शुक्रवार, 13 मई 2016

हे परीक्षा परिणाम ,मत डराओ बच्चों को / सुशील शर्मा

image


हे परीक्षा परिणाम
मत सताओ बच्चों को, प्यारे बच्चों के मासूम दिलों से खेलना बंद करो।
न जाने कितने मासूम दिलों से तुम खेलते हो ,न जाने कितने बच्चों के भविष्य को रौंद चुके हो तुम।
न जाने कितने माँ बाप को खून के आंसू रुला चुके हो तुम।
तुम्हे किसने यह अधिकार दिया कि तुम एक कागज पर लिखे अंको के आधार पर।


किसी की प्रतिभा का आंकलन करो ,तुम कौन होते हो यह निर्णय देने वाले की मार्कशीट के अंक बच्चे की प्रतिभा का प्रतिबिम्ब हैं।
क्या बिलगेट्स ,सचिन ,गांधी की प्रतिभा तुम्हारे अंको की मोहताज रही है ?
क्या नरेंद्र मोदी को तुमने प्रधानमंत्री लायक बनाया ?
क्या शिवराज तुम्हारे अंको के आधार पर कामयाबी के शिखर तक पहुंचे ?
क्या न्यूटन ओर आइंस्टीन को तुमने वैज्ञानिक बनाया ?
नहीं ये सभी प्रतिभाएं तुम्हारी अंको की लंगड़ी गाड़ी में चढ़ी।


ये सभी कड़ी मेहनत एवं लगन से शिखरों तक पहुंची हैं।
क्या तुम उस मासूम के करीब से गुजरे हो जिसके अंक तुमने सिर्फ इसलिए काटे हैं।
कि उसने रट कर तुम्हारा उत्तर नहीं दिया?
क्या तुमने उन माँ बाप के चहरों की उदासी देखी है जिनके बच्चे
तुम्हारी दी हुई लक्ष्मण रेखा पार नहीं कर सके ?


हे परीक्षा परिणाम
हो सके तो उन सही बच्चों के टूटे हुए दिलों में झांकना
जो कक्षा में प्रथम स्थानों पर नहीं आ सके।
हो सके तो उन सभी माँ बाप के बिखरते सपनों को
महसूस करना जिनके बच्चे IIT ,IIM एवं मेडिकल में नहीं जा सके।
क्या ये सब प्रतिभा हीन हैं ?क्या इनका कोई भविष्य नहीं है ?
तुमने तो एक कागज के टुकड़े पर अंक लिख कर
इनको प्रतिभा हीन प्रमाणित कर दिया।
तुमने इनकी कापियों को लाल ,हरा ,काला कर
इनके भविष्य पर अंको का ताला लगा दिया।
हे परीक्षा परिणाम तुम देखना
यही बच्चे तुम्हे झूठा साबित करेंगें।


ये तुम्हारे अंकों के कागज को रद्दी की टोकरी में फेंक कर।
बनेगें बिलगेट्स ,गांधी ,सचिन ,नरेंद्र मोदी और अब्दुल कलाम।
यही बच्चे बनेगें इंदिरा ,कल्पना ,सानिया और सायना।
यही बच्चे साबित करेंगे की तुम्हारा आंकलन सिर्फ कागज पर लिखे
कुछ अंको के आलावा कुछ नहीं है।
इसलिए हे परीक्षा परिणाम सुधर जाओ और मत डराओ इन मासूम बच्चों को।

0 blogger-facebook

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

----

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं...

1 करोड़ से अधिक पृष्ठ-पठन, 1.5 लाख गूगल+ अनुसरणकर्ता, 1500 से अधिक सदस्य

/ 2,500 से अधिक नियमित ग्राहक तथा 2000 से अधिक फ़ेसबुक प्रसंशक
/ प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 10,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को इंटरनेट के विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही नाका से जुड़ें. नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है.किसी भी फ़ॉन्ट, टैक्स्ट, वर्ड या पेजमेकर फ़ाइल में रचनाएँ rachanakar@gmail.com पर ईमेल करें. अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, समृद्ध व लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका

मनपसंद रचनाएँ खोजकर पढ़ें
गूगल प्ले स्टोर से रचनाकार ऐप्प https://play.google.com/store/apps/details?id=com.rachanakar.org इंस्टाल करें. image

--------