सोमवार, 16 अक्तूबर 2017

शून्य पुत्र दशमलव // डाक्टर चंद जैन “अंकुर “

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स्वजनों एवं प्रिय मित्रों आज 15 th oct को world methmetics day है जिसे विश्व गणित दिवस के रूप में मनाया जाता है | मैंने गणित पर काव्य लिखने का प्रयास किया है ,आप लोगों का आशीर्वाद चाहूँगा | विश्व निर्माण के पहले कण से ही गणित आरंभ हो जाता है फिर अंक फिर रेखा इसके बाद बीज गणित का विकास हुआ | स्वर व्यंजन को अभिव्यक्त करने के लिए अक्षर विकसित हुआ | ये हमारे ऋषि वैज्ञानिक के पुरुषार्थ से संभव हुआ है जिन्होंने शून्य में उस परम सत्ता के अस्तित्व को अनुभव किया |


जब कुछ भी नहीं था तब शून्य था ये बात विज्ञान और अध्यात्म दोनों मानते हैं तब सबसे पहले पहला कण का उदभव हुआ | माँ शिव शक्ति का शब्द अभिव्यक्ति है शिव परम ऊर्जा का स्रोत है तो शक्ति उसका प्रवाह है जो विश्व के कण-कण में व्याप्त है ,इसी अभिव्यक्ति को मेरी कविता शून्य पुत्र दशमलव के माध्यम से प्रस्तुति का प्रयास है | दशमलव गणित की वो इकाई है जिसका बहुआयामी मान है,यह सूक्ष्मता की पराकाष्ठा और विशालता के अंतिम बिंदु की अभिव्यक्ति को अपने में समेटे रखता है , ये सूक्ष्मता और विशालता का योग बिंदु है।

0,1,2,3,4,5,6,7,8,9 संग मानव की चेतना और पुरुषार्थ के योग को गणित के माध्यम से अभिव्यक्त कर सकता है| दशमलव एक ऐसा बिंदु मान है जब ये किसी भी संख्या में स्थान बदलता है तो १ और ० को प्रभावित करता है जैसे १० गुना १०० गुना १००० कम या ज्यादा कर सकता है | सच कहा जाये तो गणित की भाषा में ये शून्य का प्रथम पुत्र है जो अदिशाक्तिमान है | ये केवल कल्पना नहीं है इसमें कल्पना विज्ञान है |

शून्य पुत्र दशमलव

शिव माँ के अवगुंजन से एक चितेरा जन्म लिया
शिव ने मैय्या से पूछा ये नन्हा सा कौन प्रिये
क्या सौर बुनेगा बोल शिवानी ये अपना पहला*तारा
माँ ने बोली युग्म हमारा गीत युगों तक गायेगा
ये शून्य का उदभव है विश्व दशमलव पायेगा


ये मुक्त है शिवम् पूर्ण है ये अपना पहला बच्चा
धन ऋण गुणा भाग योग से रूप बदलता जायेगा
सोच समझ कर रखना भवानी विश्व भाग्य खुल जायेगा
अभय दान शिव से माँगा शिव ने ये वरदान दिया
अभय रहेगा उभय हमारा विश्व बीज कहलायेगा


मैं परमआगमन शून्य ० रूप में मातृ शिखर पर बैठूंगा
माँ ही नारीश्वर शब्द रूप है मै हूँ तेरा अर्द्ध प्रिये
जन्म मृत्यु का योग है हम तू केवल जननी है प्रिये
पुनर्जन्म का मैं कर्ता हूँ आदि बीज का कारण हूँ
गुरुत्व केंद्र का केंद्र दशमलव अनंत गुणों का योग प्रिये


पञ्च तत्व का योग दशमलव ,सूक्ष्म,,सूक्ष्मतम का भेद प्रिये
गुरुत्व केंद्र का केंद्र दशमलव,ये आदि अनंत का मेल प्रिये
ये पहला कण शून्यमान है और शिव का उद्घाटन है
ये मैय्या का अंक ,भवानी ये नन्हा विश्वान्कुर है
ऋषि वैज्ञानिक का अन्वेषण शून्य विश्व को पूर्ण किया


और दशमलव प्रथम पुत्र है और सनातन गाथा है
परमाणु चेतना का उद्गम है विश्व चेतना दर्शन है

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