गुरुवार, 9 जून 2016

प्राची - मई 2016 : यहां वहां की / भ्रष्ट आचरण निर्माण में पत्नी का योगदान / दिनेश बैस

 

यहां वहां की

भ्रष्ट आचरण निर्माण में पत्नी का योगदान

दिनेश बैस

त्तर प्रदेश के एक भ्रष्ट शिरोमणि अधिकारी की पत्नीजी को भी सह आरोपी के रूप में सम्मान दिया गया है. उनके विषय में कहा गया है कि पतिजी को भ्रष्ट बनाने में उनका अद्वितीय योगदान रहा है. उनकी प्रेरणा से ही वे महाभ्रष्ट के सम्मान के अधिकारी हुये हैं. पतिजी ने भी स्वीकारा है कि यदि वे नहीं होतीं तो कदाचित वे एक सीधे साधे बांगड़ू से अफसर बन कर रह जाते. उन्हें राष्ट्रव्यापी ख्याति अर्जित नहीं होती. बड़ा आदमी बनने के लिये अगर वे निरंतर प्रेरित नहीं करतीं तो वे सरकारी बंगला-गाड़ी, एक अदद निजी कुत्ता के साथ ही, इस निरंतर स्थानान्तरणशील लोकसेवक जगत से कूच कर गये होते. पत्नीजी के प्रताप से आज वे इतने बड़े आदमी बन गये हैं कि उनकी आमदनी का हिसाब किताब लगाने में अनेक जांच एजेंसी स्वयं को असहाय महसूस कर रही हैं. राज्य की अनेक जेल उनके स्वागत की प्रतीक्षा में हैं.

यह घटना बताती है कि जीवन के हर क्षेत्र में स्त्रियों के योगदान को स्वीकारा जाने लगा है. उन्हें उचित सम्मान मिलने लगा है. स्त्रियां स्वयं को सिद्ध कर रही हैं कि वे कुछ भी कर सकती हैं, पुरुष के हर क्षेत्र में अतिक्रमण कर सकती हैं. महत्वपूर्ण यह है कि उनके इस दावे को स्वीकार भी किया जा रहा है. वह पिछड़ा समय गया जब पति भ्रष्ट आचरण से, अकूत दौलत कमा कर पत्नी के नाम सम्पत्ति बनाता जाता था. पकड़े जाने पर खाली हाथ जेल चला जाता था. पत्नी तिलक कर शुभकामना देती थी- आपकी यात्रा मंगलमय हो- जैसे पति परमेश्वर तीर्थ यात्रा पर जा रहे हों. सरकार के हाथ फूटी कौड़ी भी नहीं लगती थी. उल्टा जेल में सरकारी खर्च पर उनके खाने पीने से लेकर, पीने खाने तक की व्यवस्था और करनी पड़ती थी. अधिकारी पतिजी की भ्रष्टाचार करने की यह शैली उस स्वीकृत मान्यता के विपरीत होती थी जिसमें कहा जाता है कि नेकी कर, कुंये में डाल. अब कुंये नहीं रहे. इस अभाव को भरने के लिये विकल्प अवतरित हो गये हैं- आवश्यकता आविष्कार की जननी है- नेकी के स्थान पर बदी है, भ्रष्टाचार है. कुंए की भूमिका निभाने के लिये पत्नी प्रजाति है ही- वैसे भी कहा जाता है कि पत्नी हर चुनौती स्वीकार करने के लिये तत्पर रहती है- इस प्रकार अब कहावत का कायाकल्प यों हुआ कि भ्रष्टाचार कर और पत्नी को अर्पण कर- तेरा तुझ को सौंप कर क्या लागे है मोय- सम्भवतः यह प्रथम अवसर है जब 'तू जहां जहां चलेगा, मेरा साया साथ होगा' की स्थितियां बन रही हैं- पतिजी जेल गमन करेंगे तो पत्नी जी का भी साया नहीं, शरीर साथ होगा.

मध्य प्रदेश या अन्य राज्यों की भ्रष्ट अधिकारी तथा राजनीति भ्रष्टों की पत्नियां इस प्रकरण से बहुत हताश बताई जा रही हैं. उनकी आपत्ति है कि भ्रष्टाचार प्रेरक तत्व की तरह तो हम भी अपने दायित्व का निर्वाह करते हैं. फिर पतियों को भ्रष्ट बनाने में अब तक हमारी भूमिका क्यों नहीं स्वीकारी गई. निश्चय ही इस मामले में उत्तर प्रदेश अधिक न्यायप्रिय है, प्रगतिशील है. मेरा निवेदन है कि उन्हें हीन भावना से ग्रस्त होने की आवश्यकता नहीं है. ईश्वर के न्याय पर भरोसा करना चाहिये. कहा जाता है कि उसके घर में देर है, अंधेर नहीं है. कश्मीर से कन्याकुमारी तक देश एक है. यह संदेश हमें रेलवे की कन्याकुमारी एक्सप्रेस देती है. इस पर विश्वास करके उन्हें धैर्य रखना चाहिये कि आज जो कदम देश के एक राज्य ने उठाया है, कल उस पर चलने के लिये अन्य राज्य भी विवश होंगे. कब तक भ्रष्ट बनाने में पत्नियों के योगदान को अनदेखा करते रहेंगे?

पत्नियों को शुभकामना के साथ उनकी व्यापक भूमिका को स्वीकारना ही होगा. पत्नी प्रताप से अकल्पनीय विस्फोटक कार्य होते रहे हैं. कौन जानता था कि पत्नी की डांट का साइड इफैक्ट यह होगा कि तुलसी बाबा रामचरित् लिखने बैठ जायेंगे. कबीर ने इस रहस्य को समझा तो मुंह से निकल ही गया कि 'माया महा ठगनी हम जानी'- एक स्ट्रिंग ऑपरेशन में बताया गया था कि कबीर पत्नी को ही माया मानते थे- श्रीयुत धर्मेंद्रजी तो इन दुर्घटनाओं से इतने आहत हुये कि उन्हें भय सताने लगा- मैं कहीं कवी न बन जाऊं तेरे प्यार में ऐ कवीता-

घोषित फॉर्मूला यह है कि हर सफल व्यक्ति की सफलता के पीछे किसी न किसी महिला का हाथ होता है. यह फॉर्मूला किसी कुंठित व्यक्ति के द्वार बनाया प्रतीत होता है. सच यह है कि 'किसी' नहीं, पत्नी का हाथ होता है, उसकी प्रेरणा होती है. उसकी प्रेरणा के अभाव में भ्रष्ट होना सम्भव ही नहीं है. कभी संज्ञान में नहीं आया कि कोई पत्नी का अभाव झेलता प्राणी सफल भ्रष्टाचार कर पाया हो. वह इतना निराश होता है जीवन के दो ही विकल्प उसके पास बचते हैं. वह आत्महत्या करे या ईमानदार बना रहे- हर कोई आत्महत्या करने का साहस नहीं कर पाता है. कायरता में ईमानदार ही बना रहता है- हां, यह अवश्य है कि कभी-कभी केवल पत्नी की प्रेरणा भ्रष्ट होने में पर्याप्त नहीं प्रतीत होती है. ऐसी स्थिति में उत्कृष्ट भ्रष्ट बनने के महत्वाकांक्षी व्यक्ति को पत्नी के अतिरिक्त अंशकालिक पत्नियों की भी प्रेरणा ग्रहण करनी पड़ती है.

सम्पर्कः 3-गुरुद्वारा, नगरा, झांसी-28003

मो. 08004271503

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