विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - रचनाकार में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. अपनी रचनाएं इस पते पर ईमेल करें : rachanakar@gmail.com

हास्य - व्यंग्य : मेक इन इंडिया

image

शशिकांत सिंह "शशि"

सरकार देश का विकास चाहती है। वह किसी उद्योगपति को पांच साल के लिए टैक्‍सफ्री कर सकती है। उन्‍हें बिजली मुफ्‍त देगी। उनके लिए सिंगल विंडों सिस्‍टम करेगी। एक और वर्ग है जो इस देश में मेक इन इंडिया करता है जिसे कोर्स की किताबों में किसान कहते हैं। सरकारी चिंतक कहते है, मेक इन इंडिया का अर्थ है मिसाइल बनाना; मक्‍का बनाना अर्थात उपजाना इस दायरे में नहीं आता। उद्योगपति बेचारा गरीब होता है उसको सराकारी संरक्षण की जरूरत है जैसे बाघों को।

बकरी को किसी ने राष्‍ट्रीय पशु घोषित किया क्‍या ? वह दूध देती रहे। उसका कर्त्‍तव्‍य है दूध देना और हमार पीना। किसान को पानी की जरूरत है...... तो ? डीजल तो कारपोरेट वालों को दे दिया गया। वह चाहे जितना मर्जी दाम बढ़ाये। किसान मेक इन इंडिया करना चाहें तो साहूकार से कर्ज लेकर करें। साहूकार भी तो मेक इन इंडिया ही कर रहा है। किसानों को तो फिर भी सुविधा है कि वह मर सके। उसके मरने से राष्‍ट्रीय क्षति नहीं होती। देश का झंडा नहीं झुकता। यह सुविधा केवल नेताओं को हासिल है।

किसान देश के लिए बनाता ही क्‍या है ? फल-दूध ,अनाज और सब्‍जी। ये ऐसी क्‍या नियामत हैं जिनके लिए हाय-हाय की जाये। देश को चाहिए सुखोई विमान; विराट यु़द्धपोत ; अग्‍नि मिसाइल और बमवर्षक जहाज। बोफोर्स तोपें तो बदनाम हो गईं नहीं तो उनकी भी जरूरत कम नहीं है। नगरी-नगरी, द्वारे-द्वारे घूमकर मालिक उद्योगपतियों को आमंत्रित कर रहे हैं तो किसके लिए ? देश के किसानों के लिए। उनको रोजगार मिल सके इसके लिए। उन्‍हें पता है कि आज न कल किसानों के पास बंजर खेत होंगे। यदि आत्‍महत्‍या नहीं कर पाया तो बेचारा क्‍या करेगा ? उसे कोई न कोई रोजगार तो चाहिए। कारखानों में मजदूरी करके पेट तो भर सकेगा। जो सरकार इतनी दूरदर्शी हो उसपर आरोप नहीं लगाया जा सकता। नहीं तो देशद्रोह की दफायें लगा दी जायेंगी।

हमारे कहने को गलत न समझा जाये सरकार किसानों के हितों की चिंता करती है और खूब करती है। इंडिया को डिजिटल कर दिया गया। मोबाइल पर ही सरकारी ऐप्‍स आ गये। इंटरनेट गांव-गांव में पहुंचाने की चिंता सरकार कर रही है। एक दिन ऐसा जरूर आयेगी जब किसानों के पास मोबाइल चार्ज करने के लिए बिजली भी होगी। उस दिन किसान क्‍य करेगा ? वह सरकार से सीखेगा कि खेती कैसे की जाये और कारखानों में मजदूरी करेगा। स्‍मार्टनेश फील करने के लिए शहरों में रहेगा। वह यदि समय पर आत्‍महत्‍या नहीं कर पाया तो सारे खेत साहूकार-महाजन ले लेंगे ऐसे में वह मोबाइल पर गेम खेलेगा और खुश रहेगा। उसके बच्‍चे तो गांव की प्राथमिक पाठशाला में चूती हुई छत के नीचे बैठकर अ से आम पढ़ ही रहे हैं। वे बेचारे ए फॉर एपल का मुकाबला करने की सोचेंगे भी नहीं क्‍योंकि उन्‍हें कौन सा मेक इन इंडिया करना है। वह मजदूरी करेगा। उसके लिए सारी तैयारियों कर ली गई है।

मेक इन इंडिया तो स्‍माट शहरों वाले करेंगे जिनपर सरकार की भी कृपा है और विदेश वाले भी गोद ले रहे हैं। एक बार कहकर देखिये जापान को कि जिला भिखमखेड़ी के गांव शिवपालगंज को गोद ले ले तो मेक इन जापान करना भी छोड़ दे। ऐसे में कोई हार्दिक पटेल यदि आंदोलन करता है तो उसपर लाठियों और गोलियां बरसनी ही चाहिए। आधी रात को उसपर पुलिस छोड़ देनी चाहिए। बुद्धिजीवी वर्ग को भी चाहिए कि उसका मजाक फेसबुक और टिविटर पर खूब उड़ायें। भक्‍ति तो उसकी की जाती है जो मेक इन इंडिया करे। देश के लिए उत्‍पादन करे चाहे भ्रष्‍टाचार का ही क्‍यों न हो।

--

शशिकांत सिंह ’शशि’

जवाहर नवोदय विद्यालय शंकरनगर नांदेड़ महाराष्‍ट्र, 431736

मोबाइल-7387311701

इमेल- skantsingh28@gmail.com

विषय:
रचना कैसी लगी:

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु बेनामी टिप्पणियाँ बंद की गई हैं (आपको पंजीकृत उपयोगकर्ता होना आवश्यक है) तथा साथ ही टिप्पणियों का मॉडरेशन भी न चाहते हुए लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

[facebook][blogger]

MKRdezign

संपर्क फ़ॉर्म

नाम

ईमेल *

संदेश *

Blogger द्वारा संचालित.
Javascript DisablePlease Enable Javascript To See All Widget