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अनिल कुमार सोनी के हाइकु



"हाइकु" 


बदरा ले जा

ये नीर बहाकर 

आंसू गरम!


एक जग में

मैं जल पी जाता हूँ

आप बताएं?


जल थल में

जल है की थल है

महाभारत ।


जल की धारा

धुआंधार प्रपात

जबलपुर ।


जल व कुल

मिलन शीघ्र होता

कहावत है ।


राग धमार

पानी आटे की लोई

मृदंग बाजे ।


सूख गया है

जीवन का पानी भी

कैसे कुं जियें ।


सहारा पानी

ये रोटी ही ब्रह्म है 

"उपनिषद"


तूल तूलिका

आकार दे रंगीन

रंग व पानी ।


 पानी मृदा को

श्रम से कच्ची  ईंट

ताप से पकी ।


अछूत कुआं

पानी की किल्लत है

आज भारत ।


भूकंप आये

संतुलन बनाये 

समूद्रीजल ।


बीज संसार

जीव अवतार है

"पालनहार" ।



जल बिन्दु से

बीज अंकुरण है

जीवन भी है।


जल का क्रोध

सुनामी प्रलय भी

जल जीवन ।


काले पानी से

याद है न कुर्वानी

सजा होती थी !


बीज कपास

शर्मिला होता ही है

अहंकार न ।


बीज अमर

पानी हवा प्रेम हो

फल मिलता ।


बीज बबूल

फूल नहीं कांटे है

पानी न डालो ।


फ्रिजों में कैद !

हिमालय का बर्फ

पानी की कमी ।


जल कर भी

लगता है सबको

हवा कर भी?


जल जायेगा

अंबर में उड़ा है

भाप बनके ।


पानी तरंग

सा रे गा मा पा धा नि 

जल तरंग ।


बीज पहले

धर्म बाद में आया

बीज मंत्र है


हौसला कान्हा

माखन चोरी लीला

सुदामा मित्र


पंख नहीं है

हौसला फुदकना

पंछी धरा में


हौसला रखो   

जाने भी दो उनको  

आत्मा अमर


मिला हौसला

बना खिलाड़ी आज

सबके साथ


ढोल बजते

हौसला बुलंद हो

पहलवान


हाथ बटाऐं

स्वच्छ भारत में

हाथ का साथ


दिल से साफ

मन से भी साफ हैं

पर्यावरण


संक्रमण से

मकर राशि पर

कतार कैश


परिवर्तन 

समय उम्र रूप

ढलता जाता


वे और ये है

ये रहे न वे , हम

परिवर्तन


केंचुली वाला

केतली चाय वाला

परिवर्तन


लकड़ी बीज

आग कोयला राख

परिवर्तन


राग बसंत

पलाश के फूले है

परिवर्तन


जख्म भरे है

ठंडी हवाओं से भी

सुबह शाम


बहुआयामी

माँ मौसी बिटिया

साली ननद


बहू बेग़म

गम्भीर सबक है

गम ही गम


हू वहू बहू

बेटी बहू दुल्हन

बिदाई संग


जानकी सीता

कर्म की गीता  बनी

बहू अवध



बहू तारीफ

बहू सास तारीफ

न आलोचना


बहू बेग़म

गम्भीर सबक है

गम ही गम


हमारी शान

बनाए रखना है

बहू ही जाने


काये कक्कु 

बरस गये नोट

बना हाइकु ।


नहले पे दहा

बैंक अधिकारी जो

सोने में फसा।


कैसे कैसे हैं         

जैसे जैसे नगद      

वैसे वैसे है ।


जल जाता है

समुद्र में आदमी

जल पी कर ।


भाग्य की बातें

समझ में आती है

ऐकाग्रता में।


सुर साधना

ठोस द्रव गैस की

तीनों को जाने ।


आजाद हुये

इंसान और पक्षी

भाषा वहीं  है



अनिल कुमार सोनी 
विषय:

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