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अंतर भाषा (Interlanguage)

अंकिता आचार्य पाठक

नुष्य जब मातृभाषा के अलावा कोई दूसरी भाषा सीखता है, तो उस दौरान (सीखने की प्रक्रिया) उसके मन में सीखी जाने वाली भाषा का एक रूप बन जाता है। यह रूप न तो पूर्णतः उसकी अपनी मातृभाषा का होता है, जो अपने नियमों को प्रक्षेपित कर व्याघात उपस्थित करती है और न पूर्णतः लक्ष्य भाषा का बल्कि दोनों के बीच का होता है। इसलिए बी. एफ. सेलिंकर ने इसे ‘इंटरलेंग्विज’ (Interlanguage) कहा है, क्योंकि भाषा सीखने वाले के मन में यह केवल एक विशिष्ट काल में ही होती है।

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ज्यों ज्यों वह लक्ष्य भाषा के नियमों को सीखता जाता है उसकी यह अंतर भाषा बदलती जाती है, अर्थात् उसका नया नया रूप उसके मन में बैठता जाता है, जिसमें प्रतिदिन मातृभाषा का प्रभाव कम होता जाता है। लक्ष्य भाषा के नियमों के ज्ञान के साथ साथ उसका प्रयोग भी बढ़ता जाता है।

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प्रारम्भ में यह अंतरभाषा अपने स्वरूप में मातृभाषा से बहुत अधिक प्रभावित तथा विभिन्न कारणों से होने वाली भूलों और गल्तियों से युक्त होती है, किन्तु धीरे धीरे प्रभाव कम होता जाता है तथा भूलें और गल्तियाँ भी कम होती जाती हैं तथा अंतरभाषा लक्ष्य भाषा के समीप पहुँचती जाती है। अंत में जब वह व्यक्ति लक्ष्य भाषा को पूरी तरह सीख लेता है, मातृभाषा का प्रभाव तथा अन्य प्रकार की गल्तियाँ पूर्ण समाप्त हो जाती हैं तो अंतरभाषा लक्ष्यभाषा में विलीन हो जाती है।

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अतः अंतरभाषा को एक ऐसी भाषा कहा जा सकता है, जिसमें लक्ष्य भाषा को सीखने वाले द्वारा आत्मसातित तत्वों तथा उस समय तक उससे होने वाली उन गल्तियों का समावेश होता है, जो लक्ष्यभाषा के प्रयोग के समय मातृभाषा के व्याघात अतिसामान्यीकरण तथा नियमें उपनियमों आदि के अज्ञाता से उत्पन्न होती हैं।

अंतरभाषा के सन्दर्भ में गल्तियों के विश्लेषण का एक सन्दर्भ उनके स्रोतों का विवरण और वर्गीकरण भी होता है। व्यतिरेकी विश्लेषण का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि ऐसी गल्तियों का मूल कारण मातृभाषा के प्रयोग से उत्पन्न जड़ता होती है जो आदतन लक्ष्य भाषा के नियमों पर हावी होकर उनको अपने नियमों में परिवर्तित कर लेती है। व्यवघात की यह प्रक्रिया ही उनकी दृष्टि में सभी वास्तविक त्रुटियों का कारण है। पर यह देखा गया है कि लक्ष्य भाषा की संरचना स्वयं में त्रुटियों का कारण बन जाती है और अन्य भाषा सीखने के समय पाई जाने वाली कई त्रुटियों की प्रकृति मातृभाषा सीखने के समय प्रयोग में आने वाली त्रुटियों के समान होती है। जैसे—

1. वो हम लोगों से बड़े हैं। He is big.

2. वह कल देगा आज नहीं। -- वह आज देगा नहीं कल।

3. मेरे लड़के ने कहा। -- हमारा बेटे ने कहा।

अतः अंतर भाषा की परिकल्पना में नियमों का बहुत योगदान है। जब मनुष्य दूसरी भाषा के नियम सीखता है तब उसकी अपनी मातृभाषा के नियम उसमें बाध्य होते हैं जिसके कारण मनुष्य को दूसरी भाषा सीखने में समय लगता है

डॉ.  अंकिता आचार्य पाठक (एम.ए., पी एच. डी. भाषाविज्ञान)

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