मंगलवार, 1 सितंबर 2015

कविता - शूरवीर महाराणा प्रताप

शूरवीर महाराणा प्रताप shoorveer maharana pratap

सी.बी. श्रीवास्तव ‘‘विदग्ध‘‘

 

है जिसका इतिहास पुराना और विश्व में ख्याति महान
भारत की वह वीर भूमि है नाम है उसका राजस्थान

जिसकी परंपराये अनूठी उंची आन बान औ शान
शूरवीरता, दृढ़ता साहस निष्ठा बल उसकी पहचान

रखने अपनी बात जहॅा है हंसी खेल दे देना जान
धर्म न्याय कर्तव्य देश हित लाखों हुये वहां बलिदान

ऐसी रक्त स्नात माटी में पलकें करते विनत प्रणाम
महाराणा प्रताप ने अपना शुरू किया जीवन संग्राम

वंशज थे राणा सांगा के, थी जिनकी अजेय तलवार
युद्ध विजय था जीवन जिनका कभी न देखी कोई हार

कहते है शरीर में उनके युद्धों के थे अस्सी घाव
सदा जीत पाई युद्धों में कभी न हारा कोई दांव

खडा आज भी गढ़ चित्तौड़ में याद सजाये कीर्तिस्तंभ
उस गढ़ के स्वामी प्रताप थे अकबर को था अपना दम्भ

सारे राजपूत राजाओं को अपने चंगुल में फांस
महाराणा प्रताप को भी वश में करने को थी उसकी आस

था किरकिरी आंख की अकबर को प्रताप का एकल राज
जे स्वतंत्र ध्वज फहराता था इससे थे अकबर नाराज

राजपूत को राजपूत के हाथों ही देने को मात
विजय योजना बना भेज दी सेना मानसिंह के साथ

मानसिंह अकबर के साले थे साम्राज्ञी के भाई
छोटे से मेवाड राज्य पर शाही सेना चढ आई

अरावली की हल्दी घाटी में प्रताप का था डेरा
अकबर की भारी सेना ने उन्हें वही पा आ घेरा

युद्ध हुआ घनघोर वही पर दो बिलकुल असमानों में
पर छक्के छुडवाये शत्रु के भालों तीर कमानों नें

था प्रताप का घोडा चेतक स्वामिभक्त औ बलशाली
ले उड़ता था जहां कही वह वार न जाता था खाली

थे प्रताप घोडे पर अपने मान हाथी के हौदे में
पर चेतक ने कसर न छोडी कहीं जान के सौदे में

मानसिंह दब दुबक बच गया राणा वाले भाले से
सारी सेना दंग रह गई आफत के पर काले से

लिखता है इतिहास अनोखी घटनायें कई नामों पै
फिर भी किंतु पंरतु प्रमुख हो जाते है परिणामों में

वार प्रबल था चेतक ने रख दी थी हाथी पर निजटाप
मरा महावत बचा मानसिंह सफल कर था विफल प्रताप

राणा का बचाव कर चेतक कूद गया नाले के पार
घायल था निहार स्वामी को गिरकर त्याग गया संसार

अपने स्वामिभक्त चेतक को खो राणा थे दुखी अपार
खडी समाधि आज भी जो तट पै करती दुखी पुकार

टूट गये राणाजी धन जन हानि से पर छोडी न आन
मन की निष्ठा यत्न और श्रम ही है शौर्य की सच पहचान

व्यर्थ नहीं जाते हैं जग में वीरों के कोई बलिदान
करता है इतिहास युगों युग सच्चे वीरों का सम्मान

राणा के संग भील लडाके थे और सेठ थे भामाषाह
जिन्हें राज्य औ राणा की रक्षा की थी मन से परवाह

भामा शाह ने थैली खोली भील हुये लड़ने तैयार
राणा ने उनकी कृतज्ञता के बदले माना आभार

किंतु सुअवसर जेा भी आते आते जीवन में एकबार
अगर चूक गये तो भर जाते मन में दुख का बडा गुबार

राणा के आदर्श आज भी है भारत के बच्चों में
सबसे ऊपर नाम है उनका देशभक्ति के सच्चों में

गाता है इतिहास आज भी उनकी गौरव गाथायें
ऐसा पुत्र यशस्वी पाने मन्नत करती मातायें

एक नहीं कई एक हुये नर नारी राजस्थानी है
जिनके जीवन की अलबेली पानी दार कहानी है

मानवता की गुण गरिमा को जिनने सदा सजाया है
निभा कठिन कर्तव्य स्वतः का सबका आदर पाया है

यश जिनका धन होता जग में वे ही पूजे जाते है
धन बल वाले भी उनके चरणों में शीश झुकाते है

शौर्य रहा भारतवासी के सादे तीर कमानों में
पर ममता के भाव भी रहे अनुपम उनके प्राणों में

नहीं पराजय जय महत्व की बडा सदा मन का अनुराग
उससे ही लिख पाता मानव जीवन में खुद अपना भागा

कभी जीत भी लाती अपयश कभी सुयश दे जाती हार
यश अपयश ईश्वर के हाथों मनुज का न उन पर अधिकार

दुख को भी सुख समझा करते जो होते दृढ़ व्रत वाले
कभी नहीं डिगते वचनों से चाहे जो कोई कर डाले

दुख को मान कसौटी मन की बढ़ते जाते है मानी
उन्हें नहीं विचलित कर पाती कभी कोई भी हैरानी

ऐसे ही जंगल में रह प्रताप ने अपना व्रत पाता
सदा हाथ में राह वीर के उनका निर्मोही भाला

भावुक मन पर होते जब भी क्रूर काल के कठिन प्रहार
आता याद अचानक सबको तब अपना घर औ परिवार

छोटी घटनाये भी कर जाती मन में भारी बदलाव
प्र मनस्वी के दृढ़ निश्चय पर पड़ता कभी न कोई प्रभाव

वन विलाव ने भूखी बिटिया से भी जब रोटी छीनी
मां बेटी के आंसू तब लाये केवल चिंता झीनी

किंतु दूसरे क्षण संयत हो उनने निश्चय कर डाला
पी डालेंगे शंकर के सम वे हर एक विष का प्याला

हारे लेकिन कभी न टूटे अपने अडिग विचारो से
गिरा हिमालय सिर पर फिर भी हटे न निज आधारों से

हर कठिनाई रौंद कुचल रखी प्रताप ने अपनी शान
वहीं दिया जग में प्रसिद्ध है जिस व्रत के हित राजस्थान

महाराणा प्रताप के जीवन औ उनके आदर्श महान
जिस पर है गौरवान्वित हर भारत वासी औ सारा हिंदुस्तान

मुगल सल्तनत से लड़ निर्भय कर सब सुख सुविधा बलिदान
अकबर से भी गया सराहा वह वीर प्रताप महान

शौर्य सत्य संकल्प धर्म गुण है भारत के पानी में
मातृभूमि की भक्ति सहित जो दिखते हर बलिदानी में

सदियों बाद आज भी राणा करते हरेक हृदय पे राज
जबकि मिट गया कुछ ही सालो बाद ही अकबर का साम्राज्य
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प्रो.सी.बी. श्रीवास्तव ‘‘विदग्ध‘‘
ओबी 11 एमपीईबी कालोनी
रामपुर, जबलपुर 482008

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