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हिंदी में 'अक्षर भविष्य' की अनंत सम्भावनाएँ

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डॉ.चन्द्रकुमार जैन   हिंदी विश्व में चीनी भाषा के बाद सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।  हिंदी भाषा का मूल प्राचीन संस्कृत भाषा में है। इस भ...

डॉ.चन्द्रकुमार जैन 

हिंदी विश्व में चीनी भाषा के बाद सर्वाधिक बोली जाने वाली भाषा है।  हिंदी भाषा का मूल प्राचीन संस्कृत भाषा में है। इस भाषा ने अपना वर्तमान स्वरूप कई शताब्दियों के पश्चात हासिल किया है और बड़ी संख्या में बोलीगत विभिन्नताएं अब भी मौजूद हैं। हिंदी की लिपि देवनागरी है, जो कि कई अन्य भारतीय भाषाओं के लिए संयुक्त है। हिंदी के अधिकतम शब्द संस्कृत से आए हैं। इसकी व्याकरण की भी संस्कृत भाषा के साथ समानता है।

आज आवश्यकता इस बात की है कि हिंदी भाषा और उसके महत्व का सही-सही आकलन किया जाए क्योंकि वह संसार की उन्नत भाषाओं में हिंदी सबसे अधिक व्यवस्थित भाषा है। वह सबसे अधिक सरल भाषा है। वह सबसे अधिक लचीली भाषा है। वह एक मात्र ऐसी भाषा है जिसके अधिकतर नियम अपवादविहीन हैं तथावह सच्चे अर्थों में विश्व भाषा बनने की पूर्ण अधिकारी है। हिन्दी लिखने के लिये प्रयुक्त देवनागरी लिपि अत्यन्त वैज्ञानिक है।हिन्दी को संस्कृत शब्दसंपदा एवं नवीन शब्दरचनासामर्थ्य विरासत में मिली है। वह देशी भाषाओं एवं अपनी बोलियों आदि से शब्द लेने में संकोच नहींकरती।अंग्रेजी के मूल शब्द लगभग दस हजार हैं, जबकि हिन्दी के मूल शब्दों की संख्या ढाई लाख से भी अधिक है।हिन्दी बोलने एवं समझने वाली जनता पचास करोड़ से भी अधिक है।हिन्दी का साहित्य सभी दृष्टियों से समृद्ध है।हिन्दी आम जनता से जुड़ी भाषा है तथा आम जनता हिन्दी से जुड़ी हुई है। हिन्दी कभी राजाश्रय की मुहताज नहीं रही।भारत के स्वतंत्रता-संग्राम की वाहिका और वर्तमान में देशप्रेम का अमूर्त-वाहक है। भारत की सम्पर्क भाषा है और भारत की राजभाषा भी है। 

राजभाषा हिंदी

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हिंदी में रोजगार पर चर्चा करते हुए देहरादून के प्रोफेसर डॉ.अमियकुमार साहू बताते हैं कि भारत के संविधान में देवनागरी लिपि में हिंदी को संघ की राजभाषा घोषित किया गया है । हिंदी की गिनती भारत के संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल भाषाओं में की जाती है। लेकिन राजभाषा अधिनियम (1963) को पारित करके यह व्यवस्था की गई कि सभी सरकारी प्रयोजनों के लिए अंग्रेजी का प्रयोग भी अनिश्चित काल के लिए जारी रखा जाए। अतः अब भी सरकारी दस्तावेजों, न्यायालयों आदि में अंग्रेजी का इस्तेमाल होता है। हालांकि, हिंदी के विस्तार के संबंध में संवैधानिक निदेश बरकरार रखा गया।

राज्य स्तर पर हिंदी भारत के निम्नलिखित राज्यों की राजभाषा है: बिहार, झारखंड, उत्तराखंड, मध्य प्रदेश, राजस्थान, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा और दिल्ली। ये प्रत्येक राज्य अपनी सह-राजभाषा भी बना सकते हैं। उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश में यह भाषा उर्दू है। इसी प्रकार कई राज्यों में हिंदी को भी सह-राजभाषा का दर्जा प्रदान किया गया है। अपने छत्तीसगढ़ में अब छत्तीसगढ़ी को भी राजभाषा का दर्ज़ा मिल गया है। 


विश्व भाषा हिंदी

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यह उल्लेख करना समीचीन होगा कि विदेशियों में भी भारत की धनी संस्कृति को समझने की रुचि बढ़ी है। यही वजह है कि कई देशों ने अपने यहां भारतीय भाषाओं को प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षण केंद्रों की स्थापना की है। भारतीय धर्म, इतिहास और संस्कृति पर विभिन्न पाठ्यक्रम संचालित करने के अलावा इन केंद्रों में हिंदी, उर्दू और संस्कृत जैसी कई भारतीय भाषाओं में भी पाठ्यक्रम संचालित किए जाते हैं। वैश्वीकरण और निजीकरण के इस परिदृश्य में अन्य देशों के साथ भारत के बढ़ते व्यापारिक संबंधों को देखते हुए संबंधित व्यापारिक साझेदार देशों की भाषाओं की अन्तर-शिक्षा की जरूरत महसूस की जाने लगी है। इस घटनाक्रम ने अन्य देशों में हिंदी को लोकप्रिय और सरलता से सीखने योग्य भारतीय भाषा बनाने में काफी योगदान किया है। अमरीका में कूछ स्कूलों ने फ्रेंच, स्पेनिश और जर्मन के साथ-साथ हिंदी को भी विदेशी भाषा के रूप में शुरू करने का फैसला किया है। हिंदी ने भाषा-विषयक कार्य-क्षेत्र में स्वयं के लिए एक वैश्विक मान्यता अर्जित कर ली है।

तकनीकी भाषा हिंदी

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भाषाओं और विशेष रूप से हिंदी में भाषा प्रौद्योगिकी में विकास की शुरुआत 1991 में इलेक्ट्रॉनिकी विभाग के अधीन भारतीय भाषा प्रौद्योगिकी विकास मिशन (टीडीआईएल) की स्थापना के साथ हुई। इसके उपरांत मिशन के तहत बड़ी संख्या में गतिविधियां संचालित की गईं। भारतीय भाषाओं की स्मृद्धि को ध्यान में रखते हुए 1991 में हिंदी सहित संवैधानिक रूप से स्वीकार्य प्रत्येक भाषा में तीन लाख शब्दों का संग्रह विकसित करने का फैसला किया गया। तदनुसार हिंदी शब्द संग्रह विकसित करने का काम आईआईटी दिल्ली को सौंपा गया। हिंदी संग्रह के 1981-1990 के दौरान मुद्रित पुस्तकें, जर्नल्स, पत्रिकाएं, समाचार पत्र और सरकारी दस्तावेज हैं। इन्हें छः मुख्य श्रेणियों में बांटा गया है; समाज विज्ञान, भौतिक एवं व्यावसायिक विज्ञान, सौन्दर्य-विषयक, प्राकृतिक विज्ञान, वाणिज्य, सरकारी और मीडिया भाषाएं तथा अनुदित सामग्री। शब्द स्तरीय टैगिंग, शब्द गणना, अक्षर गणना, फ्रीक्वेन्सी गणना के लिए सॉफ्टवेयर टूल्स भी विकसित किए गए। विभिन्न संस्थानों द्वारा करीब तीस लाख शब्दों को मशीन से पढ़ने योग्य संग्रह विकसित किया गया है। 

इसके अलावा, विभिन्न संगठनों ने हिंदी शब्द संसाधक विकसित किए हैं और सिद्धार्थ (डीसीएम, 1983 में) से लेकर लिपि (हिंदी ट्रॉनिक्स 1983), आईएसएम, आईलीप, लीप ऑफिस (सी डैक, पुणे), जिस्ट, श्रीलिपि, सुलिपि, एपीएस, अक्षर आदि तक हिंदी में और भी कई अन्य वर्ड-प्रोसेसर उपलब्ध हैं। सीडैक पुणे ने जिस्ट टेक्नोलॉजी विकसित की है, जिससे सूचना प्रौद्योगिकी में भारतीय भाषाओं का प्रयोग सुविधाजनक हुआ है। यह सूचना अन्तर-परिवर्तन, स्क्रीन और प्रिन्टर पर उनके प्रदर्शन के लिए विशेष फॉन्ट्स (आईएसएफओसी), विभिन्न लिपियों के लिए संयुक्त की-बोर्ड लेआउट (इनस्क्रिप्ट) आदि का प्रयोग करते हुए भारतीय लिपि कोड का इस्तेमाल करता है। 

लेकिन, स्मरण रहे कि अब हिंदी केवल राजभाषा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक बाजार में भी अपनी जगह बना रही है। छात्र को हिंदी ऑनर्स या एमए करते समय भाषा की अच्छी समझ जरूरी है। हिंदी भाषा और साहित्य का अध्ययन एक गहन पठन-पाठन की प्रक्रिया है। पढ़ने-लिखने, विचार करने और किसी भी सिद्धांत और उसके व्यावहारिक पक्ष को समझने का भरपूर मौका इस क्षेत्र में मिलता है।

इस संबंध में दिल्ली के सत्यवती कॉलेज के प्रोफेसर मुकेश मानस का कहना है कि इसमें कविता, कहानी के अलावा मीडिया, अनुवाद और रचनात्मक लेखन जैसी कई चीजें हैं, जो करियर बनाने में मदद करती हैं। हिंदी से ऑनर्स करने वालों को नौकरी के लिए कोई दिक्कत नहीं होती। वे विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में हो सकते हैं। ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां छात्र अपनी किस्मत आजमा सकते हैं, जैसे – 

अध्यापन

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हिंदी से बीए व बीएड करने के बाद स्कूलों में हिंदी अध्यापक की नौकरी मिल जाती है। कॉलेज के स्तर पर अध्यापन करने वाले छात्रों को एमए के बाद एमफिल और पीएचडी करने के बाद कॉलेज में प्रवक्ता का पद मिल जाता है। पीएचडी होल्डर कॉलेज व विश्वविद्यालय स्तर पर देश में कहीं भी लेक्चरर की नौकरी पा सकते हैं। अध्यापन के लंबे अनुभव पर वे रीडर व प्रोफेसर भी बन सकते हैं।

मीडिया

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हिंदी से स्नातक करने वालों के लिए मीडिया एक बड़ा अवसर लेकर आया है। देश-विदेश में फैला यह जाल हिंदी के छात्रों को कई तरह से काम करने का अवसर प्रदान करता है। हिंदी भाषा पर अच्छी पकड़ होने के कारण छात्रों को पत्रकारिता के क्षेत्र में प्रवेश करने में आसानी होती है। स्टूडेंट्स बीए या एमए के बाद पत्रकारिता का डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते हैं। यह कोर्स करने के बाद किसी भी पत्र-पत्रिका में रिपोर्टर या उप संपादक बन सकते हैं।

भारत सरकार का करीब हर संस्थान अपने यहां से हिंदी में पत्र-पत्रिकाएं प्रकाशित करता है। इन पत्रिकाओं में प्रकाशन से लेकर संपादन तक में हिंदी के छात्रों की जरूरत पड़ती है। प्रिंट मीडिया के अलावा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया में भी हिंदी जानने वालों को प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा रेडियो में भी रोजगार के अनेक अवसर हैं।


पर्यटन

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पर्यटन के क्षेत्र में भी इनके लिए रोजगार के अवसर हैं। इस क्षेत्र में बेहतर करने के लिए कल्चरल टूरिज्म मैनेजमेंट में भी डिप्लोमा कर सकते हैं।

फिल्म

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फिल्म और टीवी सीरियल में भी आप अपनी किस्मत आजमा सकते हैं। यदि आपको शब्दों से खेलने में मजा आता है, तो आपको यहां भी काम मिल सकता है और आपकी कल्पना उड़ान भरती है, तो स्क्रिप्ट राइटर के तौर पर आप यहां कोशिश कर सकते हैं। इसके अलावा आप गीतकार भी बन सकते हैं।


हिंदी अधिकारी

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हिंदी के छात्रों के लिए विभिन्न बैंक राजभाषा अधिकारी की नियुक्ति करते हैं। हिंदी भाषा अधिनियम का प्रावधान है कि सभी संस्थानों में हिंदी अधिकारी को रखना पड़ेगा। भारत सरकार व निजी संस्थान में हिंदी अधिकारी के रूप में काम करने का अवसर सामने आता है। देश-विदेश में सरकारी संस्थानों में हिंदी सलाहकार के रूप में भी काम करने का अवसर भी मिल सकता है।


अनुवादक

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यदि आप किसी दूसरी भाषा पर पकड़ रखते हैं, तो अनुवादक भी बन सकते हैं। विभिन्न ट्रेवल एजेंसियां और सरकारी व निजी संस्थान ऐसे लोगों को मौका देते हैं। मीडिया के क्षेत्र में भी ऐसे लोगों की काफी डिमांड होती है। हिंदी का ज्ञान होने के साथ-साथ आपको अंग्रेजी का भी ज्ञान होना चाहिए। कर्मचारी चयन आयोग हर साल हिंदी अनुवादकों की भर्ती करता है।

प्रतियोगी परीक्षा

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हिंदी से स्नातक करने के बाद विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में शामिल होकर बैंक, न्यायिक सेवा, सिविल सर्विस और स्टेट सर्विस के अलावा रेलवे व बैंक आदि में भी नौकरी के बेहतर अवसर हो सकते हैं।

अन्य क्षेत्र

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हिंदी भाषा और साहित्य के छात्र लिंग्विस्टिक का भी कोर्स कर सकते हैं और अच्छी नौकरी पा सकते हैं। इसके साथ ही अगर हिंदी में अच्छी पकड़ है, तो क्रिकेट कमेंटरी से लेकर फैशन जगत व एड एजेंसी और एनजीओ में भी करियर बनाया जा सकता है।

कहाँ पढ़ें

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हिंदी भाषा में कालेजों/विश्वविद्यालयों द्वारा सचांलित किए जाने वाले पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय/कालेज संचालित पाठ्यक्रम इस तरह हैं -

अंतर्राष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय पंचटीला, वर्धा (महाराष्ट्र)

एम.ए., एम.फिल, पीएचडी (भाषा प्रौद्योगिकी

हिंदी विभाग, हैदराबाद विश्वविद्यालय हैदराबाद-46

हिंदी भाषा में एम.ए., एम.फिल और पीएचडी. कार्यात्मक हिंदी, हिंदी अनुवाद में स्नाकोत्तर डिप्लोमा।

उच्चतर शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान, विश्वविद्यालय स्कंध, दक्षिण भारत हिंदी प्रचार सभा, टी.नगर, चेन्नई-17 (तमिलनाडु)

हिंदी साहित्य और भाषा में एम.ए., एम.फिल और पीएचडी, हिंदी अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा, हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर प्रमाण पत्र

पुणे विश्वविद्यालय, पुणे (महाराष्ट्र)

कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.

बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी-05 (उ.प्र.)

कार्यात्मक हिंदी में एम.ए. (पत्रकारिता)

अविनाशलिंगम डीम्ड यूनिवर्सिटी फॉर वूमैन, कोयम्बटूर (तमिलनाडु)

कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल (म.प्र.)

हिंदी पत्रकारिता में एम.ए.

आंध्र विश्वविद्यालय, विशाकापत्तनम (आ.प्र.)

हिंदी पत्रकारिता में स्नातकोत्तर डिप्लोमा अनुवाद (हिंदी) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।

चौ चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ (उ.प्र.)

कार्यात्मक हिंदी में एम.ए.

दूरस्थ शिक्षण संस्थान, केरल विश्वविद्यालय, त्रिवेंद्रम-695581 (केरल)

कार्यात्मक हिंदी में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

दूरस्थ शिक्षा, बंगलौर यूनिवर्सिटी, सेंट्रल कॉलेज कैम्पस, अम्बेडकर विथि, बंगलौर (कर्नाटक)

अनुवाद में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हिन्दी)

एसएनडीटी महिला विश्वविद्यालय, मुंबई

अनुवाद (हिंदी) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, अलीगढ़ (उ.प्र.)

अनुवाद (हिंदी) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा

इग्नू, नई दिल्ली

अनुवाद (हिंदी) में स्नातकोत्तर डिप्लोमा हिंदी में 

सृजनात्मक लेखन में स्नातकोत्तर डिप्लोमा।

( स्मरणीय है कि ऐसे अन्य अनेक संस्थान भी हैं.

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डॉ. चन्द्रकुमार जैन

हिन्दी विभाग,

शासकीय दिग्विजय स्वशासी

स्नातकोत्तर महाविद्यालय, राजनांदगाँव। mo.9301054300

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रचनाकार: हिंदी में 'अक्षर भविष्य' की अनंत सम्भावनाएँ
हिंदी में 'अक्षर भविष्य' की अनंत सम्भावनाएँ
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