रचनाकार में खोजें -
 नाका में प्रकाशनार्थ  रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें.

निशिपाल सूरी की कहानी - ओल्ड एज होम

SHARE:

                              ओल्ड एज होम                कुछ तो उन के हिलने डुलने से और कुछ पति के कराहने की आवाज़ से एकाएक मालती जी की नींद...

image

                              ओल्ड एज होम
               कुछ तो उन के हिलने डुलने से और कुछ पति के कराहने की आवाज़ से एकाएक मालती जी की नींद खुल गयी. हाथ बढ़ा कर  टेबल लैंप जलाया और नज़र घड़ी पर पड़ी.  रात के साढ़े तीन बजे थे. देखा तो गोविंद जी हाथों से सीने को दबाये बार बार ओंठ भींचते हुए छटपटा रहे थे और शरीर पसीने से भीगा हुआ था.
      घबरा कर पूछा -" बहुत दर्द है क्या ? उत्तर में उन्होंने बस सिर हिला दिया.
     मालती जी ने तुरंत अपने अभिन्न मित्र और फैमिली डाक्टर अवस्थी को फोन किया जो चार घर दूर ही रहते थे. तुरंत ही वे पत्नी कमला के साथ दौड़े आये. गोविंद जी को दे्ख कर उनको अटैंड करने लगे और पत्नी को पास के ही अस्पताल में एंबुलेंस के लिये फोन करने को कहा. फिर उस अस्पताल के वरिष्ठ हृदय रोग विशेषज्ञ को फोन कराया. डाक्टर अवस्थी जो स्वयं एक अच्छे फिज़ीशियन थे उस अस्पताल के विज़िटिंग डाक्टर भी थे . मन ही मन सब स्थिति की गंभीरता को समझ रहे थे लेकिन एक दूसरे को हिम्मत रखने को कह रहे थे.
      शीघ्र ही एंबुलेंस आ पहॅुची. जल्दी-जल्दी गोविंद जी को एंबुलेंस में  डाला गया और अस्पताल चल पड़े. वहाँ सब तैयार था जाते ही उनको आई.सी.यू. में ले गये और उपचार की प्रक्रिया आरंभ हो गयी.


कुछ देर के बाद डाक्टर अवस्थी के साथ अस्पताल के डाक्टर भी बाहर आये  और मालती जी से बोले--" देखिये मैडम आप को बहुत हिम्मत से काम लेना होगा , बड़ा मैसिव अटैक है .यह तो डाक्टर अवस्थी थे तो आप के पति को अस्पताल तक ले आये. नहीं तो ऐसी हालत में तो मरीज़ का अस्पताल तक पहॅुचना भी नामुमकिन होता है."
       सुन कर मालती जी ने एक बार कृतज्ञता भरी नज़रों से डाक्टर अवस्थी को देखा. कुछ बोल न सकीं. उनके  पैरों तले से ज़मीन खिसक गयी. ऑखों के आगे अंधेरा छा गया और अगर कमलाजी उनको थाम न लेतीं तो शायद वहीं गिर जातीं. डाक्टर अवस्थी जा कर पानी ले आये . थोड़ा पानी पीने के बाद कुछ संभलीं तो डाक्टर ने आगे कहा. -" आप को धीरज रखना होगा. अगले ७२ घंटे बहुत भारी हैं. यह समय ठीक ठाक निकल जाये तो कुछ आशा हो सकती है नहीं तो कुछ भी हो सकता है. आप अपने बच्चों को तो बुला ही लीजिये; और भी किसी को खबर देनी हो तो दे दें."


       मालतीजी कुछ न बोल सकीं . चुपचाप अपने पर्स से एक छोटी सी डायरी निकाली जिस में कुछ ज़रूरी फोन नंबर थे और अवस्थी जी को दे दी. वे अस्पताल के गेट के पास के पी.सी.ओ से फोन करने चले गये. कमलाजी उनके पास बैठ कर र्धीरे धीरे उनकी पीठ पर हाथ फेरती रहीं. किसी को भी शब्द नहीं सूझ रहे थे.
           डाक्टर अवस्थी ने सब से पहले बड़े बेटे आकाश को फोन किया जो टोरंटो में एक जनरल स्टोर चलाता है. सुनकर वह बहुत दुःखी हुआ और बोला-" अंकल यहाँ भी बड़ी समस्या है. रूबी की कॉलेज की परीक्षा चल रही है, गुन्नू के पैर में फ्रैक्चर हुआ है ;और स्टोर में जो हैल्पर है वह भी छुट्टी पर गयी है.  लेकिन आप चिंता न करें मैं जल्दी ही कुछ व्यवस्था करके पहली फ्लाईट ले कर आ जाऊॅगा. "


           फिर डाक्टर अवस्थी ने दूसरे बेटे अंबर को दुबई में फोन किया. फोन उसकी पत्नी दामिनी ने उठाया और बताया- " अंबर तो ऑफिस के काम से शहर से बाहर गये हैं . परंतु आप चिंता न करें. मैं अभी उनको फोन करती हूँ और जैसे ही वापस आयेंगे हम घर के लिये निकल पड़ेंगे "
            तीसरा और आखिरी फोन सुदूर दक्षिण भारत में रह रही बेटी  रेखा को किया . फोन उसकी सास ने उठाया और इस असमय में फोन करने पर झॅुझला उठीं -" अभी रेखा से बात नहीं हो सकती वह सो रही है."


             जब अवस्थी जी ने उनको सारी स्थिति से अवगत कराया तो खीज कुछ कम हुई लेकिन आवाज़ की तल्खी नहीं गयी. " देखिये हमें दुःख हुआ यह जान कर लेकिन रेखा की तबीयत भी कुछ ढीली रहती है आजकल, अभी जगाना ठीक नहीं होगा "
    क्या हुआ है रेखा बिटिया को. घबरा कर पूछा अवस्थी जी ने .
अरे कुछ घबराने की बात नहीं है. वह माँ बनने वाली है नलिन तो कंपनी के काम से विदेश गया है रेखा अकेली ही आ सकेगी. हम कल ही उसको भेजने का इंतज़ाम करते है .
                 फोन करके वापस आये तो देखा कि एक डाक्टर मालती जी से बात कर रहा था-
" मैडम आप के पति का उपचार तो हो रहा है. आप में से कोई भी उनके पास नहीं जा सकता. तो बेहतर होगा कि आप घर चली जायें अगर ज़रूरत होगी तो हम आप को फोन कर देंगे."


              डाक्टर अवस्थी ने भी उसका समर्थन किया .और बताया कि सब बच्चों को फोन कर दिया है पर क्या बात हुई नहीं बताया. आई.सी.यू के दरवाज़े में लगे कॉच से एक बार गोविंद जी को देख कर सब घर की ओर चल पड़े .


              घर पहॅुचीं तो शंभु ने चाय बनाई. थोड़ी सी चाय पी कर वे चुपचाप बैठ गयीं किसी भी तरह चैन नहीं था बस मन ही मन प्रार्थना करती रहीं कि ये ७२ घंटे जल्दी जल्दी बीत जायें . बच्चे आयें तो पिता को अच्छी हालत में देखें. कान फोन पर और ऑखें द्वार पर लगी थीं. बीच बीच में अस्पताल जाकर उसी काँच से पति को देख लेती थीं.
            अभी ५६ घंटे ही हुए थे कि अस्पताल के डाक्टर का फोन मिला कि गोविंद जी की हालत सुधरने लगी है.. अगर ऐसा ही होता रहा तो हमें आशा है कि जल्दी ही वे खतरे से बाहर होंगे. यह मालती जी की प्रार्थनाओं का असर था या डाक्टरों के इलाज का या नियति का करिश्मा . गोविंद जी की हालत में आशातीत सुधार हुआ यहाँ तक कि चौथे ही दिन उनको आई.सी.यू से निकाल कर स्पैशल केयर युनिट में रख दिया गया. यहाँ आई सी यू की सब सुविधायें तो उपलब्ध थीं लेकिन वैसे प्रतिबंध नहीं थे. जब शाम को अन्य मरीज़ों को मिलने के लिये लोग आते थे तब एक एक कर के गोविंद जी को भी देखने की अनुमति मिल गयी थी हालॉकि बात करने की अब भी मनाही थी. छठे दिन की दोपहर तक थोड़े थोड़े अंतराल पर सब बच्चे पहॅुच गये और शाम को मिलने के समय का इंतज़ार करने लगे.


            शाम को जब अस्पतल पहॅुचे तो डाक्टर गोविंद जी को देख रहे थे. मालती जी भी अंदर ही थीं .जब डाक्टर ने सुना कि उनके बच्चे आये हैं तो नर्स को कह कर गोविंद जी का पलंग सिरहाने  से थोड़ा ऊॅचा कर दिया और मालती जी ने उन के बाल सीधे कर दिये. वे कुछ फ्रैश लग रहे थे.


           बच्चे जब उनको मिलने अंदर गये तो खुशी के स्थान पर हैरानी हुई .ऊपर से तो यही कहा -" ओह पापाजी ! हम तो डर ही गये थे जब अंकल का फोन मिला .घबरा रहे थे कि आप को किस हाल में देखेंगे . लेकिन आप को इस तरह देख कर बहुत ही खुशी और तसल्ली हो रही है. लेकिन माता पिता दोनों ने ही देख और समझ लिया कि उनकी ऑखें उनके शब्दों का साथ नहीं दे रहीं . मन के भाव ऑखों से प्रगट हो रहे थे कि आप तो अच्छे भले हो ममा ने नाहक हमें डरा दिया और हम सब काम काज छोड़ कर दौड़े आये. पिता ने धीरे से मुस्कुरा कर हाथ हिला कर उनका अभिवादन किया. तभी नर्स ने कहा --
"आप लोग प्लीज़ बाहर चले जायें और एक - एक कर इनसे मिलें लेकिन ध्यान रहे कि ये अधिक बातें न करें  अभी मुझे इन को एक इंजैक्शन देना है तब आप आ सकते हैं..
       

मालती जी को छोड़ कर सब बच्चे बाहर आ गये और वहीं पड़े एक बेंच पर बैठ गये. दामिनी ने कुछ तीखी आवाज़ में कहा-" यहाँ तो सब ठीक ठाक है हम तो डरते हुए कुछ और ही सोचते आये हैं "
 

आकाश ने कहा -मेरे घर में कितनी परेशानियाँ चल रही हैं मैंने सब कुछ अवस्थी अंकल को भी बताया था लेकिन उनका कहना था कि मुझे हर हाल में आना ही चाहिये."
अम्बर भी मन की बात कह्ने में पीछे नहीं रहा-"हम तो रास्ते भर यही सोचते रहे कि पापाजी के बाद ममा का क्या होगा. कहाँ रहेंगी वे ,किस तरह रहेंगी. हमारा तो दो कमरों का छोटा सा फ्लैट है. जहाँ आये दिन पार्टियाँ होती हैं ऐसे माहौल में ममा का वहाँ गुज़ारा मुश्किल है. आकाश भैया आप ............"
लेकिन आकाश ने बात बीच में ही काट दी -" न भाई मुझ से तो कोई उम्मीद मत करना . याद है मुझे पिछली बार ममा पापाजी जब वहाँ आये थे तो ममा खुद भी कितनी परेशान हुई थीं और हम सब को भी दुखी कर दिया था. छः महीने का वीज़ा था तो भी एक महीने के बाद ही पापाजी को उनको लेकर वापस आना पड़ा."
सब रेखा की तरफ देखने लगे रेखा ने भी हामी नहीं भरी ,बोली- " मेरी तरफ इस तरह क्या देख रहे हो. मैं तो खुद कितनी मुश्किल से इस संयुक्त परिवार में दिन काट रही हूँ मैं ही जानती हॅू बस इंतज़ार कर रही हूँ कि कब नलिन को विदेश में कोई अच्छी नौकरी मिल जाये और मुझे इस ज़िंदगी से मुक्ति मिले. ऐसे में ममा की ज़िम्मेदारी न बाबा न और अब ममा अकेली कहाँ हैं अब तो पापाजी भी हैं ..........


दामिनी -"हम तो यही सोच रहे थे कि ..................... तभी मालती जी को आते देख कर सब चुप हो गये . आकाश ने फुसफुसा कर कहा-इस बारे में बाद में विचार करें गे . तब तक मैं पापाजी से भी बात करूॅगा.
इस बारे में जल्दी ही कुछ फैसला हो जाना चाहिये.
           मालती जी आयीं तो इतने दिनों के रुके हुए ऑसू बह निकले और वे आकाश के कंधे पर सर रख कर रोने लगीं. --आकाश ने कहा ममा अब यह रोना बंद करिये. सब तो ठीक ठाक है. पापाजी अब तो स्वस्थ हैं हमें तो उनको देख कर बहुत तसल्ली हुई है. फिर सब एक एक कर के भीतर गये और पापाजी को देख कर आ गये. आकाश ने कहा-"ममा आप बहुत थक गयीं हैं आज आप घर जाइये मैं रात को पापाजी के पास रहॅूगा. "


          मालती जी सहमत हो गयीं और कहा-" ठीक है तुम खाना खाकर आ जाना तब मैं घर चली जाऊॅगी ."
   " नहीं ममा मैं तो अभी थोड़ी देर पहले ही पहॅुचा हूँ और आते ही खाना खाया है अब मैं कुछ नहीं खाऊॅगा .आप जाइये " सब घर चले गये तो आकाश कमरे के अंदर चला गया.. गोविंद जी तब तक थक कर सो गये थे वह भी वहाँ पड़ी कुर्सी पर बैठ गया और ऑखें मूँ्द कर कुछ सोचने लगा.
     घर पहॅुच कर मालती जी सब बच्चों से बड़े स्नेह से मिलीं और सब की कुशलता पूछी. कुछ देर तक बातें करने के बाद उन्हों ने कहा-" चलो अब खाना खाओ और आराम करो. बहुत थक गये होगे." खाना खाकर वे भी अपने कमरे में सोने चली गयीं. आज उनको बड़ी राहत महसूस हो रही थी बच्चों के आ जाने से बहुत ताकत और हिम्मत अनुभव कर रही थीं..जल्दी ही उन की ऑख लग गयी. न जाने कितनी देर सोईं थी  वे कि प्यास लगने से नींद खुल गयी पानी पीने के लिये रसोई की तरफ जा रही थीं कि अंबर के कमरे में रोशनी देख कर उधर मुड़ गयीं दरवाज़े के पास ही पहॅुची थीं कि भीतर से बातों की आवाज़ सुनाई दी.,
रेखा की आवाज़ थी-" भैया अब क्या सोचा है ,क्या करना है ?


उत्तर दामिनी ने दिया-हम तो मॉजी के बारे में चिंतित थे कि वे अकेली कैसे रहेंगी अब तो दोनो का ही प्रबंध करना होगा." सुन कर चौंक गयीं मालती जी.
अम्बर ने कहा -"ठीक तो वही होगा जो आकाश भैया ने कहा है. पापाजी को चाहिये कि अब अपनी वसीयत लिख दें यह घर बेच बाच कर पैसे हमे बॅाट दें  उनके रह्ने का इंतज़ाम किसी ओल्ड एज होम में कर देंगे. वहाँ उनको अपनी कंपनी भी मिलेगी और हमें भी उनकी चिंता नहीं रहेगी. जो भी खर्च होगा हम मिल कर उठा लेंगे. आज रात आकाश भैया पापाजी से भी बात कर लेंगे."


दामिनी ने कहा- " ठीक तो है  सब कुछ जितना जल्दी हो जाये अच्छा है. अब तो तेरह दिन तक रुकने की भी  कोई ज़रूरत नहीं है."
  रेखा ने कहा -"भैया मेरा हिस्सा भी बराबर का होना चहिये. मेरी सास ने कह कर भेजा है कि जायदाद में तुम्हारा भी हिस्सा है ले कर ही आना."
          मालती जी से और सुना नहीं गया. यही हमारे बच्चे हैं जिन के पालन -पोषण ,पढाई लिखाई पर हम ने अपना पेट काट कर पैसे लगाये कि ये अपने पैरों पर खड़े हो कर अपना जीवन आराम से चलायें. और  बुढ़ापे में हमको सहारा दें. अब जब ये अपने जीवन में सुखी हैं, खुश हैं तो इनकी नज़र इस मकान और हमारी जमा-पॅूजी  पर है. .हम को  ओल्ड एज होम में भेजने की इच्छा है.  क्या इसी दिन के लिये लोग संतान की इच्छा करते हैं. पैर घसीटती हुई अपने कमरे में आ गयीं .प्यास से गला सूख रहा था .जीभ में कॉटे उग आये थे लेकिन न तो पानी पीने की इच्छा रही थी और न रसोई तक जाने की हिम्मत. ध्यान बार बार पति की ओर ही जाता था ------
"हे भगवान आकाश ने अगर यही बातें अपने पिता से कही होंगी तो उन पर क्या बीती होगी.


वे डर गयीं कि जो अनहोनी इतने भारी दिल के दौरे से नहीं घटी वह इस आघात से न घट जाये. वे अपने पति की सलामती के लिये ईश्वर से प्रार्थना करती रहीं.
         रात कैसे बैठे बैठे ही बीत गयी पता नहीं चला. सुबह हुई तो नहा धो कर पूजा की. आज तो पूजा में भी मन नहीं  लग रहा था. बस पति को सकुशल देखने की कामना और प्रार्थना करती हुई अस्पताल की ओर  चल पड़ीं. जाकर देखा सामने पड़े स्टूल पर पैर फैलाये आकाश सो रहा था. गोविंद जी की ऑखें खुली थीं .वे वीरान सी ऑखों से छत की तरफ टकटकी लगाये देख रहे थे. घबरा गयीं वे यह देख कर. धीरे से उनको छुआ तो वे चौंक पड़े -

" क्या हुआ इतनी जल्दी जाग गये ?
जागा क्या मुझे तो रात भर नींद ही नहीं आयी.
तो डाक्टर से कोई दवाई क्यों नहीं ले ली.
नहीं मालती उसका कोई असर नहीं होता .मालती जी समझ गयीं कि यहाँ भी बेटे ने डंक मार दिया है.
चाय लाई हूँ पीयोगे.?
अपने लिये भी लाई हो न ? आओ एक साथ पीते हैं .मालती जी ने दो कपों में चाय डाली और सहारा दे कर पति को उठाया. दोनो चाय पी ही रहे थे कि आकाश भी उठ गया. -" अरे ममा आप कब आयीं , पता ही नहीं लगा. अभी अभी ऑख लगी थी
.  हाँ बेटा मैं भी अभी आयी हूँ तुम्हारा कल इतना लंबा थका देने वाला सफर था. फिर मरीज़ के साथ रात भर जागना बहुत मुश्किल होता है. अब मैं आ गयी हूँ तुम घर जा कर आराम करो. चाय पियोगे ?
नहीं ममा मैं घर जाकर फ्रैश हो कर ही कुछ खाऊँ-पीयूँगा "


मालती जी को लगा कि वह जल्दी ही घर जाना चाहता है ताकि अपने भाई-बहन के साथ सारी बात बॉट सके..
                वह जाने लगा तो गोविंद जी ने कहा-" बेटा आकाश बहुत बहुत धन्यवाद ; तुम ने तो मेरी ऑखें खोल दी हैं  मुझे तो कभी वसीयत करने और मकान बेचने का ख्याल ही नहीं आया. आज अवस्थी अंकल को कहना कि वकील को ले कर यहीं आ जायें .तुम्हारी सलाह मान कर मैं आज ही अपनी वसीयत लिखवा दॅूगा. "
"जी पापाजी "कह कर वह तेज़ी से दरवाज़े की तरफ मुड़ा . मालती जी को लगा कि वह जल्दी से जा कर अपनी उपलब्धि के बारे में सब को बताना चाहता है.
         इस के बाद कोई कुछ नहीं बोला बस एक दूसरे का हाथ पकड़े बैठे रहे. स्पर्श से ही एक दूसरे से अपनी भावनायें बॉटते रहे.
            दोपहर को जब अवस्थी जी वकील साहब के साथ आये तो गोविंद जी से बोले -" यह तुम क्या कर रहे हो ? अभी तो ज़रा अच्छे हुए हो. वसीयत लिखने की इतनी जल्दी क्या है. अभी तो बच्चे आये हैं थोड़ा ठीक हो जाओ "घर चल कर लिखवा लेना.


            गोविंद जी ने कहा- जल्दी है भई मुझे जल्दी है . तुम मेरी जल्दी नहीं समझ सकोगे .किस्मत वाले हो जो तुम्हारी कोई संतान नहीं है. "
             अवस्थी जी ने मालती जी को कुछ कहना चाहा तो उन्हों ने भी इशारे से उनको रोक कर इतना ही कहा- भाई साहब उनको मत रोकिये ; जो भी करना चाह्ते हैं ठीक है कर लेने दीजिये. अवस्थी जी भी चुप हो गये. और गोविंद जी लिखवाने लगे.................................
            शाम के समय सारे बच्चे जब अस्पताल के कमरे में आये तो गोविंद जी पलंग की पीठ का सहारा लेकर बैठे थे. डाक्टर अवस्थी ,कमलाजी,वकील साहब सभी को मौजूद देख कर चारो बच्चे अपनी खुशी छुपा नहीं सके .कि यह सब इतनी आसानी से और इतनी जल्दी हो गया.
          . गोविंद जी कुछ ऊॅची आवाज़ में बोले.-" मैं अपने प्यारे बच्चों का बहुत आभारी हूँ जो मेरी बीमारी की खबर सुन कर अपने अपने घर और काम छोड़ कर दौड़े आये हैं अब मैं ठीक हूँ इसलिये तुम सब वापस जा सकते हो आकाश . ने कल रात मुझे बहुत अच्छी बात सुझाई जो अब तक मेरे दिमाग में नहीं आयी थी. मुझे यह भी समझ आया कि यह केवल आकाश की नहीं अपितु मेरे सभी बच्चों की इच्छा है. तो उनकी इस इच्छा और सलाह का मान रखते हुए आज मैने अपनी वसीयत लिखवा दी है. जिस पर गवाह के रूप में मेरे मित्र डाक्टर अवस्थी और अस्पताल में मेरी देखभाल कर रहे डाक्टर गुप्ता ने हस्ताक्षर कर दिये हैं वकील साहब आप इनको मेरी वसीयत सुना दें और तीनो बच्चों को एक एक कापी दे दें. "
          कुछ उत्तेजना के कारण और कुछ ज़ोर से बोलने से वे थक गये थे और उनकी सॉस फूलने लगी थी. डाक्टर अवस्थी ने उनको लिटा दिया और मालती जी उनका माथा सहलाने लगीं. वकील साहब वसीयत पढ़ने लगे----- बच्चे सॉस रोक कर सुनने लगे..........................
             मैं गोविंद लाल गुप्ता सुपुत्र श्री देवी दयाल गुप्ता अपने पूरे होशो-हवास में बिना किसी दबाव या प्रतिबंध के यह वसीयत लिख रहा हूँ मेरी सारी धन-संपत्ति मेरी स्वयं की अर्जित की हुई है. इसपर केवल मेरी पत्नी मालती गुप्ता का ही अधिकार है जिन्हों ने जीवन की इस लंबी यात्रा में सदा मेरा साथ निभाया है और प्रत्येक स्थिति में मेरी ताकत बन कर मुझे सहारा दिया है और संभाला है. और किसी का इस संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं है.
           . अपने तीनों बच्चों को उनका हिस्सा उनकी पढ़ाई लिखाई और शादियों में खर्च  कर के ज़ेवर, और घर बसाने के लिये ज़रूरी धन के रूप में मैं दे चुका हूँ अब मुझे उनको कुछ भी नहीं देना.


        रहा यह मकान तो इसको मैने और मेरी पत्नी ने बड़े अरमानों से बनवाया है ठीक उसी तरह जैसे कोई पक्षी एक एक तिनका चुन कर अपना घोंसला बनाता है. इस पर अभी मेरा और मेरे बाद मेरी पत्नी का ही अधिकार होगा लेकिन यह घर कभी भी बेचा नहीं जायेगा .हम इसको एक ओल्ड एज होम बनायेंगे. जिस में वे वृद्ध रहेंगे जिन की उनके बच्चों को ज़रूरत नहीं है.  या जिन को अपने पास रखने की उनके बच्चों की इच्छा ही नहीं है . न तो उन बच्चों के पास अपने बूढ़े माता पिता के लिये कोई समय है, न जगह और न पैसा."
         पढ़ लेने के बाद वकील साहब ने एक एक कापी तीनों बच्चों को देदी.  अवस्थी जी कमला जी  और वकील साहब एक साथ कमरे से निकल गये. बच्चों के चेहरे का रंग उड. गया .वे तो समझ ही नहीं पा रहे थे कि करें तो क्या करें और कहें  तो क्या. ? गोविंद जी उनकी तरफ पीठ फेर कर लेटे रहे और मालती जी उनके सिरहाने खड़ी थी. 

 
        अंबर आकाश और रेखा उनको कुछ कहने को उनकी तरफ बढ़े तो मालती जी ने कहा -" बेटा आप को देर हो रही है अब जाओ "


        हारे हुए जुआरी की तरह चारो अपने पैर घसीटते हुए बाहर निकल गये. और चल पड़े उस मकान  की ओर जिसे अभी अभी उनके पिता ने ओल्ड एज होम की संज्ञा दी है.


                        -०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-०-

 

निशिपाल सूरी ,
५८-रिवर व्यू एन्क्लेव ,
टैल्को कॉलोनी ,
जमशेद्पुर

.

COMMENTS

BLOGGER: 1
Loading...

विज्ञापन

----
.... विज्ञापन ....

-----****-----

|नई रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$count=6$page=1$va=0$au=0

विज्ञापन --**--

|कथा-कहानी_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts$s=200

|हास्य-व्यंग्य_$type=blogging$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|लोककथाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|लघुकथाएँ_$type=list$au=0$count=5$com=0$page=1$src=random-posts

|काव्य जगत_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

-- विज्ञापन --

---

|बच्चों के लिए रचनाएँ_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$count=6$page=1$src=random-posts

|विविधा_$type=complex$tbg=rainbow$au=0$va=0$count=6$page=1$src=random-posts

 आलेख कविता कहानी व्यंग्य 14 सितम्बर 14 september 15 अगस्त 2 अक्टूबर अक्तूबर अंजनी श्रीवास्तव अंजली काजल अंजली देशपांडे अंबिकादत्त व्यास अखिलेश कुमार भारती अखिलेश सोनी अग्रसेन अजय अरूण अजय वर्मा अजित वडनेरकर अजीत प्रियदर्शी अजीत भारती अनंत वडघणे अनन्त आलोक अनमोल विचार अनामिका अनामी शरण बबल अनिमेष कुमार गुप्ता अनिल कुमार पारा अनिल जनविजय अनुज कुमार आचार्य अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ अनुज खरे अनुपम मिश्र अनूप शुक्ल अपर्णा शर्मा अभिमन्यु अभिषेक ओझा अभिषेक कुमार अम्बर अभिषेक मिश्र अमरपाल सिंह आयुष्कर अमरलाल हिंगोराणी अमित शर्मा अमित शुक्ल अमिय बिन्दु अमृता प्रीतम अरविन्द कुमार खेड़े अरूण देव अरूण माहेश्वरी अर्चना चतुर्वेदी अर्चना वर्मा अर्जुन सिंह नेगी अविनाश त्रिपाठी अशोक गौतम अशोक जैन पोरवाल अशोक शुक्ल अश्विनी कुमार आलोक आई बी अरोड़ा आकांक्षा यादव आचार्य बलवन्त आचार्य शिवपूजन सहाय आजादी आदित्य प्रचंडिया आनंद टहलरामाणी आनन्द किरण आर. के. नारायण आरकॉम आरती आरिफा एविस आलेख आलोक कुमार आलोक कुमार सातपुते आशीष कुमार त्रिवेदी आशीष श्रीवास्तव आशुतोष आशुतोष शुक्ल इंदु संचेतना इन्दिरा वासवाणी इन्द्रमणि उपाध्याय इन्द्रेश कुमार इलाहाबाद ई-बुक ईबुक ईश्वरचन्द्र उपन्यास उपासना उपासना बेहार उमाशंकर सिंह परमार उमेश चन्द्र सिरसवारी उमेशचन्द्र सिरसवारी उषा छाबड़ा उषा रानी ऋतुराज सिंह कौल ऋषभचरण जैन एम. एम. चन्द्रा एस. एम. चन्द्रा कथासरित्सागर कर्ण कला जगत कलावंती सिंह कल्पना कुलश्रेष्ठ कवि कविता कहानी कहानी संग्रह काजल कुमार कान्हा कामिनी कामायनी कार्टून काशीनाथ सिंह किताबी कोना किरन सिंह किशोरी लाल गोस्वामी कुंवर प्रेमिल कुबेर कुमार करन मस्ताना कुसुमलता सिंह कृश्न चन्दर कृष्ण कृष्ण कुमार यादव कृष्ण खटवाणी कृष्ण जन्माष्टमी के. पी. सक्सेना केदारनाथ सिंह कैलाश मंडलोई कैलाश वानखेड़े कैशलेस कैस जौनपुरी क़ैस जौनपुरी कौशल किशोर श्रीवास्तव खिमन मूलाणी गंगा प्रसाद श्रीवास्तव गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर ग़ज़लें गजानंद प्रसाद देवांगन गजेन्द्र नामदेव गणि राजेन्द्र विजय गणेश चतुर्थी गणेश सिंह गांधी जयंती गिरधारी राम गीत गीता दुबे गीता सिंह गुंजन शर्मा गुडविन मसीह गुनो सामताणी गुरदयाल सिंह गोरख प्रभाकर काकडे गोवर्धन यादव गोविन्द वल्लभ पंत गोविन्द सेन चंद्रकला त्रिपाठी चंद्रलेखा चतुष्पदी चन्द्रकिशोर जायसवाल चन्द्रकुमार जैन चाँद पत्रिका चिकित्सा शिविर चुटकुला ज़कीया ज़ुबैरी जगदीप सिंह दाँगी जयचन्द प्रजापति कक्कूजी जयश्री जाजू जयश्री राय जया जादवानी जवाहरलाल कौल जसबीर चावला जावेद अनीस जीवंत प्रसारण जीवनी जीशान हैदर जैदी जुगलबंदी जुनैद अंसारी जैक लंडन ज्ञान चतुर्वेदी ज्योति अग्रवाल टेकचंद ठाकुर प्रसाद सिंह तकनीक तक्षक तनूजा चौधरी तरुण भटनागर तरूण कु सोनी तन्वीर ताराशंकर बंद्योपाध्याय तीर्थ चांदवाणी तुलसीराम तेजेन्द्र शर्मा तेवर तेवरी त्रिलोचन दामोदर दत्त दीक्षित दिनेश बैस दिलबाग सिंह विर्क दिलीप भाटिया दिविक रमेश दीपक आचार्य दुर्गाष्टमी देवी नागरानी देवेन्द्र कुमार मिश्रा देवेन्द्र पाठक महरूम दोहे धर्मेन्द्र निर्मल धर्मेन्द्र राजमंगल नइमत गुलची नजीर नज़ीर अकबराबादी नन्दलाल भारती नरेंद्र शुक्ल नरेन्द्र कुमार आर्य नरेन्द्र कोहली नरेन्‍द्रकुमार मेहता नलिनी मिश्र नवदुर्गा नवरात्रि नागार्जुन नाटक नामवर सिंह निबंध नियम निर्मल गुप्ता नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’ नीरज खरे नीलम महेंद्र नीला प्रसाद पंकज प्रखर पंकज मित्र पंकज शुक्ला पंकज सुबीर परसाई परसाईं परिहास पल्लव पल्लवी त्रिवेदी पवन तिवारी पाक कला पाठकीय पालगुम्मि पद्मराजू पुनर्वसु जोशी पूजा उपाध्याय पोपटी हीरानंदाणी पौराणिक प्रज्ञा प्रताप सहगल प्रतिभा प्रतिभा सक्सेना प्रदीप कुमार प्रदीप कुमार दाश दीपक प्रदीप कुमार साह प्रदोष मिश्र प्रभात दुबे प्रभु चौधरी प्रमिला भारती प्रमोद कुमार तिवारी प्रमोद भार्गव प्रमोद यादव प्रवीण कुमार झा प्रांजल धर प्राची प्रियंवद प्रियदर्शन प्रेम कहानी प्रेम दिवस प्रेम मंगल फिक्र तौंसवी फ्लेनरी ऑक्नर बंग महिला बंसी खूबचंदाणी बकर पुराण बजरंग बिहारी तिवारी बरसाने लाल चतुर्वेदी बलबीर दत्त बलराज सिंह सिद्धू बलूची बसंत त्रिपाठी बातचीत बाल कथा बाल कलम बाल दिवस बालकथा बालकृष्ण भट्ट बालगीत बृज मोहन बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष बेढब बनारसी बैचलर्स किचन बॉब डिलेन भरत त्रिवेदी भागवत रावत भारत कालरा भारत भूषण अग्रवाल भारत यायावर भावना राय भावना शुक्ल भीष्म साहनी भूतनाथ भूपेन्द्र कुमार दवे मंजरी शुक्ला मंजीत ठाकुर मंजूर एहतेशाम मंतव्य मथुरा प्रसाद नवीन मदन सोनी मधु त्रिवेदी मधु संधु मधुर नज्मी मधुरा प्रसाद नवीन मधुरिमा प्रसाद मधुरेश मनीष कुमार सिंह मनोज कुमार मनोज कुमार झा मनोज कुमार पांडेय मनोज कुमार श्रीवास्तव मनोज दास ममता सिंह मयंक चतुर्वेदी महापर्व छठ महाभारत महावीर प्रसाद द्विवेदी महाशिवरात्रि महेंद्र भटनागर महेन्द्र देवांगन माटी महेश कटारे महेश कुमार गोंड हीवेट महेश सिंह महेश हीवेट मानसून मार्कण्डेय मिलन चौरसिया मिलन मिलान कुन्देरा मिशेल फूको मिश्रीमल जैन तरंगित मीनू पामर मुकेश वर्मा मुक्तिबोध मुर्दहिया मृदुला गर्ग मेराज फैज़ाबादी मैक्सिम गोर्की मैथिली शरण गुप्त मोतीलाल जोतवाणी मोहन कल्पना मोहन वर्मा यशवंत कोठारी यशोधरा विरोदय यात्रा संस्मरण योग योग दिवस योगासन योगेन्द्र प्रताप मौर्य योगेश अग्रवाल रक्षा बंधन रच रचना समय रजनीश कांत रत्ना राय रमेश उपाध्याय रमेश राज रमेशराज रवि रतलामी रवींद्र नाथ ठाकुर रवीन्द्र अग्निहोत्री रवीन्द्र नाथ त्यागी रवीन्द्र संगीत रवीन्द्र सहाय वर्मा रसोई रांगेय राघव राकेश अचल राकेश दुबे राकेश बिहारी राकेश भ्रमर राकेश मिश्र राजकुमार कुम्भज राजन कुमार राजशेखर चौबे राजीव रंजन उपाध्याय राजेन्द्र कुमार राजेन्द्र विजय राजेश कुमार राजेश गोसाईं राजेश जोशी राधा कृष्ण राधाकृष्ण राधेश्याम द्विवेदी राम कृष्ण खुराना राम शिव मूर्ति यादव रामचंद्र शुक्ल रामचन्द्र शुक्ल रामचरन गुप्त रामवृक्ष सिंह रावण राहुल कुमार राहुल सिंह रिंकी मिश्रा रिचर्ड फाइनमेन रिलायंस इन्फोकाम रीटा शहाणी रेंसमवेयर रेणु कुमारी रेवती रमण शर्मा रोहित रुसिया लक्ष्मी यादव लक्ष्मीकांत मुकुल लक्ष्मीकांत वैष्णव लखमी खिलाणी लघु कथा लघुकथा लतीफ घोंघी ललित ग ललित गर्ग ललित निबंध ललित साहू जख्मी ललिता भाटिया लाल पुष्प लावण्या दीपक शाह लीलाधर मंडलोई लू सुन लूट लोक लोककथा लोकतंत्र का दर्द लोकमित्र लोकेन्द्र सिंह विकास कुमार विजय केसरी विजय शिंदे विज्ञान कथा विद्यानंद कुमार विनय भारत विनीत कुमार विनीता शुक्ला विनोद कुमार दवे विनोद तिवारी विनोद मल्ल विभा खरे विमल चन्द्राकर विमल सिंह विरल पटेल विविध विविधा विवेक प्रियदर्शी विवेक रंजन श्रीवास्तव विवेक सक्सेना विवेकानंद विवेकानन्द विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक विश्वनाथ प्रसाद तिवारी विष्णु नागर विष्णु प्रभाकर वीणा भाटिया वीरेन्द्र सरल वेणीशंकर पटेल ब्रज वेलेंटाइन वेलेंटाइन डे वैभव सिंह व्यंग्य व्यंग्य के बहाने व्यंग्य जुगलबंदी व्यथित हृदय शंकर पाटील शगुन अग्रवाल शबनम शर्मा शब्द संधान शम्भूनाथ शरद कोकास शशांक मिश्र भारती शशिकांत सिंह शहीद भगतसिंह शामिख़ फ़राज़ शारदा नरेन्द्र मेहता शालिनी तिवारी शालिनी मुखरैया शिक्षक दिवस शिवकुमार कश्यप शिवप्रसाद कमल शिवरात्रि शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी शीला नरेन्द्र त्रिवेदी शुभम श्री शुभ्रता मिश्रा शेखर मलिक शेषनाथ प्रसाद शैलेन्द्र सरस्वती शैलेश त्रिपाठी शौचालय श्याम गुप्त श्याम सखा श्याम श्याम सुशील श्रीनाथ सिंह श्रीमती तारा सिंह श्रीमद्भगवद्गीता श्रृंगी श्वेता अरोड़ा संजय दुबे संजय सक्सेना संजीव संजीव ठाकुर संद मदर टेरेसा संदीप तोमर संपादकीय संस्मरण संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018 सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन सतीश कुमार त्रिपाठी सपना महेश सपना मांगलिक समीक्षा सरिता पन्थी सविता मिश्रा साइबर अपराध साइबर क्राइम साक्षात्कार सागर यादव जख्मी सार्थक देवांगन सालिम मियाँ साहित्य समाचार साहित्यिक गतिविधियाँ साहित्यिक बगिया सिंहासन बत्तीसी सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध सीताराम गुप्ता सीताराम साहू सीमा असीम सक्सेना सीमा शाहजी सुगन आहूजा सुचिंता कुमारी सुधा गुप्ता अमृता सुधा गोयल नवीन सुधेंदु पटेल सुनीता काम्बोज सुनील जाधव सुभाष चंदर सुभाष चन्द्र कुशवाहा सुभाष नीरव सुभाष लखोटिया सुमन सुमन गौड़ सुरभि बेहेरा सुरेन्द्र चौधरी सुरेन्द्र वर्मा सुरेश चन्द्र सुरेश चन्द्र दास सुविचार सुशांत सुप्रिय सुशील कुमार शर्मा सुशील यादव सुशील शर्मा सुषमा गुप्ता सुषमा श्रीवास्तव सूरज प्रकाश सूर्य बाला सूर्यकांत मिश्रा सूर्यकुमार पांडेय सेल्फी सौमित्र सौरभ मालवीय स्नेहमयी चौधरी स्वच्छ भारत स्वतंत्रता दिवस स्वराज सेनानी हबीब तनवीर हरि भटनागर हरि हिमथाणी हरिकांत जेठवाणी हरिवंश राय बच्चन हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन हरिशंकर परसाई हरीश कुमार हरीश गोयल हरीश नवल हरीश भादानी हरीश सम्यक हरे प्रकाश उपाध्याय हाइकु हाइगा हास-परिहास हास्य हास्य-व्यंग्य हिंदी दिवस विशेष हुस्न तबस्सुम 'निहाँ' biography dohe hindi divas hindi sahitya indian art kavita review satire shatak tevari undefined
नाम

 आलेख ,1, कविता ,1, कहानी ,1, व्यंग्य ,1,14 सितम्बर,7,14 september,6,15 अगस्त,4,2 अक्टूबर अक्तूबर,1,अंजनी श्रीवास्तव,1,अंजली काजल,1,अंजली देशपांडे,1,अंबिकादत्त व्यास,1,अखिलेश कुमार भारती,1,अखिलेश सोनी,1,अग्रसेन,1,अजय अरूण,1,अजय वर्मा,1,अजित वडनेरकर,1,अजीत प्रियदर्शी,1,अजीत भारती,1,अनंत वडघणे,1,अनन्त आलोक,1,अनमोल विचार,1,अनामिका,3,अनामी शरण बबल,1,अनिमेष कुमार गुप्ता,1,अनिल कुमार पारा,1,अनिल जनविजय,1,अनुज कुमार आचार्य,5,अनुज कुमार आचार्य बैजनाथ,1,अनुज खरे,1,अनुपम मिश्र,1,अनूप शुक्ल,14,अपर्णा शर्मा,6,अभिमन्यु,1,अभिषेक ओझा,1,अभिषेक कुमार अम्बर,1,अभिषेक मिश्र,1,अमरपाल सिंह आयुष्कर,2,अमरलाल हिंगोराणी,1,अमित शर्मा,3,अमित शुक्ल,1,अमिय बिन्दु,1,अमृता प्रीतम,1,अरविन्द कुमार खेड़े,5,अरूण देव,1,अरूण माहेश्वरी,1,अर्चना चतुर्वेदी,1,अर्चना वर्मा,2,अर्जुन सिंह नेगी,1,अविनाश त्रिपाठी,1,अशोक गौतम,3,अशोक जैन पोरवाल,14,अशोक शुक्ल,1,अश्विनी कुमार आलोक,1,आई बी अरोड़ा,1,आकांक्षा यादव,1,आचार्य बलवन्त,1,आचार्य शिवपूजन सहाय,1,आजादी,3,आदित्य प्रचंडिया,1,आनंद टहलरामाणी,1,आनन्द किरण,3,आर. के. नारायण,1,आरकॉम,1,आरती,1,आरिफा एविस,5,आलेख,3789,आलोक कुमार,2,आलोक कुमार सातपुते,1,आशीष कुमार त्रिवेदी,5,आशीष श्रीवास्तव,1,आशुतोष,1,आशुतोष शुक्ल,1,इंदु संचेतना,1,इन्दिरा वासवाणी,1,इन्द्रमणि उपाध्याय,1,इन्द्रेश कुमार,1,इलाहाबाद,2,ई-बुक,326,ईबुक,182,ईश्वरचन्द्र,1,उपन्यास,257,उपासना,1,उपासना बेहार,5,उमाशंकर सिंह परमार,1,उमेश चन्द्र सिरसवारी,2,उमेशचन्द्र सिरसवारी,1,उषा छाबड़ा,1,उषा रानी,1,ऋतुराज सिंह कौल,1,ऋषभचरण जैन,1,एम. एम. चन्द्रा,17,एस. एम. चन्द्रा,2,कथासरित्सागर,1,कर्ण,1,कला जगत,105,कलावंती सिंह,1,कल्पना कुलश्रेष्ठ,11,कवि,2,कविता,2744,कहानी,2067,कहानी संग्रह,245,काजल कुमार,7,कान्हा,1,कामिनी कामायनी,5,कार्टून,7,काशीनाथ सिंह,2,किताबी कोना,7,किरन सिंह,1,किशोरी लाल गोस्वामी,1,कुंवर प्रेमिल,1,कुबेर,7,कुमार करन मस्ताना,1,कुसुमलता सिंह,1,कृश्न चन्दर,6,कृष्ण,3,कृष्ण कुमार यादव,1,कृष्ण खटवाणी,1,कृष्ण जन्माष्टमी,5,के. पी. सक्सेना,1,केदारनाथ सिंह,1,कैलाश मंडलोई,3,कैलाश वानखेड़े,1,कैशलेस,1,कैस जौनपुरी,3,क़ैस जौनपुरी,1,कौशल किशोर श्रीवास्तव,1,खिमन मूलाणी,1,गंगा प्रसाद श्रीवास्तव,1,गंगाप्रसाद शर्मा गुणशेखर,1,ग़ज़लें,484,गजानंद प्रसाद देवांगन,2,गजेन्द्र नामदेव,1,गणि राजेन्द्र विजय,1,गणेश चतुर्थी,1,गणेश सिंह,4,गांधी जयंती,1,गिरधारी राम,4,गीत,3,गीता दुबे,1,गीता सिंह,1,गुंजन शर्मा,1,गुडविन मसीह,2,गुनो सामताणी,1,गुरदयाल सिंह,1,गोरख प्रभाकर काकडे,1,गोवर्धन यादव,1,गोविन्द वल्लभ पंत,1,गोविन्द सेन,5,चंद्रकला त्रिपाठी,1,चंद्रलेखा,1,चतुष्पदी,1,चन्द्रकिशोर जायसवाल,1,चन्द्रकुमार जैन,6,चाँद पत्रिका,1,चिकित्सा शिविर,1,चुटकुला,71,ज़कीया ज़ुबैरी,1,जगदीप सिंह दाँगी,1,जयचन्द प्रजापति कक्कूजी,2,जयश्री जाजू,4,जयश्री राय,1,जया जादवानी,1,जवाहरलाल कौल,1,जसबीर चावला,1,जावेद अनीस,8,जीवंत प्रसारण,129,जीवनी,1,जीशान हैदर जैदी,1,जुगलबंदी,5,जुनैद अंसारी,1,जैक लंडन,1,ज्ञान चतुर्वेदी,2,ज्योति अग्रवाल,1,टेकचंद,1,ठाकुर प्रसाद सिंह,1,तकनीक,30,तक्षक,1,तनूजा चौधरी,1,तरुण भटनागर,1,तरूण कु सोनी तन्वीर,1,ताराशंकर बंद्योपाध्याय,1,तीर्थ चांदवाणी,1,तुलसीराम,1,तेजेन्द्र शर्मा,2,तेवर,1,तेवरी,8,त्रिलोचन,8,दामोदर दत्त दीक्षित,1,दिनेश बैस,6,दिलबाग सिंह विर्क,1,दिलीप भाटिया,1,दिविक रमेश,1,दीपक आचार्य,48,दुर्गाष्टमी,1,देवी नागरानी,20,देवेन्द्र कुमार मिश्रा,2,देवेन्द्र पाठक महरूम,1,दोहे,1,धर्मेन्द्र निर्मल,2,धर्मेन्द्र राजमंगल,2,नइमत गुलची,1,नजीर नज़ीर अकबराबादी,1,नन्दलाल भारती,2,नरेंद्र शुक्ल,2,नरेन्द्र कुमार आर्य,1,नरेन्द्र कोहली,2,नरेन्‍द्रकुमार मेहता,9,नलिनी मिश्र,1,नवदुर्गा,1,नवरात्रि,1,नागार्जुन,1,नाटक,87,नामवर सिंह,1,निबंध,3,नियम,1,निर्मल गुप्ता,2,नीतू सुदीप्ति ‘नित्या’,1,नीरज खरे,1,नीलम महेंद्र,1,नीला प्रसाद,1,पंकज प्रखर,4,पंकज मित्र,2,पंकज शुक्ला,1,पंकज सुबीर,3,परसाई,1,परसाईं,1,परिहास,4,पल्लव,1,पल्लवी त्रिवेदी,2,पवन तिवारी,2,पाक कला,22,पाठकीय,61,पालगुम्मि पद्मराजू,1,पुनर्वसु जोशी,9,पूजा उपाध्याय,2,पोपटी हीरानंदाणी,1,पौराणिक,1,प्रज्ञा,1,प्रताप सहगल,1,प्रतिभा,1,प्रतिभा सक्सेना,1,प्रदीप कुमार,1,प्रदीप कुमार दाश दीपक,1,प्रदीप कुमार साह,11,प्रदोष मिश्र,1,प्रभात दुबे,1,प्रभु चौधरी,2,प्रमिला भारती,1,प्रमोद कुमार तिवारी,1,प्रमोद भार्गव,2,प्रमोद यादव,14,प्रवीण कुमार झा,1,प्रांजल धर,1,प्राची,309,प्रियंवद,2,प्रियदर्शन,1,प्रेम कहानी,1,प्रेम दिवस,2,प्रेम मंगल,1,फिक्र तौंसवी,1,फ्लेनरी ऑक्नर,1,बंग महिला,1,बंसी खूबचंदाणी,1,बकर पुराण,1,बजरंग बिहारी तिवारी,1,बरसाने लाल चतुर्वेदी,1,बलबीर दत्त,1,बलराज सिंह सिद्धू,1,बलूची,1,बसंत त्रिपाठी,2,बातचीत,1,बाल कथा,326,बाल कलम,23,बाल दिवस,3,बालकथा,48,बालकृष्ण भट्ट,1,बालगीत,8,बृज मोहन,2,बृजेन्द्र श्रीवास्तव उत्कर्ष,1,बेढब बनारसी,1,बैचलर्स किचन,1,बॉब डिलेन,1,भरत त्रिवेदी,1,भागवत रावत,1,भारत कालरा,1,भारत भूषण अग्रवाल,1,भारत यायावर,2,भावना राय,1,भावना शुक्ल,5,भीष्म साहनी,1,भूतनाथ,1,भूपेन्द्र कुमार दवे,1,मंजरी शुक्ला,2,मंजीत ठाकुर,1,मंजूर एहतेशाम,1,मंतव्य,1,मथुरा प्रसाद नवीन,1,मदन सोनी,1,मधु त्रिवेदी,2,मधु संधु,1,मधुर नज्मी,1,मधुरा प्रसाद नवीन,1,मधुरिमा प्रसाद,1,मधुरेश,1,मनीष कुमार सिंह,4,मनोज कुमार,6,मनोज कुमार झा,5,मनोज कुमार पांडेय,1,मनोज कुमार श्रीवास्तव,2,मनोज दास,1,ममता सिंह,2,मयंक चतुर्वेदी,1,महापर्व छठ,1,महाभारत,2,महावीर प्रसाद द्विवेदी,1,महाशिवरात्रि,1,महेंद्र भटनागर,3,महेन्द्र देवांगन माटी,1,महेश कटारे,1,महेश कुमार गोंड हीवेट,2,महेश सिंह,2,महेश हीवेट,1,मानसून,1,मार्कण्डेय,1,मिलन चौरसिया मिलन,1,मिलान कुन्देरा,1,मिशेल फूको,8,मिश्रीमल जैन तरंगित,1,मीनू पामर,2,मुकेश वर्मा,1,मुक्तिबोध,1,मुर्दहिया,1,मृदुला गर्ग,1,मेराज फैज़ाबादी,1,मैक्सिम गोर्की,1,मैथिली शरण गुप्त,1,मोतीलाल जोतवाणी,1,मोहन कल्पना,1,मोहन वर्मा,1,यशवंत कोठारी,8,यशोधरा विरोदय,2,यात्रा संस्मरण,16,योग,3,योग दिवस,3,योगासन,2,योगेन्द्र प्रताप मौर्य,1,योगेश अग्रवाल,2,रक्षा बंधन,1,रच,1,रचना समय,72,रजनीश कांत,2,रत्ना राय,1,रमेश उपाध्याय,1,रमेश राज,26,रमेशराज,8,रवि रतलामी,2,रवींद्र नाथ ठाकुर,1,रवीन्द्र अग्निहोत्री,4,रवीन्द्र नाथ त्यागी,1,रवीन्द्र संगीत,1,रवीन्द्र सहाय वर्मा,1,रसोई,1,रांगेय राघव,1,राकेश अचल,3,राकेश दुबे,1,राकेश बिहारी,1,राकेश भ्रमर,5,राकेश मिश्र,2,राजकुमार कुम्भज,1,राजन कुमार,2,राजशेखर चौबे,6,राजीव रंजन उपाध्याय,11,राजेन्द्र कुमार,1,राजेन्द्र विजय,1,राजेश कुमार,1,राजेश गोसाईं,2,राजेश जोशी,1,राधा कृष्ण,1,राधाकृष्ण,1,राधेश्याम द्विवेदी,5,राम कृष्ण खुराना,6,राम शिव मूर्ति यादव,1,रामचंद्र शुक्ल,1,रामचन्द्र शुक्ल,1,रामचरन गुप्त,5,रामवृक्ष सिंह,10,रावण,1,राहुल कुमार,1,राहुल सिंह,1,रिंकी मिश्रा,1,रिचर्ड फाइनमेन,1,रिलायंस इन्फोकाम,1,रीटा शहाणी,1,रेंसमवेयर,1,रेणु कुमारी,1,रेवती रमण शर्मा,1,रोहित रुसिया,1,लक्ष्मी यादव,6,लक्ष्मीकांत मुकुल,2,लक्ष्मीकांत वैष्णव,1,लखमी खिलाणी,1,लघु कथा,224,लघुकथा,806,लतीफ घोंघी,1,ललित ग,1,ललित गर्ग,13,ललित निबंध,18,ललित साहू जख्मी,1,ललिता भाटिया,2,लाल पुष्प,1,लावण्या दीपक शाह,1,लीलाधर मंडलोई,1,लू सुन,1,लूट,1,लोक,1,लोककथा,306,लोकतंत्र का दर्द,1,लोकमित्र,1,लोकेन्द्र सिंह,3,विकास कुमार,1,विजय केसरी,1,विजय शिंदे,1,विज्ञान कथा,57,विद्यानंद कुमार,1,विनय भारत,1,विनीत कुमार,2,विनीता शुक्ला,3,विनोद कुमार दवे,4,विनोद तिवारी,1,विनोद मल्ल,1,विभा खरे,1,विमल चन्द्राकर,1,विमल सिंह,1,विरल पटेल,1,विविध,1,विविधा,1,विवेक प्रियदर्शी,1,विवेक रंजन श्रीवास्तव,5,विवेक सक्सेना,1,विवेकानंद,1,विवेकानन्द,1,विश्वंभर नाथ शर्मा कौशिक,2,विश्वनाथ प्रसाद तिवारी,1,विष्णु नागर,1,विष्णु प्रभाकर,1,वीणा भाटिया,15,वीरेन्द्र सरल,10,वेणीशंकर पटेल ब्रज,1,वेलेंटाइन,3,वेलेंटाइन डे,2,वैभव सिंह,1,व्यंग्य,1880,व्यंग्य के बहाने,2,व्यंग्य जुगलबंदी,17,व्यथित हृदय,2,शंकर पाटील,1,शगुन अग्रवाल,1,शबनम शर्मा,7,शब्द संधान,17,शम्भूनाथ,1,शरद कोकास,2,शशांक मिश्र भारती,8,शशिकांत सिंह,12,शहीद भगतसिंह,1,शामिख़ फ़राज़,1,शारदा नरेन्द्र मेहता,1,शालिनी तिवारी,8,शालिनी मुखरैया,6,शिक्षक दिवस,6,शिवकुमार कश्यप,1,शिवप्रसाद कमल,1,शिवरात्रि,1,शिवेन्‍द्र प्रताप त्रिपाठी,1,शीला नरेन्द्र त्रिवेदी,1,शुभम श्री,1,शुभ्रता मिश्रा,1,शेखर मलिक,1,शेषनाथ प्रसाद,1,शैलेन्द्र सरस्वती,3,शैलेश त्रिपाठी,2,शौचालय,1,श्याम गुप्त,3,श्याम सखा श्याम,1,श्याम सुशील,2,श्रीनाथ सिंह,6,श्रीमती तारा सिंह,2,श्रीमद्भगवद्गीता,1,श्रृंगी,1,श्वेता अरोड़ा,1,संजय दुबे,4,संजय सक्सेना,1,संजीव,1,संजीव ठाकुर,2,संद मदर टेरेसा,1,संदीप तोमर,1,संपादकीय,3,संस्मरण,637,संस्मरण लेखन पुरस्कार 2018,128,सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन,1,सतीश कुमार त्रिपाठी,2,सपना महेश,1,सपना मांगलिक,1,समीक्षा,676,सरिता पन्थी,1,सविता मिश्रा,1,साइबर अपराध,1,साइबर क्राइम,1,साक्षात्कार,14,सागर यादव जख्मी,1,सार्थक देवांगन,2,सालिम मियाँ,1,साहित्य समाचार,52,साहित्यिक गतिविधियाँ,181,साहित्यिक बगिया,1,सिंहासन बत्तीसी,1,सिद्धार्थ जगन्नाथ जोशी,1,सी.बी.श्रीवास्तव विदग्ध,1,सीताराम गुप्ता,1,सीताराम साहू,1,सीमा असीम सक्सेना,1,सीमा शाहजी,1,सुगन आहूजा,1,सुचिंता कुमारी,1,सुधा गुप्ता अमृता,1,सुधा गोयल नवीन,1,सुधेंदु पटेल,1,सुनीता काम्बोज,1,सुनील जाधव,1,सुभाष चंदर,1,सुभाष चन्द्र कुशवाहा,1,सुभाष नीरव,1,सुभाष लखोटिया,1,सुमन,1,सुमन गौड़,1,सुरभि बेहेरा,1,सुरेन्द्र चौधरी,1,सुरेन्द्र वर्मा,62,सुरेश चन्द्र,1,सुरेश चन्द्र दास,1,सुविचार,1,सुशांत सुप्रिय,4,सुशील कुमार शर्मा,24,सुशील यादव,6,सुशील शर्मा,16,सुषमा गुप्ता,20,सुषमा श्रीवास्तव,2,सूरज प्रकाश,1,सूर्य बाला,1,सूर्यकांत मिश्रा,14,सूर्यकुमार पांडेय,2,सेल्फी,1,सौमित्र,1,सौरभ मालवीय,4,स्नेहमयी चौधरी,1,स्वच्छ भारत,1,स्वतंत्रता दिवस,3,स्वराज सेनानी,1,हबीब तनवीर,1,हरि भटनागर,6,हरि हिमथाणी,1,हरिकांत जेठवाणी,1,हरिवंश राय बच्चन,1,हरिशंकर गजानंद प्रसाद देवांगन,4,हरिशंकर परसाई,23,हरीश कुमार,1,हरीश गोयल,1,हरीश नवल,1,हरीश भादानी,1,हरीश सम्यक,2,हरे प्रकाश उपाध्याय,1,हाइकु,5,हाइगा,1,हास-परिहास,38,हास्य,51,हास्य-व्यंग्य,52,हिंदी दिवस विशेष,9,हुस्न तबस्सुम 'निहाँ',1,biography,1,dohe,3,hindi divas,6,hindi sahitya,1,indian art,1,kavita,3,review,1,satire,1,shatak,3,tevari,3,undefined,1,
ltr
item
रचनाकार: निशिपाल सूरी की कहानी - ओल्ड एज होम
निशिपाल सूरी की कहानी - ओल्ड एज होम
http://lh6.ggpht.com/-199AKUw86E0/VB1JCCV4XQI/AAAAAAAAang/efWGE--t27A/image_thumb.png?imgmax=800
http://lh6.ggpht.com/-199AKUw86E0/VB1JCCV4XQI/AAAAAAAAang/efWGE--t27A/s72-c/image_thumb.png?imgmax=800
रचनाकार
http://www.rachanakar.org/2014/09/blog-post_65.html
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/
http://www.rachanakar.org/2014/09/blog-post_65.html
true
15182217
UTF-8
सभी पोस्ट लोड किया गया कोई पोस्ट नहीं मिला सभी देखें आगे पढ़ें जवाब दें जवाब रद्द करें मिटाएँ द्वारा मुखपृष्ठ पृष्ठ पोस्ट सभी देखें आपके लिए और रचनाएँ विषय ग्रंथालय खोजें सभी पोस्ट आपके निवेदन से संबंधित कोई पोस्ट नहीं मिला मुख पृष्ठ पर वापस रविवार सोमवार मंगलवार बुधवार गुरूवार शुक्रवार शनिवार रवि सो मं बु गु शु शनि जनवरी फरवरी मार्च अप्रैल मई जून जुलाई अगस्त सितंबर अक्तूबर नवंबर दिसंबर जन फर मार्च अप्रैल मई जून जुला अग सितं अक्तू नवं दिसं अभी अभी 1 मिनट पहले $$1$$ minutes ago 1 घंटा पहले $$1$$ hours ago कल $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago 5 सप्ताह से भी पहले फॉलोअर फॉलो करें यह प्रीमियम सामग्री तालाबंद है चरण 1: साझा करें. चरण 2: ताला खोलने के लिए साझा किए लिंक पर क्लिक करें सभी कोड कॉपी करें सभी कोड चुनें सभी कोड आपके क्लिपबोर्ड में कॉपी हैं कोड / टैक्स्ट कॉपी नहीं किया जा सका. कॉपी करने के लिए [CTRL]+[C] (या Mac पर CMD+C ) कुंजियाँ दबाएँ