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किताबों की दुनिया में भविष्य की अक्षर लकीरें / डॉ.चन्द्रकुमार जैन

किताबों की दुनिया व्यक्ति को केवल ज्ञान का भंडार ही नहीं उपलब्ध कराती बल्कि किताबें किसी भी व्यक्ति की वे साथी हैं जिनके कारण व्यक्ति स्वयं को कभी अकेला महसूस नहीं करता। पुस्तकें अथवा किताबें किसी व्यक्ति के लिए ज्ञान का वह भंडार हैं जिसके कारण व्यक्ति स्वयं को अत्यधिक सहज एवं ज्ञान से परिपूर्ण पाता है।

पुस्तकालय समाज की अनिवार्य आवश्यकता है। मनुष्य को भोजन कपड़े और आवास की व्यवस्था हो जाती है तो वह जिन्दा रह जाता है, शेष उन्नति तो वह उसके बाद सोचता है। समाज यदि विचारशील है तो वह शांति और सुव्यवस्था की अन्य आवश्यकतायें बाद में भी पूरी कर सकता है, इसलिये पुस्तकालय समाज की पहली आवश्यकता है, क्योंकि उससे ज्ञान और विचारशीलता की सर्वोपरि आवश्यकता की पूर्ति होती है। 

पुस्तकें आज केवल ज्ञान प्राप्ति का उत्तम साधन ही नहीं बल्कि आय के सृजन का भी उम्दा स्रोत बनती जा रही हैं। देश में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के पश्चात तो पुस्तकों से संबंधित रोजगार का वर्चस्व और भी अधिक हो गया है। आज किसी भी व्यक्ति के लिए अपनी इच्छानुसार ज्यादा से ज्यादा पुस्तकें खरीद पाना संभव नहीं है और व्यक्ति की इन्हीं इच्छाओं की पूर्ति करती है ‘लाइब्रेरी’। लाइब्रेरी पुस्तक ज्ञान का वह भंडार केन्द्र है, जहां से किताबें तथा पत्र-पत्रिकाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। अब तो सरकार की ओर से भी प्रत्येक क्षेत्रों में पुस्तकालयों की स्थापना की जा रही है।

ज्ञान-विज्ञान की असीम प्रगति के साथ पुस्तकालयों की सामाजिक उपयोगिता और अधिक बढ़ गयी हैI युग-युग कि साधना से मनुष्य ने जो ज्ञान अर्जित किया है वह पुस्तकों में संकलित होकर पुस्तकालयों में सुरक्षित हैI वे जनसाधारण के लिए सुलभ होती हैंI पुस्तकालयों में अच्छे स्तर कि पुस्तकें रखी जाती हैं; उनमें कुछेक पुस्तकें अथवा ग्रन्थमालाएं इतनी महँगी होती हैं कि सर्वसाधारण के लिए उन्हें स्वयं खरीदकर पढ़ना संभव नहीं होताI यह बात संदर्भ ग्रंथों पर विशेष रूप से लागु होती हैI बड़ी-बड़ी जिल्दों के शब्दकोशों और विश्वकोशों तथा इतिहास-पुरातत्व कि बहुमूल्य पुस्तकों को एक साथ पढ़ने का सुअवसर पुस्तकालयों में ही संभव हो पाता हैI

विस्तृत तथा विशेष ज्ञान प्रदान करने में पुस्तकालयों की भूमिका को व्यापक रूप में स्वीकार किया जाता है। 

रोजगार

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स्कूलों, कॉलेजों एवं सार्वजनिक निगमों में तो आज लाइब्रेरी होती ही हैं इसलिए लाइब्रेरी की संख्या बढऩे के साथ ही इसमें काम करने वाले लोगों की मांग भी बढ़ी है। लाइब्रेरी का प्रबंधन प्रशिक्षित लोगों के हाथ में होता है। एक बड़ी लाइब्रेरी में काम करने वालों की संख्या काफी अधिक होती है।

एक अच्छी लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन के साथ-साथ असिस्टैंट, डॉक्यूमैंट ऑफिसर, काऊंटर असिस्टैंट आदि स्टाफ होता है। अब तो देश के बड़े-बड़े पुस्तकालयों को कम्प्यूटर नैटवर्क के जरिए भी जोड़ा जा रहा है ताकि पाठकों को आसानी से मैटर उपलब्ध हो सके। विषयों की बढ़ती जटिलता के कारण अब यह पहले की भांति सरल नहीं रह गया है।

कार्यक्षेत्र

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किताबों की खरीद, विषयों के अनुसार उनका पृथककरण अथवा कैटेगराइजेशन, इनकी कैटलॉगिंग रखने की जगह का उचित प्रकार से निर्धारण आदि करने के मूल में ही पुस्तकालय विज्ञान का सार है।

योग्यता

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इस क्षेत्र में स्नातक होने के बाद आ सकते हैं। लाइब्रेरी विज्ञान की पढ़ाई देश के विभिन्न संस्थानों में होती है।

पाठ्यक्रम

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इसमें मुख्य रूप से बैचलर ऑफ लाइब्रेरी साइंस (बी.लिब.) कराया जाता है। इसके अतिरिक्त कई विश्वविद्यालयों में एम.लिब. और पीएच.डी. की भी सुविधा है। इसमें प्रवेश लिखित परीक्षा के आधार पर होता है। लिखित परीक्षा में सामान्य ज्ञान से संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

यह क्षेत्र विशेष रूप से महिलाओं के लिए अधिक आकर्षक होता है। महिलाएं इसमें बढ़-चढ़ कर भाग लेती हैं। इसमें नौकरी की संभावनाएं भी अधिक हैं। संदर्भ सहायक और प्रलेखन सहायक आदि पदों पर भी नियुक्ति बी.लिब. के छात्रों की ही होती है। यह एक वर्षीय कोर्स है।

लाइब्रेरियनशिप में पदनाम पुस्तकालयाध्यक्ष (लाइब्रेरियन), प्रलेखन अधिकारी, सहायक पुस्तकालयाध्यक्ष, उप पुस्तकालयाध्यक्ष, वैज्ञानिक (पुस्तकालय विज्ञान/प्रलेखन), पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, ज्ञान प्रबंधक/अधिकारी सूचना कार्यपालक, निदेशक/सूचना सेवा अध्यक्ष, सूचना अधिकारी तथा सूचना विश्लेषक हो सकते हैं। स्कूल, कॉलेज, विश्वविद्यालयों में; केन्द्रीय सरकारी पुस्तकालयों में,बैंकों के प्रशिक्षण केन्द्रों में; राष्ट्रीय संग्रहालय तथा अभिलेखागारों में; विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत गैर-सरकारी संगठनों में; आई.सी.ए.आर., सी.एस.आई.आर., डी.आर.डी.ओ.,आई.सी.एस.एस.आर.,आई.सी.एच.आर,आई.सी.एम.आर, आई.सी.एफ.आर.ई. आदि जैसे अनुसंधान तथा विकास केंद्रों में; विदेशी दूतावासों तथा उच्चायोगों में; विश्व स्वास्थ्य संगठन, यूनेस्को, संयुक्त राष्ट्र संघ, विश्व बैंक आदि जैसे अंतर्राष्ट्रीय केन्द्रों में; मंत्रालयों तथा अन्य सरकारी विभागों के पुस्तकालयों में; राष्ट्रीय स्तर के प्रलेखन केंद्रों में; पुस्तकालय नेटवर्क में; समाचार पत्रों के पुस्तकालय में ,न्यूज चैनल्स में; रेडियो स्टेशन के पुस्तकालयों में,सूचना प्रदाता संस्थाओं में इंडेक्स, सार संदर्भिका आदि तैयार करने वाली प्रकाशन कंपनियों में डिजिटल लाइब्रेरी ऑफ इंडिया आदि जैसी विभिन्न डिजिट ललाइब्रेरी परियोजना में,प्रशिक्षण अकादमियों में। 

संस्थान

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1 इंदिरा गांधी मुक्त विश्वविद्यालय, मैदान गढ़ी, नई दिल्ली

2  बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय, वाराणसी, उत्तर प्रदेश

3 जामिया मिलिया इस्लामिया विश्वविद्यालय, जामिया नगर, नई दिल्ली

4 दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली

5 मुम्बई विश्वविद्यालय, एम जी रोड, फोर्ट, मुम्बई, महाराष्ट्र

6 शिवाजी विश्वविद्यालय, विद्या नगर, ग्वालियर, मध्य प्रदेश

7 बिहार विश्वविद्यालय, मुजफ्फरपुर, बिहार और कुछ अन्य। 

वेतन

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वेतन संगठनों की प्रकृति के आधार पर भिन्न-भिन्न है। अनेक कॉलेजों तथा विश्वविद्यालयों ने पुस्तकालय-स्टाफ के लिए विअआ वेतनमान लागू किए हैं। केन्द्रीय सरकार की बड़ी संस्थापनाओं की संघटक इकाइयां जैसे वैज्ञानिक एवं औद्योगिकी अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर), रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) वैज्ञानिक स्टाफ पर यथा लागू वेतनमान देती है। कार्य-निष्पादन के आवधिक अंतराल पर मूल्यांकन के आधार पर उन्नति के अवसर इस कार्य को आकर्षक बनाते हैं।

अच्छा शैक्षिक रिकार्ड तथा कम्प्यूटर एवं सूचना प्रौद्योगिकी में पर्याप्त कौशल रखने वाले व्यक्ति इस व्यवसाय में आकर्षक करियर बना सकते हैं। प्रसंगवश यह भी कि मस्तिष्क को संस्कारवान् और ज्ञान से परिपूर्ण कर लेने पर मनुष्य व्यक्तिगत उन्नति ही नहीं, सामाजिक और राष्ट्रीय समृद्धि का भी द्वार खोल लेता है। इन लाभों को देखते हुए भारतवर्ष में भी पुस्तकालयों का जाल बिछाने की आवश्यकता अनुभव हो रही है। यदि कुछ विचारवाद व्यक्ति अथवा राजनैतिक नेता इसे एक अभियान का स्वरूप प्रदान कर दें तो देश देखते देखते धरती से आकाश में पहुँच सकता है।

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