विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

वाग्यंत्र अथवा वागवयव अथवा ध्वनि-यंत्र

प्रोफेसर महावीर सरन जैन

ध्वनिविज्ञान अथवा स्वनविज्ञान (Phonetics) के अन्तर्गत भाषा की आधारभूत सामग्री का अध्ययन किया जाता है। किसी भी भाषा का कोई भी उच्चार ध्वनियों अथवा स्वनों का अविच्छिन्न प्रवाह है। भाषा की ध्वनियाँ स्वतः अर्थहीन होती हैं। ध्वनियों का उच्चारण भौतिक घटनाएँ हैं तथा इस रूप में ये भौतिक विज्ञान में भी विवेच्य हैं। ध्वनिविज्ञान अथवा स्वनविज्ञान भाषा की लघुतम अर्थहीन श्रव्य इकाइयों का वैज्ञानिक अध्ययन करता है।

इस विज्ञान के क्षेत्र में विवेच्य ध्वनियों के सम्बंध में ध्वनिवैज्ञानिकों में मतभेद हैं। डेनियल जॉन्स सायास स्वेच्छापूर्वक ध्वनि वर्ग के वाक् ध्वनियों के अध्ययन को ही विवेच्य मानते हैं। वे इस वर्ग में श्रुति तथा खण्डेतर ध्वनि गुणों (दीर्घता, बलाघात, स्वराघात आदि) को समाहित नहीं करते।

(Daniel Jones: An outline of English Phonetics, P.1-2, Heffer, Cambridge, (1962))

के. एल. पाइक ने इन ध्वनियों के अध्ययन को भी विवेच्य सीमा में मानते हैं।

(K.L.Pike: Phonetics: A critical analysis of Phonetic Theory and the technique for the Practical Description of Sounds, pp. 36-41.)

ध्वनिविज्ञान में वाक् ध्वनियों के उच्चारण अथवा उत्पादन, संचरण एवं संवहन का अध्ययन किया जाता है। इस दृष्टि से ध्वनिविज्ञान अथवा स्वनविज्ञान की तीन शाखाएँ हैं –

1. उच्चारणात्मक ध्वनिविज्ञान

2. भौतिक ध्वनिविज्ञान

3. श्रवणात्मक ध्वनिविज्ञान

इनमें उच्चारणात्मक ध्वनिविज्ञान के क्षेत्र में अधिक कार्य हुआ है। रॉबिन्स ने उच्चारणात्मक ध्वनिविज्ञान की प्राथमिकता प्रतिपादित की है। उनके शब्दों में, "भाषावैज्ञानिक भौतिक ध्वनिविज्ञान, ध्वनि-लहर-संचरण, श्रवणेन्द्रिय की शारीरिक रचना तथा श्रवण-बोध आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञों द्वारा सम्पन्न कार्यों और अनुसंधानों से अपने को परिचित रख सकते हैं और उन्हें इस ज्ञान से परिचित रखना ही चाहिए तथा इसका भी औचित्य है कि कुछ भाषावैज्ञानिक ज्ञान-विज्ञान की उपर्युक्त शाखाओं के भाषा अध्ययन से सम्बंधित पक्षों में विशेषज्ञता प्राप्त करें मगर ऐसे भाषावैज्ञानिक को, जो ध्वनिविज्ञान के इन पक्षों में विशेषज्ञता प्राप्त नहीं करना चाहता तथा भाषा अध्ययन की ओर उन्मुख होने वाले विद्यार्थी को अपनी दृष्टि उच्चारणात्मक ध्वनिविज्ञान पर केन्द्रित रखनी चाहिए क्योंकि उच्चारणात्मक ध्वनिविज्ञान के द्वारा किसी भाषा के ध्वन्यात्मक पक्ष का अध्ययन अन्य विधियों की अपेक्षा सबसे अधिक आसान है तथा इससे अध्येता का सबसे अधिक हित सम्पन्न हो सकता है"।

(R.H.Robins: General Lingustics An Introductory Survey, P.85, Longmans, London (1964)))

वाग्यंत्र अथवा वागवयव अथवा ध्वनि-यंत्र (SPEECH APPARATUS / SPEECH MECHANISM/ VOCAL APPARATUS) अथवा उच्चारण अवयव (VOCAL ORGANS)

clip_image001

1. ललाट विवर (Frontal sinus)

2. नासिका-विवर (Nasal cavity)

3. नासिका एवं ग्रसनी का संधि-स्थल (Nasal pharynx)

4. कठोर तालु (Hard palate)

5. कोमल तालु (Soft palate)

6. जिह्वा अथवा जीभ (Tongue) (इसको जिह्वा-नोक, जिह्वा-अग्र, जिह्वा-मध्य, जिह्वा-पश्च आदि भागों में बाँटा जाता है। जिह्वा के किस भाग से स्वरों का उच्चारण हो रहा है, इसको लेकर अग्र स्वर, मध्य स्वर एवं पश्च स्वर भेद हो जाते हैं। इसी प्रकार व्यंजनों के उच्चारण में जिह्वा के विभिन्न भाग अपनी भूमिका का निर्वाह करते हैं।

7. अलिजिह्वा अथवा कौवा के निकट (end of Uvula and beginning of Oral cavity)

8. उपजिह्वा अथवा उपालिजिह्वा (Epiglottis)

9. काकलीय ग्रसनी अथवा ग्रसनी-काकल (Laryngeal pharynx or Larynopharynx)

10. घोषतंत्री अथवा स्वरतंत्री (Vocal fold or Vocal cords)

11. निलय वलन (Ventricular fold)

12. काकल विवर (Larynx cavity)

13. श्वास नली (Trachea)

14. भोजन नलिका (Esophagus)

--

Professor Mahavir Saran Jain                                 
( Retired Director, Central Institute Of Hindi )
Address:
India:  Address:   Sushila Kunj, 123, Hari Enclave, Chandpur Road, Buland Shahr-203001, India.         
                       Mobile: 09456440756 / 08938840864 / 07409562277
USA :  Address: 855 De Anza Court, Milpitas CA 95035 - 4504
Email:     mahavirsaranjain@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget