गुरुवार, 15 अक्तूबर 2015

कृष्ण कुमार चंचल की कविता

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मेरा भारत महान

100 में से 99 बेईमान

फिर भी मेरा भारत महान.

हर रोज आत्महत्या कर रहा किसान,

फिर भी मेरा भारत महान

बड़े-बड़े अपराधी जहाँ संसद में बैठ के बढ़ा रहे हैं देश की शान,

ऐसा है मेरा भारत महान.

जहाँ हर दिन माँ, बहन और बेटी की लुटती इज्ज़त और जान,

क्या यही है मेरा भारत महान?

खेत में आत्महत्या करता किसान,

फिर कैसे मेरा भारत महान?

हर रोज अपनी जान लुटाता इस देश का वीर जवान,

क्या ऐसे ही होगा मेरा भारत महान?

जहाँ एक सूट के लगते हैं करोड़ों के दाम,

वहीँ सैनिकों की रक्तरंजित वर्दियों को मिलता कूड़ादान.

कैसा है ये मेरा भारत महान?

रोज हमारी छाती पे मूंग दलता वो पाकिस्तान,

ऐसे में कैसा ये भारत महान?

जाति, धर्म और संप्रदाय के नाम पे

जब नित नए राज्यों के हो रहे है निर्माण,

क्या यही है मेरा भारत महान?

जिस देश में रानी लक्ष्मी, दुर्गा, सानिया और सायना ने जन्म लिया,

उसी देश में इन्द्राणी को मीडिया दे रहा है अद्भुत पहचान.

वाह रे! मेरा भारत महान.

 

क्या ये है मेरा भारत महान?

 

-

कृष्ण कुमार चंचल

M/9-D, Maroda Sector,

Bhilai. Chhatisgarh
490006

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