बुधवार, 19 नवंबर 2014

यशवन्त कोठारी का व्यंग्य - स्थानीय महाभारत

ताज़ा व्यंग्य

स्थानीय महाभारत

यशवन्त कोठारी

स्थानीय महाभारत का बिगुल बज़ गया है। चौसरें सज़ गई हैं सब तरफ शोर शराबा -हाहाकार मच रहा हैं। सखी शहर में स्थानीय निकायों के चुनावों की मारामारी चल गई हैं। बड़ा ,अजीब , विचित्र और विकट समय हैं। मैदान-ए जंग में महिलाएं भी हैं और पुरुष भी। कहीं बड़ा भाई छोटे भाई से लड़ रहा हैं कहीं ससुर दामाद के खिलाफ ताल ठोंक रहा है। कहीं बाप बेटे राजनितिक व् व्यापारिक स्वार्थ के चलते अलग अलग पार्टी से नामांकन भर रहे हैं, चित्त भी मेरी और पट्ट भी मेरी और अंटा हमारे बाप का। एक दूसरे को नीचा दिखने के लिए ब्याईजी ब्याईजी से लड़ रहे हें. घरेलू राजनीति एक कदम आगे बढ़ कर चौराहों , गलियों  , मोहल्लों कालोनियों में आ गई है.

आश्वासनों की नदियां बह रही हैं , नलों में पानी आने लगा हें बिजली की लाइटें बदली जा रही हैं सड़कों के गड्ढों की मरम्मत हो रही हैं। पार्कों में फव्वारें चल रहे हैं कचरा डि पो हटाये जा रहे हैं ये स्थानीय चुनावों के दिन हैं जातिवाद , लिंग वाद रिश्तों नातों की दुहाई दी जा रही हैं। मत दाता ज्यादा समझदार है, किसी को भी नाराज नहीं करना चाहता सभी को एक ही जवाब मेरा वोट तो आपको ही मिलेगा. ये दिन मा न मनुहार के हैं।

महिलाएं झुंडों में प्रचार कर रही हैं पति लोग पीछे पीछे घूम रहें हैं एक महिला उम्मीदवार का स्पश्ट मत था, जीत भी मेरी और हार भी मेरी में हार कर कर भी जीतूंगी और सामने वाली जीत कर भी हारेंगी खुलासा करते हुए बताया की बोर्ड तो हमारी पार्टी का ही बनेगा.

सब कुछ अच्छा लग रहा हैं मगर कितने दिन. हे मतदाता बटन दबा।

शहर चुनावी समुद्र में आकंठ डूबा हुआ हैं कीचड़ उछाल कार्यक्रम शान से चल रहें हैं जनता के दिन का आराम रात का चैन सब कुछ स्थानीय महा भारत के अर्जुनों कर्णों ने छीन लिया हैं टिकट तो मुझे ही मिलना था मगर महिला सीट होने के कारण आपकी भाभीजी मैदान में हैं वैसे आपका कोई काम नहीं रुकेगा बस एक बटन दबाना हैं बाकी सब में देख लूंगा, आपके टेंडर पास हो जायेंगे, पति महोदय आश्वासनों के पुलन्दे फेंक कर आगे बढ़ जाते हैं। वादों आश्वासनों के सहारे चुनाव की वैतरणी पार करने की सफल -असफल कोशिश की जा रही हैं। महिला प्रत्याशी और महिला मतदाता दोनों ही ज्यादा जागरूक हैं जो शुभ लक्षण हैं. सास बहु , ननद भौजाई ,देवरानी जेठानी के संबंधों में नई ऊष्मा का संचार हो रहा हैं। . स्थानीय महाभारत में शांति पर्व की कोई गुंजाईश नहीं हैं

चलो भी बटन दबाते हें.

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यशवंत कोठारी

८६ , लक्ष्मी नगर ब्रह्मपुरी जयपुर-३०२००२

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