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स्त्री शक्ति । कामिनी कामायनी

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“और क्या ?एक ही फोन में दौड़ी चली  आई  । बस झोला में कुछ समान और छोटकी को साथ लेकर नथनी साहू कार्पेंटर  के साथ आ गई  । उसको देखकर जैसे कलेजा फट गया इसका  ,रुलाई रुक नहीं रही थी ।कैसा हो गया था । पैर पर पलस्तर ,देह पर मैल चिक्कट, दाढ़ी बड़ी  बड़ी , गंदे बिखरे बिखरे बाल सुख कर बदन कांटा ।जल्दी जल्दी उसका कपड़ा उतरवा कर रात में ही धो कर सूखने डाल दिया ।साबुन से उसके हाथ पाँव धोए ,। कोठरी में चारों तरफ नजर दौड़ाई ।दो  लिमका का खाली बोतल ,एक टिनही थारी ,दु मैल कंबल दो पैंट शर्ट ,तीन चार बरजर पैंट का खाली बड़ा डिब्बा । संपत्ति के नाम पर बस इतना ही । पास में कुछ पैसे थे ,पड़ोसी ने आटा आलू ला दिया और पड़ोसिन ने पका भी दिया । दूसरे दिन ही उन लोगों की मदद से दो काम भी मिल गया । और आज देखो ,मैडम सब की दुआ से इसका सारा घर ओढ़ने बिछाने ,पहनने खाने के सामान से ही नहीं ,बच्चों से भी भर गया ,अपना पैर जमाने के बाद गाँव से अपने तीनों बच्चों को भी बुलावा लिया और उनके पढ़ने की व्यवस्था भी वहीं कोठियों में रो कलप कर करवा दिया ।पति  दिहाड़ी मजदूर ,दस हजार कमाता था जिसमें आधी दारू में उड़ा देता और बाकी आधे में अपना पेट पालता और  बीबी बच्चों के लिए गाँव भेजता जहां घोर गरीबी में उससे चार पाँच जनो की पेट की आग अनबुझी ही रह जाती थी .अब देखो घर वाला अभी भी काम पर नहीं जाता है और दारू पीकर अक्सर इसपर हाथ भी उठा देता है ,मगर मात्र पाँच हजार में सब कुछ सम्हाल रही है” । मैंने अपनी सहेली ममता के बगल में खड़ी उसकी नई साफ सुथरी सुंदर सी काम वाली को देखा तो अचानक मुंह से निकल गया  था “इसीलिए तो नारी को लक्ष्मी कहा गया होगा”।

    कामिनी कामायनी ॥

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