शुक्रवार, 27 अक्तूबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–5 : 10 एक आँख // सुषमा गुप्ता

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10 एक आँख[1]

एक बार दो फ्रायर[2] भीख माँगने निकले। पहाड़ों पर अंधेरा हो गया था पर एक गुफा में रोशनी हो रही थी सो वे वहाँ पहुँच गये और वहाँ जा कर आवाज लगायी — “ओ घर के मालिक, क्या आप हमको रात को सोने के लिये जगह देंगे?”

एक बिजली की कड़क जैसी आवाज जो सारे पहाड़ को कँपकँपा गयी बोली — “अन्दर आ जाओ।”

दोनों फ्रायर अन्दर चले गये। वहाँ आग के पास एक बड़े साइज़ का आदमी[3] बैठा हुआ था। उसके एक आँख थी जो उसके माथे पर थी। वह बोला — “आओ तुम लोग यहाँ बैठो।तुम लोग यहाँ आराम से रहोगे।”

दोनों फ्रायर तो उसको देख कर पत्ते की तरह से काँपने लगे। वह दोनों फ्रायर के पीछे गया और एक बड़ा सा पत्थर गुफा के दरवाजे पर लगा कर उसने गुफा में घुसने का दरवाजा बन्द कर दिया। वह पत्थर इतना बड़ा था कि 100 आदमी भी मिल कर उसे नहीं हटा सकते थे।

उस एक आँख वाले ने कहा — “हालाँकि खाने के लिये मेरे पास 100 भेड़ें हैं पर अभी तो पूरा साल पड़ा है और मुझे उनको पूरे साल के लिये बचाना है इसलिये अब तुम मुझे यह बताओ कि मैं तुममें से पहले किसको खाऊँ? छोटे फ्रायर को या बड़े फ्रायर को? तुम आपस में तय कर लो, चाहे लौटरी निकाल लो और मुझे बता दो।”

सो लौटरी निकाली गयी और उसमें बड़े फ्रायर का नाम निकला। बड़े फ्रायर का नाम देखते ही वह एक आँख वाला बड़े फ्रायर की तरफ दौड़ा, उसको एक लोहे की सलाख के चारों तरफ लपेटा और आग पर भूनने के लिये रख दिया।

वह उस लोहे की सलाख को अलटता पलटता रहा और गाता रहा — “मोटा आज छोटा कल, मोटा आज छोटा कल।”

छोटा फ्रायर तो अपने साथी के इस तरह मरने पर बहुत दुखी था और सोच रहा था कि वह अपनी इस तरह की किस्मत को किस तरह से बदल सकता था।

जब बड़े फ्रायर का भुनना खत्म हो गया तो उस एक आँख वाले ने उसे खाना शुरू किया। उसने बड़े फ्रायर की एक टाँग छोटे फ्रायर को भी स्वाद के लिये खाने के लिये दी। छोटे फ्रायर ने उसको खाने का केवल बहाना किया पर असल में उसने उसको अपने पीछे फेंक दिया।

जब उस एक आँख वाले ने बड़े फ्रायर को खा लिया तो उसने उसकी हड्डियाँ उठा कर फेंक दीं और वहीं पास पड़े भूसे पर सो गया। छोटा फ्रायर आग के पास ही गुड़मुड़ी बना बैठ गया पर बहाना करता रहा कि वह भी सोने ही वाला था।

जब उसने एक आँख वाले की खर्राटे की आवाज सुनी तो उसने वह लोहे की सलाख उठायी जिस पर उसने बड़े फ्रायर को भूना था और उसको लाल हो जाने तक गरम किया।

इस बीच वह गाता रहा — “इसको भौंक दो इस बड़े साइज़ के आदमी की अकेली आँख में।” यह कह कर उसने वह लोहे की सलाख उस बड़े साइज़ के आदमी की अकेली आँख में भौंक दी।

सलाख के आँख के अन्दर जाते ही वह बड़े साइज़ का आदमी चिल्लाता हुआ कूद कर उठ बैठा और छोटे फ्रायर को पकड़ने के लिये अपने हाथ इधर उधर फेंकने लगा।

अब क्योंकि उसकी आँख फूट गयी थी तो वह देख तो सकता नहीं था इसलिये छोटा फ्रायर जल्दी ही भेड़ों के झुंड में भाग गया।

एक आँख वाला उसका पीछा करता रहा और भागते भागते वह भी भेड़ों के झुंड तक आ पहुँचा और अपने हाथों से उनको एक एक करके महसूस किया पर वह छोटा फ्रायर हर बार उसके हाथों से बच गया।

जब वह एक आँख वाला उस छोटे फ्रायर को काफी कोशिशों के बाद भी नहीं पकड़ सका तो चिल्ला कर बोला — “तुम ज़रा दिन निकलने तक रुको फिर मैं तुम्हें देखता हूँ।”

यह सुन कर छोटे फ्रायर ने एक भेड़ ली उसकी खाल निकाली और उसमें छिप गया। जब दिन निकल आया तो एक आँख वाले ने गुफा के दरवाजे से पत्थर हटाया और खुद वहाँ जा कर बैठ गया।

उसकी एक टाँग दरवाजे के एक तरफ थी और दूसरी टाँग दरवाजे के दूसरी तरफ। ऐसा उसने इसलिये किया था ताकि वह हर बाहर जाने वाले को महसूस कर सके।

इस तरीके से वह भेड़ को तो वहाँ से गुजर जाने देगा पर अगर कोई आदमी गुजरेगा तो वह उसको पहचान लेगा। फ्रायर ने एक छोटी भेड़ को अपने ऊपर रखा और उस बड़े साइज़ के आदमी की टाँगों के बीच में से निकल गया।

उस बड़े साइज़ के आदमी को पता ही नहीं चला कि छोटा फ्रायर कब उन भेड़ों के झुंड में से निकल कर बाहर भाग गया। उसने सोचा कि उसके नीचे से तो सारी भेड़ें ही निकल कर जा रही है तो लगता है कि वह उसके बिना महसूस किये ही बाहर निकल गया होगा।

इस तरह से उस छोटे फ्रायर ने उस बड़े साइज़ के आदमी से अपनी जान बचायी।



[1] One Eye (Story No 115) – a folktale from Abruzzo area, Italy, Europe.

Adapted from the book : “Italian Folktales”, by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Friar is a religious order in Roman Catholic Church especially in mendicant orders

[3] Translated for the word “Giant”

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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