रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

लातिनी अमेरिकी लेखक जोआओ गुइमारेस रोसा की कहानी " थर्ड बैंक ऑफ़ द रिवर

SHARE:

लातिनी अमेरिकी कहानी ------------------------------- लातिनी अमेरिकी लेखक जोआओ गुइमारेस रोसा की कहा...

लातिनी अमेरिकी कहानी 
-------------------------------
लातिनी अमेरिकी लेखक जोआओ गुइमारेस रोसा की कहानी
" थर्ड बैंक ऑफ़ द रिवर " का अंग्रेज़ी से हिंदी में
" नदी का तीसरा किनारा " शीर्षक से
अनुवाद
----------------------------------------------------------------------------------------
नदी का तीसरा किनारा
----------------------------
--- मूल लेखक : जोआओ गुइमारेस रोसा
अनुवाद : सुशांत सुप्रिय

पिता एक ज़िम्मेदार , भरोसे के क़ाबिल और व्यावहारिक आदमी थे । बचपन से ही वे ऐसे ही थे । जब मैंने पिता को जानने वाले लोगों से उनके बारे में पूछा तो उन सभी लोगों ने पिता के बारे में यही राय व्यक्त की । मुझे याद नहीं आता कि वे मुझे अपने आस-पास के लोगों की तुलना में कभी ज़्यादा धुनी या रूखे मिजाज़ वाले लगे हों । हाँ, वे बातें कम ही किया करते थे । हमारी माँ ही हर रोज़ हम तीनो को -- मुझे , मेरी
बहन और मेरे भाई को, डाँटती-फटकारती या आदेश दिया करती थी । लेकिन एक
दिन मेरे पिता ने अपने लिए एक नाव मंगवाई ।
उन्होंने इस मामले को गम्भीरता से लिया । उन्होंने अपने लिए बढ़िया मिमोसा काठ की नाव बनवाई । वह आकार में छोटी थी और उसमें केवल एक आदमी के बैठने की जगह थी । वह पूरी तरह से हाथ से बनी हुई मज़बूत क़िस्म की लकड़ी की नाव थी ,
जो बीस-तीस बरस तक आराम से चल सकती थी । माँ नाव बनाने के विचार तक का मज़ाक़ उड़ाती रहती । वह पूछती -- जिस व्यक्ति ने अपने समूचे जीवन-काल में कभी ऐसे करतबों में में अपना समय व्यर्थ नहीं गँवाया, वह अपने जीवन के इस मुक़ाम पर अब नाव में बैठ कर मछली पकड़ने और शिकार पर जाने की बात सोच भी कैसे सकता है ? पिता कुछ नहीं कहते ।
तब हमारा घर नदी से एक मील से भी कम की दूरी पर था , हालाँकि अब यह दूरी बढ़ गई है । घर के इतने क़रीब वह नदी बहती रहती -- चौड़ी, गहरी और शांत । सदा ख़ामोशी से बहती हुई । वह इतनी चौड़ी नदी थी कि उसका दूसरा किनारा नज़र ही नहीं आता था । मैं वह दिन कभी नहीं भूल सकता जिस दिन नाव बन कर तैयार हो गई।
पिता ने न कोई ख़ुशी ज़ाहिर की, न उत्साह , न ही निराशा । सदा की तरह उन्होंने अपनी टोपी पहनी, हमें अलविदा कहा और चल पड़े । उन्होंने एक भी शब्द और नहीं कहा , किसी भी तरह का खाना या और कोई सामान नहीं लिया और न ही
जाते-जाते हमें कोई सलाह ही दी । हमें लगा जैसे माँ को चीख़ने-चिल्लाने का दौरा-सा पड़ जाएगा लेकिन ऐसा कुछ नहीं हुआ । केवल उनके चेहरे का रंग उड़ गया और दाँतों से अपने होठ काटते हुए वे कड़वाहट से भर कर बोलीं -- " तुम्हारी मर्ज़ी है, जाओ चाहे यहीं रहो । लेकिन अगर जा रहे हो तो फिर कभी लौट कर नहीं आना ! "
पिता की चुप्पी रहस्यमयी बनी रही । उन्होंने प्यार से मेरी ओर देखा और मुझे अपने साथ ले कर चलने लगे । मैं माँ के ग़ुस्से से डर रहा था , लेकिन मैं फिर भी पिता के साथ हो लिया । हम नदी की ओर बढ़ने लगे । मैं उनके साथ आश्वस्त महसूस कर रहा था । रोमांच से भर कर मैंने उनसे पूछा -- " पिताजी , क्या आप अपनी नाव में मुझे भी ले चलेंगे ? "
लेकिन उन्होंने मुझे आँख भर कर देखा , अपना आशीर्वाद दिया और इशारे से मुझे लौट जाने के लिए कहा । मैंने उन्हें दिखाने के लिए लौटने का नाटक भी किया
पर जैसे ही वे मुड़े , मैं उन्हें देखने के लिए घनी झाड़ियों से ढँके एक गड्ढे में छिप कर बैठ गया । पिता नाव में बैठे , नाव की रस्सी खोली और उसे खेते हुए दूर निकल
गए । नाव की लम्बी परछाईं पानी में किसी मगरमच्छ की तरह फिसलती चली गई ।
पिता कभी नहीं लौटे । असल में वे कहीं ज़्यादा दूर गए भी नहीं थे । वे नदी के ही एक हिस्से में नाव खेते रहे । उनकी नाव बीच नदी के उसी हिस्से में इधर-उधर आती-जाती रही । वे हमेशा नाव में ही रहते । उन्हें किसी ने फिर कभी नाव से बाहर नहीं
देखा । यह अजीब सच्चाई हम सभी को भयभीत करने के लिए काफ़ी थी ।जो आज तक कभी नहीं हुआ था , वह हो रहा था । हमारे रिश्तेदार , पड़ोसी और जान-पहचान वाले , सभी इस अद्भुत घटना पर चर्चा करने के लिए इकट्ठा हुए ।
माँ ने बेहद समझदारी से काम लिया । उन्होंने धीरज बनाए रखा । हालाँकि किसी ने भी यह बात नहीं कही , लेकिन लगभग सभी का यही मानना था कि पिता पागल हो गए थे । केवल कुछ लोग ही ऐसे थे जिनका यह मानना था कि शायद पिता ईश्वर को दिया गया कोई वचन निभा रहे थे । कुछ लोगों ने यह भी कहा कि सम्भवत: पिता को कोढ़ जैसी कोई भयानक बीमारी होगा थी जिसकी वजह से वे एक दूसरा जीवन जीने के लिए हमें छोड़ कर दूर चले गए थे । किंतु दूर हो कर भी वे हम सब के पास ही रहना चाहते थे ।
नदी के किनारे रहने वाले लोगों और यात्रियों से यह ख़बर चारो ओर फैल गई थी कि पिता अब ज़मीन पर क़दम कभी नहीं रखते थे -- न दिन में , न रात में । इंसानों से दूर वे अकेले और दिशाहीन-से नदी में भटकते रहते । माँ और हमारे अन्य रिश्तेदारों का मानना था कि पिता ने ज़रूर नाव में कुछ खाना छिपा कर रखा होगा जो जल्दी ही ख़त्म हो जाएगा । ऐसी हालत में उन्हें यहाँ नहीं तो किसी और जगह नाव को किनारे पर ला कर ज़मीन पर आना ही पड़ेगा । इसका मतलब यह होगा कि या तो वे हमेशा के लिए हमसे दूर कहीं चले जाएँगे या फिर अपने किए पर पछता कर वे घर लौट आएँगे ।
लेकिन वे सब ग़लत थे । मैं गोपनीय तरीक़े से प्रतिदिन पिता के लिए कुछ खाना चुरा लेता था । यह विचार मेरे मन में उस पहली रात को ही आ गया था जब पिता के जाने के बाद परिवार के हम सब सदस्य नदी के किनारे लकड़ियाँ जला कर प्रार्थना करते रहे थे और अधीर हो कर पिता को पुकारते रहे थे । उस दिन के बाद से हर रोज़
मैं पिता के लिए एक पूरी पाव रोटी , शक्कर या केले का गुच्छा ले कर नदी के किनारे जाता । एक बार एक घंटे तक बेचैनी से प्रतीक्षा करने के बाद पिता नज़र आए । आइने-सी चिकनी नदी में वे अपनी थिरकती नाव में शांत बैठे हुए थे । उन्होंने मुझे देखा पर न तो वे मेरी ओर आए , न कोई इशारा ही किया । मैंने खाना उन्हें दिखाया और फिर नदी के किनारे पत्थरों के घिसने से बनी एक खोह के अंदर रख दिया । जानवरों, बारिश और ओस से वहाँ खाना सुरक्षित रहेगा, मुझे इसका यक़ीन था । हर रोज़, लगातार , मैंने ठीक वैसा ही किया । हालाँकि बाद में मैं यह जानकर हैरान हुआ कि माँ को सब पता था । माँ जानबूझ कर खाना ऐसी जगह रख देती थी जहाँ से मैं आसानी से ले जा सकूँ । पिता के बारे में अपनी भावनाओं को उन्होंने कभी ज़ाहिर नहीं किया ।
बाद में खेती-बाड़ी और हिसाब-किताब में मदद के लिए माँ ने अपने भाई को अपने पास बुला लिया । हम बच्चों के लिए भी एक शिक्षक नियुक्त कर दिया गया ताकि हमारी पढ़ाई ठीक तरह से हो सके । माँ के कहने पर एक दिन एक पुरोहित पूजा का लिबास पहन कर नदी के किनारे गया और झाड़-फूँक करके पिता पर हावी भूत-प्रेत को भगाने लगा । उसने चिल्ला कर पिता से कहा कि उन्हें यह मूर्खतापूर्ण ज़िद छोड़ कर अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियों को निभाना चाहिए ।
अगली बार माँ ने पिता को डरा-धमका कर वापस बुलाने के लिए दो सिपाहियों को नदी के किनारे भेजा । लेकिन ये सभी उपाय बेकार साबित हुए । पिता किनारे से दूर बने रहे । कई बार वे इतनी दूर चले जाते कि नदी के धुँधलके में वे बड़ी मुश्किल से नज़र आते । चूँकि कोई उनकी नाव के क़रीब नहीं जा पाता इसलिए न तो कभी कोई उन्हें छू पाया , न उनसे बात ही कर पाया । चिल्लाने पर भी वे जवाब नहीं देते ।
कुछ अख़बार वाले जब एक बार एक बड़ी नाव में बैठ कर उनकी तसवीर खींचने गए तो वे भी बाक़ी लोगों की तरह असफल रहे । पिता अपनी नाव खे कर दूसरे किनारे पर चले गए । वहाँ वे झाड़ियों में जा छिपे । दूसरे किनारे पर मीलों तक दलदल और घनी झाड़ियाँ थीं । केवल वे ही नदी के उस इलाक़े का चप्पा-चप्पा जानते थे । अन्य लोग वहाँ रास्ता खो जाते थे । इसलिए भूल-भुलैया जैसी अपनी निजी पनाहगाह में वे महफ़ूज़ थे ।
हमें इस सब का आदी हो जाना चाहिए था , लेकिन यह मुश्किल था और हम कभी ऐसा नहीं कर सके । मेरा तो यही मानना है । चाहे-अनचाहे मेरी सोच घूम-फिर कर उसी बिंदु पर आ जाती थी । मैं पिता के बारे में फ़िक्र करने से ख़ुद को नहीं रोक पाता था । मैं समझ नहीं पाता था कि वे ऐसा जीवन कैसे जी पा रहे थे ।रात-दिन, कड़ी धूप ,
मूसलाधार बारिश और आँधी-तूफ़ान जैसे कष्टों में भी वे नाव में डेट हुए थे । भयानक गर्मी और ठिठुरती सर्दी में , यहाँ तक कि साल के बीच के मुश्किल समय में भी वे बिना छत या सुरक्षा के कैसे जी पा रहे थे ? उनके सिर पर केवल एक टोपी थी और तन ढँकने के लिए बेहद कम कपड़े थे । फिर भी वे सप्ताह-दर-सप्ताह, महीने-दर-महीने, साल-दर-साल, एक अर्थहीन, लक्ष्यहीन, जीवन जीते चले जा रहे थे । पिता कभी ज़मीन पर नहीं आए । उन्होंने कभी रेतीले किनारे या घास पर पाँव नहीं रखा । वे कभी नदी में मौजूद किसी छोटे द्वीप पर भी नहीं उतरे ।
यह सम्भव है कि झपकी लेने के लिए कभी-कभार वे अपनी नाव को किसी टापू के गुप्त कोने में झाड़ियों से बाँध देते होंगे । लेकिन उन्होंने कभी किनारे पर आ कर आग नहीं सुलगाई , न ही कभी लालटेन या मोमबत्ती जलाई । यहाँ तक कि उन्होंने कभी माचिस की तीली भी नहीं जलाई । उनके पास कोई टाॅर्च भी नहीं थी । अंजीर के पेड़ की जड़ों के पास बने खोखल में या नदी के किनारे की चट्टान की खोह में मैं उनके लिए जो खाना रख आता था उसमें से वे बहुत कम ही खाते थे । क्या केवल उतना ही जीवित रहने के लिए पर्याप्त था ? क्या वे कभी बीमार नहीं होते थे ? नाव को क़ाबू में रखने के लिए लगातार चप्पू चलाते रहने की शारीरिक ताक़त उन में कहाँ से आती होगी ? वह भी तब जब बीच-बीच में नदी में बाढ़ के तेज बहाव के साथ मरे हुए पशुओं और जड़ से उखड़े पेड़ों की वजह से ख़तरा और भी बढ़ जाता था । ऐसी दशा में वे ख़ुद को और अपनी छोटी-सी नाव को कैसे बचा पाते होंगे ? यह सब कितना डरावना और ख़तरनाक होता होगा ।
पिता ने कभी किसी जीते-जागते इंसान से बात नहीं की । हम भी अब उनकेबारे में आपस में बात नहीं करते थे , हालाँकि हम उनके बारे में सोचते ज़रूर थे । पिता को कभी भुलाया नहीं जा सकता था ।यदि कभी-कभार पल भर के लिए हम उन्हें अपने ज़हन से निकाल देते तो भी कुछ देर बाद अचानक उनकी याद हमें एक वेग के साथ जगा जाती -- वे जिस भयावह स्थिति में अपना जीवन जी रहे थे वह हमें बार-बार चौंका देने के लिए काफ़ी थी ।
मेरी बहन का ब्याह हो गया , किंतु माँ ने यह समारोह बिना किसी ताम-झाम के ,
बेहद सादगी से पूरा किया । जब भी हम कुछ अच्छा खाते-पीते तो हमें पिता का ख़्याल
आ जाता । यह बात हमें दुखी कर देती । और यह भी कि मूसलाधार बारिश वाली सर्द, तूफ़ानी रातों में जब हम आरामदेह बिस्तरों में होते तब पिता अकेले अपनी असहायता में ख़ुद को और नाव को बचाने की जद्दोजहद में जुटे होते ।
जान-पहचान वाले लोग अक्सर मुझे देख कर कह देते कि मेरी शक्ल अब मेरे पिता से मिलने लगी है । लेकिन मैं जानता था कि अब उनके बाल बढ़ चुके होंगे और दाढ़ी बेहद खुरदरी और सफ़ेद हो चुकी होगी ।उनके नाख़ून भी बेहद बढ़ गए होंगे । मैं कल्पना कर सकता था कि अब वे कितने दुबले-पतले , कमज़ोर और बीमार लगते
होंगे । हालाँकि मैं कभी-कभार खोह में उनके लिए कपड़े रख आता था , मुझे पता था कि अब वे लगभग नग्न ही होंगे । धूप में झुलसी उनकी त्वचा भी अब बड़े-बड़े बालों वाले किसी जानवर-सी हो गई होगी । पिता के बारे में सोचते ही मेरे ज़हन में उनकी यही छवि उभरती थी ।
पिता ने हमारे बारे में जानने की कभी कोई कोशिश नहीं की । क्या उन्हें हमारी ज़रा भी परवाह नहीं थी ? लेकिन मैं उनसे अब भी प्यार करता था , उनकी इज़्ज़त करता था । जब भी कोई किसी बात के लिए मेरी तारीफ़ करता तो मैं यही कहता -- " यह सब करना मुझे पिताजी ने सिखाया था ।"
यह बिलकुल सच तो नहीं था लेकिन इस झूठ में सच्चाई भी थी । यदि पिता अब हमें भूल चुके थे और हमारे बारे में नहीं सोचते थे तो वे हमसे दूर नदी में और आगे क्यों नहीं चले जाते थे जहाँ से न वे हमें देख सकते, न हम उन्हें देख पाते? वे क्यों हमारे आस-पास ही बने हुए थे ? इन प्रश्नों के उत्तर तो केवल वे ही दे सकते थे ।
जब मेरी बहन ने बेटे को जन्म दिया, उसने ठान लिया कि वह पिता को उनका नाती दिखाएगी । परिवार के हम सब सदस्य नदी के किनारे पहुँचे । वह एक ख़ुशनुमा दिन था । मेरी बहन ने शादी का सफ़ेद जोड़ा पहन रखा था । उसने अपने बेटे को ऊपर उठाया और बच्चे के पिता ने उन दोनों के ऊपर एक छतरी तान दी । हमने पिता को आवाज़ दी और फिर इंतज़ार करते रहे ।बार-बार पुकारने के बावजूद पिता नहीं आए । मेरी बहन फूट-फूट कर रोने लगी । अंत में वहाँ एक-दूसरे के गले लग कर हम सब बिलख-बिलख कर रोए । किंतु पिता नहीं आए ।
इस घटना के बाद मेरी बहन और मेरे जीजा रहने के लिए कहीं दूर चले गए । मेरा भाई भी रहने के लिए किसी और शहर में चला गया । समय तेज़ी से गुज़रता रहा । माँ बूढ़ी हो रही थी । अंत में वह भी रहने के लिए मेरी बहन के पास चली गई । केवल मैं वहीं रह गया । अकेला । शादी करके फिर से परिवार बसा लेने का ख़्याल मेरे मन में कभी नहीं आया । अपने जीवन की विडम्बनाओं से घिरा हुआ मैं वहीं रुका रह गया । हालाँकि पिता ने कभी मुझे नदी में अपने निर्धारित भटकने का कारण नहीं बताया , मुझे पता था कि उन्हें मेरी ज़रूरत थी । अंत में मैंने निश्चय किया कि मुझे पिता के इस अजीब व्यवहार का कारण जानना ही है । तब लोगों ने बताया कि शायद पिता ने अपनी यात्रा की वजह उस आदमी को बताई होगी जिसने उनकी नाव बनाई थी । लेकिन अब उसकी भी मृत्यु हो चुकी थी और किसी को भी ठीक से इस बारे में कुछ भी पता या याद नहीं था । हाँ, कुछ लोगों ने ज़रूर कुछ मूर्खतापूर्ण बातें बताईं । उन लोगों के मुताबिक़ बहुत पहले एक बार नदी में भयानक बाढ़ आई थी । तब सब को लगा था कि लगातार हो रही मूसलाधार बारिश की वजह से आई वह प्रलयंकारी बाढ़ सब को लील जाएगी । उन लोगों का कहना था कि शायद पिता आने वाले प्रलय या तबाही के अंदेशे की वजह से नाव बनवा कर पहले ही निकल पड़े । मैंने भी यह कहानी बहुत पहले सुनी थी हालाँकि अब मुझे यह ठीक से याद नहीं थी । कुछ भी हुआ हो , मैं अपने पिता को कभी दोष नहीं दे सकता था । अब तो मेरे सिर के बाल भी सफ़ेद होने लगे थे ।
मेरे पास कहने के लिए केवल अफ़सोसनाक बातें थीं । इस सब के लिए बराबर मैं ख़ुद को दोषी क्यों मानता था ? क्या इसकी वजह मेरे पिता थे ? उनका इस तरह चला जाना था ? उनकी कमी का शिद्दत भरा अहसास था ? या फिर वह नदी थी जो अनंत से अनंत तक बहती थी ? सदा नवजीवन से भरी हुई । जिस में पिता भटक रहे थे ।
मैं बूढ़ा होने लगा था । यह अवश्यंभावी था, मेरा यह जीवन केवल उसे मुल्तवी कर रहा था । मैं चिड़चिड़ा हो गया था । बीमार और बेचैन रहने लगा था । और पिता ? आख़िर उन्होंने ऐसा क्यों किया ? यक़ीनन वे बहुत कष्ट झेल ।चरहे होंगे । अब तो वे बहुत बूढ़े हो चुके थे । हो सकता है , अपने जीवन के इस अंतिम समय में किसी दिन वे नाव को उलट जाने दें । या जब नदी में बाढ़ आए तो वे चप्पू चलाना बंद करके नाव को उफ़नती धारा के हवाले कर दें ताकि नाव किसी शोर मचाते जल-प्रपात की विराट् ऊँचाई से गिर कर नदी की अतल गहराई में सदा के लिए विलीन हो जाए । मेरा जीवन तनावपूर्ण बना हुआ था । पिता वहाँ नदी में भटक रहे थे । यहाँ मेरी सुख-शांति हमेशा के लिए छिन गई थी । पता नहीं क्यों, मैं हमेशा अपराध-बोध से घिरा रहता था । मेरा अंतर्मन भीतर तक छलनी हो चुका था । काश, मुझे पता होता । काश, चीज़ें कुछ अलग होतीं । और तब, एक दिन मेरे ज़हन में एक ख़्याल आया ।
वह विचार ऐसा था कि मैं अगले दिन के भी नहीं रुक पाया । क्या मैं पागल हो गया था ? नहीं । हमारे घर में यह शब्द ज़बान पर नहीं लाया गया था । इतने बरसों में कभी नहीं । किसी ने किसी को कभी पागल नहीं कहा था । कोई पागल था भी नहीं । या फिर सभी पागल थे । उस दिन मैं नदी के किनारे चला गया । मेरे हाथ में केवल एक कपड़ा था जिसे हिला कर मैं पिता का ध्यान अपनी ओर खींचना चाहता था । मैं अपने पूरे होशोहवास में था । मैं इंतज़ार करने लगा । आख़िर वे मुझे बहुत दूरी पर नज़र आए । उनकी धुँधली आकृति धीरे-धीरे स्पष्ट दिखने लगी । वे नाव में बैठे हुए थे । मैंने उन्हें बार-बार पुकारा । और तब मैंने उनसे वे सब बातें कह डालीं जिन्हें कहने के लिए मैं न जाने कब से उतावला था ।
मैंने पूरी ताक़त से उन्हें विश्वास दिलाने के स्वर में कहा -- " पिताजी , अब आप बूढ़े हो रहे हैं । आप बहुत लम्बे अरसे से वहाँ हैं । अब आप लौट आइए । आपने अपने हिस्से का काम कर लिया । अब आप को वहाँ रुकने की कोई ज़रूरत नहीं ... आप लौट आइए और आपकी जगह मैं चला जाऊँगा । इसी समय या जब भी आप चाहें तब । हम दोनों यही चाहते हैं । मैं नाव में आपकी जगह ले लूँगा । " और जब मैंने यह कहा, मेरा दिल तेज़ी से धड़कने लगा । लेकिन मेरे शब्द मेरे भीतर की सच्चाई और अच्छाई से उपजे हुए थे ।
पिता ने मेरी बात सुनी । वे खड़े हो गए । उन्होंने चप्पुओं के सहारे नाव मेरी ओर मोड़ ली । वे मेरी बात मान गए थे । अचानक मैं भीतर तक काँप गया क्योंकि इतने बरस बाद पहली बार उन्होंने अपना हाथ उठा कर मेरी ओर हिलाया था और मैं कुछ न कर सका । बस खड़ा रह गया ... फिर मैं बेतहाशा भागा । डर के मारे रोंगटे खड़े हो गए । मैं वहाँ से पागलों की तरह भागता चला गया क्योंकि पिता जैसे क़ब्र से उठ कर आए हुए लग रहे थे ... किसी दूसरी ही दुनिया से । मुझे माफ़ कर दें । माफ़ी माँगता हूँ
मैं । केवल माफ़ी ।
डर के मारे मेरा पूरा शरीर सर्द पड़ गया था । मैं बीमार हो गया । पिता के भरोसे को इस तरह तोड़ने के बाद क्या मैं इंसान कहला सकता हूँ ? इस विफलता के बाद मेरे लिए अब चुप रहना ही बेहतर है । मैं जानता हूँ, अब बहुत देर हो चुकी है । अब पछताने से कुछ नहीं होगा । फिर भी मैं अपने इस सतही जीवन से चिपका हुआ हूँ । आत्म-हत्या से डरता हूँ । लेकिन अंत में जब मृत्यु आए तो मैं चाहता हूँ कि मुझे एक छोटी-सी नाव में लिटा कर नदी के अनवरत बहते जल में बहा दिया जाए । इसी नदी में जिसके किनारे कभी ख़त्म नहीं होते । बहते-बहते मैं नदी की अथाह गहराइयों में खो जाऊँ । इस के जल में समा कर नदी का ही हिस्सा बन जाऊँ । हमेशा के लिए ।

------------०------------
सुशांत सुप्रिय
प्रेषक: सुशांत सुप्रिय 
A - 5001,
गौड़ ग्रीन सिटी ,
वैभव खंड ,
इंदिरापुरम ,
ग़ाज़ियाबाद - 201010
( उ. प्र. )

ई-मेल : sushant1968@gmail.com

------------0------------

COMMENTS

BLOGGER

-----****-----

|13000+ रचनाएँ_$type=complex$count=6$page=1$va=0$au=0

|विविधा_$type=blogging$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3793,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2070,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,226,लघुकथा,808,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1882,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: लातिनी अमेरिकी लेखक जोआओ गुइमारेस रोसा की कहानी " थर्ड बैंक ऑफ़ द रिवर
लातिनी अमेरिकी लेखक जोआओ गुइमारेस रोसा की कहानी " थर्ड बैंक ऑफ़ द रिवर
http://lh6.ggpht.com/-cI6EqLQtQT0/U9y0JPlNmNI/AAAAAAAAZ08/zhMB6X0ydYI/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/-cI6EqLQtQT0/U9y0JPlNmNI/AAAAAAAAZ08/zhMB6X0ydYI/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2014/08/blog-post_68.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2014/08/blog-post_68.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ