका भाई यहां जानबूझ कर वक्‍त बर्बाद कर रहा है। जिस वक्‍त वे कॉफी पी रहे थे, प्रूडेंसिया कोटेस अपनी भरपूर जवानी की झलक दिखलाती रसोई में आयी। उसके हाथ में कुछ पुराने अखबारों की रद्दी थी जिनसे उसने अँगीठी की आग तेज की।

“मुझे पता था, वे क्‍या करने जा रहे थे,” उसने मुझे बताया था,“और मैं केवल उनसे सहमत थी, बल्‍कि मैं तो ऐसे शख्‍स से शादी ही न करती जो आदमी के करने लायक काम न करता।” रसोई से निकलने से पहले पाब्‍लो विकारियो ने प्रूडेंसिया कोटेस से कागज की कतरनें लीं और उनमें से एक पैड्रो विकारियो को चाकू लपेटने के लिए दे दी। प्रूडेंसिया कोटेस उन्‍हें आँगन के दरवाजे तक जाता देखती रही। बिना एक पल के लिए भी हतोत्‍साहित हुए अगले तीन बरस तक पाब्‍लो विकारियो की राह देखती रही। तब तक, जब वह जेल से बाहर आया और हमेशा हमेशा के लिए उसका पति बना।

“तुम दोनों अपना अच्‍छी तरह से ख्याल रखना” उसने दोनों से कहा था।

इसीलिए क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता के पास यह मानने के बेहतर कारण थे जब उसे लगा कि विकारियो बंधुओं का संकल्‍प पहले की तुलना में डगमगाया हुआ था। उसने उन दोनों को रॉटगट रम की बोतल यह सोच की दी कि वे इसे पीकर बुरी तरह नशे में धुत्‍त हो जायेंगे।

“उस रोज़” क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता ने मुझे बताया था,“मुझे लगा, इस दुनिया में हम औरतें कितनी अकेली हैं।” पैड्रो विकारियो ने क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता से उसके पति का शेविंग किट उधार मांगा। वह उसके लिए ब्रश, साबुन, लटकाने वाला शीशा और नया ब्‍लेड डाल कर सेफ्टी रेज़र ले आयी, लेकिन उसने अपने कसाइयों वाले चाकू से ही दाढ़ी बनायी। क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता को लगा, यह तो बेवजह मर्दानगी की हद थी। “वह फिल्‍मों के कातिल की तरह लग रहा था।” क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता ने मुझे बताया था। लेकिन जैसा कि पैड्रो विकारियो ने मुझे बाद में बताया था और जो सच भी था कि सेना में उसने उस्‍तरे से शेव करना सीखा था और तब से वह किसी और सेफ्टी रेज़र से शेव कर ही नहीं सकता था। जहां तक उसके भाई का सवाल था, उसने डॉन रोगेलियो दे ला फ्लोर के मांगे हुए सेफ्टी रेज़र से ढंग से दाढ़ी बनायी।

आखिरकार, उन्‍होंने चुपचाप, बहुत धीमे धीमे पूरी बोतल खत्‍म की। इस बीच वे सड़क पार के घर की अंधेरी खिड़कियों की तरफ गावदियों वाली निगाह से देखते रहे और दूध की खरीद करने आये नकली ग्राहक ऐसी चीज़ों के बारे में पूछने के लिए अंदर बाहर होते रहे जो दुकान में मौजूद नहीं थीं। वे तो सिर्फ यही देखना चाहते थे कि क्‍या सचमुच विकारियो बंधु सैंतिएगो नासार को मारने की नीयत से उसका इंतज़ार कर रहे थे।

विकारियो बंधु खिड़की में बत्ती का जलना नहीं देख पाये। सैंतिएगो नासार चार बज कर बीस मिनट पर घर के भीतर घुसा लेकिन उसे अपने कमरे तक पहुंचने के लिए बत्ती जलाने की ज़रूरत ही नहीं पड़ी थी। सीढ़ियों पर लगा बल्‍ब रात भर जलता रहता था और उसकी रौशनी बेडरूम तक आती थी। सैंतिएगो नासार कपड़े पहने हुए ही अंधेरे में ही बिस्‍तर पर पसर गया। उसके पास नींद लेने के लिए सिर्फ एक ही घंटा था। जब विक्‍टोरिया गुज़मां उसे जगाने के लिए आयी ताकि वह बिशप की अगवानी के लिए जा सके तो उसने सैंतिएगो नासार को इसी हालत में सोये हुए देखा था।

हम मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस के यहां तीन बजे के बाद तक तो एक साथ ही थे। मारिया ने खुद ही संगीतकारों को रवाना कर दिया था और नाच घर की बत्तियां बुझा दी थीं ताकि आनंददायिनी मुलैट्टो लड़कियां बिस्‍तरों पर जा कर घड़ी भर आराम कर सकें। वे बिना रुके पिछले तीन दिन से काम कर रही थीं। पहले गुप्‍त रूप से, खास मेहमानों के लिए आनंद के पल जुटा रही थीं, फिर अपने दरवाजे हम जैसे लंडूरों के लिए भी खोल दिये। हमारी तसल्‍ली शादी की धूमधाम से नहीं हो पायी थी। मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस जिसके बारे में हम कहा करते थे कि वह एक ही बार तभी सोने जायेगी जब मरेगी, बेहद सुरुचि सम्‍पन्‍न महिला थी। मैंने आज तक उससे अधिक कोमलांगी और काम कला में माहिर दूसरी औरत नहीं देखी थी। लेकिन वह बहुत कठोर भी थी। वह यहीं जनमी और पली बढ़ी हुई थी। वह यहां एक ऐसे घर में रहती थी जिसमें किराये के लिए कई कमरों के दरवाजे खुले रहते थे। नाच घर के लम्‍बे चौड़े आँगन में परमारिबो कस्‍बे से लायी गयी चीनी बाजार की तुंबी वाली लालटैनों की रौशनी में लोग नाचते थे। यह वही औरत थी जिसे मेरे सारे हमजोलियों के कौमार्य भंग का श्रेय जाता है। उसने हमें इतना कुछ सिखाया था जो हम कभी न सीख पाते। लेकिन इन सबसे बढ़ कर उसने हमें एक बात सिखायी थी कि ज़िंदगी में खाली बिस्‍तर से ज्‍यादा उदास कर देने वाली और कोई जगह नहीं होती।

सैंतिएगो नासार ने जब उसे पहली बार देखा था तो अपने होश खो बैठा था। मैंने तब उसे चेताया था,“कहीं लेने के देने न पड़ जायें।”

लेकिन उसने मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस की मादक अदाओं की चकाचौंध में आकर मेरी तरफ ध्यान ही नहीं दिया था। वह उसे पागलपन की हद तक प्यार करने लगा था। पन्द्रह बरस की उम्र में ही वह मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस के लिए आंसू बहाने लगा था। तभी इब्राहिम नासार ने उसे मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस के बिस्‍तर से कोड़े मार कर बाहर निकाला और उसे एक बरस से भी ज्‍यादा के लिए रैंच पर बंद करके रखा था। तब से दोनों में गम्भीर अनुराग का रिश्‍ता चला आ रहा था। इसमें प्रेम की कोई विकृति नहीं थी। मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस के मन में सैंतिएगो नासार के प्रति इतना आदर था कि वह सैंतिएगो नासार के मौजूद रहने पर कभी और किसी के साथ हमबिस्‍तर नहीं हुई। उन पिछली छुट्टियों में हमें वह यह कह कर जल्‍दी रवाना कर देती थी कि वह थकी हुई है लेकिन वह दरवाजा कड़ी लगाये बिना खुला छोड़ देती थी और हॉल की बत्ती जलती रहने देती थी ताकि में मैं चुपके से उसके पास आ सकूं।

सैंतिएगो भेस बदलने की जादुई कला में महारत रखता था। यह उसका सबसे प्रिय खेल था - मुलैट्टो लड़कियों की पहचान गड्डमड्ड कर देना। वह कुछ लड़कियों की कपड़ों की अलमारी में रखे सारे कपड़ों की लॉटरी जैसी निकालता। नतीजा यह होता कि वे खुद को अपने से अलग महसूस करतीं। वे दूसरी लड़कियों के कपड़े पहन कर दूसरी ही लड़कियां बन जातीं। एक खास मौके पर एक लड़की ने खुद को हू ब हू दूसरी लड़की के भेस में पाया। दोनों में इतनी अधिक समानता थी कि वह आश्चर्य से चीखने लगी थी,“मुझे लगा, मैं शीशे से बाहर आ गयी हूं।” वह बोली थी। लेकिन उस रात मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस ने आखिरी बार सैंतिएगो नासार को भेस बदलने वाली चालबाजियों में शरीक नहीं होने दिया था। मारिया ने ये सब इतने हलके बहाने से किया था कि उसकी याद के कसैलेपन ने सैंतिएगो नासार की ज़िंदगी ही बदल डाली।

इसलिए हम संगीतकारों को प्रेम गीतों के एक और दौर के लिए अपने साथ लिवा ले गये। हम अपनी पार्टी को खुद ही जारी रखे हुए थे और उसी वक्‍त विकारियो बंधु सैंतिएगो नासार का कत्‍ल करने के लिए उसकी राह देख रहे थे। यह सैंतिएगो नासार का ही आइडिया था कि उस वक्‍त, चार बजे के आसपास, विधुर जीयस की पहाड़ी पर चला जाये और नव दम्‍पत्‍ति के सम्‍मान में गीत गाये जायें।

हम न केवल खिड़कियों के तले गीत गाते रहे, बल्‍कि हमने बगीचे में रॉकेट भी छोड़े, और आतिशबाजी भी की। इसके बावजूद, हम फार्म हाउस के भीतर जीवन के किसी भी लक्षण का अंदाजा नहीं लगा पाये। हमें यह लगा ही नहीं, कि भीतर कोई नहीं है, खासकर, इसलिए भी कि नयी कार अभी भी दरवाजे पर खड़ी थी। उसकी छत अभी भी खुली हुई थी। उस पर साटन के रिबन और मोम का सारा सजावटी सामान ज्‍यों का त्‍यों लगा हुआ था। मेरे छोटे भाई लुई एनरिक जो उस समय प्रोफेशनल की तरह से गिटार बजाता था, ने नव दम्‍पत्‍ति के सम्‍मान में एक द्विअर्थी वैवाहिक गीत बना डाला था। उस वक्‍त तक बरसात भी नहीं हुई थी। इसके विपरीत, ऊपर आसमान में चाँद चमक रहा था, हवा बिल्‍कुल साफ़ थी और प्रपात की तली में आप कब्रिस्‍तान से सेंट एल्‍मो की ज्‍योत की रौशनी की झिलमिल देख सकते थे। दूसरी तरफ, चाँदनी रात में केले के दरख्‍़तों के झुंड देखे जा सकते थे। नीचे दलदल नज़र आ रहा था और क्षितिज में कैरिबियाई इलाके की चमकीली लकीर नज़र आती थी। सैंतिएगो नासार ने समुद्र में जलती बुझती रौशनी की तरफ इशारा करके बताया था कि यह एक गुलाम जहाज की यातना पा रही आत्‍मा थी। यह जहाज कार्टाजेना डे इंडियाज पर मुख्‍य बंदरगाह पर सेनेगल के गुलामों को ले कर जा रहा था। यह सोचना असंभव नहीं था कि उसकी आत्‍मा उसे सता रही थी। हालांकि उस वक्‍त तक वह नहीं जानता था कि एंजेला विकारियो का वैवाहिक जीवन दो घंटे पहले ही समाप्त हो चुका था। बयार्दो सां रोमां उसे उसके मां बाप के घर तक पैदल चला कर ले गया था ताकि मोटर का शोरगुल उसकी बदकिस्मती का ढोल पहले ही न पीट दे। वह वहां से अकेला लौटा था। उसने विधुर जीयस के शानदार फार्म हाउस की बत्तियां भी नहीं जलायी थीं।

जब हम पहाड़ी से नीचे उतरे तो मेरे भाई ने बाजार में एक ढाबे पर तली हुई मछली खाने का न्‍यौता दिया लेकिन सैंतिएगो नासार इसके लिए राज़ी नहीं हुआ। दरअसल वह बिशप के आने से पहले घंटे भर की नींद लेना चाहता था। वह नदी के किनारे किनारे क्रिस्‍तो बेदोया के साथ चला गया। रास्‍ते में सड़क के किनारे किनारे गरीब गुरबों वाले ढाबे खुलने शुरू हो गये थे। मोड़ पर मुड़ने से पहले उसने हमसे अलविदा कहते हुए हाथ हिलाया। यह आखिरी बार था जब हमने उसे देखा था।

क्रिस्‍तो बेदोया ने सैंतिएगो नासार से उसके घर के पिछवाड़े की तरफ विदाई ली। दोनों ने तय किया था कि वे बाद में घाट पर मिलेंगे। कुत्‍तों ने जब सैंतिएगो नासार को आते देखा तो वे हमेशा की तरह उस पर भौंके। लेकिन उसने उन्‍हें धुंधलके में चाबियों का छल्ला बजाने की आवाज़ से शांत कर दिया। जब वह रसोई में से अपने कमरे की तरफ गया तो उस वक्‍त विक्‍टोरिया गुज़मां चूल्‍हे पर रखे कॉफी के बर्तन पर निगाह रखे हुए थी।

“साब जी,” विक्‍टोरिया गुज़मां ने उसे पुकारा था,“कॉफी थोड़ी देर में तैयार हो जायेगी।”

सैंतिएगो नासार ने उसे बताया था कि वह कॉफी बाद में लेगा। उसने यह भी कहा कि वह साढ़े पाँच बजे से उसे जगाने के लिए दिविना फ्लोर को भेज दे। उसके हाथ वह वैसे ही कपड़े भेजे जैसे उसने उस वक्‍त पहने रखे थे। सैंतिएगो नासार के बिस्‍तर पर जाने के पल भर के भीतर ही विक्‍टोरिया गुज़मां को दूध मांगने वाली भिखारिन के जरिये क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता का भेजा संदेश मिला। साढ़े पाँच बजे सैंतिएगो नासार को जगाने की हिदायत का उसने पालन किया लेकिन उसने दिविना फ्लोर को न भेज कर खुद ही साफ़ कपड़ों का जोड़ा लिया और सैंतिएगो नासार को जगाने लगी। वह इस विलासी के पंजों से अपनी छोकरी को बचाये रखने का कोई भी मौका हाथ से नहीं जाने देती थी।

मारिया एलेक्‍जंद्रीना सर्वांतीस ने अपने घर के दरवाजे की कुंडी नहीं लगायी थी। मैं अपने भाई से अलग हुआ और वरांडे को पार करके भीतर आ गया। वहां ट्युलिप के फूलों के बीच उन मुलैट्टो लड़कियों की बिल्लियां मुड़ी तुड़ी होकर सो रही थीं। मैं दरवाजा खटखटाये बिना ही बेडरूम के भीतर चला आया। बत्तियां बुझी हुई थीं लेकिन मैं जैसे ही भीतर पहुंचा मेरे नथुनों में एक गर्म औरत के शरीर की गंध भर गयी। मैंने उस अंधेरे में अनिद्रा रोग की मारी मादा तेंदुए की चमकती हुई आंखें देखीं। उसके बाद मुझे अपने तन बदन का होश नहीं रहा। सुबह जब घंटियां बजनी शुरू हुईं तो मैं होश में आया था।

अपने घर की तरफ जाते समय मेरा भाई सिगरेटें खरीदने के इरादे से क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता के स्‍टोर में गया। वह उस समय इतना पीये हुए था कि उस मुठभेड़ की स्‍मृतियां उसके लिए हमेशा गड्डमड्ड रहीं, लेकिन वह पैड्रो विकारियो द्वारा ऑफर किये गये घातक ड्रिंक को कभी भूल नहीं पाया,“वह तरल आग की तरह था।” भाई ने मुझे बताया था। पाब्‍लो विकारियो, जो सो चुका था, मेरे भाई के आने की आहट से जाग गया था। पैड्रो विकारियो ने मेरे भाई को चाकू दिखाया,“हम सैंतिएगो नासार को मारने जा रहे हैं।” उसने मेरे भाई को बताया था।

मेरे भाई को याद नहीं रहा,“लेकिन अगर मुझे याद भी रहता तो मुझे उस पर यकीन नहीं आता।” उसने मुझे कई बार बताया था, “कोई चूतिया ही होगा जो कभी यह सोचे कि वे किसी को मारेंगे, वो भी सूअर काटने वाले चाकू से।” उन्‍होंने मेरे भाई से सैंतिएगो नासार का अता पता पूछा था क्‍योंकि उन दोनों ने इन दोनों को एक साथ देखा था। मेरे भाई को याद ही नहीं आ रहा था कि उसने क्‍या जवाब दिया था। लेकिन जब क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता और विकारियो बंधुओं ने उसका जवाब सुना तो वे भौंचके रह गये थे।

उनके अनुसार मेरे भाई ने कहा था, “सैंतिएगो नासार मर चुका है।” इसके बाद उसने धार्मिक रीति से दुआएं दीं, चौखट पर लड़खड़ाया और ठोकरें खाता बाहर निकल गया। चौक के बीचों बीच उसका सामना फादर एमाडोर से हुआ। वह पूजा के परिधान पहने हुए घाट की तरफ जा रहे थे। उनके पीछे पीछे घंटी टुनटुनाता हुआ वेदी सेवक और बिशप की सार्वजनिक प्रार्थना के लिए यज्ञ वेदी उठाये कई सेवक चले जा रहे थे। जब विकारियो बंधुओं ने उन सबको जाते देखा तो वे उनसे आगे निकल गये।

क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता ने जब पादरी को अपनी दुकान के आगे से गुज़र कर जाते देखा तो वह आखिरी उम्‍मीदें भी छोड़ चुकी थी। उसने मुझे बताया था, “मुझे लगा उन्‍हें मेरा संदेश मिला ही नहीं, इसके बावजूद बरसों बाद फादर एमाडोर ने मेरे सामने स्‍वीकार किया था कि जिस वक्‍त वे घाट पर जाने के लिए तैयार हो रहे थे तो उस वक्‍त उन्‍हें क्‍लोतिल्‍दे आर्मेंता का और दूसरे जरूरी संदेश मिल गये थे।”

तब फादर उदास, अंधेरे कैलेफॉल रेस्‍ट होम में दुनिया के तामझाम से दूर, विश्राम कर रहे थे,“सच तो यह है कि मुझे समझ में ही नहीं आया कि मैं क्‍या करूं।” फादर ने मुझे बताया था,“मेरा पहला विचार तो यही था कि इस सबसे मेरा कोई लेना देना नहीं है। यह तो सिविल अधिकारियों का झमेला है, लेकिन फिर मैंने तय किया कि मैं सरसरी तौर पर प्‍लेसिडा लिनेरो से कुछ कहूं।” लेकिन इसके बावजूद जब वे चौक से गुज़रे तो इस बाबत पूरी तरह से भूल चुके थे, “तुम्‍हें इस बात को समझना चाहिये,” उन्‍होंने मुझसे कहा था,“कि उसी अभागे दिन बिशप का आगमन हो रहा था।” अपराध के वक्‍त वे इतने हताश हो गये थे और उन्‍हें खुद पर से इतनी विरक्ति हो गयी थी कि उन्‍हें कुछ और सूझा ही नहीं तो उन्‍होंने आग लगने के संकेत का अलार्म बजा दिया।

 

(क्रमशः अगली किश्तों में जारी…)

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नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3790,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी 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रचनाकार: गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (5)
गैब्रियल गार्सिया मार्खेज़ का उपन्यास - उस मौत का रोजनामचा (5)
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