बुधवार, 29 नवंबर 2017

देश विदेश की लोक कथाएँ — यूरोप–इटली–7 : 2 इस्मेलियन सौदागर // सुषमा गुप्ता

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2 इस्मेलियन सौदागर

एक बार एक राजा अपने आदमियों के साथ शिकार खेलने गया तो कुछ ही देर में आसमान में बादल घिर आये और भारी बारिश होने लगी। बारिश से बचने के लिये लोग चारों तरफ भागने लगे।

उस बारिश में राजा रास्ता भूल गया। उसको एक अकेला मकान दिखायी दे गया तो वह उस मकान में शरण लेने के लिये उधर की तरफ चल पड़ा।

उस मकान में एक बूढ़ा रहता था। राजा ने उस बूढ़े से पूछा — “क्या आप मुझे रात भर के लिये यहाँ शरण देंगे?”

बूढ़ा बोला — “हाँ हाँ क्यों नहीं। आइये मैजेस्टी, अन्दर आ जाइये और आग के पास बैठिये। थोड़ा गरम होइये और अपने आपको सुखाइये।”

राजा ने अपने गीले कपड़े खूँटी पर टाँग दिये और वहाँ पड़े एक काउच पर लेट गया। कुछ ही देर में वह सो गया।

रात को किसी समय उसकी आँख खुल गयी तो उसने उस बूढ़े को किसी से बात करते हुए सुना। उसने उस बूढ़े को घर भर में ढूँढा पर जब वह उसको घर में कहीं नहीं मिला तो वह दरवाजे की तरफ बढ़ा।

उसने बाहर देखा तो आसमान तो साफ पड़ा था और आसमान में तारे चमक रहे थे। दरवाजे की सीढ़ियों पर वह बूढ़ा अकेला बैठा हुआ था।

राजा ने उससे पूछा — “ओ भले आदमी, तुम अभी अभी किस से बातें कर रहे थे?”

बूढ़ा बोला — “मैं ग्रहों से बातें कर रहा था।”

राजा ने फिर पूछा — “ग्रहों से तुम क्या कह रहे थे?”

बूढ़ा बोला — “मैं उनको अपने लिये अच्छी किस्मत लाने के लिये धन्यवाद दे रहा था।”

“क्या अच्छी किस्मत?”

बूढ़ा बोला — “यही कि उन्होंने मेरे ऊपर कितनी मेहरबानी की है कि आज की रात उन्होंने मेरी पत्नी को एक बेटा दिया है। और आपके ऊपर भी कि उन्होंने आपकी पत्नी को एक बेटी दी है। जब मेरा बेटा बड़ा हो जायेगा तो वह आपकी बेटी से शादी कर लेगा।”

राजा को यह सुन कर गुस्सा आ गया क्योंकि यह तो वह सोच ही नहीं सकता था कि अगर आज की रात उसके कोई बेटी हुई भी है तो वह उसकी शादी इस गरीब बूढ़े के बेटे से कर देगा।

वह गुस्से में बोला — “ओ नीच जात। यह सब बेकार की बात मुझसे करने की तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई? तुमको इसकी सजा मिलेगी।”

उसने कपड़े पहने और सुबह होते ही अपने महल चला गया।

रास्ते में उसको अपने नाइट्स और नौकर मिले जो उसको ढूँढने के लिये निकले हुए थे। वे बोले — “योर मैजेस्टी, आपके लिये एक बहुत ही अच्छी खबर है। कल रात रानी जी ने एक बेटी को जन्म दिया है।”

राजा तुरन्त ही अपने महल की तरफ चल दिया। जैसे ही वह अपने घोड़े से उतरा तो उसके दरबारियों ने उसे घेर लिया और उसको बताया कि उसके बेटी हुई है। जब वह अन्दर पहुँचा तो आयाओं ने उसको उसकी बेटी दिखायी।

बच्ची को देखते ही उसने अपने राज्य में मुनादी पिटवा दी कि कल रात जितने भी लड़के पैदा हुए हों उनको ढूँढ ढूँढ कर मार दिया जाये। उसके सिपाही तुरन्त ही शहर में गये और एक घंटे में ही सारे शहर को छान मारा।

उनको केवल एक ही लड़का मिला जो कल रात पैदा हुआ था। उन्होंने उसको उसकी माँ से छीना और राजा के हुकुम से उसको जंगल ले गये।

वे दो सिपाही थे और जैसे ही उन्होंने उस बच्चे को मारने के लिये अपनी तलवार उठायी तो उनके दिल में दया आ गयी। उन्होंने सोचा कि “क्या हमको सचमुच में इस भोले भाले बच्चे को मारना चाहिये जो बेचारा अभी केवल एक दिन का ही है।

यहाँ यह कुत्ता है। हम इस कुत्ते को मार देते हैं और इसका खून उस बच्चे के कपड़ों पर लगा कर राजा के पास ले चलते हैं। और इस बच्चे को भगवान की दया पर यहीं छोड़े जाते हैं।”

उन्होंने वैसा ही किया। उन्होंने कुत्ते को मार कर उसका खून बच्चे के कपड़ों पर लगाया और उसके कपड़े राजा के पास ले गये और बच्चे को वही जंगल में पड़ा छोड़ दिया। बच्चा जंगल में पड़ा चिल्लाता रहा।

एक इस्मेलियन सौदागर जियूमैन्टो वहाँ से अपना सामान बेचने के लिये उधर से गुजर रहा था कि उसने किसी बच्चे की रोने की आवाज सुनी। वह उधर गया तो उसको झाड़ियों में पड़ा एक बच्चा मिला। उसने उसको उठा लिया, चुप किया और घर ले जा कर अपनी पत्नी को दे दिया।

घर पहुँच कर वह अपनी पत्नी से बोला — “प्रिये, आज मैं तुम्हारे लिये पहली बार कुछ ऐसी चीज़ ले कर आया हूँ जो मैंने खरीदी नहीं है – एक छोटा सा बच्चा। यह मुझे जंगल में पड़ा मिला था। हमारे अपने बच्चे तो हैं नहीं पर भगवान ने हमें यह बच्चा दे दिया।”

उन्होंने उस बच्चे को बहुत प्यार से 20 साल तक पाला पोसा। वह बच्चा भी तब तक यही सोचता रहा कि वह उस सौदागर का ही बेटा था।

उस बच्चे की बीसवीं सालगिरह पर उस सौदागर ने उससे कहा — “मेरे बेटे, अब मैं बूढ़ा हो रहा हूँ और अब तुम भी आदमी बन गये हो सो अब तुम मेरे हिसाब किताब और सामान को देखो भालो और तुम विदेश का हिसाब किताब सँभालो।”

उस नौजवान ने अपने पिता की किताबें और बक्से आदि सँभाले और अपने माता पिता के आशीर्वाद और नौकरों के साथ घर छोड़ कर चल दिया।

चलते चलते वह स्पेन आया तो वहाँ एक बहुत अमीर सौदागर के आने की खबर राजमहल तक पहुँची। राजा ने उसको अपने महल में बुलवा भेजा और उसको अपने जवाहरात दिखाने के लिये कहा।

यह स्पेन का ही राजा था जिसने इस लड़के को मारने का हुकुम दिया था। इस नौजवान सौदागर के आने पर राजा ने अपनी बेटी को भी अन्दर से बुला भेजा। राजकुमारी भी अब 20 साल की सुन्दर लड़की हो गयी थी। राजा ने अपनी बेटी से कहा कि वह भी आ कर उस सौदागर के लाये जवाहरात देख ले अगर उसको कुछ पसन्द हो तो।

राजकुमारी ने जैसे ही उस नौजवान सौदागर को देखा तो वह तो उसके प्यार में खो गयी। राजा ने अपनी बेटी की तरफ देखा तो उसको खोया हुआ पाया तो उससे पूछा — “क्या बात है बेटी?”

“कुछ नहीं पिता जी।”

“क्या तुमको इन जवाहरातों में से कुछ चाहिये? बोलो अगर चाहिये तो।”

“नहीं पिता जी मुझे न तो कोई जवाहरात चाहिये और न ही कोई कीमती पत्थर। पर मुझे यह नौजवान चाहिये। मुझे इससे शादी करनी है।”

राजा ने सौदागर की तरफ देखा और उससे पूछा — “तुम कौन हो नौजवान?”

नौजवान सौदागर बोला — “मैं इस्मेलियन सौदागर जियूमैन्टो का बेटा हूँ। मैं व्यापार के लिये देश विदेश घूम रहा हूँ ताकि अपने पिता के बाद मैं उनका व्यापार सँभाल सकूँ।”

उस सौदागर की इतनी सारी सम्पत्ति देखते हुए राजा ने अपनी बेटी की शादी उससे करने का फैसला कर लिया। नौजवान शादी के लिये अपने माता पिता को लाने के लिये अपने घर लौटा।

घर आ कर उसने अपने माता पिता को स्पेन के राजा से मुलाकात और उसकी बेटी से शादी के बारे में बताया तो उसकी माँ तो यह सुन कर पीली पड़ गयी और उसने उसको डाँटना शुरू कर दिया।

वह बोली — “ओ मेरे उपकारों को भूल जाने वाले, तो क्या तुम मुझे छोड़ कर चले जाओगे? तुमको इस राजकुमारी के प्यार में पड़ कर घर छोड़ कर जाने की इतनी जल्दी है तो ठीक है जाओ और फिर इस घर में अपनी शक्ल मत दिखााना।”

लड़का बोला — “पर माँ मैंने तुम्हारे साथ क्या बुरा किया है?”

“मुझे माँ नहीं कहना। मैं तुम्हारी असली माँ नहीं हूँ।”

“अगर तुम मेरी असली माँ नहीं हो तो फिर मेरी असली माँ कौन है?”

“भगवान ही जानता है कि वह कौन है। हमने तो तुमको जंगल में पड़ा पाया था।” कह कर उसने उस लडके को सारी कहानी सुना दी जिसको सुन कर वह लड़का तो बस बेहोश होते होते ही बचा।

अपनी पत्नी के गुस्से को देख कर सौदागर अपने उस बेटे से कुछ कहने की हिम्मत ही नहीं कर पा रहा था। बहुत दुखी हो कर सौदागर ने उसे कुछ पैसे दिये और व्यापार करने के लिये कुछ सामान दिया और उसको जहाँ वह जाना चाहता था जाने दिया।

चलते चलते वह लड़का एक जंगल में आ निकला। वहाँ उसको रात हो गयी थी। वह जमीन पर गिर पड़ा और अपने हाथों से जमीन पीट पीट कर रोने लगा।

“माँ माँ, अब मेरे लिये इस दुनियाँ में क्या है। मैं बिल्कुल अकेला हूँ। ओ मेरी माँ की आत्मा, मेरी सहायता करो, मुझे रास्ता दिखाओ।”

तभी उसके पास फटे कपड़े पहने लम्बी दाढ़ी वाला एक बूढ़ा प्रगट हुआ। वह बोला — “क्या बात है मेरे बेटे, तुम क्यों रो रहे हो?”

लड़के ने उसे सब कुछ साफ साफ बता दिया और साथ में यह भी बताया कि वह अपनी होने वाली पत्नी के पास क्यों नहीं जा सकता था। क्योंकि अब उसको पता चल गया था कि वह इस्मेलियन सौदागर का असली बेटा नहीं था।

बूढ़े ने कहा — “तुम डरते क्यों हो बेटे? चलो स्पेन चलते हैं। मैं तुम्हारा पिता हूँ और मैं तुम्हारी सहायता करूँगा।”

लड़के ने उस फटे कपड़े पहने बूढ़े की तरफ देखा और बोला — “तुम? क्या तुम मेरे पिता हो? तुम शायद सपना देख रहे हो।”

बूढ़ा बोला — “नहीं बेटे। मैं सपना बिल्कुल नहीं देख रहा। मैं तुमको सच बता रहा हूँ और मैं तुमको विश्वास दिलाता हूँ कि मैं ही तुम्हारा पिता हूँ। अगर तुम मेरे साथ चलो तो मैं तुमको तुम्हारी अमीरी वापस दिला सकता हूँ नहीं तो तुम बरबाद हो जाओगे।”

नौजवान ने उस बूढ़े की तरफ देखा और सोचा — “मुझे तो हर हाल में बरबाद होना ही है तो क्यों न मैं इस बूढ़े के साथ जा कर ही बरबाद होऊँ।”

सो उसने उस बूढ़े को अपने घोड़े पर बिठाया और उसको साथ ले कर स्पेन आया। वह स्पेन के राजा से मिलने गया तो राजा ने उससे पूछा — “तुम्हारे पिता कहाँ हैं?”

लड़के ने बूढ़े की तरफ इशारा करते हुए कहा — “ये हैं मेरे पिता।”

“यह आदमी तुम्हारा पिता? और तुम्हारी यह हिम्मत कि तुम मेरी बेटी का हाथ माँगने के लिये यहाँ मेरे पास आओ?”

बूढ़े ने बीच में राजा की बात काटी — “योर मैजेस्टी, मैं वही बूढ़ा हूँ जो जंगल में एक बारिश की रात जब आप मेरे घर में शरण लेने के लिये आये थे तो मैं ग्रहों से बात कर रहा था।

जिसने आपको अपने बेटे और आपकी बेटी के जन्म की खबर सुनायी थी और यह भी बताया था कि वे दोनों शादी कर लेंगे। यह लड़का और कोई नहीं मेरा ही बेटा है।”

यह सुन कर तो राजा और बहुत गुस्सा हो गया — “निकल जाओ यहाँ से, ओ बूढ़े। चौकीदार पकड़ लो इसको।”

यह सुन कर उसके चौकीदार उस बूढ़े को पकड़ने आये तो उसने अपने फटे कपड़े निकाल दिये। उसकी छाती पर बादशाह की सुनहरी पोशाक चमक उठी।

राजा और उसके चौकीदार दोनों घुटनों के बल बैठ कर चिल्लाये — “बादशाह आप? हमें माफ करें। मुझे मालूम नहीं था कि मैं किससे बात कर रहा था। यह मेरी बेटी है यह अब आपकी अमानत है।”

असल में बादशाह अपनी शाही ज़िन्दगी से थक चुका था इसलिये वह वेश बदल कर संसार भर में सितारों ओर ग्रहों से बात करता यात्रियों की तरह घूम रहा था।

सबने एक दूसरे को गले लगाया और चूमा और फिर शादी की तारीख तय की। इस्मेलियन सौदागर और उसकी पत्नी को भी स्पेन बुलवा लिया गया।

लड़के ने खुले दिल से उन दोनों का स्वागत किया — “माँ और पिता जी, आप ही मेरे असली माता और पिता हैं क्योंकि आपके घर से निकाले जाने पर ही मेरी ज़िन्दगी बन सकी। हालाँकि मैं एक राजकुमारी से शादी कर रहा हूँ पर फिर भी आप दोनों हमेशा मेरे साथ ही रहेंगे।” उन दोनों बूढ़ों की आँखों में खुशी के आँसू आ गये।

बादशाह के बेटे और राजा की बेटी दोनों की शादी हो गयी और शादी के बाद दोनों खुशी खुशी रहे।



[1] Ismailian Merchant (Story No 152) – a folktale from Italy from its Palermo area.

Adapted from the book : “Italian Folktales” by Italo Calvino. Translated by George Martin in 1980.

[2] Translated for the word “Planets”. Planets are the Sun, the Moon, Jupiter, Mercury etc.

[3] A knight is a person granted an honorary title of knighthood by a monarch or other political leader for service to the Monarch or country, especially in a military capacity. See its picture above.

[4] Giumento – the name of the Ismailian merchant

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सुषमा गुप्ता ने देश विदेश की 1200 से अधिक लोक-कथाओं का संकलन कर उनका हिंदी में अनुवाद प्रस्तुत किया है. कुछ देशों की कथाओं के संकलन का  विवरण यहाँ पर दर्ज है. सुषमा गुप्ता की लोक कथाओं के संकलन में से क्रमशः  - रैवन की लोक कथाएँ,  इथियोपिया इटली की  ढेरों लोककथाओं को आप यहाँ लोककथा खंड में जाकर पढ़ सकते हैं.

(क्रमशः अगले अंकों में जारी….)

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