370010869858007

---प्रायोजक---

---***---

नीचे टैक्स्ट बॉक्स से रचनाएँ अथवा रचनाकार खोजें -
 नाका संपर्क : rachanakar@gmail.com अधिक जानकारी यहाँ [लिंक] देखें.

****

Loading...

व्यंग्य // बाज़ार से गुजरा है वो, खरीदार नहीं है....// गिरीश पंकज

image

वो बाज़ार से गुज़र रहा था लेकिन कुछ-कुछ डरा हुआ था.

उसका चेहरा देख कर मैंने पूछ लिया , ''बाज़ार में रौनक है लेकिन तुम्हारे चेहरे पर हवाइयां उड़ रही हैं, क्या बात है ?''

वह उदास मुस्कान के साथ बोला, ''जब जेब खाली हो, यानी कंगाली -ही - कंगाली हो तो बाज़ार सबसे डरावनी जगह लगती है।''

मैंने पूछा, ''जेब क्यों खाली है? जबकि सामने दिवाली है।  क्या गरीब और क्या अमीर, हर कोई बाजार में ही नज़र आ रहा है।  देखो, वो सेठ अपनी सेठानी के साथ कितनी ज़बरदस्त खरीदारी कर रहा है।  हर दुकानदार मालामाल है, और तू है कि कंगाल है? अरे,  क्या तू किसी की जेब नहीं काटता? क्या रिश्वतखोरी नहीं करता? बोल न पगले, क्या किसी को ठगने का धंधा नहीं करता? तू है कौन, तेरा परिचय क्या है? बोल न आम आदमी ?''

वह मुस्कराने लगा, ''अरे, तुमने तो ठीक ही पहचाना, मैं आम आदमी हूँ. जो आम के मौसम में भी ठीक से आम नहीं खा पाता। ऐसा आदमी हूँ जिसकी आमदनी इतनी ही है कि ज़िंदा भर रह सके.''

मैंने कहा, ''तुम्हारे चेहरे को देख कर मैं पहले ही समझ गया था कि इतना उदास और परेशानहाल चेहरा किसी आम आदमी का ही हो सकता है।  धनतेरस पर हर कोई  कुछ-न-कुछ ख़रीद रहा है और तुम हो कि चचा ग़ालिब का शेर गुनगुनाते हुए घूम रहे हो ?''

आम आदमी अब जोर से हँस पड़ा. लगा जैसे बाज़ार की रौनक अचानक कुछ बढ़ -सी गई है. वह बोला, ''अरे आप तो ज्योतिषी भी लगते हैं? अभी कुछ देर पहले ही मैं गुनगुना ही रहा था, 'दुनिया में हूँ, दुनिया का तलबगार नहीं हूँ / बाजार से गुजरा हूँ खरीदार नहीं हूँ'  हम लोग बाजार से गुजरते हैं और तृप्त हो जाती हैं।  जैसे गरीब और भूखा बच्चा होटल के बाहर खड़ा हो कर मिठाइयों को निहारता है और  जलेबी, रसगुल्ला या राजभोग आदि खाने की कल्पना करके ही तृप्त हो जाता है. अपन का भी यही हाल है।  लोगों को खरीदते देखते हैं और प्रसन्न हो जाते हैं कि चलो,  कोई तो है जो खरीद रहा है. धनतेरस पर हर कोई धन के लिए तरसे यह ठीक नहीं।  हम लोग तरसते रहें तो कोई बात नहीं. बाकी लोग धनतेरस में धनबरसे का सुख लेते रहे.''

मैंने कहा, ''तुम बड़े दिल वाले हो. सबको दुआएं दे रहे हो..''

उसने कहा, ''अपने हिस्से जो है, उसे देने में क्या दिक्कत है? क्या लोग   ये भी नहीं देते?''

मैंने कहा, ''बिलकुल, लोग दुआएँ देने में भी कंजूसी करते हैं।  तुम खुल कर दे रहे हो इसका मतलब है तुम सबसे धनवान हो। ''

आम आदमी बोला, ''काहे मज़ाक करत हो बाबू ?   हम और धनवान?''

हमने कहा, ''तुम्हारे पास दुआओं का खज़ाना है भाई, जिसे लुटा रहे हो. वो जो मोटा सेठ  पूरे बाज़ार को खरीदने पर आमादा है उससे जाकर कहो तो कि आप पैसे मत दो, दुनिया के लिए  दुआएं भर कर दो , देख लेना नहीं करेगा।''

आम आदमी चकरा गया, बोला, ''अरे, क्या ऐसा भी हो सकता है? मुझे तो यकीन नहीं होता। ''

मैंने कहा, ''समाज में ऐसे अनेक लोग  ज़िंदा हैं जो किसी के कटे पर लघुशंका भी नहीं करते।  चलो, हम अपनी बात की सच्चाई को आजमाते है।''

इतना बोल कर मैं आम आदमी के साथ सामान खरीद रहे सेठ के पास जा पहुंचा. मैंने कहा, ' सेठ जी, दिवाली का समय है।  कुछ दे दीजिए।''

सेठ  बोला, ''आगे जाओ भाई, कड़की चल रही है।  बाजार लूटने पर आमादा है.  डिस्टर्व मत करो।' '

हमने कहा, ''आप दुनिया की खुशहाली के लिए दुआ भर कर दो।  हम लोग चले जाएंगे।''

सेठ कुछ देर सोचने लगा फिर बोला, ''ये फालतू काम हम नहीं करते।  जाओ, कहीं और जाओ.''

हम मुस्कराते हुए लौट आए।  आम आदमी बोला, '' आप तो उड़ती चिड़िया के पर गिन लेते हैं।  मेरे बारे में जान गए, उस सेठ का चरित्तर समझ गए।  आप हैं कौन?''

अब मुझे हँसी आ गई. मैंने कहा, ''मैं भी आम आदमी हूँ।  बस तुम बोलते नहीं, मैं बोलकर लिख भी लेता हूँ। ''

आम आदमी खुश हो गया और बोला, ''बाज़ार से घर खाली हाथ लौट रहा था. अब आपकी कविता के साथ लौटूंगा. कुछ सुनाइए। ''

मैंने कहा , ''कोई बड़ी कविता फ़ौरन तो सम्भव नहीं होगी, लो  तुकबंदी टाइप की कुछ सुन लो। 

'बाजार से गुजरा है, खरीदार नहीं है'

क्या आदमी जीने का हकदार नहीं है

खाली है जेब उसकी मुरझा गया चेहरा

वैसे है भला -चंगा बीमार नहीं है।''

आम आदमी खुशी-खुशी बाज़ार से बाहर हो कर घर की तरफ बढ़ गया। घर ही गया अथवा गम भुलाने के लिए ''कहीं और'' चला गया, यह ग्यारंटी से कहना मुश्किल है।  लेकिन बाज़ार से दूर हो गया, इतना तय है

--

गिरीश पंकज

(गिरीशचंद्र उपाध्याय)
संपादक, सद्भावना दर्पण

२८ प्रथम तल, एकात्म परिसर,

रजबंधा मैदान रायपुर, छत्तीसगढ़. 492001*

----------------------------------------------------------------------------------------------------------

निवास - सेक़्टर -3 , एचआईजी -2 , घर नंबर- 2 ,  दीनदयाल उपाध्याय नगर, रायपुर- 492010
------------------------------------------------------------------------------------------------------------
पूर्व सदस्य, साहित्य अकादमी, नई दिल्ली (2008-2012)
उपन्यास, 16  व्यंग्य संग्रह सहित 60  पुस्तके
------------------------------------------------------------------------
1- http://sadbhawanadarpan.blogspot.com
2 - http://girishpankajkevyangya.blogspot.com
3 -http://girish-pankaj.blogspot.com

व्यंग्य 7964493682863437535

एक टिप्पणी भेजें

रचनाओं पर आपकी बेबाक समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक धन्यवाद.

स्पैम टिप्पणियों (वायरस डाउनलोडर युक्त कड़ियों वाले) की रोकथाम हेतु टिप्पणियों का मॉडरेशन लागू है. अतः आपकी टिप्पणियों को यहाँ प्रकट होने में कुछ समय लग सकता है.

emo-but-icon

मुख्यपृष्ठ item

रचनाकार में छपें. लाखों पाठकों तक पहुँचें, तुरंत!

प्रकाशनार्थ रचनाएँ आमंत्रित हैं.

   प्रतिमाह 10,00,000(दस लाख) से अधिक पाठक
/ 14,000 से अधिक हर विधा की साहित्यिक रचनाएँ प्रकाशित
/ आप भी अपनी रचनाओं को विशाल पाठक वर्ग का नया विस्तार दें, आज ही रचनाकार से जुड़ें.

विश्व की पहली, यूनिकोडित हिंदी की सर्वाधिक प्रसारित, लोकप्रिय ई-पत्रिका - नाका में प्रकाशनार्थ रचनाओं का स्वागत है. किसी भी फ़ॉन्ट में रचनाएं इस पते पर ईमेल करें :

rachanakar@gmail.com
कॉपीराइट@लेखकाधीन. सर्वाधिकार सुरक्षित. बिना अनुमति किसी भी सामग्री का अन्यत्र किसी भी रूप में उपयोग व पुनर्प्रकाशन वर्जित है.
उद्धरण स्वरूप संक्षेप या शुरूआती पैरा देकर मूल रचनाकार में प्रकाशित रचना का साभार लिंक दिया जा सकता है.

इस साइट का उपयोग कर आप इस साइट की गोपनीयता नीति से सहमत होते हैं.

नाका में प्रकाशनार्थ रचनाएँ भेजने संबंधी अधिक जानकारी के लिए यह लिंक देखें - http://www.rachanakar.org/2005/09/blog-post_28.html

आवश्यक सूचना : कृपया ध्यान दें -

कविता / ग़ज़ल स्तम्भ के लिए, कृपया न्यूनतम 10 रचनाएँ एक साथ भेजें, छिट-पुट एकल कविताएँ कृपया न भेजें, बल्कि उन्हें एकत्र कर व संकलित कर भेजें. एकल व छिट-पुट कविताओं को अलग से प्रकाशित किया जाना संभव नहीं हो पाता है. अतः उन्हें समय समय पर संकलित कर प्रकाशित किया जाएगा. आपके सहयोग के लिए धन्यवाद.

*******


कुछ और दिलचस्प रचनाएँ

---प्रायोजक---

---***---

फ़ेसबुक में पसंद करें

---प्रायोजक---

---***---

ब्लॉग आर्काइव