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पाठकीय - बी. के. गुप्ता : भारत में राष्ट्रभाषा का भविष्य

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भाषा व्यक्तियों के बीच विचारों के आदान प्रदान करने का एक माध्यम है, अंग्रेजी में कहा गया है -''लैंग्वेज इज द कम्युनिकेशन ऑफ पर्सन टू पर्सन''।

भारत देश में कई प्रकार की भाषायें बोली जाती है ,जिनमे से हिन्दी भारत देश की प्रमुख भाषा है । भारत में सर्वाधिक हिन्दी बोले जाने के कारण ही भारत का नाम ''हिन्दुस्तान'' है। ''हिन्दुस्तान जिन्दाबाद'' रखने के लिए हिन्दी भाषा का उपयोग जरूरी है, परन्तु आज पश्चिमी सभ्यता के कारण हिन्दी का महत्व कम होता जा रहा है, और लोग अंग्रेजी को अधिक महत्व दे रहे है। हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है फिर भी इसका महत्व दिनों-दिन खत्म होता जा रहा है।

राष्ट्रभाषा का महत्व कम होने के निम्नलिखित कारण हैं-

1.पश्चिमी सभ्यता 2.शिक्षा का स्तर 3.रोजगार का क्षेत्र 4.टी.वी. और इन्टरनेट 5.समाचार पत्र 6.राजनीति 7.अंग्रेजी बोलने का शौक

राष्ट्रभाषा का आने वाला भविष्य-

आने वाले भविष्य में हिन्दी बोलने वाले 10 प्रतिशत लोग ही बचेंगे जो कि गाँव या पिछड़े क्षेत्रो में निवास कर रहे होंगे और देश की राष्ट्रभाषा खत्म हो जायेगी। अगर देश में हिन्दी भाषा का उपयोग खत्म हो जायेगा तो ''हिन्दुस्तान'' नाम भी खत्म हो जायेगा क्योंकि हिन्दी के बिना राष्ट्र ''हिन्दुस्तान'' नहीं हो सकता हिन्दी और हिन्दुस्तान एक साथ ही रहेंगे।

कुछ वर्षों के बाद बच्चा जन्म से ही अंग्रेजी बोलेगा और हिन्दी जानेगा ही नहीं की क्या है, तब ''हिन्दुस्तान'' नाम खत्म हो जायेगा और सिर्फ ''इण्डिया'' नाम रह जायेगा और सब अंग्रेज ही बन जायेंगे। तब न तो कोई वेद-पुराण पढ़ेगा न रामायण इन सभी की शिक्षा से आगें आने वाली पीढ़ी वंचित रह जायेगी। जब जन्म से ही बच्चा अंग्रेजी सीखेगा और बोलेगा तो हिन्दी ग्रन्थों को पढ़ ही नहीं पायेगा, इसलिए वह शिष्टाचार ,आदर ,सम्मान भी भूल जायेगा, गीता ज्ञान बताने वाला कोई न होगा और वेद, पुराण, ग्रन्थ एवं रामायण खत्म हो जायेंगे।

किसी भी चीज को बिगाड़ना सरल है परन्तु बनाना कठिन ,यदि एक बार राष्ट्रभाषा खत्म हो गई तो उसे वापस लाना बहुत कठिन होगा।

जिस प्रकार देश में संस्कृत् भाषा नाम मात्र ही रह गई है उसी प्रकार राष्ट्रभाषा हिन्दी के खत्म होने का समय दूर नहीं है। आने वाले समय में जो लोग हिन्दी बोलेंगे भी उनको हीन भावना से देखा जायेगा, जिससे बेबस होकर लोगों को अंग्रेजी सीखनी और बोलनी पड़ेगी।

राष्ट्रभाषा को बचाने के उपाय-

राष्ट्रभाषा को बनाए रखने के लिए आवश्यक है कि हम पश्चिमी सभ्यता पर ध्यान न देकर हम अपनी राष्ट्रभाषा और भारतीय सभ्यता तथा संस्कृति का उपयोग करें और अपनी भाषा तथा ग्रन्थों को खत्म न होने दें।

अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी का भी उपयोग अवश्य करे ।ताकि हमें हमारी हिन्दी भाषा न भूले और हिन्दी जीवित बनी रहे। रोजगार में हिन्दी माध्यम छात्र हो या अंग्रेजी माध्यम दोनों को समानता का अधिकार दिया जाय हिन्दी माध्यम छात्र को नौकरी और रोजगार से नकारा न जाय बल्कि हिन्दी माध्यम छात्र को अंग्रेजी ज्ञान के साथ उसे प्राथमिकता दी जाय ,भाषा न देखकर उसकी योग्यता पर ध्यान पर ध्यान दिया जाय।

राजनीतिक भाषण में भी अपनी राष्ट्रभाषा का पूरा उपयोग किया जाय सभी कार्यक्रमों में अंग्रेजी के साथ-साथ हिन्दी जरूर बोली जाय। अंग्रेजी बोलने का शौक रखें मगर अपनी राष्ट्रभाषा हिन्दी के साथ ताकि हिन्दी का महत्व कम न हो।

शासन अपनी राष्ट्रभाषा को प्रोत्साहित करती रहे तथा दूरसंचार के माध्यम से व समाचार पत्रों में हिन्दी का महत्व कभी-कभी जरूर बताया जाय जिससे ''हिन्दुस्तान'' में हिन्दी जीवित बनी रहे।

निष्कर्ष-

वास्तव में हिन्दी भाषा के भविष्य पर यदि ध्यान नहीं दिया गया तो यह खराब दिशा में जायेगा हिन्दी-हिन्दुस्तान का ही संबध है यदि हिन्दी न रहेगी तो हिन्दुस्ततान राष्ट्र का नाम भी नहीं रहेगा जब तक देश में हिन्दी है तब तक ही हिन्दुस्तान है।

अनुरोध-

''जय हिन्द और जय हिन्दुस्तान अमर रहे'' का नारा अमर बनाये रखने के लिए हिन्दी भाषा को बनाये रखना आवश्यक है, हमारा हिन्दुस्तान अमर बना रहे इसलिए हिन्दी का उपयोग जरूर किया जाय और राष्ट्र और राष्ट्रभाषा को जिन्दा बनाये रखें और हमारा देश हिन्दुस्तान बना रहे।

''जय हिन्दी ,जय हिन्द,जय हिन्दुस्तान।''

लेखक-

बी0के0गुप्ता

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