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बालकथा / कौवा काला क्यों ? / -दीनदयाल शर्मा

कौवा काला क्यों ?

हजारों वर्ष पहले की बात है। तब संसार के सभी पक्षियों का रंग सिर्फ सफेद ही होता था। यह देख कर एक दिन ब्रह्मा जी ने सोचा कि बेचारे भोले-भाले पक्षी एक ही रंग के कारण कितने दुखी हैं। अतः: इस सम्बन्ध में चंदन वन में सभी पक्षियों की एक बैठक बुलवाई। बैठक में संसार के अनेक पक्षियों के अलावा कीड़े-पतंगे भी आए।

चन्दन वन के बीच में लगे बरगद के पेड़ के नीचे बैठक आरंभ हुई। ब्रह्मा जी ने वहां लगे आसन पर अपना स्थान ग्रहण किया। सारे पक्षी एवं कीड़े पतंगे उनके चारों और बैठ गए।

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कुछ देर ब्रह्मा जी खड़े हुए और पक्षियों से बोले, ‘मेरे प्यारे पक्षियों, तुम सभी को केवल सफेद रंग में देखता हूं तो पहचानना मुश्किल हो जाता है, कि किस पक्षी का क्या नाम है। तुम्हें भी आपस में एक दूसरे को पहचानने में काफी दिक्कत होती है।’

कौवा बोला, ‘हां भगवन्, हमें बहुत दिक्कत होती है।’

‘अच्छा ठीक है, बीच में मत बोलो। हां तो आज यह बैठक इसलिए बुलाई गई है कि तुम सबको अपनी अपनी पसंद के अनुसार सुन्दर-सुन्दर रंग दिया जा सके। ऐसा करने से तुम सबकी एक अलग पहचान होगी। फिर तुम्हें पहचानने में कोई कठिनाई नहीं होगी।’ ब्रह्मा जी ने कहा और फिर सभी से पूछा, ‘हमारी राय कैसी लगी आप सबको ?’

‘बहुत अच्छी भगवन्।’ सभी पक्षी एक साथ बोले। फिर ब्रह्मा जी ने कहा, ‘साथियों, आज तुम अपनी अपनी पसंद का रंग मांगो। रंग मांगने में कोई संकोच नहीं करना। जैसा रंग तुम चाहोगे, वैसा ही मिलेगा।’ इतना कह कर ब्रह्मा जी आसन पर बैठ गए।

ब्रह्मा जी की बात सुन कर सभी पक्षी खुशी से चहचहाने लगे। मोर की पीऊ-पीऊ, तोते की टीऊ-टीऊ, कौवे की कांव-कांव, मुर्गे की कुकडू-कूं, कबूतर की गटर-गूं और कोयल की मधुर कू-कू की आवाज से सारा चंदन वन गूंज उठा।

कुछ देर बाद बैठक में आए सभी पक्षियों एवं कीड़ों-पतंगों को बारी-बारी से अपनी- अपनी पसंद का रंग दिया जाने लगा। सबके अंत में कौवे की बारी आई। कौवे ने पीला रंग मांगा। ब्रह्माजी ने उसे पीले रंग का बना दिया। कौवा अपना पीला रंग देखकर बोला, ‘भगवन् पीला रंग मुझे अच्छा नहीं लगता। मुझे तो नीला रंग दे दो।’

ब्रह्माजी ने उसे नीला रंग दे दिया तो पीले रंग पर नीला रंग चढ़ते ही कौवा हरे रंग का हो गया। हरा रंग देखकर कौवा बोला, ‘भगवन्, मुझे लाल रंग दे दो, हरा अच्छा नहीं लगता।’ और जब उसे लाल रंग दिया तो वह बैंगनी रंग का हो गया। कौवा अपना बैंगनी रंग देखकर बोला, ‘भगवन. यह तो अच्छा नहीं लगता, कोई और रंग दे दो।’

कौवे की बात सुनकर ब्रह्मा जी को गुस्सा आ गया। उन्होंने गुस्से से कौवे को काले रंग का बना दिया। ब्रह्मा जी बोले, ‘मूर्ख, तुझे कोई रंग पसंद नहीं आता। जा, तेरी यही सजा है कि तू अब हमेशा काले रंग का ही रहेगा।’ कौवा अपना काला रंग देखकर बोला, ‘भगवन्, मुझे काला रंग तो बिलकुल ही अच्छा नहीं लगता। चलो, पीला ही दे दो।’

ब्रह्मा जी ने कहा, ‘नहीं अब कुछ नहीं हो सकता, क्योंकि तूने अपने द्वारा मांगे रंग पर संतोष नहीं किया। अब तू हमेशा काले रंग का ही रहेगा।’ और उस दिन के बाद से कौवे का रंग काला हो गया।

-दीनदयाल शर्मा

‘टाबर टोल़ी’, 10/22 आर. एच. बी. कॉलोनी,

हनुमानगढ़ जं. 335512, राजस्थान

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